
संजय कुमार सिंह
आज मेरे आठ में से दो अखबारों की लीड एक है। इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड भारतीय छात्रा का कोलंबिया से स्वंय डिपोर्ट हो जाना है। इसी तरह, द हिन्दू और द टेलीग्राफ की लीड चुनाव आयोग की बैठक है जो वोटर आईकार्ड को आधार से लिंक करने की सहमति बनाने के लिए है। द हिन्दू का शीर्षक है, 2015 में (सुप्रीम कोर्ट द्वारा) रोक दिये जाने के बाद चुनाव आयोग ने ईपीआईसी-आधार नंबर को जोड़ने की योजना पर चर्चा शुरू की। यह खबर आज दूसरे अखबारों में भी है लेकिन द हिन्दू की खबर के शीर्षक और हाईलाइट किये अंश से लग रहा है कि चुनाव आयोग ने वोटर आईकार्ड को मतदाता सूची से लिंक करने या उसपर विचार करने के लिए यह बैठक बुलाई है। यह भी कि उसके पास सारी शिकायतों का एक ही समाधान है। आप जानते हैं कि एक एपिक नंबर के एक से ज्यादा कार्ड होने के साथ मतदाता सूची से छेड़छाड़ के आरोप लगाये गये हैं। चुनाव आयोग ने इसे ठीक करने का आश्वासन तो दिया है लेकिन उससे पहले मतदाता सूची को आधार से लिंक करने के लिए सहमति भी बनाने की बैठक हो रही है। ऐसे जैसे आधार से लिंक कर देने से सारी समस्या हल हो जायेगी। मुझे लगता है कि फर्जी वोटर के साथ मतदाता सूची में और भी गड़बड़ियां हैं जिनके लिए दोषियों का पता लगाकर उन्हें सजा दी जानी चाहिये। वोटर आईडी को आधार से लिंक करने से समस्या का समाधान एक हद तक ही हो सकता है।
असली समस्या तो एक पिता के 41 से ज्यादा बच्चे और एक पते पर भारी संख्या में मतदाता होना है। यह कैसे और क्यों हुआ – इसकी जिम्मेदारी तय करके दोषी को सजा देना ज्यादा जरूरी है वरना आधार से लिंक करने के बाद दूसरा क्या तरीका अपनाया जायेगा उसे सार्वजनिक होने में फिर 10 साल लग जायेंगे। वैसे भी, जब नियम है कि मतदाता को नाम डलवाने के आवेदन के साथ पहले के मतदाता कार्ड का विवरण देना है ताकि पुरानी जगह से नाम हटाने के बाद ही नई जगह नाम जुटे तो दो जगह नाम रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं? इसी तरह, नाम हटवाने के लिए मतदाता के परिवार पर ही भरोसा करना चाहिये। फिर कोई और और नाम कटवा दे रहा है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई जरूरी है। जाहिर है, जो नाम कटवा रहा है (अगर लिखित आवेदन दिया है) तो उसके संबंधित चुनाव अधिकारी भी जिम्मेदार है और दोनों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। अगर यह काम पार्टी स्तर पर हुआ है तो पार्टी के लोगों को भी चेतावनी दी जानी चाहिये। इसमें मुद्दा यह नहीं है आधार से जुड़ा होगा तो अधिकारी नाम हटा पायेंगे कि नहीं। मुद्दा यह है कि जबरन हटाना है या बिना आवेदन हटाना है तो हटाये ही जायेंगे। और हम देख चुके हैं कि इस देश में इलेक्टोरल बांड लाने या अनिल मसीह होने पर सजा नहीं मिलती है। इस बार भी तैयारी यही है और अगर कार्रवाई नहीं हुई तो कोई गारंटी नहीं है कि आगे ऐसा नहीं होगा।
वैसे भी, अभी तक ऐसे मतदाता हैं जिनके पास आधार कार्ड नहीं है और ऐसे आधार कार्ड वाले भी हैं जो मतदाता नहीं हैं। जनहित में, चुनावी निष्पक्षता और चुनाव में सब की भागीदारी के लिए यह जरूरी है कि सबके नाम मतदाता सूची में हों और हटाने की जल्दबाजी नहीं की जाये। अगर किसी ने घर बदल लिया है और नई जगह की मतदाता सूची में नहीं है तो वह पुराने पते पर आकर मतदान कर सकता है और यह उसका अधिकार है। ऐसे में नाम हटाने से वह वोट से वंचित रहेगा और चूंकि वोट देने के लिए नाम शामिल करवाना और वोटर आई कार्ड होना जरूरी है तो जो ऐसा नहीं कर पायेगा वह वोट नहीं दे पायेगा। चुनाव में अधिकतम भागीदारी के लिहाज से यह ठीक नहीं है। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने आधार के उपयोग को आवश्यक करने से मना कर दिया है फिर भी आधार जन्म प्रमाणपत्र से लेकर मृत्यु तक एक जरूरी दस्तावेज है और इसपर यकीन किया जा सकता है। इसके नकली और अस्थायी होने की आशंका मतदाता सूची के मुकाबले बहुत कम है। इसके अलावा, इस बात की संभावना है कि किसी के पास आधार कार्ड तो न हो पर वह मतदाता कार्ड हो। इसी तरह यह भी संभव है कि मतदाता कार्ड हो और आधार कार्ड नहीं हो। सरकार को तय करना है कि मतदाता होना, या आधार कार्ड रखना ऐच्छिक है कि नहीं। अगर ऐच्छिक है तो लिंक करने का कोई मतलब नहीं है। अगर आधार कार्ड आवश्यक है या सबके पास है तो निश्चित आयु के बाद सबका नाम