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जागरण समूह में किस तरह टार्चर किया गया एक चीफ सब एडिटर को, पढ़िए दास्तान

पत्रकार की बिगड़ी तबियत तो पत्नी से लिखवाया इस्तीफा!

दैनिक जागरण समूह के डिजिटल प्लेटफार्म जागरण न्यू मीडिया से एक अजब-गजब मामला सामने आया है। संस्थान के नोएडा दफ्तर में कार्यरत चीफ सब एडिटर का आरोप है कि संस्थान ने उसे उस वक्त नौकरी से बाहर किया जब वह शारीरिक रूप से गंभीर बीमार था।

बावजूद इसके प्रबंधन ने उसकी पत्नी से उसके नाम पर इस्तीफा मेल करा लिया। पत्रकार सिद्धार्थ चौरसिया ने दैनिक जागरण समूह व कई उच्च कर्मचारियों पर तमाम गंभीर आरोप भी लगाए हैं, नीचे पढ़ें, उन्होंने क्या कुछ कहा लिखा है…


सिद्धार्थ चौरसिया –

नमस्कार सर…, मेरा नाम सिद्धार्थ है। मैं जागरण न्यू मीडिया का अक्टूबर तक कर्मचारी था। मेरा EMP CODE-PN0262 था। अगस्त में मैं बीमार हो गया था। मुझे एंग्जाइटी और पेट में अल्सर की समस्या हो गई थी। मेरे HOD का नाम अनिल पांडे और डेस्क इंचार्ज अजय सिंह थे। लोकसभा चुनाव के समय अजय सिंह office में शिफ्ट के अलावा एक डेढ़ घंटा काम मुझसे हमेशा लेते थे।

इतना ही नहीं, अजय सिंह ने नरेंद्र सांवरिया नाम‌ के एक कर्मी को शिफ्ट इंचार्ज बना रखा है, जो टीम में खुलेआम मां बहन की गालीगालौज करता है और सबको टारगेट करता रहा। जब मैंने एक दो बार मेल और मौखिक रूप से इसकी शिकायत अजय सिंह से की तो उन्होंने उसका बचाव किया और उल्टे मेरे काम में बेमतलब में खामियां बताकर टारगेट करने लगे और की मर्तबा चैट पर, फोन पर नौकरी से निकलवाने की धमकी देने लगे।

अजय सिंह और नरेंद्र सांवरिया लोकसभा चुनाव से लेकर शपथग्रहण तक इतना ज्यादा मुझे मेंटली परेशान करने लगा। खबरों में जरा-जरा सी टाइपो एरर ढूंढ़कर स्क्रीनशॉट लेकर सबको‌ टैग करके मेल करता रहा और मुझे दिमागी रूप से परेशान करता रहा। इन सबके पीछे अजय सिंह का सबसे बड़ा हाथ रहा। अजय सिंह कभी भी डेस्क पर नहीं टिकते थे। वह हमेशा सब एडिटर या अन्य कर्मियों को शिफ्ट‌ की जिम्मेदारी देकर जूनियर से एक चीफ सब एडिटर को लीड करवाते थे। फिर उसके जरिये एक दूसरे को टारगेट करवाते रहे।

आपस में सभी कर्मियों को एक दूसरे से टकराव करवाना, फिर सबको सामने से बीच बचाव करना और छोटी-छोटी बात पर सबको नौकरी‌ से हटाने की धमकी देना यही फितरत रहा। अजय सिंह, नरेंद्र सांवरिया ने खासकर मुझे इतना‌ ज्यादा परेशान किया कि मैं धीरे-धीरे एंग्जाइटी का‌ मरीज बन गया।

बीते साल (2024) अगस्त के महीने में जागरण से करीब तीस लोगों को नौकरी से निकाला गया है। इस Layoff में पहले‌ मेरा नाम भी शामिल था। लेकिन जब मैं गंभीर रूप से बीमार हो गया और दिल्ली के एम्स में इलाज चलने लगा तो मेरी पत्नी ने अजय सिंह और नरेंद्र सांवरिया को फोन कर इस बात की जानकारी दी। साथ ही कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। डर के मारे अनिल‌ पांडे, अजय सिंह और नीतेश श्रीवास्तव ने Layoff करने की बात से इनकार कर दिया और भरोसा दिलाया की तुम बेकार इतना सोचकर बीमार पड़ गये। मैं तो हमेशा से तुम्हारी तारीफ करता हूं, तुम्हारा बचाव किया हूं।

उसके बाद मेरी पत्नी‌ ने‌ राजेश उपाध्याय से संपर्क किया और जब तक मेरी तबीयत ठीक नहीं हो जाए तब तक मुझे अनपेड लीव देने और मुझे नौकरी से नहीं हटाने की बात कही। लेकिन राजेश उपाध्याय, अनिल पांडे, अजय सिंह, रूही प्रवेज ने मेरी‌ मम्मी और मेरी पत्नी को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ अभी अपने पद से स्वंय इस्तीफा दे दे। पहले अपने सेहत पर ध्यान दे। हमलोग वादा करते हैं वह जैसे स्वस्य हो जाएंगे। हम‌ पुन: उनको उसी पद पर रख लेंगे।

ये सब मायाजाल बुनकर इन लोगों ने मेरी पत्नी से मेरे नाम का इस्तीफा लिखवा लिया।

लेकिन‌ जब मैं धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगा, और जब डाक्टर ने कहा कि आप काम कर सकते हैं कोई ऐसी बात नहीं है तो मैंने कई मर्तबा राजेश उपाध्याय और अनिल पांडे को फोन‌ और Whatsapp किया। मेरी पत्नी दो तीन दिन office भी गई लेकिन HR ने ना‌ उसे अनिल पांडे से मिलने दिया ना‌ राजेश उपाध्याय से। HR ने हर बार मीटिंग का‌ बहाना बनाकर मेरी पत्नी को वापस भेज दिया। पिछले‌ छह सात महीने मुझे बीमारी और दर-दर अस्पतालों का सामना करना पड़ा।

मौत के मुंह से मैं बचकर जैसे तैसे अब कुछ हद तक रिकवर हुआ। उन सबका जिम्मेदार मैं अनिल पांडे, अजय और नरेंद्र सांवरिया को मानता हूं। ये लोग गुटबाजी कर के कई लोगों की नौकरी खा गये। कई लोगों का‌ घर उजाड़ दिए।

अनिल पांडे अक्सर हटाए जाने वाले कर्मी जो उनके बारे में इधर उधर कोई बातें लिखता है तो बाकी कर्मी को कहते फिरते हैं कि मेरी मीडिया में इतनी साख है कि मैं अगर चाहूं तो फलां को किसी भी ग्रुप में नौकरी पर ना लगने दूं। किसी को भी हटवा सकता हूं, मुझसे उलझने वाले को आजतक मैंने छोड़ा नहीं। वह अपने आप को तुर्रम खां समझते हैं।

वह भूल गये हैं कि रोटी देने वाला भगवान है। किसी मीडिया संस्थान का प्रधान संपादक अगर यह सोच रखता है कि अगर वह चाहे तो किसी को नौकरी पर कहीं और ना लगने दे, तो ये सबसे बड़ी भूल है। बेशक इंडस्ट्री छोटी है। लेकिन वह भगवान नहीं है।

राजेश उपाध्याय के व्हाट्सएप चैट स्क्रीनशॉट

एडिटर इन चीफ अनिल पांडेय के साथ चीफ सब एडिटर सिद्धार्थ चौरसिया
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