श्याम मीरा सिंह-

एक बनिया, एक दलित को दलितों पर ही गाली पड़वा दे रहा है और ये बता रहा है कि एक बनिया, दलितों का हितेषी है, एक दलित नहीं।
@Sumitchauhaan दलित वर्ग से आते हैं। और संघर्ष करके यहाँ पहुँचे। अपने पैसे से दलित मुद्दों पर ग्राउंड रिपोर्ट करते हैं। उन्होंने मायावती की दर्जनों रैलियों ग्राउंड पर जाकर कवर कीं। ऐसा कोई दलित मुद्दा नहीं, जिसे उन्होंने ग्राउंड से कवर न किया हो। धूप में, गर्मी में, सर्दी में।
वहीं दिलीप ग्राउंड कभी दलितों की बस्ती में जाकर वीडियो नहीं बनाते, वे केवल इंटरव्यू और पॉडकास्ट के लिए जाते हैं। ब्राह्मणवादी मीडिया एक बनियवर्ग से आने वाले दलित चिंतक से सहज है। इसलिए किसी दलित वर्ग से आने वाले किसी सामाजिक चिंतक, विचारक, दलित मुद्दों पर तीक्ष्ण रूप से मुखर किसी नौजवान, या बुजुर्ग को नहीं बुलाती। ब्राह्मण/बनिया मीडिया को दलित चिंतक भी एक बनिया/ब्राह्मण चाहिए। दलित मण्डल भाजपा को सपोर्ट करने लगे और भाजपा दिलीप मंडल को सपोर्ट करने लगे तो ब्राह्मण/बनिया मीडिया ने एक बनिया- “दलित चिंतक” को बुलाना शुरू कर दिया। अब उसे किसी दलित स्कॉलर की ज़रूरत न रह गई।
जो जगह दलित वर्ग आने वाले किसी स्कॉलर, लेखक, कवि, विचारक को मिलनी चाहिए थी। वह मंच ब्राह्मणवादी मीडिया से पिछले दरवाज़े से हाथ मिलाकर एक बनिया ने क़ब्जा लिया। अब एक बनिया बताता है कि दलितों के लिए क्या सही है। कैसे एक दलित ग़द्दार है। कैसे एक दलित कांग्रेसी हो गया। भाजपा के डेयरी मिल्क से दूध पीने वाले बनिया वर्ग से आने वाले दलित चिंतक, अब दलित पत्रकार को गालियाँ पड़वा रहे हैं। ग़द्दार कह रहे हैं सामाजिक डिस्कॉर्स में दलितों के प्रतिनिधित्व के मंच को क़ब्ज़ाने वाला बनिया वर्ग व्यक्ति असली दलित हितेषी है, दलितों के विश्वास को खेलकर भाजपा से अंदर ही अंदर हाथ मिलाने वाला बनिया दलित हितेषी है। लेकिन एक दलित पत्रकार, स्वतंत्र नहीं सोच सकता। एक दलित अपने निजी विचार नहीं रख सकता। सिर्फ़ एक बनिया रखेगा। बनिया/ब्राह्मण मीडिया मिलकर दलितों को बताएँगे कि कैसे एक दलित ग़द्दार है। ग़ज़ब।



