यौन शोषण मामले में दैनिक जागरण के चार वरिष्ठ पदाधिकारी 13 नवंबर को कोर्ट में तलब

दैनिक जागरण कानपुर में कार्यरत रहे चार वरिष्ठ पदाधिकारी दैनिक जागरण की ही एक महिला कर्मी के यौन शोषण के मामले में तेरह नवंबर को कोर्ट में तलब किए गए हैं. इसके पहले 10 अक्टूबर को कोर्ट में डेट लगी हुई थी लेकिन चारों कर्मी हाजिर नहीं हुए. इसके बाद जज ने अगली तारीख 13 नवंबर दी है. अगर ये लगातार गैर-हाजिर रहते हैं तो इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी हो सकता है. अगर तब भी पुलिस के हत्थे न चढे़ तो कुर्की की कार्रवाई की जा सकती है.

इन चारों आरोपियों के नाम हैं- नितिन, प्रदीप, दिनेश और सन्तोष मिश्रा. माना जा रहा है कि अगर इन लोगों को जमानत नहीं मिली तो ये जेल की हवा भी खा सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि यौन शोषण के आरोप में फंसे अपने चारों वरिष्ठ कर्मियों को बचाने के लिए जागरण प्रबंधन भी लगा हुआ है. इन आरोपियों में से एक नितिन श्रीवास्तव खुद जनरल मैनेजर की हैसियत में इन दिनों दैनिक जागरण नोएडा में कार्यरत है.

दूसरा आरोपी प्रदीप अवस्थी घटना के वक्त प्रोडक्शन इंचार्ज थे कानपुर में. अब ये भी नोएडा में पदस्थ है. दिनेश दीक्षित कानपुर में फीचर विभाग में कार्यरत है. सन्तोष मिश्रा कानपुर में फोरमैन है. उधर, पीड़िता ने भड़ास4मीडिया से बात करते हुए कहा कि ये लोग कब तक बचेंगे. जब आसाराम और राम रहीम न बचे तो ये किस खेत की मूली हैं. पीड़िता का कहना है कि जागरण प्रबंधन ने केस को प्रभावित करने की खूब कोशिश की. अब भी उन लोगों का हर तरह से दबाव डालना जारी है.

पूरे प्रकरण को समझने के लिए इस खबर को पढ़ें…

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कोर्ट ने दैनिक जागरण को लगाई फटकार, रोज होगी मजीठिया की सुनवाई

कानपुर से मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे मीडियाकर्मियों के लिए एक अच्छी खबर आ रही है. आज कानपुर लेबर कोर्ट ने दैनिक जागरण समूह की कंपनी जागरण प्रकाशन लिमिटेड को कड़ी फटकार लगाई. आज मजीठिया वेज बोर्ड मामले की सुनवाई थी. सुनवाई के दौरान जब जागरण प्रकाशन का नंबर आया तो जागरण प्रकाशन की तरफ से कोई मौजूद नहीं था. वकील ने कोर्ट से अगली तारीख देने की अप्लीकेशन लगा दी.

इस पर मीडियाकर्मियों और उनके वकील ने आपत्ति जताई. मीडियाकर्मियों के वकील ने कहा कि जागरण के लोग लगातार कोर्ट को गुमराह कर समय नष्ट कर रहे हैं. ये लोग लगातार हीलाहवाली कर रहे हैं ताकि कोर्ट का समय बर्बाद हो और क्लेम करने वाले थक हार कर घर बैठ जाएं. मजिस्टेट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जागरण प्रकाशन के वकील को फटकार लगाई.

मजिस्ट्रेट ने जागरण के रवैये पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर इन लोगों को समय चाहिये तो हम बस एक दिन का समय देते हैं. कल यानी 12 जुलाई को आइए. अब मजीठिया की प्रतिदिन तारीख लगेगी और प्रतिदिन सुनवायी होगी. इतना सुनते ही मीडिया कर्मियों के चेहरे खुशी से खिल गये और जागरण का वकील मुंह लटकाए खड़ा रहा.

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दैनिक जागरण, कानपुर का एक वरिष्ठ अधिकारी सड़क पर घूम-घूम कर गाड़ियां चेक कर रहा!

