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डीडी फ्री डिश पर MPEG-2 स्लॉट्स की 7वीं ई-नीलामी शुरू, पढ़ें.. किन चैनलों को होगा फायदा?

नई दिल्ली | सरकारी फ्री-टू-एयर प्लेटफॉर्म डीडी फ्री डिश पर खाली पड़े MPEG-2 स्लॉट्स की सातवीं वार्षिक ई-नीलामी सोमवार से शुरू हो गई है। सरकार का उद्देश्य इस नीलामी के जरिए क्षेत्रीय भाषा के समाचार चैनलों को अधिक स्थान देकर प्लेटफॉर्म की पहुंच को और विस्तार देना है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “डीडी फ्री डिश हिंदीभाषी बाजारों में पहले से मजबूत उपस्थिति रखता है। प्लेटफॉर्म के सब्सक्राइबर लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे दक्षिण भारत सहित अन्य क्षेत्रीय भाषा बाजारों में भी संभावनाएं बढ़ी हैं।”

हिंदी समाचार चैनलों के लिए प्रतिस्पर्धा, क्षेत्रीय चैनलों के लिए अलग स्लॉट

सरकार ने प्रसार भारती को निर्देश दिया है कि वे क्षेत्रीय भाषा के समाचार चैनलों के लिए समर्पित स्लॉट्स सुनिश्चित करें। हालांकि, हिंदी और अंग्रेजी समाचार चैनलों को भी इससे कोई नुकसान नहीं होगा।

नीलामी में हिंदी समाचार चैनलों के लिए जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। 2024 की ई-नीलामी में 12 निजी हिंदी समाचार चैनलों ने स्लॉट खरीदे, जिनकी कीमत ₹17.5 करोड़ से ₹19 करोड़ तक रही। इन चैनलों ने कुल मिलाकर ₹232 करोड़ का भुगतान किया।

पिछले साल (2023) हिंदी समाचार चैनलों के लिए स्लॉट की अधिकतम कीमत ₹21 करोड़ तक पहुंच गई थी, जबकि आरक्षित मूल्य मात्र ₹7 करोड़ था।

क्षेत्रीय भाषाओं के लिए ‘बकेट आर’, हिंदी समाचार चैनलों को राहत

नई ई-नीलामी नीति के अनुसार, क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार चैनलों को “बकेट आर” में रखा गया है, जिसमें हिंदी, उर्दू, मराठी और पंजाबी को छोड़कर अन्य भाषाओं के चैनलों के लिए ₹3 करोड़ का आरक्षित मूल्य तय किया गया है।

नीति में स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई क्षेत्रीय भाषा लगातार दो साल तक डीडी फ्री डिश पर मौजूद रहती है, तो उसे “बकेट डी” में शिफ्ट कर दिया जाएगा, जहां आरक्षित मूल्य ₹6 करोड़ होगा।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार हिंदी समाचार चैनलों को संतुलन देने के लिए “बकेट सी” (₹8 करोड़ का आरक्षित मूल्य) को दूसरे दौर में दोहरा सकती है, जिससे हिंदी समाचार चैनलों को भी उचित स्थान मिल सके।

बोली की ऊंची कीमतों पर सरकार का बयान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि बोली की कीमतें बाज़ार की मांग पर निर्भर करती हैं और सरकार इसमें सीधा हस्तक्षेप नहीं करती।

“बोली की ऊंची कीमतें अक्सर डीडी फ्री डिश के विशाल दर्शक वर्ग को खोने के डर के कारण होती हैं। हालांकि, इस साल प्रमुख चुनाव नहीं होने के चलते कीमतों में कुछ गिरावट देखी जा सकती है,” एक सरकारी अधिकारी ने कहा।

डीडी फ्री डिश की रणनीति और भविष्य की योजना

प्रसार भारती ने कहा कि नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए उपलब्ध स्लॉट्स की संख्या पहले से नहीं बताई जाती। इससे समाचार चैनलों में प्रतिस्पर्धा बनी रहती है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम समझते हैं कि हिंदी समाचार चैनलों के राजस्व में गिरावट आई है, लेकिन डीडी फ्री डिश उनके व्यापार मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। 2023 में हमने अपनी नीलामी रणनीति में बदलाव किया था, ताकि अधिकतम राजस्व प्राप्त किया जा सके।”

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