बांदा में हुई एक धमाकेदार प्रेस कॉन्फ्रेंस ने जिले की राजनीति और पत्रकारिता दोनों में हलचल मचा दी। पत्रकारों के साथ पूर्व मंत्री डॉ. सुरेंद्र पाल वर्मा के बेटे महेंद्र पाल वर्मा ने पूर्व बसपा मंत्री और मौजूदा सपा नेता दद्दू प्रसाद यादव व स्थानीय दबंग राजा भैया यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों ने दस्तावेज़ और सबूत दिखाते हुए दावा किया कि दोनों नेताओं ने मिलकर फर्जी रंगदारी का केस तैयार किया ताकि पत्रकारों को फंसाया जा सके और विरोधी राजनीतिक चेहरों को खत्म किया जा सके। पत्रकारों ने कहा कि यह पूरा खेल सत्ता और रसूख के बल पर सच को दबाने और पत्रकारिता को डराने का प्रयास है।
“मुझे राजनीति से खत्म करने की साजिश” — महेंद्र पाल वर्मा
पूर्व मंत्री डॉ. सुरेंद्र पाल वर्मा के बेटे महेंद्र पाल वर्मा ने दद्दू प्रसाद पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें राजनीति से मिटाने की साजिश रची जा रही है। वर्मा ने कहा—“दद्दू प्रसाद मेरी राजनीतिक ज़मीन खत्म करना चाहते हैं। वे राजा भैया को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। यह व्यक्तिगत बदले और सत्ता के खेल की साजिश है।”
वर्मा ने आगे कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव (2027) से पहले उन्हें और पत्रकारों को निशाना बनाकर जनता की आवाज़ को दबाने की कोशिश हो रही है।
“हम डरने वाले नहीं” — पत्रकार अनवर राजा रानू
पत्रकार अनवर राजा रानू ने कहा कि धमकी और झूठे मुकदमों से पत्रकारिता को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा— “अगर कोई सोचता है कि पत्रकारों को झूठे केस में फंसा कर चुप करा देगा तो यह उसकी भूल है। हमारे पास सबूत, वीडियो और गवाह हैं। आज मुझे निशाना बनाया गया है, कल किसी और पत्रकार को बनाया जाएगा।”
रानू ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि अगर पत्रकारों के खिलाफ षड्यंत्र जारी रहा तो मीडिया सड़क पर उतरकर विरोध करेगा।
राजा भैया की भूमिका पर उठे सवाल — पत्रकार आशीष सागर दीक्षित
पत्रकार आशीष सागर दीक्षित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई दस्तावेज़ दिखाए और दावा किया कि राजा भैया ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर झूठे मुकदमे तैयार करवाए। “उन्होंने उन महिलाओं से झूठे केस दर्ज करवाए जो पहले से ही मेरे खिलाफ थीं। यह विवाद 2013 से चला आ रहा है जब मैंने उनकी NGO की गड़बड़ियों का खुलासा किया था।”
दीक्षित ने कहा कि राजा भैया समाजसेवा के नाम पर करोड़ों रुपये की ग्रांट हड़प चुके हैं, लेकिन एक भी मॉडल गांव नहीं बनाया। “20 लाख की रंगदारी की बात की जा रही है, लेकिन उसका कोई सबूत नहीं है,” दीक्षित ने कहा।
CBI या SIT जांच की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद पत्रकारों और महेंद्र पाल वर्मा ने एकजुट होकर कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए CBI या SIT जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा— “अतारा के सर्किल ऑफिसर प्रवीन यादव के रहते निष्पक्ष जांच असंभव है। अगर जांच में देरी हुई तो पत्रकार सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।”
राजनीतिक हलचल और मीडिया की एकजुटता
इस खुलासे के बाद बांदा की राजनीति में हलचल मच गई है। कई पत्रकार संगठनों और सामाजिक समूहों ने पत्रकारों के समर्थन में बयान जारी करते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है।
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