मजीठिया मामले में हिंदुस्तान प्रबंधन की बड़ी हार, हटाए गए पत्रकारों को वापस लेना पड़ा

हिंदुस्तान लखनऊ से एक बड़ी खबर आ रही है जो मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे साथियों के लिए प्रेरणा दायक हो सकती है। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुरूप वेतन मांग रहे हिंदुस्तान लखनऊ संस्करण के आठ पत्रकारों को शनिवार को पहली सफलता हाथ लगी। श्रम विभाग की पहल के बाद चार पत्रकारों आलोक उपाध्याय, लोकेश त्रिपाठी, फ़िरोज़ हैदर और एल पी पंत को कार्यालय में प्रबंधन को विवश होकर प्रवेश देना पड़ा।

श्रम विभाग के कड़े तेवर के बाद हिंदुस्तान प्रबंधन को यह लिखकर देना पड़ा कि वह मजीठिया मांग रहे पत्रकारों को कार्यालय आने से नहीं रोक सकता। इसके बाद चार पत्रकार शाम को हिंदुस्तान के कार्यालय पहुंच गए और रोज की तरह कार्य शुरू कर दिया। इसके बाद तो कार्यालय में हड़कंप मच गया। आंदोलन कर रहे पत्रकारों को कार्यालय के सभी साथी बधाई देने टूट पड़े। इससे हतोत्साहित प्रबंधन ने तत्काल चारों पत्रकारों से सोमवार को कार्यालय आने का आग्रह करते हुए अपना पिंड छुड़वाया।

मजीठिया मांग रहे चार अन्य पत्रकारों संजीव त्रिपाठी, संदीप त्रिपाठी, प्रसेनजीत रस्तोगी और प्रवीण पांडेय को हिंदुस्तान प्रबंधन पहले ही सेवा से बर्खास्त कर चुका है। अब श्रम विभाग ने इन चारों की भी बर्खास्तगी वापस लेने का फरमान प्रबंधन को सुना दिया है। 4 अक्टूबर को मामले की सुप्रीम में सुनवाई है। इससे पहले ही श्रम विभाग के कड़े तेवर देख कर प्रबंधन में हड़कंप है और कर्मचारियों में ख़ुशी का माहौल में।

चर्चा ये भी है कि कानपुर श्रमायुक्त आफिस ने हिंदुस्तान प्रबंधन के लोगों को तलब किया है। कहा जा रहा है कि सुधांशु श्रीवास्तव दिल्ली से बात करने कानपुर श्रम विभाग के आफिस आए जहां उन्हें अफसरों ने बिठा लिया। हालांकि इस सूचना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पा रही है।

शशिकान्त सिंह
पत्रकार और आरटीआई कार्यकर्ता
मुंबई
9322411335



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