मुलायम कुनबे में झगड़े से जो बड़े खुलासे हुए, उसे आपको जरूर जानना चाहिए….

Nikhil Kumar Dubey : घर के झगड़े में जो बड़े ख़ुलासे हुए…

1: यादव सिंह घोटाले में रामगोपाल और अक्षय फँसे हैं, बक़ौल शिवपाल. 

2: अमर सिंह ने सेटिंग करके मुलायम को जेल जाने से बचाया था: ख़ुद मुलायम ने बताया.

3: शिवपाल रामगोपाल की लड़ाई में थानों के कुछ तबादले अखिलेश को जानबूझकर करने पड़े थे: ख़ुद अखिलेश ने कहा.

4: राम गोपाल नपुंसक है : अमर सिंह ने कहा.

5: प्रतीक काग़ज़ों में पिता का नाम एम एस यादव लिखते हैं लेकिन मुलायम के किसी हलफ़नामे में उनके दूसरे बेटे का नाम नहीं

6: प्रमुख सचिव बनने की योग्यता मुलायम के पैर पकड़ने से तय होती है : अखिलेश.

Shamshad Elahee Shams: मैं पहलवान मुलायम सिंह का न कभी प्रशंसक रहा न कभी उसके साईकिल छाप समाजवाद का वकील. बहुत दिनों से सैफई में कब्बड्डी का मैच देशभर का मनोरंजन कर रहा है उसे मैं भी देख रहा हूँ. मुलायम सिंह की घटिया राजनीति जिसका इतिहास सिर्फ और सिर्फ अवसरवादिता, धोखेबाजी-टिकियाचोरी का रहा हो आखिर उस पर वक्त क्यों जाया किया जाय? ताश के पत्तो का महल एक न एक दिन ढहना ही है, आज नहीं तो कल. मुलायम सिंह की राजनीति को गौर से देखने वाले सभी जानते है कि उस पर भरोसा करना खुद को धोखा देना है. जिसका मुलायम सिंह दोस्त उसे दुश्मन की जरुरत नहीं. मुलायम सिंह ने चौधरी चरण सिंह, वी. पी. सिंह, काशीराम-मायावती, भाकपा-माकपा, नितीश कुमार, लालू प्रसाद किस किस को धोखा नहीं दिया? प्रदेश की सारी सत्ता का केंद्रीयकरण सिर्फ और सिर्फ अपने परिवार में ही कर देने वाले के दिमाग की मैपिंग करें तो यही पता चलेगा कि उसे खुद पर और अपने परिवार के लोगों के आलावा किसी दूसरे पर कभी विश्वास नहीं रहा. मुलायम सिंह ने लोहिया छाप समाजवाद के नाम पर सिर्फ अपने परिवार का एकाधिकार जिस तरह स्थापित किया वह राजनीति के किसी भी मापदंड के अनुसार निंदनीय है. आखिर जो जीवन भर बोया, अंत में वही काटेगा. आज तक दूसरो के साथ जो किया वक्त ने दिखा दिया कि उसका जवाब खुद उसका लड़का ही एक दिन उसे देगा. कल्याण सिंह और मुलायम सिंह, दोनों के राजनीतिक चरित्र एक जैसे रहे है दोनों की गति एक ही होनी है, एक की हो चुकी दूसरे की प्रक्रिया चल रही है.

Vishnu Nagar : लखनऊ की राजनीतिक ड्रामेबाज़ी में मुलायम सिंह यादव ने खुद स्वीकार किया है कि उन्होंने कोई ऐसा अपराध किया था, जिसमें उन्हें जेल हो सकती थी लेकिन तिकड़मेश्वर ने उन्हें किसी तरह बचा लिया। वह केस क्या था, क्या यह वही था, जिसमें आय से अधिक संपत्ति का मामला था और सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि प्रमाण के अभाव में वह इस मामले को बंद करना चाहती है मगर उसने अभी तक मामला बंद नहीं किया है और मोदी सरकार बंद होने देगी भी नहीं। कांग्रेस -भाजपा दोनों इसका इस्तेमाल मुलायम सिंह को चंगुल में फँसाये रखने के लिए करती रही हैं और सब जानते हैं कि सीबीआई का रुख़ सरकार के हिसाब से बनता -बिगड़ता है। तो क्या यही मामला है या कोई और मामला, जिसमें तिकड़मेश्वर ने उन्हें बचाया?यह जानना दिलचस्प होगा और तिकड़म से बचाया गया है उन्हें तो कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?