A senior official of dainik jagran Kanpur is checking vehicles

A senior high rank official posted in Dainik jagran head office Kanpur now a days on an extra duty. He has self pro claimed FLYING SQUAD,  who stop four wheelers on roads, if DAINIK JAGRAN Sticker is pasted on vehicle wind screens. Actually, he want to prove himself as most loyal employee to Dainik jagran prakashan owners. On Saturday, he stopped a commercial Ola cab. He overtook cab on mall road in such a way that cab escaped from a major accident.

He detained driver. Rebuked and ask how he posted Jagran press sticker. Driver made him talk with owner, who is a renowned journalist and recently resigned from i-next news paper of jagran prakshan. Owner told him that he had been worked with jagran for many years and also had been accredited (manyata prapt) journalist from Amar ujala. Even, that senior official from jagran treated him to make his vehicle seize.

The cab owner who is also reputed journalist has decided to make a complaint against this official in jagran very soon. The interesting matter is that self pro claimed loyal senior employee is doing RTO duty on road, but not in good faith of his colleagues. Staff is fed up with his such behavior and this incident has become talk of the town.

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इस आडियो टेप के कारण चली गई अंकित पांडेय की नौकरी, आप भी सुनें

दैनिक जागरण कानपुर में कार्यरत अंकित पांडेय की नौकरी चली गई, वजह बना एक आडियो टेप. इस टेप में अंकित बहुत सारी बातें करते हुए दिख रहे हैं. हालांकि ये बातें कुछ भी अलग नहीं है क्योंकि आमतौर पर रिपोर्टर अपने बासेज के बारे में फील्ड में अपने भरोसेमंद लोगों से ऐसे ही बतियाता है, भड़ास निकालता है.

लेकिन आज कल काल रिकार्डिंग सबके फोन में है और जिस अपने भरोसे वाले सज्जन से आप दिल की गुबार फोन पर निकाल रहे हैं, कभी उनसे आपकी खटक गई तो वो वह टेप जारी कर आपकी बैंड बजवा सकता है. दिल्ली में केजरीवाल सरकार के मंत्री के साथ यही हुआ था. उनके पीए ने ही नाराज होकर उनका सेक्स वीडियो वायरल कर दिया था और उनका मंत्रिपद चला गया.

इसी तरह रिपोर्टर अंकित पांडेय की नौकरी जाने का कारण बन गया यह आडियो. आप भी सुनें, नीचे क्लिक करें :

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दैनिक जागरण मजीठिया का लाभ कर्मचारियों को नहीं देगा! हिंदुस्तान, अमर उजाला और सहारा ने भी चली चाल

खुद को देश का नंबर वन अखबार बताने वाले दैनिक जागरण के कानपुर प्रबन्धन ने अपने कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने से साफ़ तौर पर पलटी मार लिया है। यही नहीं कानपुर से प्रकाशित हिंदुस्तान और अमर उजाला तो यहाँ तक दावा कर रहे हैं कि वह अपने कर्मचारी को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दे रहे हैं। कानपुर से प्रकाशित राष्ट्रीय सहारा और आज अखबार ने अपने आर्थिक हालात का रोना रोते हुए मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने से इनकार कर दिया है।

कानपुर के मीडिया जगत की ये सच्चाई सामने आई है आरटीआई के जरिये। कानपुर के पत्रकार और मजीठिया क्रांतिकारी शारदा त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश के कामगार आयुक्त कार्यालय से आरटीआई से ये जानकारी मांगी थी कि कानपुर में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का किन किन अखबारों ने पालन किया और किसने किसने नहीं किया, पूरी रिपोर्ट दी जाय। इस पर कामगार आयुक्त कार्यालय ने चौकाने वाली जानकारी उपलब्ध कराई है। कानपुर से प्रकाशित अख़बारों में दो अखबारों का दावा है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड के अनुरूप वेतन दे रहे हैं। ये हैं हिंदुस्तान और अमर उजाला। दो अखबार राष्ट्रीय सहारा और आज की हालात नाजुक बताई गयी है।

