इस पत्रकार ने cm के मीडिया एडवाइजर का पद ठुकरा दिया!

दिनेश मानसेरा ने पद अस्वीकार किया या उनकी नियुक्ति पर भाजपा में विवाद के बाद शासन ने आदेश रद्द किया?

पिछले दिनों उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार दिनेश मानसेरा को नवनियुक्त मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने अपना मीडिया सलाहकार बनाने का आदेश जारी किया। हर जगह इसको लेकर खबर छपी। पर आज खुद दिनेश मानसेरा ने इस पद को अस्वीकार करने की घोषणा कर दी। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि इस नियुक्ति पर भाजपा में विवाद को देखते हुए आदेश सरकार द्वारा रद्द किया गया।

पहले पढ़िए पत्रकार दिनेश मानसेरा का वक्तव्य-

Dinesh Mansera-

मुझे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत जी ने अपना मीडिया सलाहकार बनाया. सबकी दुआएँ मिली. जब मैं देहरादून पहुंचा तो उससे पहले ही सोशल मीडिया पर बहुत कुछ मेरे बारे में और मेरे परिवार के बारे में उछाला गया.

इस सबसे भी ज्यादा मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत के फैसले पर सवाल उठे. मेरी नियुक्ति के पीछे मेरी योग्यता, मेरा पत्रकारिता का अनुभव, मेरा स्वभाव-व्यवहार और मेरे द्वारा लोगो की भलाई ही आधार थी। यह सब ऐसे लोगो को रास नही आ रही जो मुझे पहचानते भी नहीं। इस सभी विषयों से सीएम साहब को भी कष्ट पहुंच रहा है।

मुझे बुलाने और अपनी टीम में रखने का निर्णय उनका ही था। मुझे आभास है कि वो सरल सज्जन व्यक्ति हैं। इसलिए मुझे यहां पदभार ग्रहण करने से पहले सभी विषयों पर सोचना समझना पड़ा। यही फैसला लिया है कि जब हम ऐसे लोगो से घिरे रहेंगे जोकि हमे काम ही करने नही देगे तो ऐसे माहौल में काम करने का कोई औचित्य नहीं।

मुझे पद लालसा कभी नही रही। ये मेरे करीबी सब जानते है। मान सम्मान सबका जरूरी है जोकि कायम रहना चाहिए। मैं स्पष्ट मानता हूं कि जब तक कार्य संस्कृति न हो वहां सब बेमानी है। सबकी गरिमा बनी रहे इसलिए मैं इस पद को अस्वीकार करता हूँ।


दिनेश मानसेरा की उपरोक्त घोषणा के बाद लोग तरह तरह की प्रतिक्रियाएँ व्यक्त कर रहे हैं। देखें कुछ-

संजीव पालीवाल- मुझे लगता है Dinesh Mansera जी कि आपने सही फैसला लिया है। आपकी छवि एक खुशमिजाज, मेहनती पत्रकार की रही है। आप अगर ये पद स्वीकार भी करते तो यहां कामयाब ही होते। लेकिन मुख्यमंत्री का सलाहकार ना बनने का फैसला करके आपने बेहद साहसिक काम किया है। ये कोई जिगर वाला ही कर सकता है। पत्रकार और दोस्तों के दोस्त बने रहिये।

शरद शर्मा- कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना…. ये वो देश है जहां प्रभु श्री राम और माता सीता के बारे में भी जाने क्या क्या कहा गया जिसके कारण माता सीता और प्रभु श्री राम को अलग होना पड़ा। ऐसे दुनिया की बात सुनकर अगर फैसले होने लग गए तो फिर तो कुछ हो ही नहीं पाएगा। आपका यह फैसला मुझे उचित नहीं लगता।

अम्बुज नौटियाल- Dinesh Mansera जी। राज्य में मीडिया के हालात और मीडिया और सरकार/राजनेताओें के बीच की दूरियों के बारे में आप भली भाँति जानते हैं। ऐसे मे ज़रूरी है कि सरकार और लोगों के बीच की दूरियों को ख़त्म करने के लिये मुख्यमंत्री के पास ज़मीनी लेकिन अनुभवी सलाहकार हों। आपका फ़ैसला अपनी जगह सही हो सकता है लेकिन, दूरगामी लोक हित के लिये आपसे इस फ़ैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करूँगा।

Vinish kumar- Sir, पूरे देश में कई ऐसे लोग हैं जो आज एनडीटीवी को पसंद नहीं करते हैं। लेकिन फिर भी आज एनडीटीवी अपनी जगह मजबूती के साथ खड़ा है। और हम सब एनडीटीवी के सिपाही हैं पीछे नहीं हटेंगे। फिर आप क्यों हट गए? लोग हैं कहते रहेंगे उन्हें कहने दीजिए।

नदीम अहमद काज़मी- Yeh ghalat faisala hai Dinesh ji. Logon ka ka kya hai vo to peer paighambar par bhi unglee uthate rahe hain..yeshu ko sooli par chadha diya..
Mahatma Gandhi kee jaan le lee…
Aisa kaun hai jo sabko khush kar de…
Aap apne kaam se pahchane jaate hain …jahan bhi rahenge achha karenge..
UKD ke logon ka bhi asp bhala hee karenge..apne faisle par punarvichar keejiye aur is corona kaal mein farishtey ban kar ubhariye..


उधर ये भी कहा जा रहा है कि मीडिया सलाहकार के पद पर दिनेश मानसेरा की नियुक्ति रद्द की गाई है। एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार दिनेश मानसेरा को सरकार ने मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार बनाया था लेकिन अब उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई है। बताया जा रहा है कि भाजपा के अंदर दिनेश मनसेरा के मीडिया सलाहकार बनाये जाने के बाद विवाद देखा जा रहा था। इसके बाद सरकार के द्वारा उनके मुख्यमंत्री मीडिया सलाहकार के आदेश को निरस्त किया गया है।

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