रवीश कुमार-
दिल्ली के ही एक इलाके में 5000 लोगों के घरों में एक महीने से पानी नहीं आ रहा है। महिलाएँ दफ़्तर में जाकर स्नान कर रही हैं और इसी दिल्ली में कथित कुलीन तंत्र पर हमला बोलने का नाटक किया जा रहा है। लोकल से लेकर ग्लोबल स्तर पर कमज़ोर दिख रही सरकार उन समस्याओं से नहीं लड़ती जो ज़मीन पर हैं मगर लड़ती हुई दिखती रहे इसके लिए पड़ोस में दुश्मन पैदा करती है और उसके लोग उसकी कहानी में रस डालते हैं।
क्लब की वेटिंग लिस्ट के आधार पर कुलीन तंत्र को सत्ता का मलेरिया घोषित किया जा रहा है, जिसे अब दूर किया जाएगा। कथित कुलीन तंत्र से लड़ाई के लिए वीर रस की कविताएं लिखी जाने लगी हैं। ताकि दक्षिणपुरी में बाल्टी लेकर इंतज़ार कर रहे लोगों को पता रहे कि उनकी सरकार बहादुर होने के लिए जिमखाना क्लब खाली करा रही है।
क्लब की इस लड़ाई में कुलीन ही आपस में कुलीन-कुलीन खेल रहे हैं और जिमखाना क्लब के बहाने सत्ता की गोद में बैठा कुलीन ख़ुद को इस लड़ाई में सर्वहारा दिखा रहा है। नौटंकी की भी हद होती है। इसी तरह कुछ दिन पहले ख़ान मार्केट से चिढ़ पैदा की गई, सरकार का ही चारण करने वाले लोग इंडिया को सुपर पावर फील करने के लिए घूमने जाते हैं। वो सीलमपुर हाट नहीं जाते हैं। उसी ख़ान मार्केट में जाते हैं जहाँ अब योगी जी और मोदी जी का पोस्टर लगा होता है और ख़ान मार्केट की फ़ितरत जैसी थी, वैसी ही है। ख़ान मार्केट और अमीरों का कुछ नहीं बिगड़ा।
ऐसा नहीं हुआ कि ख़ान मार्केट पर विश्व विजय प्राप्त करने के बाद दिल्ली के कुलीन कटोरा लेकर भटकने लगे हैं। दिल्ली के अमीरों के पास इसी शहर में दस और कुलीन बाज़ार और क्लब हैं और नए-नए कुलीन बाज़ार बनते जा रहे हैं। कुलीन कुलीन होता है। उससे दो साड़ी माँग लीजिए या ली गई हुई साड़ी मत लौटाइये, क्या फर्क पड़ता है।
मगर ऐसी कहानी मत बनाइये कि प्रधानमंत्री से सरकार नहीं चल रही है और जिमखाना क्लब वाले सरकार चलाने नहीं दे रहे हैं। ख़ान मार्केट या जिम खाना क्लब पर कथित कब्ज़े से क्या बदल गया और क्या बदल जाएगा? हर डेटा कहता है कि भारत में अमीर और अमीर हो गए और 80 करोड़ दो सौ रुपये के मुफ्त अनाज पर निर्भर हो गए। अमीरों को अमीर बना कर दो चार क्लबों पर कब्ज़ा करने के नाम पर विश्व विजयी होने की नौटंकी रची जा रही है।
जिमखाना क्लब के सदस्य भी उसी सरकार की डफली बजाते हैं, जो उनसे क्लब लेकर बहादुर बन रही है। लंच डिनर पर मोदी समर्थक कहलाने के लिए अपने ही दोस्तों से भिड़ जाते हैं। उन्हीं को अब नए शत्रु के रुप में दिखाया जा रहा है। जब असली ताकतवर (अमेरिका) सामने आ जाता है तो बोला नहीं जाता है। उससे लड़ती हुई यह सरकार कहीं नज़र नहीं आती मगर प्रधानमंत्री निवास के बगल में एक मोर्चा खोज लिया गया है।
गोदी मीडिया और सरकार के कुलीन समर्थक दिखाएंगे कि लड़ाई हो रही है। रक्तपात हो रहा है। सरकार ने कितनी बड़ी लड़ाई मोल ले ली है। दुनिया में जो लड़ाई चल रही है, उसके खिलाफ बोलने का नैतिक साहस गंवा देने वाली सरकार जिमखाना क्लब से लड़ने की नैतिकता प्राप्त कर चुकी है। ट्रंप ने कितनी बार भारत को अपमानित किया गया, उनकी बातों का प्रतिकार भूल कर दोस्ती का पैगाम बताया जाने लगा। उधर भारत पाँच साल में अमेरिका से पाँच सौ बिलियन डॉलर की ख़रीद करने जा रहा है। दिल्ली में मौजूद अमेरिका के विदेश सचिव रुबियो ने ट्वीट किया है। भारत की कंपनियाँ वादा करने की होड़ में हैं कि अमेरिका में कितने अरब डॉलर का निवेश करेंगी। प्रधानमंत्री मोदी भारत की ग़रीब जनता से अपील कर रहे हैं कि कोई संकट आया है, एकजुट होना है, सोना नहीं ख़रीदना है, डॉलर बचाना है।
इधर रुबियो दिल्ली आकर कह रहे हैं कि भारत ने कमिटमेंट कर दिया है कि अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर का सामान ख़रीदेगा। काश ग्लोबल मैदान जिमखाना क्लब होता तो सरकार के समर्थन में कुलीन लोग जमकर लिखते हैं कि क्लब ख़ाली करने का नोटिस थमा दिया गया है और मोदी सरकार दुनिया की पहली सरकार है जिसका कोई एलिट नहीं है। एलिट दिल्ली के एक मार्केट में है और दो क्लब में है। हा हा हा। दक्षिणपुरी के लोग बिना पानी के एलिट बन गए हैं।
हर मुद्दे की तरह जिमख़ाना क्लब को लेकर भी दिल्ली का संभ्रांत वर्ग दो खेमों में बँट गया। एक वह ख़ेमा है जो जिमख़ाना क्लब के पक्ष में है। और दूसरा वह जो सरकार की कार्रवाई का समर्थन कर रहा है। हालाँकि कार्रवाई के पक्ष के लोगों की संख्या अधिक है।
इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि उनमें से अधिकांश की जिमख़ाना क्लब की सदस्यता लेने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। यहाँ सदस्यता के लिए लंबी लाइन है। पंद्रह से तीस वर्षों तक की प्रतीक्षा करने को कहा जाता है।
यानी आप साठ साल की आयु में आवेदन करें तो हो सकता है आपको नब्बे वर्ष की आयु में सदस्यता मिले। तब उस सदस्यता का आप क्या करेंगे?
-अखिलेश शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार)



शेखर
May 28, 2026 at 2:26 pm
सिर्फ़ यही शोर है कि इस कुलीन क्लब को बंद करके सरकार अभूतपूर्व पराक्रम का परिचय देने जा रही है। लेकिन लगातार होते इस शोर के बीच मुझ जैसा जन्मजात अकुलीन इतने बड़े कुलीनों के इस विशाल क्लब के एक ही कुलीन सदस्य- राहुल गांधी का ही नाम जान पाया। क्या पूरी दिल्ली में कोई ऐसा पत्रकार है,जो दस-बीस और कुलीनों के नाम देश के सामने उजागर कर दे।