Vivek Dutt Mathuria : तस्वीर साफ है मुलायम अखिलेश को ट्रेंड कर रहे हैं बस ….जो मुलायम के मन में है उसे न शिवपाल जानते और न अमर सिंह. इतिहास गवाह है मुलायम सियासत में खुद के अलावा किसी के नहीं हुए….वीपी सिंह, चन्द्रशेखर, वामपंथी, मायवती, अजित सिंह और न जाने कितने हैं ज़िनके कांधे पर पैर रख कर यहां तक पहुंचे हैं अब भाजपा के नजदीक दिख रहे हैं.

Khushdeep Sehgal : समाजवादी कुनबे की हालत देखकर एक किस्सा याद आ गया. एक बुजुर्ग सेठ को मौत से बड़ा डर लगता था. उसने खूब पूजा-पाठ करने के बाद ईश्वर से मौत से बचने का वरदान ले लिया. वरदान ये था कि यमदूत जब भी उसे लेने आएगा तो वो उसे दिख जाएगा, ऐसे में वो अपने पैर तत्काल यमदूत की ओर कर दे, जिससे यमदूत उसे ले नहीं जा पाएगा. साथ ही सेठ को ये ताकीद भी किया गया कि वो इस वरदान का किसी और से भूल कर भी ज़िक्र नहीं करेगा. एक बार सेठ बीमार होने के बाद बिस्तर पर पड़ गया. फिर वो घड़ी भी आ गई जब यमदूत उसे ले जाने के लिए आ पहुंचा. लेकिन सेठ के पास तो वरदान था, झट अपने पैर उसने यमदूत की ओर कर दिए. यमदूत फिर उसके सिर की ओर पहुंचा. सेठ ने फुर्ती से फिर अपने पैर यमदूत की ओर कर दिए. अब यही चक्कर काफी देर तक चलता रहा. यमदूत जिधर जाए, सेठ उधर ही अपने पैर कर दे. सेठ इस तरह जान बचाता रहा. यमदूत थक कर सेठ को छोड़कर जाने ही लगा था. लेकिन सेठ को पैर इधर-उधर करते देख घरवालों ने समझा कि उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है. घरवालों ने रस्सियों से सेठ के पैर बांध दिए. यमदूत का काम हो गया. अब जैसे ही वो सेठ के सिर की तरफ आया तो सेठ के मुंह से निकला…”साला जब भी मरवाया, घरवालों ने ही मरवाया”…

सौजन्य : फेसबुक

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केरल में सिर्फ ईसाई शराब पी सकता है, बेच सकता है, हिन्दू नहीं!

Shameer Aameen Sheikh : यदि आपको लगता है कि भारत में सिर्फ एक ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’ है तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। आइये जानते हैं भारत के कुछ अन्य पर्सनल लॉ के बारे में। इनको पढ़कर आप समझ जायेंगे कि भारत जैसे ‘अनेकता में एकता’ वाले देश में ‘कॉमन सिविल कोड’ अगले ढाई साल तो क्या ढाई सौ साल तक लागू नहीं हो सकता, यह सिर्फ राजनीतिक उछल-कूद है और कुछ भी नहीं –

1) गोवा के हिन्दू महिला को अगर 25 वर्ष की उम्र तक बच्चा नहीं हुआ या 30 वर्ष की उम्र तक बेटा नहीं हुआ तो उसका पति दूसरा विवाह कर सकता है (ये बेटा-बेटी में कानूनन भेद किया गया है)। लेकिन गोवा का मुस्लिम दूसरी शादी नहीं कर सकता।

2) कर्नाटक के ब्राह्मणों में सगे मामा-भांजी शादी कर सकते हैं, अन्य ब्राह्मण नहीं कर सकते।

3) बैंक में कोई हाथ में शेविंग ब्लेड भी ले जाये तो गिरफ्तार किया जा सकता है, लेकिन सिक्ख सरदार तलवार भी ले जा सकते है।

4) सिक्ख महिला बगैर हेल्मेट के बाईक चला सकती है, क्योंकी सिक्ख धर्म में महिलाओं को टोपी पहनना अवैध है।

