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शब्दचर्चा (25): हिंदी मीडिया ने राहुल की ख़बर तो छापी मगर जज का नाम ग़लत लिखा

चीन द्वारा भारत की 2 हज़ार वर्ग किमी ज़मीन पर क़ब्ज़ा करने के बारे में राहुल गाँधी ने कुछ साल पहले जो बयान दिया था, उसपर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने तीखी टिप्पणी करते हुए उनके सच्चे भारतीय होने पर ही सवाल उठा दिया। जज साहब की टिप्पणी सही थी या
ग़लत, इस पर हम कुछ नहीं कहेंगे। लेकिन उनके नाम पर अवश्य चर्चा करेंगे जिसे हिंदी मीडिया दीपांकर लिख रहा है।

दीपांकर सही नहीं है। सही है दीपंकर (दीपम्+कर) जिसका मतलब है दीप को करने वाला यानी प्रकाश देने वाला। 24 बुद्धों में से पहले अवतार का नाम दीपंकर है। जस्टिस दीपंकर दत्त बंगाली हैं और बंगाल में यह नाम ज़्यादा चलता है। बांग्ला वेबसाइटों पर इनका नाम দীপঙ্কর দত্ত (दीपंकर दत्त) ही लिखा जाता है।

‘दीपंकर’ नाम बंगाल के अलावा कहीं और क्यों नहीं चलता, मुझे नहीं मालूम। लेकिन परिणाम यह यह हुआ है कि शेष भारत इस नाम और इसके अर्थ से अपरिचित-सा है। शेष भारत तक यह नाम बंगालियों के दीपंकर नाम की अंग्रेज़ी स्पेलिंग – Dipankar या Deepankar – के माध्यम से ही पहुँचता है जिसके ‘a’ को लोग आ पढ़ लेते हैं और दीपंकर की जगह हो जाता है दीपांकर।

अफ़सोस की बात है कि संस्कृत की पृष्ठभूमि वाला यह शब्द उस बांग्ला भाषा में तो सही लिखा जा रहा है जिसे दिल्ली पुलिस एक विदेशी (बांग्लादेशी) भाषा ठहराने पर तुली हुई है मगर उस हिंदी में ग़लत लिखा जा रहा है जिसके बारे में कुछ देशभक्तों का दावा है कि यह संस्कृत की सबसे योग्य उत्तराधिकारी है।

पिछली शब्दचर्चा…

शब्दचर्चा (24): TROPHY को ज्यादातर न्यूज़ वेबसाइटें ट्रॉफ़ी लिखती हैं, जानिए सही क्या है?

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