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इंडियन एक्सप्रेस में छपी ये खबर पढ़ लीजिए, कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर का लोकतंत्र पता चल जाएगा!

यशवंत सिंह-

लोकतंत्र की बात करने वाली कम्युनिस्ट पार्टियां खुद अपने आंतरिक ढांचे में कितनी अलोकतांत्रिक हैं, इसके लिए आज इंडियन एक्सप्रेस में छपी ये खबर पढ़ लीजिए।

सीपीआई को दूसरा कोई नहीं मिला चीफ बनाने लायक। नौजवान कामरेड लोग ज़िन्दगी भर लाल झंडा उठाते रहें। टॉप पद पर बुड्ढे लोग ही रहेंगे। मोदी के पचहत्तर साल में रिटायर होने की कामना तो करेंगे लेकिन ख़ुद के लिए सेवेंटी फाइव का कोई मतलब नहीं।

ऐसे ही सीपीआई एमएल को दीपांकर भट्टाचार्य का कोई विकल्प मिलता ही नहीं। हम जब इस पार्टी के छात्र विंग आइसा में थे तो तबसे आजतक दीपांकर जी ही पार्टी चीफ हैं।

इनके पहले विनोद मिश्रा जी पार्टी मुखिया थे जो अपने निधन तक पद पर बने रहे और उन्होंने ही दीपांकर जी को नए मुखिया के रूप में डेवलप किया था। कई दशक हो गए लेकिन दीपांकर जी की जगह लेने लायक कोई दूसरा कामरेड सीपीआई एमएल में पैदा नहीं हुआ।

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