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हरदोई के डीएम ने बर्बाद किसान को फेसबुक पर ब्लाक कर दिया!

Kumar Sauvir : मुझे तो अब अक्‍सर ऐसा साफ लगने लगता है कि जो पढ़-लिख कर डीएम बन जाता है, वह वाकई बेवकूफी या अभद्रता का दामन सम्‍भाल लेता है। उनसे ज्‍यादा समझदार और संवेदनशील तो साबित होता है किसान, जो अफसरशाही कार्यशैली से लेकर प्रकृति तक की निर्ममता का सामना करना होता है। नजीर हैं हरदोई के जिलाधिकारी रमेश मिश्र। हरदोई के डीएम ने डीएम हरदोई के नाम पर एक नया फेसबुक पेज बनाया है, जिसमें वे दिन भर अपनी ढपोरशंखी ढफली बजाया करते हैं कि:- आज मैंने इतने लोगों को लाभान्वित किया, उतने लोगों को उतना फायदा उठाया। इतने लोगों के साथ हेन किया, और उतने लोगों को हेन किया। ऐसा किया, वैसा किया, यू किया, ऊ किया, अइसन किया, वइसन किया।

Kumar Sauvir : मुझे तो अब अक्‍सर ऐसा साफ लगने लगता है कि जो पढ़-लिख कर डीएम बन जाता है, वह वाकई बेवकूफी या अभद्रता का दामन सम्‍भाल लेता है। उनसे ज्‍यादा समझदार और संवेदनशील तो साबित होता है किसान, जो अफसरशाही कार्यशैली से लेकर प्रकृति तक की निर्ममता का सामना करना होता है। नजीर हैं हरदोई के जिलाधिकारी रमेश मिश्र। हरदोई के डीएम ने डीएम हरदोई के नाम पर एक नया फेसबुक पेज बनाया है, जिसमें वे दिन भर अपनी ढपोरशंखी ढफली बजाया करते हैं कि:- आज मैंने इतने लोगों को लाभान्वित किया, उतने लोगों को उतना फायदा उठाया। इतने लोगों के साथ हेन किया, और उतने लोगों को हेन किया। ऐसा किया, वैसा किया, यू किया, ऊ किया, अइसन किया, वइसन किया।

लेकिन क्‍या, कितना, केतरा किया, उसका जवाब आपको उनके पेज पर टंगी अखबारी कटिंग के शीर्षक में मिल सकता है। पिछले एक पखवारे से डीएम रमेश मिश्र जी लगातार इसी तरह की लारंतनियां फेंक रहे थे, कि अचानक एक बेबस किसान, जिसकी सारी फसल ताजा प्राकृतिक हादसे में तबाह हो चुकी थी, लेकिन ने सरकारी अफसरों पर कई दिनों तक गुहार लगायी, चिरौरी की और मिन्‍नतें मनायीं कि:-सरकार। हम लोग बर्बाद हो चुके हैं, अब आप तो नजरे इनायत कर दीजिए।

लेकिन किसी भी अफसर के कानों तक जूं नहीं रेंगी। हारकर उस किसान ने एक नयी तरकीब अपनायी। उसने डीएम हरदोई फेसबुक के दावों वाले पोस्‍ट पर लगातार अपनी अर्जियां कमेंट के तौर पर लगाना शुरू कर दिया। इस किसान के मुताबिक उसके ऐसे कमेंट-अर्जियां लगाने को डीएम साहब ने इग्‍नोर किया, लेकिन जब किसान ने अपना हौसला नहीं छोड़ा तो डीएम साहब ने खुद ही अपना सब्र तोड़ दिया और उस किसान के कमेंट को लगातार डिलीट करना शुरू किया।

जाहिर है कि इस प्रक्रिया से भी किसान का हौसला नहीं टूटा, बल्कि उसकी तेजी बढ़ती ही गयी। एक दिन तो उस किसान ने यहां तक लिख दिया कि सरकार, अब क्‍या मरै के बादै कोई राहत मिली? नतीजा, डीएम साहब ने फैसला किया कि वह अपने संसार से इस किसान को विदा कर देंगे। और आखिरकार डीएम साहब ने अपने पेज पर इस किसान को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा करते हुए उसे ब्‍लाक कर दिया। बहुत सिकायत करत रहत रहै ना? ल्‍यौ, अब थामो बाबा जी का घण्‍टा!

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर के फेसबुक वॉल से.

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1 Comment

1 Comment

  1. manish srivastava

    May 8, 2015 at 5:47 pm

    sauvir ji..journalist must b behave n write like dis..

    reg manish srivastava
    nishpaksh pratidin

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