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चित्रा का चित्र-विचित्र : अतुल अग्रवाल भूतपूर्व हो गए!

शिवकुमार विवेक-

तलाक होना अब कोई अनोखी और नई बात नहीं है किंतु गुरुवार को देश के एक प्रमुख चैनल की एंकर का विवाह विच्छेदन देश भर के सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और अनेक सोशल मीडिया जीवियों के लिए यह देश के सामने मौजूद मुद्दों से ज्यादा जरूरी व प्रासंगिक हो गया। वे सुनीता विलियम्स पर बात नहीं कर रहे थे किंतु चित्रा त्रिपाठी के तलाक पर या तो गमजदा हो रहे थे या उसका मजाक उड़ा रहे थे।

सोशल मीडिया पर ऐसे वाहियातपन की अनंत गुंजायश है। ऐसे मीडिया प्लेटफॉर्म्स कई लोगों के लिए थूकने या उल्टी के उगालदान की तरह हैं। जो मन भाए लिखो और अपने जैसे हजारों लोगों को झोंक दो। भेड़ें दौड़ने लगेंगी। इसे ही ट्रेंड होना कहते हैं। भोर में कई लोगों की आंखें सोशल मीडिया में खुलती हैं और रात में इसी को सिरहाना बनाकर सो जाती हैं। सस्ते डेटा के कारण ग्रामीण ऊर्जा अब इसी पाइपलाइन में प्रवाहित हो रही है।

बहरहाल, चित्रा त्रिपाठी के तलाक पर देश क्यों बहस करे, सवाल यह है। चित्रा देश के एक प्रमुख चैनल में एंकरिंग करते हुए अब कंपनी की उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने खुद ही एक ट्वीट करके अपना विवाह टूटने की जानकारी दी। गोया, उन्हें यह इल्म है कि वह सेलिब्रिटी हो चुकी हैं और सेलिब्रिटी में अपने सुख-दुख का आईना देखने वाले समाज के लिए उनका विवाह टूटना बहुत बड़ी घटना है। उनके परिवार में इतनी बड़ी घटना घटित हो जाए, क्या देश इससे अनभिज्ञ रहे!

उन्होंने ऐलान किया- साथ में 16 शानदार साल बिताने के बाद, हमने कुछ समय पहले ही अलग होने की योजना बनाई और अब हम इसे औपचारिक रूप देने के लिए तैयार हैं – पति-पत्नी के रूप में नहीं, बल्कि सह-माता-पिता और परिवार के रूप में। हम अपने बेटे को साथ-साथ पालने के लिए समर्पित हैं और इस बदलाव के दौरान अपने प्रियजनों के समर्थन के लिए उनके आभारी हैं। यह अंत नहीं है, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत है। आपकी शुभकामनाएँ हमारे लिए बहुत मायने रखती हैं।’

उनके पति अतुल अग्रवाल, जो इस ट्वीट के बाद ‘भूतपूर्व’ हो गए, ने भी जवाबी ट्वीट लिखकर कहा-‘होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥ सब अच्छा है, आगे भी अच्छा ही होगा, पत्नी का प्रत्येक निर्णय आज तक लागू होता रहा है तो आज क्यों नहीं?’

ट्वीट से स्पष्ट है कि अलगाव आपसी सहमति से हुआ है और उनके पति कह रहे हैं कि सती प्रभु के सुखधाम को चली गई हैं। पर, चित्रा इसकी सार्वजनिक सूचना देकर क्या चाहती हैं? हालांकि वह पहले भी सोशल मीडिया पर अपनी बहुत ब्रांडिंग करती रही हैं। अपने घर-बाहर को जनता के बीच खुलकर बांटती रही हैं। यह चर्चा उसी का ‘एक्सटेंशन’ है।

वे अपने लिए शुभकामनाएं मांग रही हैं। मंतव्य यह कि देश की जनता उनकी अभ्यर्थना पर उनकी झोली में झूरकर लाइक्स डाल दे। शुभकामना का बाजार ब्रांडिंग और लाइक्स का खेल ही तो है। सामान्य लोग भी अब अपने अथवा परिजनों के जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, अन्य अवसरों पर इसी तरह शुभकामनाएं मांगते हैं और चूंकि कुछ मांगा है तो उदारमना तुरंत सोशल मीडिया पर ‘नाइस’, ‘कांग्रेचुलेशन’, ‘बेस्ट विशेज’ को ऑटोटाइप कर भेज देते हैं। इस आंख-मूंद ऑटोमेशन प्रक्रिया में कभी-कभी तो ऐसा भी हो जाता है कि शोक बैठक की सूचना पर शुभकामनाएं टाइप हो जाती हैं।

