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सुख-दुख

डीआईजी पद पर प्रमोट हुए अतुल शर्मा को एक पत्रकार ने यूँ किया याद

मुकेश के गजेंद्र-

ही दिसंबर का महीना था. साल 2015. प्रधानी का चुनाव अपने चरम पर था. मेरे ग्राम पंचायत में भी लोग जोरों से चुनाव प्रचार में लगे थे. लेकिन मेरे लिए मुश्किल ये थी कि मेरे ही दो करीबी रिश्तेदार प्रधान पद के लिए आमने-सामने थे.

हमारे लिए धर्म संकट था… उस वक्त स्थिति तब ज्यादा संवेदनशील हो गई जब राजनीतिक लड़ाई ख़ूनी संघर्ष में तब्दील नजर आने लगी. ऐसे में मेरी नजर वहां लगातार बनी हुई थी.

इसी बीच पिताजी की कॉल आई. उन्होंने बताया कि परिस्थिति खराब होने की ओर है. मुझे अपने दोनों रिश्तों की परवाह थी. दोनों अपने थे.

इसी बीच मैंने कुशीनगर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अतुल शर्मा जी को कॉल किया… उनको पूरी बात बताई. मेरे अनुरोध के बाद उन्होंने स्थिति को गम्भीरता से लेकर उस पर तत्काल एक्शन लिया. अगले ही दिन वो और तत्कालीन जिलाधिकारी लोकेश एम जी मेरे गांव पहुंच गए.

दोनों पक्षों से लंबी बात हुई. इसके बाद चुनाव बहुत ही शांति पूर्वक सम्पन्न हुआ. खून खराबा होने से बच गया.

ऐसे अधिकारी विरले होते हैं. सब कुछ दो सक्रिय और चौकन्ने अधिकारियों की वजह से सम्भव हो सका… वरना उस वक्त जीत जिसकी भी होती, लेकिन कीमत किसी न किसी पक्ष को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती… वो हम सबका ही होता.

एक बड़ी घटना होने से पहले अपनी मुस्तैदी से बचाने वाले IPS अधिकारी अतुल शर्मा जी अब प्रोन्नत होने के बाद DIG बन गए हैं. UP के DGP खुद इस प्रोन्नति के गवाह बने हैं.

इस मौके पर उनको हम सभी की तरफ से बहुत बहुत बधाई और असीम शुभकामनाएं. अभी तो उनको बहुत सारी उपलब्धियां हासिल करनी हैं. बधाई का सिलसिला यूं ही जारी रहना चाहिए…

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