18 दिसंबर 2022 को उत्तराखंड में हुआ अंकिता भंडारी मर्डर केस तो सबको याद ही होगा। इसमें BJP नेता के पुत्र सहित 3 लोगों को पिछले दिनों सजा हुई। ये भी कहा गया कि कोई VVIP इन्वॉल्व था, लेकिन जांच एजेंसियां उसका नाम बचा गईं।
अब ज्वालापुर के पूर्व BJP विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित दूसरी पत्नी उर्मिला से बातचीत का एक ऑडियो सामने आया है। इसमें सुरेश कथित तौर पर अंकिता भंडारी मर्डर केस में दुष्यंत कुमार गौतम का नाम ले रहे हैं। दुष्यंत राज्यसभा सांसद हैं, BJP के राष्ट्रीय महासचिव हैं और उत्तराखंड प्रभारी हैं।
ऑडियो में सुरेश राठौर कह रहे हैं कि उस रात दुष्यंत गौतम उसी रिजॉर्ट में मौजूद थे, जहां अंकिता की हत्या हुई। अनैतिक संबंधों को लेकर दोनों में विवाद हुआ था। सुरेश ने ये तक दावा किया कि BJP नेता के कई ऑडियो–वीडियो एक BJP नेत्री के पास मौजूद हैं।
फिलहाल सुरेश राठौर और उर्मिला की ऑडियो सामने आने के बाद कांग्रेस हमलावर हो गई है। अंकिता भंडारी केस की दोबारा जांच की मांग उठ गई है। वहीं ऑडियो पर उर्मिला कायम हैं और वो भी इस मांग का समर्थन कर रही हैं।
-सचिन गुप्ता



उत्तराखंड प्रभारी और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यन्त कुमार गौतम भाजपा में ऊंचा रसूख रखते हैं। अंकिता भंडारी मर्डर केस में भाजपा के ही एक पूर्व विधायक की पत्नी उर्मिला उनका नाम ले रहीं हैं। बात बेटियों की है, बात उत्तराखंड के स्वाभिमान की है।
कल भाजपा नेता सुरेश राठौर की कथित पत्नी और टीवी एक्ट्रेस उर्मिला सनावर ने फेसबुक पर लाइव आकर इस केस में भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत कुमार गौतम और पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ के शामिल होने का दावा किया है। आरती गौड़ ने पार्टी से इस्तीफा भी दे दिया है।
बात आडवाणी जी, मोदी जी, योगी जी के सम्मान की भी है जिन्होंने बेटियों को बचाने पढ़ाने और महिला सुरक्षा का देश से वादा कर रखा है। इस बेहद गंभीर मामले में राजनीति न करते हुए तत्काल सीबीआई जांच करानी चाहिए। मत भूलिए इसी पार्टी के एक रेपिस्ट पूर्व विधायक को आज अदालत ने छोड़ा है। आदरणीय चिन्मयानंद जी भी इसी पार्टी से थे।
-आवेश तिवारी
उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर उस दौर की याद दिला रही है जब सत्ता, अपराध और संरक्षण के आरोपों ने जनविश्वास को गहरे झटके दिए। अंकिता भंडारी हत्याकांड से लेकर हालिया पत्रकार के मर्डर तक, विपक्षी कांग्रेस लगातार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर नैतिक और प्रशासनिक विफलता के आरोप लगा रही है।
सितंबर 2022 में पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंतरा रिज़ॉर्ट में काम करने वाली 19 वर्षीय युवती अंकिता भंडारी 18 सितंबर को लापता हुई। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने 19 सितंबर को गुमशुदगी दर्ज की। 23 सितंबर 2022 को पुलिस ने रिज़ॉर्ट के मालिक और दो कर्मचारियों को गिरफ़्तार किया। 24 सितंबर 2022 को चीला नहर से अंकिता का शव बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि हुई।
