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दिल्ली

दिल्ली की सल्तनत कोई हारे कोई जीते, लेकिन आरोप मस्त हैं!

संजय कुमार सिंह-

कोई जीते-कोई हारे, सिस्टम हार (जीत) चुका है… दिल्ली विधानसभा चुनाव में कोई जीते कोई हारे लेकिन आरोप मस्त हैं। मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने के अलावा वोट खरीदे भी गये हैं। इसके लिए उम्मीदवारों को न सिर्फ पैसे बांटे गये हैं बल्कि उंगलियों पर निशान लगाकर पक्का कर दिया गया कि ऐसे लोग वोट नहीं डाल सकेंगे।

खबरें तो कई दिनों से थीं, इसे रोका नहीं गया और मतदान के दिन भी चला। वीडियो सोशल मीडिया पर हैं लेकिन कार्रवाई की कोई खबर नहीं।

प्रचार की अवधि समाप्त होने के बावजूद, दिन की शुरुआत पहले पन्ने पर भाजपा के विज्ञापन से हुई। अभी केंचुआ और ईवीएम का खेल बाकी है। उधर प्रधानमंत्री ने संगम में डुबकी लगाकर ट्वीट किया, प्रयागराज के दिव्य-भव्य महाकुंभ में आस्था, भक्ति और अध्यात्म का संगम हर किसी को अभिभूत कर रहा है। पावन-पुण्य कुंभ में स्नान की कुछ तस्वीरें….। इससे पहले यह टेलीविजन चैनलों पर छाया हुआ था।

कुछ लोगों ने कहा कि जवाब में केजरीवाल भी अपने माता-पिता को व्हीलचेयर पर लेकर सपरिवार वोट डालने गये। अब इसकी बराबरी कुंभ में डुबकी लगाने से तो नहीं की जा सकती है लेकिन एएनआई का वीडियो जरूर है।

मार-पीट, हिंसा, तोड़-फोड़ की शिकायतों की तो गिनती भी नहीं है। ऑल्ट न्यूज़ लगातार मेटा एड लाइब्रेरी में दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ रहे तीन प्रमुख दलों के आधिकारिक फेसबुक पेजों पर नज़र बना रखी है। इस दौरान हमने पाया कि भाजपा दिल्ली का आधिकारिक पेज वर्तमान में ‘साइलेंस पीरियड’ के दौरान विज्ञापन चला रहा है जो चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के स्पष्ट उल्लंघन है।

चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन पार्टी के चुनावी नियमों के पालन करने की नीयत पर सवाल उठाता है। ऐसा पहले भी होता रहा है लेकिन इसपर भी कार्रवाई नहीं की.. खबर नहीं है।


किसी एक बिल्डिंग में अगर कुछ महीने में 7000 वोटर बढ़ सकते हैं तो पता चलता है कि सिस्टम अनिल मसीह हो चुका है।


अनिल मसीह होना – अर्थ और वाक्य में प्रयोग

किसी का अनिल मसीह होना मतलब है खुले आम (सीसीटीवी के तहत) मनमानी करना, पकड़े जाना फिर भी बाल बांका न होना।

इसका दूसरा उदाहरण डबल इंजन वाले राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक प्रिंसिपल और महिला शिक्षक का अश्लील वीडियो है जो वायरल हो गया तो कार्रवाई हो गई। पर यह अनिल मसीह होना नहीं माना जायेगा।

अभी तक शेल कंपनियों के 20,000 करोड़ पर कार्रवाई नहीं होना, सेबी प्रमुख का बचे रहना अनिल मसीह होने के उदाहरणों की श्रेणी में आयेगा। इलेक्टोरल बांड लाने, खारिज किये जाने और फिर भी राम नाम सत्य न होना सिस्टम का अनिल मसीह होना है। अनिल – जो नीला (Blue XXX) नहीं है।


उमारमन सिन्हा-

मतदाता सूची से छेड़छाड़ का आरोप यूं ही नहीं है!

आज 5 फ़रवरी 2025 को दिल्ली विधानसभा के लिए वोटिंग है। आप को मतदान करके अपने मत का उपयोग अवश्य करना चाहिए और सरकार के गठन में भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। चुनाव आयोग भी प्रचार करती है। मैं 1962 से हर चुनाव में वोट देता आया हूँ।

पाँच दिन पहले मुझे पता चला कि मेरा नाम मतदान सूची से डिलीट कर दिया गया है, हटा दिया गया है बिना जाँच किए और बग़ैर मुझे सूचित किए। सही करने की कोशिश करने पर बताया गया कि अब कुछ नहीं हो सकता। राजीव कुमार जी को मैसेज कराया जिसका कोई जवाब नहीं आया। सोचा था जाकर धरने पर बैठ जाऊँगा पर बच्चों ने रोका हुआ है।

सच है कि कुछ भी मुमकिन है या सच नामुमकिन है।

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