मतदाता सूची में हो सकता है वह वोट डाले या नहीं। मतदाता सूची इसी आधार पर बने और जिनके पास आधार नहीं है उनसे कहा जा सकता है कि वे मतदान करना चाहें तो मतदाता सूची में नाम डलवायें और आवश्यक जांच के बाद अगर मतदाता कार्ड बने तो उसमें यह अंकित किया जा सकता है कि इस वोटर का आधार कार्ड नहीं है। इससे ज्यादातर वोटर के लिए हर बार नाम लिखवाने या कट जाने का झंझट खत्म हो जायेगा। बिना आधार कार्ड वाले जो मतदाता होना चाहेंगे उन्हें अगर जांच करके मतदाता बनाया जाये और गड़बड़ी होने पर बनाने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई हो तो इसकी आशंका भी कम हो जायेगी।
आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री की इच्छा से नियुक्त पिछले चुनाव आयुक्त ने तमाम मनमानियां कीं और चुनाव आयुक्ति की नियु्क्ति करने वाली कमेटी से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के बावजूद जल्दबाजी में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करके उन्हें कार्यभार भी दिला दिया गया। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हुई और आगे की तारीख पड़ गई है। ऐसे में नये चुनाव आयुक्त की सक्रियता और उससे संबंधित सरकारी अधिकारियों के साथ उनकी बैठक चुनाव आयुक्त को सक्रिय और काम करते दिखाने के लिए भी हो सकता है। जो भी हो, इस खबर का मतलब यह भी है कि चुनाव आयोग अभी भी मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों पर राजनीतिक दलों से बात करने के लिए तैयार नहीं है और उससे पहले इस बैठक और इसके निर्णय के आधार पर वोटर आईकार्ड को आधार से लिंक करके शिकायतें दूर करने का दावा किया जा सकता है। होना यह चाहिये कि मतदाता सूची की गड़बड़ी दूर की जाये और उसके लिये जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाये और उसका विवरण सार्वजनिक किया जाये। इंडियन एक्सप्रेस की खबर का शीर्षक है, वोटर कार्ड और आधार को लिंक करने के लिए चुनाव आयुक्त गृह, विधि और यूआईडीएआई अधिकारियों से मिलेंगे। द टेलीग्राफ का फ्लैग शीर्षक है, फर्जी मतदाता की शिकायत के बाद आधार, वोटर कार्ड को जोड़ने की चर्चा।
दि एशियन एज की आज की लीड का शीर्षक है, प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका जायेंगे अप्रैल में थाईलैंड में होने वाली बीआईएमएसटीईसी बैठक में हिस्सा लेंगे जो 2 से 4 अप्रैल तक होना निर्धारित है। इसके नीचे की खबर का शीर्षक अमित शाह के हवाले से है, कांग्रेस ने असम में शांति स्थापित नहीं होने दी। कहने की जरूरत नहीं है कि शांति स्थापित करने की जरूरत मणिपुर में है तो अभी बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने भाजपा के सत्ता आने से 10 साल पहले क्या किया था। यही नहीं, इसके साथ यह यह दावा भी है कि शांति और प्रगति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दी। इसमें यह नहीं कहा गया है कि इसके लिए उन्होंने कांग्रेस नेता और भ्रष्टाचार के आरोपी हिमंत विश्व शर्मा की सेवाएं लीं और उन्हें वाशिंग मशीन से दुरुस्त करके सत्ता सौंप रखी है। एक और दिलचस्प खबर बिहार चुनाव से संबंधित हैं। इसका शीर्षक है, बिहार के मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए भाजपा ने प्रमुख नेताओं के प्रवास की योजना बनाई। यह अभियान अप्रैल में शुरू होगा और राज्य के सभी जिलों को कवर करेगा। बिहार में भाजपा की चुनावी तैयारियों के क्रम में आज अमर उजाला की लीड भी बिहार से संबंधित है। शीर्षक है, बिहार में तीन दिन में एक और पुलिस अफसर की हत्या, चार आरोपी गिरफ्तार। आज अमर उजाला की एक और खबर उल्लेखनीय है, कर्नाटक में मुस्लिम ठेकेदारों को टेंडरों में चार फीसदी आरक्षण। इसका उपशीर्षक खबर को पहले पन्ने पर रखने का मकसद बता देता है, कांग्रेस सरकार के फैसले का भाजपा ने किया विरोध। नवोदय टाइम्स की आज की लीड आयुष्मान योजना पर है। खबर के अनुसार इसके लिए योग्यता आयु 70 वर्ष से घटाकर 60 साल और कवरेज पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख करने का प्रस्ताव है। हिन्दुस्तान टाइम्स की आज की लीड राजनीतिक नहीं है। खबर के अनुसार इस बार राज्यों में मौसम समय से पहले ही गर्म हो गया है और अभी ही भारी गर्मी पड़ रही है। शनिवार को उड़ीशा के सम्बलपुर में यह 42.2 डिग्री सेल्सियस और महाराष्ट्र के चंद्रपुर में 42 डिग्री सेल्सियस रकारड किया गया।