5) जैन पुरूष, निकोबारी हिन्दू पुरूष व महिलायें और हिन्दू नागा साधू पुरूष नग्न रह सकते हैं, लेकिन कोई दूसरे धर्म के लोग नग्न रहें तो पुलिस गिरफ्तार करती है। जैन महिलाओं को नग्न रहने का अधिकार नहीं है।

6) गोवा के चर्च में हुवे किसी कैथलिक के विवाह के बाद वो अदालत की मर्जी के बगैर तलाक दे सकता है, मुस्लिम नहीं।

7) सिक्ख फौजी दाढ़ी रख सकता है, मुस्लिम नहीं।

8) सिक्ख पायलट पगड़ी पहन सकता है, हिन्दू नहीं।

9) आसाम के ऐसे चार जिले हैं, जहाँ आदिवासी जगह खरीद सकता है, अन्य कोई नहीं।

10) काश्मीर कि तरह नागालैंड और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों को भी विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है।

11) केवल हिन्दू आदिवासी भाला, चाकू और दूसरे कुछ हथियार रख सकते है, दूसरे नहीं।

12) अज्ञारी (पारसी धर्मस्थल) में केवल पारसी जा सकते हैं, दूसरे नहीं।

13) सोमनाथ व पशुपतिनाथ मंदिर में केवल हिन्दू जा सकते हैं, दूसरे नहीं।

14) केरल में सिर्फ ईसाई शराब पी सकता है, बेच सकता है, हिन्दू नहीं।

ये ‘पर्सनल लॉ’ यहाँ सिर्फ उदाहरण के तौर पर बताये गये हैं, और भी बहुत हैं। तो ‘कॉमन सिविल कोड’ का गाना गाने वालों के न तो पुरखों की औकात थी, न इनकी है, न इनकी आगे आनेवाली पीढ़ियों की होगी, कि ‘कॉमन सिविल कोड’ लागू कर सकें, इसलिये बेकार में परेशान न हों।

शमीर आमीन शेख की एफबी वॉल से.

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जब फेसबुक की खुबसूरत “बला” ने मुझे ब्लॉक कर दिया… पढ़ें लाइव चैट

बच गया गुरु आज एक खुबसूरत दिखाई देने वाली फेसबुकिया मोहतरमा के हाथों नंगा होने से…आप भी अलर्ट रहें… इस फेसबुक पर खूबसूरत सी दिखाई देने वाली कई मोहतरमायें मर्दों को इनबाक्स में घर बैठे बैठे ही नंगा करने का इंतजाम करे बैठीं हैं… खूबसूरत चेहरे वाली जलील मोहतरमा और मेरी चैट को पढ़ें….

-Meri help kardo

-क्या मदद कर दूं मैडम

-Mujhe 500 rs ki jarurat h hafte bhar me lauta dungi

-मोहतरमा आज तक तुम्हारी मेरी दुआ सलाम राम राम तक हुई नहीं है…और तुम सीधी इनबाक्स में पहली बार जब लैंड करी हो तो सीधे सीधे 500 रुपये की मदद की डिमांड…क्या है यह सब…अपना तो दिमाग ही चकरा गया…कहानी क्या है जरा पूरा माजरा तो खुलकर समझाओ….

-Darsal mayke aayi thi. mobile tut gyi whi bnwani h

-मैं तुम्हें किस बिना पर 500 थमा दूं….और क्यों मोहतरमा …जरा मुझे समझायेंगी कि मैं आपको 500 रुपये बिना दुआ सलाम या पुरानी दोस्ती के क्यों थमा दूं यूं ही 500 रुपये… आज से पहले तुमने कभी मुझसे राम राम तक नहीं की…और मांग रही हो पांच सौ रुपये….क्या इस फेसबुक पर मैं ही तुम्हें दुनिया का सबसे कम दिमाग प्राणी दिखाई पड़ा हूं…

-Koi bat nhi sorry

-दोस्त तुमने तो मेरे दिमाग को ही सुन्न कर दिया है.. बहुत बढ़िया… आज से पहले तुम्हें कभी संजीव का हालचाल लेने की फुर्सत नहीं मिली… क्यों? आज पहली बार जिंदगी में आई में तो सीधे सीधे 500 रुपये लेने… तुम्हारी आंख में तो दोस्ती के नाम पर दो बूंद पानी है या नहीं…लगता है तुम सिर्फ दाम की दोस्त हो….अच्छे इंसान तुम्हारे लिये जायें भाड़ में क्यों है न सही….मैंने सही पकड़ा न… थोड़ा तो आंख में शरम का पानी रखतीं कि जिस इंसान से आज तक तुमने हलो हाय तक नहीं किया उससे 500 रुयपे ऐसे मांग रही हो जैसे मैने तुम्हारा कर्ज खा रखा हो लेकर पहले से….शाबास बहुत बढ़िया.. कहां रहती हो, क्या करती हो…

