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दलाली का एग्रीमेंट करवाता है साधना प्राइम न्यूज़!

नोएडा से प्रसारित चैनल ‘साधना प्राइम न्यूज़’ का काम करने का नजरिया तो बिलकुल बड़े चैनलों की तरह ही है। बाकायदा यह चैनल अपने रिपोर्टरों पर ख़बरें भेजने का प्रेशर देने के साथ ही डे प्लान व स्टोरी आईडिया का भी दबाव बनाता है। कोई खबर छूटने पर तुरंत ऑफिस से प्रेशर होना शुरू हो जाता है। लगातार नई और एक्सक्लूसिव ख़बरें भेजने का दबाव चैनल द्वारा पत्रकारों पर बनाया जाता है। कभी गलती से भी अगर कोई पत्रकार अपने मालिकान से मेहनताने की बात कर देता है तो उसे अपने मेहनताने के बदले इस चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

नोएडा से प्रसारित चैनल ‘साधना प्राइम न्यूज़’ का काम करने का नजरिया तो बिलकुल बड़े चैनलों की तरह ही है। बाकायदा यह चैनल अपने रिपोर्टरों पर ख़बरें भेजने का प्रेशर देने के साथ ही डे प्लान व स्टोरी आईडिया का भी दबाव बनाता है। कोई खबर छूटने पर तुरंत ऑफिस से प्रेशर होना शुरू हो जाता है। लगातार नई और एक्सक्लूसिव ख़बरें भेजने का दबाव चैनल द्वारा पत्रकारों पर बनाया जाता है। कभी गलती से भी अगर कोई पत्रकार अपने मालिकान से मेहनताने की बात कर देता है तो उसे अपने मेहनताने के बदले इस चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

इस चैनल द्वारा उन्ही पत्रकारो को संस्था की माइक आई डी दी जाती है जिसकी बोली इनकी दलाली में सबसे ज्यादा हो। चैनल के सीईओ मोसिन खान तो जरूर मरसडिज जैसी महंगी गाड़ियों से चलते है लेकिन शायद ही इन्होंने यह जानने की जहमत उठाई होगी कि इनके संस्था के पत्रकार को एक साइकिल भी नसीब हो पाती होगी या नहीं। अपने तेजतर्रार अंदाज के लिए जाने जानी वाली अंजू कोटनाला जी अक्सर ख़बरें छूटने पर चैनल के पत्रकारों को खरी खोटी सुनाने से बाज नहीं आती लेकिन शायद पत्रकारों के इस दर्द को उन्होंने भी नहीं समझा। चैनल पर प्रतिदिन राजीव रघुनन्दन द्वारा प्राइम एजेंडा में देश दुनिया के उन तमाम लोगो के मद्दों को प्रमुखता से उठाया जाता है जिनके साथ नाइंसाफी होती रही है लेकिन इनके चैनल द्वारा जो अपने संंस्थान के कर्मचारियों के साथ नाइंंसाफी की जाती है उसे कौन उजागर करेगा।

शायद यही कारण है कि कई बार चैनल का लोगो भी बदल दिया जाता है जिस कारण नए युवाओं को फाँसने का मौका इन्हे मिल सके। साथ ही संस्था द्वारा इनके पत्रकरों से 10 रूपये के स्टाम्प पेपर पर एक एग्रीमेंट भरवाया जाता है जिसपर ये लिखा होता है की आपको संस्था द्वारा कोई मेहनताना नहीं दिया जायेगा। अब फिर से यह चैनल एक नए लोगो के साथ आने जा रहा है और फिर एक बार जिसकी बोली ज्यादा होगी उसे इस चैनल द्वारा माइक आई डी थमा दी जाएगी और शुरू हो जायेगा फिर एक बार पत्रकारिता का दललिकरण। केंद्र सरकार से हमारी मांग है की ऐसे चैनलों को चिन्हित कर इनका लाइसेंस रद्द करना चाहिए ताकि परकरिता का वजूद समाप्त ख़त्म होने से बच सके।

एक साधना कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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1 Comment

1 Comment

  1. jitender bhati

    July 21, 2016 at 9:27 am

    ये बिलकुल गलत लिखा है जिस किसी ने भी लिखा है,केवल नाम ख़राब करने की साजिश है मात्र,क्योंकि मैं खुद साधना प्राइम न्यूज़ का रिपोर्टर हूँ,और जब से इस चैनल में काम कर रहा हूँ जब से ये चैनल न एयर हुआ,इस लिए जिस किसी ने भी ये सब लिखा है मैं उसका पूर्ण रूप से खंडन करता हूँ हमारे चैनल में ऐसा आज तक कुछ ऐसा नहीं है कि जैसा इन जनाब ने लिखा है,और अगर ये इतने ही सच्चे है तो ये अपनी पहचान बताएँ और अगर ये जनाब मेरे संस्थान में काम कर रहे हैं और इन्हें कोई भी परेशानी थी या है तो इसका निष्कर्ष ऑफिस में बैठे उच्चाधिकारी निकाल सकते थे,लेकिन क्योंकि ये एक साजिश है तो ऐसा तो लिखना बनता ही है हमारे चैनल की तरक्की से जलने वालों का
    जितेंद्र भाटी
    संवाददाता
    ग़ाज़ियाबाद
    9650056400

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