फ़र्ज़ी खबर की पोल खुलने पर कोर्ट गए दैनिक जागरण की याचिका ख़ारिज!

प्रशांत सिंह-

याद है? जब दैनिक जागरण ने प्रयागराज में कोरोना पीड़ितों के शवों को लेकर ‘भ्रामक’ स्टोरी की थी? तब मैंने प्रयागराज के कई घाटों पर जाकर @Altnews के लिए एक ग्राउंड रिपोर्ट लिखी थी।

उसी रिपोर्ट को हटाने को लेकर दैनिक जागरण ने याचिका दायर की थी, जिसे आज दिल्ली हाईकोर्ट ने ख़ारिज करते हुए कहा- “बोलने की स्वतंत्रता तब और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, जब विषय वस्तु व्यापक रूप से जनता के चिंता का विषय हो”

आपको मालूम होना चाहिए कि दैनिक जागरण ने अपनी खबर में कोरोना काल की दूसरी लहर में दफनाए जा रहे शवों को नॉर्मल बताते हुए कहा था। प्रयागराज के घाटों पर दफनाए जा रहे शव आम बात हैं। लेकिन शवों की संख्या को घुमा-फिराकर बताया और लोगों को भरपूर गुमराह करने की कोशिश की थी।

यहां तक कि इस ‘भ्रामक स्टोरी’ को दैनिक जागरण की राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजी गई संपादकीय समेत इनकी टीम से लेकर सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने टाइमलाइन पर शेयर किया था।

बहरहाल ये कोई पहली बार नहीं है, जब दैनिक जागरण को कोर्ट ने उसकी पत्रकारिता को लेकर उसे फटकारा हो या उसकी याचिका ख़ारिज की हो। वैसे भी ₹100-₹100 करोड़ का सरकारी विज्ञापन पाने वाले अख़बार को पत्रकारिता से क्या ही मतलब?

सुने हैं इनकी टीम ख़बर लिखते समय इनकी गुनगुनाती है- “अब तो आदत सी है मुझको ऐसे फर्जी पत्रकारिता को लेकर डांट खाने में!”

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