-Ab bht hogya bas kro mafi mangli na majbur thi kya karti

Chat Conversation End

इसके बाद इस खुबसूरत बला ने मुझे ब्लाक कर दिया…..फेसबुक के रसियों जरा बच के रहना ऐसी बहुत मिलेंगीं…. जो तुम्हें दूर से ही ठंडा करके तुम्हारी जेब खाली कर लेंगी.

Sanjeev Chauhan
9811118895
Crimes Warrior channel on YouTube
क्राइम वॉरियर ब्लॉग
patrakar1111@gmail.com

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जानो कानून : : सुप्रीम कोर्ट का फैसला- फेसबुक पर किसी की आलोचना करना अपराध नहीं, एफआईआर रद्द करो

Facebook postings against police… criticising police on police’s official facebook page…. F.I.R lodged by police….

HELD – Facebook is a public forum – it facilitates expression of public opinion- posting of one’s grievance against government machinery even on government Facebook page does not by itself amount to criminal offence – F. I.R. Quashed.

(Supreme Court)
Manik Taneja & another – Vs- State of Karnataka & another
2015 (7) SCC 423

पूरी खबर…..

Comments on Facebook : Supreme Court quashes FIRs against couple

In a fillip for free speech on social media, the Supreme Court quashed FIRs registered by the Bengaluru Traffic Police for criminal intimidation against a couple for posting adverse comments on its Facebook page. A bench of Justices V. Gopala Gowda and R. Banumathi quashed the criminal prosecution against the couple in their judgment, observing that they were well within their rights to air their grievances in a public forum like Facebook.

“The page created by the traffic police on the Facebook was a forum for the public to put forth their grievances. In our considered view, the appellants might have posted the comment online under the bona fide belief that it was within the permissible limits,” the 10-page judgment observed.

‘End to harassment’

“The police sought to suppress free speech by intimidating us with serious charges…this judgment will have a larger impact. We had the resources to get our charges squashed, but many will find it hard to counter police harassment. I hope this will be an example to stop intimidation by the police,” said Manik Taneja, the petitioner.

On June 14, 2013, Manik Taneja and his wife Sakshi Jawa, were booked by the police under charges of using ‘assault or criminal force to deter a public servant from discharging his duty’ (Section 353 of the Indian Penal Code) and criminal intimidation (IPC 506).

The previous day, the couple were driving in their car, when they collided with an autorickshaw, resulting in a passenger being injured.

Though they had paid due compensation to the injured, Ms. Jawa – who had driven the car – was summoned to Pulakeshi Nagar Traffic police station where the police had allegedly misbehaved with her.

The couple then vent their anger on the police’s Facebook page, and even sent an email complaining about the alleged harassment to the police.

The police reacted by lodging a criminal complaint against the couple.

The Karnataka High Court had refused to intervene when the couple approached it for relief, following which they had moved the Supreme Court.

This judgment comes even as another bench of the Supreme Court is hearing the legality of Section 66A of the Information Technology Act, 2000, which prescribes arrest and three years imprisonment for social media comments considered to be of a “menacing character” by the authorities.

‘We had the resources to get our charges squashed, but many will find it hard to counter police harassment’

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आजतक में कार्यरत शम्स ताहिर खान, रेहान अब्बास, मुहम्मद अनस जुबैर और शादाब मुज्तबा की फेसबुक पर क्यों हो रही है तारीफ, आप भी पढ़िए

Vikas Mishra : मेरे दफ्तर में शम्स ताहिर खान, रेहान अब्बास, मुहम्मद अनस जुबैर, शादाब मुज्तबा हैं, उच्च पदों पर हैं ये लोग, बेहद जहीन। जानते हैं कि इनमें एक समानता क्या है, इन सभी की एक ही संतान है और वो भी बेटी। वजह क्या है, वजह है इनकी तालीम, इनकी शिक्षा। क्योंकि इन्हें पता है कि जिस संतान के दुनिया में आने के ये जरिया बने हैं, उसके पालन-पोषण में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इन्हें नहीं रटाना है कम संतान-सुखी इंसान।