रही बात दैनिक जागरण अखबार की तो उसे ‘नॉट अप्लीकेबल’ की स्थिति में रखा गया है। दैनिक जागरण अखबार धोखे से अपने कर्मचारियों का सादे कागज पर हस्ताक्षर आये दिन कराता रहता है। ऐसा ही एक प्रपत्र मजीठिया वेज बोर्ड की धारा 20 जे का तैयार कर लिया गया है और उसी को ढाल बनाकर कानपुर के सहायक श्रमायुक्त रवि श्रीवास्तव दैनिक जागरण को बचाने पर लगे हैँ कि जागरण कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ न मिले और भईया जी की उन पर कृपादृष्टि भी बनी रहे।

उल्लेखनीय है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना वाद संख्या 411 / 2014 की सुनवाई करते हुए 23 / 8 / 2016 को श्रमायुक्त को आदेश दिया था कि मजीठिया लागू करवाओ। लेकिन सहायक श्रमायुक्त ने जो रिपोर्ट भेजा है, वह चौंकाने वाली है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसाएं दैनिक जागरण अखबार पर लागू नही होंगी। चूंकी इसके कर्मचारियों ने पुराने वेतन और परिलाभ लेने के लिए सहमति दी है और इस बाबत प्रबंधन ने हस्ताक्षर कराये हैं। यानी यह आसानी से कहा जा सकता है कि वेज बोर्ड का कानून इस अखबार पर लागू नहीं होगा और सारे कर्मचारी पुराने वेतन पर काम करते रहेंगे।

यहां यह बताना जरूरी होगा कि कानपुर में लगभग 15 कर्मचारी 17(1) के तहत रिकवरी दाखिल किये हुए हैं और इनकी लगभग 8 डेट भी पड़ चुकी है जिसमें मलिकानों का जवाब आ गया है और अभिलेख के लिए अगली डेट भी पड़ी हुई है। ऐसी स्थिति में यह जाँच रिपोर्ट क्या साबित करेगी, सोचनीय है। लेकिन इन अखबारों के कुछ मजीठिया क्रांतिवीर अब भी पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
मुंबई
9322411335

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सनातन धर्मी मानसिकता वाला दैनिक जागरण संकिसा बौद्ध स्तूप को टीला लिखता है ताकि बौद्ध अनुयायी अपमानित हो सकें

: संकिसा बौद्ध महोत्सव की झूठी खबर छापने से बौद्ध अनुयायियों में रोष : फर्रूखाबाद। विश्व प्रसिद्ध संकिसा बौद्ध पर्यटक स्थल पर आयोजित विशाल महोत्सव के बारे में दैनिक जागरण द्वारा झूठी खबर छापे जाने से बौद्ध अनुयायियों में रोष व्याप्त हो गया है। कानपुर से प्रकाशित दैनिक जागरण के फर्रूखाबाद संस्करण के आज 23 अक्टूबर के समाचार पत्र के पेज नम्बर 2 पर (बयानबाजी से संकिसा में माहौल गर्माया शीर्षक) समाचार प्रकाशित किया गया है। खबर धम्मा लोको बुद्ध बिहार के अध्यक्ष कर्मवीर शाक्य के हवाले से प्रकाशित किया गया है। इसमें कहा गया है कि उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एस अश्वघोष 26 अक्टूबर को अशोक स्तम्भ का अनावरण करेंगे।

इसी समाचार में मय फोटो समाचार प्रकाशित किया गया कि 22 अक्टूबर को राम नवमी के अवसर पर मां विसारी देवी सेवा समिति के संयोजक अतुल दीक्षित ने करीब देढ़ दर्जन साथियों के साथ संकिसा स्थित बौद्ध स्तूप पर मां विसारी देवी मंदिर के सामने हवन पूजन किया। बीते कई वर्षों से सनातन धर्मी मानसिकता के कारण दैनिक जागरण में बौद्ध अनुयायियों को अपमानित करने के लिये संकिसा के बौद्ध स्तूप को टीला लिखा जाता है। भारत सरकार यूपी सरकार एवं जनपद फर्रूखाबाद के सरकारी अभिलेखों में स्तूप परिसर की भूमि केन्द्र सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन है। भगवान बुद्ध का स्तूप होने के कारण ही स्तूप परिसर का अधिग्रहण किया गया था। पुरातत्व विभाग ने स्तूप परिसर की देखभाल करने के लिये चौकीदार जहरूद्दीन को तैनात किया है। जिला प्रशासन ने स्तूप परिसर की सुरक्षा के लिये स्थाई रूप से पुलिस गार्द को तैनात किया है।

