सिद्धार्थ चौरसिया-
दैनिक जागरण समूह के डिजिटल एडिटर अनिल पांडे और डिप्टी एडिटर अजय सिंह द्वारा मेरे बीमारी के हालत में मेरी वाइफ से धोखे से झूठा आश्वासन देकर इस्तीफा लेने के मामले में मैंने लेबर कोर्ट, हाईकोर्ट और कानपुर नगर कमिश्नरेट में शिकायत की।
जिसके जवाब में अनिल पांडे ने पुलिस को झूठा बयान दिया कि हमने उनसे कहा था कि जब वह स्वस्थ हो जाएंगे और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट देने पर उनको फिर नौकरी देने पर विचार किया जा सकता है।
लेकिन सच्चाई यह नहीं है। अनिल पांडे ने इस्तीफा लेने के बाद आपात स्थिति में भी इंसानियत के नाते मेरा फोन रिसीव नहीं किया। जागरण के HR ने भी मेरा फोन नहीं उठाया। वाट्सऐप पर भी काफी बार मैंने और मेरी पत्नी ने जागरण के वाइस प्रेसिडेंट राजेश उपाध्याय, एडिटर अनिल पांडे, डिप्टी एडिटर अजय सिंह को मैसेज किया। क्योंकि ये तीनों फोन नहीं उठा रहे थे। मैसेज देखकर तीनों ने इग्नोर किया। अब पुलिस को झूठी सफाई दे रहे हैं।
इसके साथ ही मैं एक सवाल उठाना चाहता हूं कि अनिल पांडे को किसने जागरण का एडिटर बनाया कि उसको इतना भी अक्ल नहीं है कि एम्स अस्पताल किसी भी मरीज को इलाज के बाद या इलाज के दौरान ओपीडी कार्ड या टेस्ट रिपोर्ट के अलावा कोई कागज जारी नहीं करता। एम्स के डॉक्टर किसी भी मरीज को या किसी कंपनी के कर्मी की नौकरी बचाने या रिज्वाइन कराने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के लिए बाध्य नहीं है।
अनिल पांडे और अजय सिंह WTT के 20वीं मंजिल पर एसी में बैठकर पुलिस को ज्ञान दे रहा है, मुझे नहीं लगता है कि कभी वो एम्स के प्रांगण में गया होगा। ईश्वर से दुआ करता हूं कि उसको भी अपने बच्चे या परिवार के लिए एम्स में गंभीर बीमारी के इलाज के लिए धक्के खाना पड़े। ताकि उसका अक्ल ठिकाने लग जाए। मुझे पूरा यकीन है कि इन दोनों की इतनी भी औकात नहीं है कि ये एम्स में पहुंचकर कभी ओपीडी कार्ड बनवा ले।
अनिल पांडे, अजय सिंह एक नंबर का झूठा और मक्कार इंसान है। इसने मेरा घर, परिवार सब तबाह कर दिया। मैं एक-एक रुपये के लिए मोहताज हो गया हूं। ईश्वर से दुआ करता हूं कि ये दोनों भी एक समय बाद मीडिया में दर-दर की ठोकरें खाएं और कोई मीडिया कंपनी इसे नौकरी ना दे। एक गरीब बेटे और उसकी विधवा मां की बद्दुआ जरूर रंग लाएगी। इसके बीवी बच्चे एक ना एक दिन इसकी सजा भुगतेंगे।
मुझे मीडिया में नौकरी मिले या ना मिले। मैं भी इन शैतानों को छठी का दूध कानूनी तरीके से याद दिला दूंगा। अनिल पांडे ने मेरा नाम लगभग 30 लोगों की जो जागरण में छंटनी की गई थी, उसमें मेरा नाम शामिल कर रखा था। जिसको लेकर अजय सिंह मुझे अक्सर दो तीन दिन पर छंटनी किए जाने को लेकर धमकी दिया था। अजय सिंह ने मुझे फोन पर कहा था कि आने वाले 3 अगस्त को तुम्हें पता चलेगा कि न्यूजरूम में क्या उठापटक होती है। इमेज खराब करना क्या होता है सबका दिमाग ठिकाने लगाऊंगा। मैंने उन लोगों की सूची तैयार कर रखी है, तुम्हारा भी अक्ल ठिकाने लगा दूंगा।
अजय सिंह ने न्यूजरूम में एक चमचा पाल रखा है जिसका नाम नरेंद्र सांवरिया है। वह न्यूजरूम में लगभग सभी कर्मियों से काम के दौरान गाली गालौज करता है। उसके टॉर्चर से काफी लोग छंटनी से पहले खुद इस्तीफा देकर PTI, Times Now नवभारत या अन्य कंपनियों में चले गये थे। जागरण न्यू मीडिया में अनिल पांडे, अजय सिंह, नरेंद्र सांवरिया की गुटबाजी है। ये तीनों एकदूसरे के पूरक हैं। ये तीनों एकदूसरे की बीच-बचाव करते हैं, अपनी कमजोरियाँ छिपाते हैं।
इन तीनों की वजह से मेरा घर तबाह हो गया। पिछले साल अगस्त से मैं बीमार हूं। दिल्ली के एम्स में अभी भी इलाज करा रहा हूं। कहीं मुझे नौकरी ना मिले। कहीं अगर अप्लाई करूं तो इनकी कोशिश रहे कि वेरिफिकेशन मेरा नेगेटिव कर दें। ऐसी धमकी दिलवा रहे हैं। इतनी नीचता पर उतर आए हैं। इस पोस्ट से मैं मेनस्ट्रीम मीडिया के तमाम मालिकों, CEO, संपादकों, HR से हाथ जोड़कर विनती करता हूं, भविष्य में अनिल पांडे, अजय सिंह, नरेंद्र सांवरिया को कहीं भी नौकरी ना दें। इसका बहिष्कार करें।
देखें शिकायत व पत्रकार के इलाज संबंधी दस्तावेज…




मूल खबर…



Vasudha
April 4, 2025 at 3:20 pm
Gurpreet Cheema ka naam aata to or maza aa jata… Ye mahila bhi piche nahi hai. Bahut torture kiya hai isne sabhi team walon ko