बिहार में मतदाता सूची सुधार (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार लगातार सवालों के घेरे में हैं। दिल्ली के बाद पटना प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी जब पत्रकारों ने उनसे ‘वोट चोरी’, घुसपैठियों और विदेशी मतदाताओं से जुड़े सवाल पूछे, तो ज्ञानेश कुमार असहज हो गए और बिना जवाब दिए प्रेस से उठ गए। पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इस रवैये को “लोकतंत्र के लिए खतरा” और “चुनाव आयोग की गिरती साख का प्रतीक” बताया है।
विपक्ष और कई वरिष्ठ पत्रकारों का आरोप है कि SIR के नाम पर लाखों वैध भारतीय मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, जबकि विदेशी नागरिकों को लेकर अब तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। वहीं, आयोग के तर्कों और मुख्य चुनाव आयुक्त की प्रतिक्रियाओं को लेकर सोशल मीडिया पर भी गुस्सा और व्यंग्य दोनों उभर रहे हैं।
इस मामले पर कुछ प्रतिक्रियाएं पढ़ें….
समीरात्मज मिश्रा-
‘वोट चोरी’ और SIR, चुनाव आयोग और ख़ासकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। दिल्ली के बाद जब पटना में भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों ने इससे जुड़े सवाल पूछे को ज्ञानेश कुमार भाग खड़े हुए।
प्रियंका भारती-
पत्रकार – बिहार के नेता प्रतिपक्ष का आरोप है “एक ही घर में बहुत सारे वोटर है उसको सुधारने के लिए क्या उपाय है?”
ज्ञानेश जी- जब किसी के पास घर नहीं होता आस पास के घर का नम्बर दे देते हैं या शून्य लिख देते हैं!
शून्य तक तो समझ आ भी जाता है लेकिन दूसरे के घर में किसी और को जबरन डाल कर उसको उस घर का सदस्य बना कर उसको वोटर बना देंगे ये कौन सा नियम है? और गुजराती भाजपा प्रदेश महामंत्री के इनफार्मेशन के आगे घर भी नहीं लिखा था वो क्या है?
ये गुजराती को बिहारी वोटर बनाने की निंजा टेक्निक है क्या?
दयाशंकर मिश्रा-
पत्रकार पुष्यमित्र ने घुसपैठिए के कथित डेटा पर पर सीधा सवाल पूछा था । चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उसे जलेबी की तरह घूमा दिया। चुनाव आयोग का शर्मनाक रवैया, लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी धमकी है।
ज्ञानेश कुमार भारत नहीं, बीजेपी चुनाव आयोग की तरह व्यवहार कर रहे हैं!
कृष्णकांत-
पत्रकार ने ज्ञानेश कुमार से पूछा कि बिहार में क्या कोई विदेशी नागरिक मिला है? ज्ञानेश कुमार ने जवाब नहीं दिया, क्योंकि अब तक एक भी विदेशी मिलने की सूचना नहीं है।
खोजने निकले थे विदेशी और लाखों भारतीयों का ही नाम काट दिया। विदेशियों का डर दिखाकर भारतीयों पर अन्याय किया जा रहा है।
नीरज झा-
ज्ञानेश जी IIT Kanpur से पढ़े हैं। 1988 में भारत की कठिनतम परीक्षा पास करके IAS बने। ये मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया है वोट चोरी का। इनके संस्था पर आरोप है कि उसकी रीढ़ झुक गई है।
ज्ञानेश जी, ऐसे में हर वो वीडियो सामने लाना चाहिए जिससे रीढ़ झुकने के आरोप कमज़ोर लगें। यूं फूहड़ तर्कों के ज़रिए आप आरोपों को और मज़बूत ही कर रहे हैं।
Note: बड़ी बड़ी डिग्रीज वाला व्यक्ति समझदार हो ये ज़रूरी नहीं।
प्रतीक पटेल-
बिहार चुनाव में रोज भाजपा के नेता घुसपैठियों का मुद्दा बना रहे हैं। अमित शाह, नरेंद्र मोदी, गिरिराज सिंह का कोई भी भाषण बिना घुसपैठियों का ख़त्म नहीं होता है।
लेकिन आज जब पत्रकार साथियों ने ज्ञानेश कुमार जी से विदेशी नागरिक और घुसपैठियों पर सवाल पूछा तब वो एकदम चुप्पी साध लिए।
आवेश तिवारी-
क्या गजब है इस देश का मुख्य चुनाव आयुक्त सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सरेआम धज्जियां उड़ा रहा है और माननीय सीजेआई मूकदर्शक बनकर बैठे हैं।
क्यों जी ECISVEEP, जब सुप्रीम कोर्ट ने तय कर दिया है कि आधार भी SIR की प्रक्रिया में एक मान्य दस्तावेज होगा तब ज्ञानेश कुमार क्यों बता रहे हैं कि आधार न तो जन्म का, न पते का या नागरिकता के प्रमाणीकरण का दस्तावेज है?
यह न्यायालय के आदेश का खुला उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट लगातार इस मामले को खींच कर खीज बढ़ा रहा है और इस मनमानी पर खामोश है। विपक्ष 29 लाख महिलाओं के नाम गायब होने का दावा कर रहा है ऐसे में SIR की विश्वसनीयता वैसे ही संकट में है।
खतरा बड़ा है। दरअसल चुनाव आयोग आधार के प्रमाणीकरण को अस्वीकार कर पूरे देश में SIR कराना चाह रहा हैं जिसे कत्तई स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह अदालत को सीधा चैलेंज है, यह उच्च अदालतों द्वारा मोदी सरकार की मनमानी पर खामोशी का भी नमूना है।


