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भारतीय कफ सिरप घोटाले ने वैश्विक स्वास्थ्य संकट को और गहरा दिया है!

शीतल पी सिंह-

भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा निर्यातक है, जो विकासशील देशों की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करता है। लेकिन 2022 से शुरू हुई एक भयानक घटना ने इस उद्योग की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। भारतीय कंपनियों द्वारा निर्मित कफ सिरप में एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) और डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) जैसे विषाक्त रसायनों की मौजूदगी ने भारत सहित गाम्बिया, उज्बेकिस्तान, इंडोनेशिया, कैमरून और अन्य देशों में सैकड़ों बच्चों और कुछ बुजुर्गों की जान ले ली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कई चेतावनियां जारी कीं, लेकिन जिम्मेदारी तय करने में देरी ने वैश्विक स्वास्थ्य संकट को और गहरा दिया।

यह संकट 2022 की शुरुआत में भारत के जम्मू के रामनगर में शुरू हुआ, जहां 12 बच्चों की मौत एक कफ सिरप से हुई, जो डीईजी से दूषित था। WHO के अनुसार, यह वैश्विक विषाक्त लहर की शुरुआत थी।

जुलाई-अक्टूबर 2022 के बीच गाम्बिया में 70 से अधिक बच्चों की मौत हुई, जो मुख्य रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के थे। ये बच्चे कफ और सर्दी के सिरप लेने के बाद तीव्र गुर्दे की विफलता (एक्यूट किडनी इंजरी – AKI) का शिकार हुए।

WHO ने 5 अक्टूबर 2022 को मेडिकल प्रोडक्ट अलर्ट जारी किया, जिसमें मेडन फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित चार सिरप – प्रोमेथाजीन ओरल सॉल्यूशन, कोफेक्समालिन बेबी कफ सिरप, माकोफ बेबी कफ सिरप और मैग्रीप एन कोल्ड सिरप – को विषाक्त घोषित किया गया। इनमें EG और DEG की अस्वीकार्य मात्रा पाई गई, जो औद्योगिक सॉल्वेंट्स हैं और मानव उपभोग के लिए घातक।

दिसंबर 2022 में उज्बेकिस्तान में 65 बच्चों की मौत डॉक-1 मैक्स और एम्ब्रोनोल सिरप से जुड़ी, जो मरियन बायोटेक द्वारा बनाए गए थे। जनवरी 2023 में WHO ने दूसरा अलर्ट जारी किया।

उसी वर्ष इंडोनेशिया में 200 से अधिक बच्चों की मौत हुई, जहां सिरप में समान विषाक्त पदार्थ पाए गए। कैमरून में 12 बच्चों की मौत, जबकि माइक्रोनेशिया, मार्शल द्वीप और श्रीलंका में भी मामले सामने आए। भारत में 2020 में जम्मू में 12 मौतें और 2023 में अन्य घटनाएं दर्ज हुईं। कुल मिलाकर, 2022-2023 में 300 से अधिक मौतें हुईं, ज्यादातर बच्चों की, लेकिन कुछ बुजुर्गों की भी रिपोर्ट्स हैं, जहां सिरप का उपयोग AKI का कारण बना।

2025 तक, मध्य प्रदेश और राजस्थान में नौ बच्चों की मौतों की जांच चल रही है, हालांकि प्रारंभिक टेस्ट्स में DEG/EG नहीं पाया गया।

घोटाले का मूल कारण भारतीय दवा कंपनियों द्वारा लागत कम करने की होड़ है। कफ सिरप में प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल (PG) नामक सुरक्षित सॉल्वेंट का उपयोग होता है, जो महंगा होता है। कई कंपनियां सस्ते औद्योगिक-ग्रेड EG/DEG का उपयोग करती हैं, जो विषाक्त होते हैं। रॉयटर्स की जांच के अनुसार, मेडन और मरियन जैसी कंपनियां टेस्टिंग रिकॉर्ड साबित नहीं कर सकीं।

