
विजय सिंह ठकुराय-
सुना है कि गुजरात एटीएस ने एक मोमीन को 4 लीटर अरंडी के तेल के साथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये सुसरा अरंडी के तेल से रिसिन नामक “सायनाइड से भी घातक” जहर निकाल कर जल स्त्रोतों को कंटेमिनेट कर के भारी तबाही की योजना बना रहा था। बात उल्टी हो गयी वैसे, क्योंकि तेल से रिसिन नहीं बनता, बीज से बनता है। पर बहरहाल, शायद मेरे पढ़ने या अखबार के छपने में कोई त्रुटि हो।
सोच रहा हूँ कि कल को ये मौलाना भारी तबाही मचाता तो कम से कम 100-200 किलो रिसिन तो लगता ही। अब चूंकि अरंडी के बीज में रिसिन की कुल मात्रा 1-2 परसेंट ही होती है इसलिए ये मौलाना दसियों हजार किलो तो अरंडी खरीदता। फिर उसे स्टोर करने के लिए बड़े-बड़े वेयरहाउस बनवाता। फिर क्रशर, बॉयलर, मिक्सर इत्यादि तमाम तरीके की हैवी मशीनरी लगती। खूब शोर होता, केमिकल की सडांध फैलती तो आबादी वाले इलाके में तो हो नहीं पाता। जंगल में प्लांट लगाता तो बिजली कहाँ से लाता? खुद का बिजलीघर बनवाता? पर मौलाना इतना सोच पाता, उससे पहले ही महात्मा जी की टीम ने उसे दबोच लिया। वेरी गुड वर्क, जान बचा लिए महात्मा जी।
अब ऐसा नहीं है कि मौलाने ने नोबेल प्राइज वाली कोई खोज कर दी है। दुनिया के हर बीज में खतरनाक टॉक्सिन्स होते ही होते हैं, यह यूनिवर्सल सत्य है। इसके पीछे प्रकृति की मंशा इतनी भर है कि कोई बीज को खा न पाए और वनस्पति को भी अपनी वृद्धि का मौका मिले। हम इंसान डेढ़ सयाने हैं, इसलिए बीजों को भी डिटॉक्स प्रोसेस कर के खा लेते हैं। बहरहाल, किसी को बीज जेहाद करनी ही हो तो रिसिन से भी हजारों गुना खतरनाक टॉक्सिन रोजमर्रा के बीजों में मौजूद होते हैं।
ना, ना, ना। ये मैं मौलाने को क्लीन चिट नहीं दे रहा। मैं तो बस आपको यह बता रहा हूँ कि “महाविनाश” की योजना की वास्तविक रेसिपी क्या है। हाइप के पीछे की सच्चाई क्या है। बाकी ATS ने धरा है तो कुछ छोटी-बड़ी खुराफात की योजना बना ही रहा होगा।
मैं तो बस नियति के चक्र पर अचंभित हूँ जी। कहाँ तो कल तक मेरे दिमाग में “वोटचोरी, महंगाई, भ्रष्टाचार, रोजगार” जैसी चीजें घूम रही थीं, सरकार बैकफुट पर लग रही थी, महात्मा जी की साख घटती प्रतीत हो रही थी। देश नींद से उठकर चेतन होता प्रतीत हो रहा था।
फिर देश के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी जामुन की तरह बरसने लगते हैं। दस साल में सरकारी आंकड़ों के ही मुताबिक घटी हजारों आतंकी घटनाओं पर मूक रहा मीडिया प्रकट होता है। हर बात को बढ़ा-चढ़ा कर, नए-नए शब्द ईजाद कर ऐसा “महातबाही” का माहौल बनाता है कि “इंटेलिजेंस फेलियर” अब मुझे “सरकार की उपलब्धि” लग रही है। राजधानी दिल्ली के धमाके पर मैं सवाल पूछने की बजाय मात्र 10-12 को ही मरने देने के लिए सरकार जी को धन्यवाद ज्ञापित कर रहा हूँ, सरकार की विफलता अब सफलता लग रही है, देश का हर मुल्ला अपना दुश्मन प्रतीत हो रहा है।
सरकार की नाकामियों से जुड़ी स्मृतियों का विलोपन हो गया है, बस एक ही शब्द याद है, कानों में बार-बार बज रहा है। “भाजप्पा हटी, तो नुन्नी कटी”



RAJ
November 12, 2025 at 7:52 pm
आपकी बात में दम है। कुछ भटके हुए डॉक्टर , इंजीनियर अगर कोई आतंकवादी कार्रवाई करते हैं तो इसे गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। लादेन , कसाब जैसे शांतिप्रिय लोग भटक गए थे। इसके लिए इन्हें कोसना अच्छी बात नहीं है। कश्मीर में महज कुछ लाख मुसलमान बहक गए थे और हिंदुओं को भगा दिया , हिंदू महिलाओं के साथ रेप किया। ये भटके हुए लोग थे। इसे गंभीरता से लेने की गलती नहीं करनी चाहिए । शांति प्रिय बच्चे हैं , बच्चों से गलतियां हो जाती हैं।
बच्चे गलतियां करते रहेंगे , हमारा दिल आपकी तरह बड़ा होना चाहिए।
Praphulla Kumar
November 14, 2025 at 2:30 am
भोस्फी क़े एडिटिंर। आतंकवाद का समर्थन करता है? पकड़े गए आतंकी तेरे माँ क़े यार है क्या?
Raj
November 13, 2025 at 7:52 pm
Buchare jab khud par phatega tab mahatma yaad aayenge. Shayad yeh balak aapki maalish ke liye tel le ja raha ho, bhaijaan ko hara bhara Kar dete hain.
JAI SHRI RAM
November 15, 2025 at 8:19 pm
nunni to teri bhi bachpan se kati hui hai aur nakli hindu naam se khud ko pattalkar bana ke ghoomta hai tu katuwa…doob ke mar ja apne khandan se sakth , specially un maa baap ke saath jinhone tere jaisa bhadwa gaddar paida kiya jo 24 ghante mulla suaron ki kati nunni muh me le ke ghoomta hai…pata nahi teri ammi kon se katuwa suaron ke muhalley me muh maarne jaati hogi jab tera abba kaam pe jata hoga…jiske baad tere jaisa chootiyum sulphate paida hua …kai logon ke mishran se bane log hi gaddar hote hain ….