संकिसा में विदेशी व स्थानीय अनुयायियों द्वारा बनवाये जा रहे बौद्ध बिहारों की लगातार  बढ़ी रही संख्या इस बात का सबूत है कि सनातन धर्म के लोग बौद्ध स्तूप व बौद्ध अनुयायियों के कार्यक्रमों का विरोध करते है। उतना ही संकिसा का विकास हुआ है। स्तूप की स्थापना के कारण ही संकिसा में गेस्ट हाउस, टेलीफोन एक्सचेंज के बाद पर्यटक हाउस बनवाया गया है। स्तूप की बदौलत ही मोहम्मदाबाद से संकिसा एवं काली नदी होते हुये भोगांव मैनपुरी की ओर काफी चौड़ी सड़क बनवाई गई है। जब कि संकिसा के वासिंदे गांव का विकास न होने के कारण 19वी सदी की तरह जिन्दगी जी रहे है। भगवान बुद्ध की कथित मौसी मां विसारी देवी के नाम पर मुठ्ठी भर लोग पूरे साल उसी समय अपना कार्यक्रम करके व्यवधान उत्पन्न करते है जब अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में प्रदेश व विदेश के लोग बौद्ध महोत्सव का आयोजन करते है।

स्तूप की बदौलत ही 31 जनवरी 2015 को परमपावन दलाई लामा संकिसा स्तूप स्थल गये थे। श्री लामा ने स्तूप के निकट यूथ बुद्धिस्ट सोसाइटी की ओर से जसराजपुर बुद्ध बिहार में विशाल अशोक स्तम्भ का उद्घाटन किया था। संकिसा के विकास एवं बौद्ध धर्म के प्रचार के लिये सूवे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उसी दौरान संकिसा में ही  दलाई लामा से भेट की थी। कामरेड कर्मवीर शाक्य ने दैनिक जागरण में प्रकाशित झूठे समाचार पर नाराजगी जाहिर करते हुये बताया कि कायमगंज के प्रमुख उद्योगपति व समाज सेवी चन्द्र प्रकाश अग्रवाल 26 अक्टूबर को नवनिर्मित अशोक स्तम्भ का उद्घाटन करेगे न कि उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एस अश्वघोष। श्री शाक्य ने बताया कि श्री घोष 26 अक्टूबर को बौद्ध भिक्षु सम्मेलन का उद्घाटन करेगे। उन्होने बताया कि दैनिक जागरण वालों की पिक्को लाला से अनवन चल रही है। इसी लिये जानबूझकर झूठा समाचार प्रकाशित किया गया है। दैनिक जागरण बौद्ध अनुयायियों को अपमानित करने के लिये उनके पवित्र स्तूप स्थल को टीला लिखता है। श्री शाक्य ने दैनिक जागरण वालों को समय रहते भूल सुधार करने एवं भविष्य में स्तूप स्थल को टीला न लिखने की चेतावनी दी है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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दैनिक जागरण कानपुर में यौन शोषण प्रकरण : पीड़िता बीना शुक्ला ने मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज करा दिया बयान, सभी आरोपियों का नाम लिया

दैनिक जागरण, कानपुर में जिस महिला बीना शुक्ला का यौन शोषण किया गया, उसने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज करा दिया है. उसने इस मामले के सभी आरोपियों का नाम लिया और इन पर आरोपों को दुहराया. इस कवायद से पुलिस द्वारा कई आरोपियों को बचाने और मामले की लीपापोती करने के अभियान पर ठंढा पानी पड़ गया है. माना जा रहा है कि अगर सब कुछ निष्पक्ष तरीके से हुआ और मामले की सुनवाई बिना दबाव के की गई तो सारे आरोपी जेल में होंगे.

