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सियासत

भाजपा के समर्थक फ़ेसबुक वाले हैं जो अब बूढ़े हो रहे हैं!

नितिन त्रिपाठी-

मैं इंस्टा पर राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कर्ली टेल्स के साथ बनाये रील्स देख रहा था. एक न्यू मिलेनिया किड ने रेफेर किया था. शानदार प्रेजेंटेशन है. अगर आपके दिमाग़ में राहुल गांधी की 2014-2020 पप्पू वाली इमेज नहीं है तो वो रील्स देख आपको राहुल गांधी quite डीसेंट मॉडर्न जनरेशन कूल पॉलिटिशियन लगेंगे. कांग्रेस की मार्केटिंग टीम ने gen जी को ठीक कैप्चर किया उधर.

भाजपा के समर्थक फ़ेस बुक वाले हैं जो अब बूढ़े हो रहे हैं. उनका स्थान जो नये लोग ले रहे हैं वह भी 35-40 वर्षीय ही हैं और उनकी अपब्रिंगिंग 2014 के बाद हुई है. तो वह भाजपा का सपोर्ट उसी अन्दाज़ में करते हैं जैसा 2016-17 तक हम लोग करते थे. हर चीज में नेहरू पर दोष डालो. नहीं तो कोई न कोई मुस्लिम पकड़ लो. फिर विदेशी ताकते हैं ही. षड्यंत्र पर ज्यादा फ़ोकस करो कि दुनिया कोशिश कर रही है भारत को गिराने की (जो कई बार सच भी होता है).

लेकिन जो यह gen ज़ी आ रही है उसके लिए ये सब कोई मुद्दे नहीं. उसकी याददाश्त में मोदी जी ही प्रधान मंत्री रहे हैं सदैव. याददाश्त में सब हिंदू वादी ही रहा है.

मोदी जी बीइंग श्रूद् पॉलिटिशियन यह समझते हैं. दिन प्रति दिन उनकी टोन पॉज़िटिव हो रही है. अपने कार्यों को हाईलाइट करते हैं. हिन्दू मुस्लिम जैसा अब तो बात भी नहीं करते हाँ सॉफ्ट हिंदुत्व एजेंडा रखते हैं. विकास, टेक्नोलॉजी की बात अब करते हैं. गांधी बाबा महान फिर से हैं. नेहरू चाचा बन गये हैं.

पर भाजपा के पक्ष में लिखने वाली फ़ेस बुक की नई पीढ़ी यह अंतर नहीं समझ पा रही है.

कांग्रेस की समस्या बस इतनी है कि उनका घोड़ा लंगड़ा है. उसका दिल पॉलिटिक्स में नहीं है. और उसका मुक़ाबला जिन मोदी जी से है वह 24 hour सीजंड पॉलिटिशियन हैं.

मुक़ाबला वैसे 2024 में कोई है नहीं पर भारत जोड़ो यात्रा, उसकी मीडिया और सोसल मीडिया कवरेज से कांग्रेस ने ब्राउनी प्वाइंट स्कोर किए हैं. उन्हें वोट में बदल पायेगी इसका बिग डाउट है.

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