भारत का फार्मा उद्योग $42 बिलियन का है, लेकिन छोटी कंपनियां (जो 60% निर्यात करती हैं) गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) का पालन नहीं करतीं। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) पर संसाधनों की कमी है, और राज्य स्तर पर भ्रष्टाचार आम है। 2023 में हरियाणा में एक अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप लगा, जहां दूषित सैंपल बदल दिए गए।

WHO ने नोट किया कि अफ्रीकी देशों में आयातित दवाओं की जांच क्षमता कम है, जिससे विषाक्त सिरप बाजार में घुस जाते हैं। गाम्बिया में दवाओं को ‘लिस्टिंग’ के बजाय रजिस्ट्रेशन की कमी ने समस्या बढ़ाई।

भारत में 1970 से पांच बड़े DEG विषाक्त मामले हो चुके हैं, लेकिन सबक नहीं सीखा गया।

घोटाले का सबसे भयानक प्रभाव बच्चों पर पड़ा। गाम्बिया में 70 बच्चे, ज्यादातर 2-3 साल के, AKI से मरे। लैमिन कोटे, एक गाम्बियाई पिता, ने बताया कि उनके बेटे ने सिरप लिया और 48 घंटों में किडनी फेल हो गई।

उज्बेकिस्तान में 68 बच्चे प्रभावित हुए, जहां एक भारतीय नागरिक सहित 21 को 20 साल की सजा मिली।

इंडोनेशिया में 200 मौतों ने पूरे देश में सिरप बैन करवा दिया। बुजुर्गों पर प्रभाव कम रिपोर्टेड है, लेकिन श्रीलंका में आई ड्रॉप्स से जुड़े मामलों में वृद्धों की जटिलताएं बढ़ीं। भारत में जम्मू की घटना में बुजुर्गों को भी AKI हुआ। परिवार टूट गए। गाम्बिया में 20 परिवारों ने सरकार और मेडन के खिलाफ मुकदमा दायर किया, $250,000 मुआवजे की मांग की।

आर्थिक रूप से गरीब देशों में स्वास्थ्य विश्वास डगमगा गया। अफ्रीका में 20% दवाएं भारत से आती हैं, लेकिन अब आयात पर सवाल उठे। जांच और प्रतिक्रियाएंWHO ने 2022-2023 में छह अलर्ट जारी किए, जिसमें 15 भारतीय कंपनियों को चिह्नित किया।

भारत सरकार ने मेडन का प्लांट सील किया, लेकिन देरी हुई – अलर्ट के एक हफ्ते बाद।

CDSCO ने नॉरिस मेडिसिन्स के दो सिरप विषाक्त पाए। उज्बेकिस्तान में ट्रायल चला, लेकिन भारत में कोई बड़ सजा नहीं। गाम्बिया में 2024 में कोर्ट ने मुकदमे की अनुमति दी।

कंपनियां दोष से इनकार करती रहीं। मेडन ने कहा, “हमारे सिरप सुरक्षित थे।” लेकिन WHO टेस्ट्स विपरीत साबित हुए।नियमन की कमजोरियां और सुधारभारत में दवा नियमन राज्य-केंद्रित है, जो भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। WHO की प्रीक्वालिफिकेशन प्रोग्राम (PQP) कफ सिरप को कवर नहीं करता, जिससे गरीब देश असुरक्षित रहते हैं।

2023 में भारत ने QR कोड अनिवार्य किया, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि यह अपर्याप्त है।

अफ्रीकी देशों को मजबूत रेगुलेटरी बॉडी की जरूरत। गाम्बिया ने सिरप बैन कर टैबलेट्स को बढ़ावा दिया। सैकड़ों निर्दोष मौतें – ज्यादातर बच्चों की – नियमन, लालच और वैश्विक असमानता का परिणाम हैं। गाम्बिया के माता-पिता न्याय मांग रहे हैं, उज्बेकिस्तान ने सजाएं दीं, लेकिन भारत में देरी चिंताजनक है।


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