ज्ञात हो कि इसी प्रकरण से संबंधित खबर भड़ास पर छापने के कारण दैनिक जागरण प्रबंधन ने भड़ास4मीडिया के एडिटर इन चीफ यशवंत सिंह और तत्कालीन कंटेंट एडिटर अनिल सिंह के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का मुकदमा दर्ज कराकर गिरफ्तार कराया और जेल भिजवा दिया था. साथ ही भड़ास से जुड़े लोगों के घर और आफिसों पर छापे मरवाए गए ताकि भड़ास पर मीडिया के पोलखोल अभियान को हमेशा के लिए रोका जा सके और भड़ास से जुड़े लोगों को बुरी तरह डराया जा सके ताकि ये लोग आगे फिर कलम उठाने की हिम्मत न कर सकें.

इसी तरह यौन शोषण का आरोप लगाने वाली पीड़िता बीना शुक्ला को भी जागरण प्रबंधन ने कई तरह से डराया-धमकाया, साथ ही प्रलोभन दिया लेकिन बीना शुक्ला न तो डरीं और न ही जागरण के किसी बहकावे में आईं. इस पूरे मामले को जानने-समझने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर एक-एक कर क्लिक करें और पढ़ते जाएं.

जागरण, कानपुर में यूनिट हेड, सीजीएम एवं आईटी हेड पर महिलाकर्मी ने लगाया यौन शोषण का आरोप

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जागरण, कानपुर में यौन उत्‍पीड़न मामले में महिला आयोग ने मांगी रिपोर्ट

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मेरी खबर के कारण जागरण वालों ने यशवंत और अनिल पर अत्याचार किया : बीना शुक्ला

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दैनिक जागरण, कानपुर के नितिन श्रीवास्तव, प्रदीप अवस्थी, संतोष मिश्रा, दिनेश दीक्षित के खिलाफ मुकदमा

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दैनिक जागरण में यौन शोषण की शिकार महिला मीडियाकर्मी ने जारी किया एक टेप (सुनें)

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बीना शुक्ला की लड़ाई, भड़ास वालों की गिरफ्तारी और जागरण के बनिये मालिक

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अगर पुलिस और दैनिक जागरण नितिन श्रीवास्तव को बचाते हैं तो मैं आत्मदाह कर लूंगी: बीना शुक्ला

 

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वाह रे दैनिक जागरण का रिपोर्टर… इन महोदय को रोस्टिंग और शेड्यूल में फर्क ही नहीं पता

खुद को देश का सर्वाधिक प्रसारित दैनिक समाचार पत्र कहने वाले दैनिक जागरण का कानपुर में ही हाल बेहाल है। यहां संपादक राघवेंद्र चड्ढा व लोकल चीफ प्रवीन शर्मा की जोड़ी संपादकीय का बंटाधार करने में लगी है। दोनों के अपने कुछ प्रिय रिपोर्टर हैं। जो चाहे जो कुछ लिखें, वही महत्व के साथ छपेगा। १० अगस्त के कानपुर महानगर संस्करण के पेज ७ में प्रकाशित बाटम स्टोरी को पढ़ कर पाठकों से अपना सिर थाम लिया।

जिलाधिकारी की ओर से पावर कारपोरेशन के एमडी को संबोधित कर लिखे गए कथित पत्र का हवाला देते हुए संपादक राघवेंद्र चड्ढा व लोकल चीफ प्रवीन शर्मा की सेवा सुश्रुषा के चलते स्टार रिपोर्टर के तौर पर महत्व पाए संग्राम सिंह द्वारा लिखी गई स्टोरी में शेड्यूल के मुताबिक नहीं, वरन रोस्टिंग के मुताबिक बिजली देने की मांग का उल्लेख किया गया है।

वाह रे जागरण के स्टाफ रिपोर्टर….। बुद्धि पर तरस आता है, जिसे शेड्यूल और रोस्टिंग का भी अंतर नही पता। और क्या कहा जाए लोकल डेस्क प्रभारी उमेश शुक्ला को, जो दोनों आंखे होने के बाद भी आंख बंद कर खबरों को पास करना अपनी शान समझते है। जय हो दैनिक जागरण की और जय हो विद्वान संपादक, लोकल चीफ, डेस्क प्रभारी व देश के नंबर एक अखबार के स्टाफ रिपोर्टर की।

एक पूर्व पत्रकार एवं सुधी पाठक

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