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वाह रे दैनिक जागरण का रिपोर्टर… इन महोदय को रोस्टिंग और शेड्यूल में फर्क ही नहीं पता

खुद को देश का सर्वाधिक प्रसारित दैनिक समाचार पत्र कहने वाले दैनिक जागरण का कानपुर में ही हाल बेहाल है। यहां संपादक राघवेंद्र चड्ढा व लोकल चीफ प्रवीन शर्मा की जोड़ी संपादकीय का बंटाधार करने में लगी है। दोनों के अपने कुछ प्रिय रिपोर्टर हैं। जो चाहे जो कुछ लिखें, वही महत्व के साथ छपेगा। १० अगस्त के कानपुर महानगर संस्करण के पेज ७ में प्रकाशित बाटम स्टोरी को पढ़ कर पाठकों से अपना सिर थाम लिया।

खुद को देश का सर्वाधिक प्रसारित दैनिक समाचार पत्र कहने वाले दैनिक जागरण का कानपुर में ही हाल बेहाल है। यहां संपादक राघवेंद्र चड्ढा व लोकल चीफ प्रवीन शर्मा की जोड़ी संपादकीय का बंटाधार करने में लगी है। दोनों के अपने कुछ प्रिय रिपोर्टर हैं। जो चाहे जो कुछ लिखें, वही महत्व के साथ छपेगा। १० अगस्त के कानपुर महानगर संस्करण के पेज ७ में प्रकाशित बाटम स्टोरी को पढ़ कर पाठकों से अपना सिर थाम लिया।

जिलाधिकारी की ओर से पावर कारपोरेशन के एमडी को संबोधित कर लिखे गए कथित पत्र का हवाला देते हुए संपादक राघवेंद्र चड्ढा व लोकल चीफ प्रवीन शर्मा की सेवा सुश्रुषा के चलते स्टार रिपोर्टर के तौर पर महत्व पाए संग्राम सिंह द्वारा लिखी गई स्टोरी में शेड्यूल के मुताबिक नहीं, वरन रोस्टिंग के मुताबिक बिजली देने की मांग का उल्लेख किया गया है।

वाह रे जागरण के स्टाफ रिपोर्टर….। बुद्धि पर तरस आता है, जिसे शेड्यूल और रोस्टिंग का भी अंतर नही पता। और क्या कहा जाए लोकल डेस्क प्रभारी उमेश शुक्ला को, जो दोनों आंखे होने के बाद भी आंख बंद कर खबरों को पास करना अपनी शान समझते है। जय हो दैनिक जागरण की और जय हो विद्वान संपादक, लोकल चीफ, डेस्क प्रभारी व देश के नंबर एक अखबार के स्टाफ रिपोर्टर की।

एक पूर्व पत्रकार एवं सुधी पाठक

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