मेरे गांव में मेरे हमउम्र दयाराम के आठ बच्चे हैं। मेरे खुद दो सगे भाई और तीन बहनें हैं। मेरे लखनऊ के एक साथी पत्रकार के 11 मामा और चार मौसियां हैं। सुभाष चंद्र बोस अपने पिता की नौवीं संतान थे। इसके बाद भी प्रोडक्शन जारी था, 14 भाई बहन थे। तो दूसरे की संतानों की तादाद गिनने से पहले जरा अपना भी इतिहास देख लेना चाहिए। अभी हाल में मैंने एक चुटकुला पढ़ा था कि एक कलेक्टर साहब गांव में नसबंदी के लाभ बताने पहुंचे थे। एक ग्रामीण ने पूछा-साहब आपने नसबंदी करवाई है? साहब बोले-नहीं, हम पढ़े-लिखे हैं। ग्रामीण बोला-तो साहब हमें भी पढ़ाओ-लिखाओ, नसबंदी करवाने क्यों आ गए।

फेसबुक पर लिखने वाले तमाम लोग विद्वान हैं, जानकार हैं, लेकिन अपनी विद्या का इस्तेमाल नफरत फैलाने में ज्यादा कर रहे हैं। हिंदू हो या मुस्लिम, दोनों समुदाय की मूल समस्या है शिक्षा। जो पढ़कर आगे बढ़ गए, वो भी शिक्षा के लिए प्रेरित नहीं करते, बल्कि अपने ही समुदाय के उन लोगों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें अक्षर ज्ञान हो गया है और जो सोशल मीडिया पर फेंका उनका कचरा उठाकर अपने दिमाग में डालने के लिए अभिशप्त हैं। दो समुदाय जो इंसानियत के तकाजे से एक-दूसरे के करीब आ सकते हैं, उन्हें बरबस ये दूर करना चाहते हैं। मुस्लिम समुदाय के अच्छे लिखने वाले अपने ही सहधर्मियों को बरगला रहे हैं। उनके अपने घर में अपनी बेटी तो डॉक्टरी-इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। लेकिन फेसबुक पर वो ‘मोदी की डियर’ पर मौज ले रहे हैं।

कोई मुस्लिम अगर इस्लाम या कट्टरता के खिलाफ अगर कोई पोस्ट लिखता है तो उसमें कमेंट करने वालों में हिंदू लोगों की भरमार होती है, जो उस पोस्ट का स्वागत करते नजर आते हैं। उस पोस्ट के कमेंट्स में मुस्लिमों की तादाद भी होती है। या तो वो अपने उस साथी को गालियां दे रहे होते हैं या फिर कुछ ऐसे भी होते हैं जो पोस्ट का समर्थन कर रहे होते हैं। ठीक इसी तरह, जब कोई हिंदू कट्टर हिंदुत्व और धर्म के नाम पर फैले अंधविश्वास के विरोध में कुछ लिखता है तो उस पोस्ट पर मुस्लिम साथियों के कमेंट थोड़े से आते हैं, अगर पोस्ट पब्लिक है तो फिर उस पर हिंदू धर्म वालों की गालियां पड़नी तय है। मेरी फ्रेंडलिस्ट में भी ऐसे साथी हैं, जिनमें से कुछ कभी परशुराम के भक्त बन जाते हैं, तो कभी देखते ही शेयर करें वाली तस्वीरें भेजते हैं, बेवजह मोदी-मोदी करते रहते हैं।

व्हाट्सएप के ग्रुप में तो कई मूर्खतापूर्ण मैसेज चलते रहते हैं। और हां, फेसबुक पर कई मुस्लिम मित्र जान बूझकर बड़े शातिराना तरीके से पोस्ट लिखते हैं। आरएसएस पर हमला करने की आड़ में हिंदुओं की ‘बहन-महतारी’ करते हैं। कई लोग मुझसे फोन करके कह चुके हैं कि ये आदमी आपकी फ्रेंडलिस्ट में क्यों है ? दरअसल ऐसी पोस्ट का अंजाम क्या होता है, मैं बताता हूं। उसमें एक मुसलमान लिखता है, बाकी मुसलमान पढ़ते हैं, वाह-वाह करते हैं, कई हिंदू पढ़कर कुढ़कर रह जाते हैं, कुछ से रहा नहीं जाता तो पोस्ट पर पहुंचकर तर्क-वितर्क करना शुरू करते हैं, तो वहीं कुछ सीधे ‘मां-बहन’ पर उतारू होते हैं। ‘मां-बहन’ करने वाले दोनों तरफ हैं। कोई डायरेक्ट परखनली से पैदा नहीं हुआ है, सबके घर में मां-बहन हैं।