चित्रा सेलिब्रिटी हैं। एक वर्ग उनका अच्छा अनुयायी है। नई पीढ़ी तो इन एंकरों को ही देश का महान पत्रकार मानती हैं और इन्हें पाकर पत्रकारिता की धन्यता समझती है।

एक बार पत्रकारिता के पाठ्यक्रम में देश के तीन महान पत्रकारों के बारे में लिखने को कहा गया तो परीक्षक को उम्मीद थी कि विद्यार्थी राजेन्द्र माथुर, माधवराव सप्रे, माखनलाल चतुर्वेदी जैसे पत्रकारों पर कलम चलाएंगे। लेकिन उसकी नजर तब फटी रह गई जब उन्होंने आज की टेलीविज़न पत्रकारिता की तीन देवियों को महान पत्रकारों की श्रेणियों में रखकर उनका नख-शिख बखान‌ कर दिया।

सोशल मीडिया एक्टीविस्टों के लिए महानता की सीमा यहीं समाप्त हो जाती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि दृश्य पत्रकारिता की इन देवियों का कोई अवदान नहीं है किंतु अब पत्रकारिता कैसे परिभाषित की जाएगी, इसकी बानगी मिल गई। मीडिया और सोशल मीडिया ने ऐसे सभी सेलिब्रिटी को हमारे दिमाग के निजी कोने में मूर्तिमान कर दिया है जो नरम और निहायत एकाकी कोना हमारे पारिवारिक मूल्यों और मूर्तियों के लिए सुरक्षित था। राजनेताओं, खिलाड़ियों और कलाकारों के मामले में भी ऐसा ही है।

सोशल मीडिया सामान्य आदमी को भी अपनी छवियों और निजी मसलों को सार्वजनिक मंचों पर परोसने के लिए तैयार करता है और कुछ लोग अपने परिवार को भी फेसबुक के चौराहे या ट्वीटर के फुटपाथ पर बेपर्दा करने में संकोच नहीं करते। मेरे एक मित्र परिवार के पर्यटन की तस्वीरों को अक्सर फेसबुक पर साझा करते थे। पर जब वे अंतरंग तस्वीरों को डालते थे तो मैं कहना चाहता था कि मेरे आदर व श्रद्धाभाव को बना रहने दीजिए। हमारे एक वरिष्ठ सुबह नाश्ता करते हुए, दोपहर को नदी में (बाथरूम बचा है!) नहाते हुए, शाम को सैर करते हुए.. हर गतिविधि की तस्वीरें फेसबुक पर डालते हैं। उनका धारावाहिक चलचित्र कई लोगों के मनोरंजन का कोटा खा लेता है। इनसे अंत में हासिल क्या होता है, एक खालीपन, व्यर्थता बोध, कभी-कभी जुगुप्सा और अवसाद।

चित्रा त्रिपाठी का घर टूट गया, आपको पता नहीं कि कैसे और क्यों टूटा। आप होते तो उसमें कोई हथेली नहीं लगा लेते। न अब लगा लेंगे। ऐसे घरों की टूटन का आप कोई उपाय नहीं कर सकते। ये निहायत व्यक्तिगत कारणों से होता है। हां, समाज में कई युवक-युवती साथ रहने के अपने फैसले खुद लेते है तो साथ छोड़ने का फैसला भी उन्हें ही लेना है। वही लेते हैं। यह भी ऐसा ही फैसला है। क्या इस पर सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर बहस होनी चाहिए, यह तय करना होगा।

मूल खबर…

फाइनली, अतुल अग्रवाल से अलग हो गईं चित्रा त्रिपाठी!

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2 Comments

2 Comments

  1. Ajay kumar Thakur

    March 23, 2025 at 7:07 pm

    Very bad.Aap dono Mil jaiye.mob 7838601336
    [email protected]

  2. Bajrang

    March 24, 2025 at 6:37 pm

    Very true and it is great as well rare of rarest personality. It is fortunate for me to hear this. Best regards.

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