पंकज शुक्ला-
आपको मालिनी अवस्थी का गाया छठ गीत, जय हो, जय हो छठ मैया, जय हो, जय हो पता है? जो मिथुन चक्रवर्ती, मनोज तिवारी और शबनम कपूर पर फिल्माया गया?
ये गाना साल 2008 में रिलीज़ फ़िल्म ‘भोले शंकर’ का है, जिसे मैंने लिखा और निर्देशित किया। फ़िल्म निर्देशन की तमाम खट्टी मीठी यादें हैं लेकिन इस दौरान ये सबक़ ज़रूर मिला कि किसी भी आत्मसम्मानी व्यक्ति के लिए सिनेमा बनाना बहुत दुष्कर कार्य है।
बात यहां मालिनी अवस्थी की, तब तक वह इतना बड़ा नाम नहीं थी और उनको इस फ़िल्म में पार्श्वगायन का मौका देने में रिस्क भी काफी था। अभिनेता और अब सांसद मनोज तिवारी चूंकि खुद लोक गायक रहे हैं, लिहाजा वह नहीं चाहते थे कि फ़िल्म में किसी दूसरे लोक गायक पर फोकस जाए। लेकिन, मुझे अपनी बात रखनी थी।
गीत के दूसरे गायक शैलेंद्र सिंह ने अतीत में मिथुन चक्रवर्ती पर फ़िल्माए तमाम सुपरहिट गाने गाए हैं। भोले शंकर के प्री प्रोडक्शन के दौरान मैंने शैलेंद्र सिंह से इस बारे में संपर्क किया और उससे पहले मिथुन चक्रवर्ती से उनके नाम का जिक्र किया। मिथुन का तब शैलेंद्र सिंह से कोई संपर्क नहीं था। लेकिन, वह इस बात से खुश हए कि मैंने शैलेंद्र सिंह के बारे में सोचा और उनसे ये गाना गवाने का फैसला किया।
तय तारीख पर मालिनी अवस्थी अपने पति अवनीश अवस्थी (पूर्व मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार) के साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंची। फ़िल्म के वित्तपोषक गुलशन भाटिया का जुड़ाव बीजेपी से था, वह मालिनी अवस्थी के नाम पर इसी शर्त पर तैयार हुए कि फ़िल्म में मौका ही दे सकते हैं, उनको मानदेय नहीं। मेरे लिए ये बहुत उहापोह की स्थिति थी क्योंकि मैं मालिनी जी से बहुत पहले वादा कर चुका था कि जब भी मैं कोई फ़िल्म निर्देशित करूंगा, उसमें उनका गाया गाना जरूर होगा।
ख़ैर मालिनी जी ने मेरी मनोदशा समझी। इस बात के लिए वह मेरा एहसान जताती रहीं कि मैंने अपनी बात याद रखी और अपनी पहली फ़िल्म में उन्हें पहली बार पार्श्वगायन का मौका दिया। मैंने उनका शुक्रिया इस बात के लिए अदा किया कि मानदेय की व्यवस्था न होने पर भी वह रिकॉर्डिंग करने आईं और मेरी बात का मान रखा।
हर छठ पर ये गीत कोई न कोई मुझे व्हाट्सएप पर भेज ही देता है। इस बार भतीजे सोम शुक्ल और बड़े भाई श्याम शुक्ल ने इसके लिंक अपने अपने अलग अलग ग्रुपों में साझा किए और मुझे भी इसका लिंक भेजा। आप भी सुनिए ये पूरा गाना। इस मौके पर इस गीत के गीतकार बिपिन बहार (जो अब स्वामी स्वर्गानंद हो चुके हैं), को भी याद कर रहा हूं और याद कर रहा हूं इस गीत के संगीतकार धनंजय मिश्र को, जो अब स्वर्गवासी हो चुके हैं।


