भास्कर की ये ‘पॉज़िटिव न्यूज़’ क्या वाक़ई पाज़िटिव है?

हिमांशु पंड्या-

बीवी की ज़िद के चलते घर में अखबार आता है जिस पर कभी कभी निगाह पड़ जाती है. आज के दैनिक भास्कर में पहले पेज पर ऊपर ही अखबार का चौथाई से ज्यादा हिस्सा समेटते हुए एक खबर है. खबर एक बुज़ुर्गवार के बारे में है जिन्होंने 56 बार फेल होने के बाद सत्तावनवीं बार में दसवीं पास की. जाहिर है, भास्कर की समझ के अनुसार ये निरंतर मेहनत से सफलता पाने का एक अनुकरणीय उदाहरण है (जिसे वह ‘पॉज़िटिव न्यूज़’ कहता है).

कोई भास्कर को समझाए कि यह सफलता का नहीं परम मूर्खता का उदाहरण है. उन बुज़ुर्गवार से पूरी सहानुभूति के साथ कहना है कि कोई उन्हें भी बताए कि छप्पन बार फेल होने में उनकी कोई असफलता नहीं थी और सत्तावनवीं बार पास होकर भी उन्होंने कुछ नहीं उखाड़ लिया.

छप्पन बार उनका फेल होना सिर्फ इस बात का परिचायक था कि वे किताबी ज्ञान और उसके पुनरुत्पादन के हमारे परंपरागत चक्र के लिए नहीं बने हैं. उन्हें कुछ और कोशिश करनी चाहिए थी, शायद वो फॉल लगाने में अच्छे होते या पतंग उड़ाने में या कूलर ठीक करने में या दुनिया के लाखों कामों में से किसी मे भी.

डरावनी बात ये है कि अब ये बारहवीं भी पास करने की ठाने बैठे हैं. हे दैनिक भास्कर ! कुछ कर सको तो ये करो कि अभियान चलाओ कि इन्हें बोर्ड द्वारा मानद बारहवीं की उपाधि दे दी जाए. जब क्रिकेट खिलाड़ियों को मानद पीएचडी मिल सकती है तो इन छप्पन प्रयासों के सम्मान में एक बारहवीं कोई ज्यादा डिमांड है !



भड़ास का ऐसे करें भला- Donate

भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849



Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code