23 सितंबर 2022 को ही जिला प्रशासन ने विवादित रिज़ॉर्ट पर बुलडोज़र कार्रवाई की। सरकार ने इसे अवैध निर्माण के ख़िलाफ़ कार्रवाई बताया। कांग्रेस ने उसी दिन आरोप लगाया कि यह कार्रवाई संभावित सबूतों को नष्ट करने के लिए जल्दबाज़ी में की गई। कांग्रेस नेताओं ने तब से लगातार कहा कि मामले में एक “वीआईपी” का ज़िक्र जांच में सामने आया, लेकिन उसके नाम और भूमिका पर सरकार स्पष्ट नहीं हुई। सरकार ने वीआईपी संरक्षण के आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि जांच क़ानून के अनुसार चल रही है।
अक्टूबर 2022 में राज्य सरकार ने विशेष जांच टीम गठित करने की घोषणा की। दिसंबर 2022 में पुलिस ने चार्जशीट दाख़िल की और अदालत में मुक़दमा शुरू हुआ। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य और गवाहों के बयान पेश किए। कांग्रेस ने हर चरण पर यह आरोप दोहराया कि राजनीतिक दबाव के कारण जांच की दिशा सीमित रखी गई, जबकि सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताया।
2023 और 2024 के दौरान कांग्रेस ने विधानसभा और सार्वजनिक मंचों से धामी सरकार पर “नैतिक भ्रष्टाचार” का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता के नज़दीकी लोगों को बचाने की संस्कृति ने उत्तराखंड की छवि को नुकसान पहुंचाया। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया और कहा कि दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
दिसंबर 2025 में देहरादून में एक वरिष्ठ पत्रकार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया। पुलिस के अनुसार, यह घटना सोशल मीडिया पर पोस्ट से जुड़े विवाद के बाद हुई और मामले की जांच चल रही है। कांग्रेस नेताओं ने इस मौत को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले से जोड़ते हुए सरकार पर दबाव और भय का माहौल बनाने का आरोप लगाया। सरकार ने किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से इनकार किया और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी मामला और पत्रकार की मौत, दोनों घटनाएं मिलकर राज्य में शासन के चरित्र पर सवाल उठाती हैं। विपक्ष का आरोप है कि धामी सरकार में आर्थिक भ्रष्टाचार के साथ-साथ नैतिक पतन भी हुआ है। वहीं सरकार बार-बार दोहराती रही है कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।
उत्तराखंड की जनता के सामने अब भी मूल सवाल कायम है कि क्या सत्ता और जांच के बीच भरोसे की खाई पाटी जा सकेगी। तारीख़वार घटनाक्रम बताता है कि जवाब केवल अदालतों के फ़ैसलों से नहीं, बल्कि शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही से आएगा।
उत्तराखंड की धामी सरकार मोस्ट करप्ट गवर्नमेंट है। ये करप्शन आर्थिक के साथ साथ नैतिक भी है। अंकिता भंडारी पर बीजेपी के जिस वीआईपी के सामने बिछ जाने का दबाव था और ऐसा न करने पर उसे मार डाला गया, उस वीआईपी का नाम सबको मालूम चल गया है। धामी सरकार ने वीआईपी को बचाने के लिए सारे सुबूत नष्ट करने के लिए रिसोर्ट पर तुरंत बुलडोजर चलवा दिया था।
उधर एक वरिष्ठ पत्रकार ने धामी सरकार की उगाही का डिटेल फेसबुक पर पोस्ट किया तो सुबह उसे माफ़ी माँगनी पड़ी और दिन बीतते बीतते उसका मर्डर भी हो गया।
बीजेपी वालों ने क्या हाल कर दिया उत्तराखंड का। धामी जैसा कमजोर, अलोकप्रिय और आरोपी सीएम उत्तराखंड को गर्त में डुबा देगा। इनसे मुक्ति पाने के लिए उत्तराखंड की बहादुर जनता को सड़कों पर उतरना चाहिए।
-यशवंत सिंह