दरअसल सोशल मीडिया को कई लोग अपने अपने तरीके से यूज कर रहे हैं। असली मुद्दे पर कोई आना नहीं चाहता। अपने मजहब वाले सही बात नहीं सिखा रहे हैं, सिर्फ डरा रहे हैं। दूसरे मजहब वालों से वो सीखना-पढ़ना चाहेंगे नहीं। खासतौर पर ये मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ ज्यादा हो रहा है, यही वजह है कि भारत में पाकिस्तान से ज्यादा मुसलमान हैं, लेकिन एक भी मुसलमान उनका सर्वमान्य नेता नहीं बन पाया। क्षेत्रीय स्तर पर आजम, ओवैसी उभरे, लेकिन इन्होंने भी तो मुसलमानों का सिर्फ इस्तेमाल ही किया है।

आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पत्रकार विकास मिश्र के एफबी वॉल से यह मैटर कापी कर भड़ास पर प्रकाशित किया गया है.

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नई ट्रेन के नाम को लेकर सोशल मीडिया पर तलवारें खिंचीं, राजा सुहेल देव राजपूत थे या राजभर या पासी?

Anand Kumar : आने वाली 13 अप्रैल को गाजीपुर से दिल्ली के लिए एक नयी ट्रेन शुरू हो रही है, “राजा सुहेल देव राजभर एक्सप्रेस” (ट्रेन सं० 22419). तीन दिन ये शाम 5.30 पर गाज़ीपुर से रवाना होकर सुबह 8.30 आनंद विहार टर्मिनल पहुंचेगी. वहां से बुधवार, शुक्र और रविवार को ट्रेन सं 22420 शाम 6.45 बजे चलकर सुबह 9.05 गाजीपुर पहुचेगी. अब ये ट्रेन का नाम बड़ा अनोखा है. आपको वामपंथी इतिहास में पढ़ाया ही नहीं गया होगा कि राजा सुहेल देव राजभर कौन थे. तो फिर ये थे कौन जिनके नाम पर ट्रेन चलाई गई है?

राजा सुहेल देव राजभर ने इस्लामिक हमलावर महमूद गज़नी के भांजे को मारा था. गज़नी के हमले के कुछ साल बाद महमूद का भांजा भारत पर हमला करने अपने कुछ चाचा, मामा और अन्य धर्म परिवर्तन करवाने वालों के साथ आया था. तो राजा सुहेल देव को राजाओं की संयुक्त सेना का मुखिया बनाया गया. बनारस पे हमला करने पहुंची गाज़ी की फौज को बुरी तरह हराया गया. सुहेल देव राजभर बाकी बेवक़ूफ़ हिन्दू राजाओं की तरह यहीं नहीं रुके थे. इस्लामिक हमलावर गाज़ी सलार मसूद की फौज को उन्होंने खदेड़ खदेड़ के काटा था. पचास हज़ार इस्लामिक हमलावरों में से सौ पचास भी मुश्किल से वापिस भाग पाए थे.

बाद में अंग्रेजों ने राजभरों को क्रिमिनल कास्ट घोषित कर दिया था. इस क्रिमिनल कास्ट एक्ट का नाम आपको दल हित चिंतकों ने नहीं बताया होगा. कई लोगों को इसके जरिये अंग्रेजों ने जन्म के कारण ही अपराधी घोषित कर दिया. ये एक्ट आजादी के बाद नहीं, संविधान बनने और लागू होने के भी कुछ साल बाद ख़त्म हुआ था. इस एक्ट के ख़त्म होने पर क्रिमिनल कास्ट को Denotified Caste घोषित किया गया.  मीना जैसी कई जो कभी राजा थे, वो सब Criminal Caste से OBC या फिर Sceduled Caste/Tribe घोषित हुए. बाकी कई (राजभर जैसे) Denotified Caste हो गए. वो अभी भी Denotified ही हैं. बाकि ये बस याद दिलाने के लिए था कि भारत में एक Denotified Caste भी है. फॉर्म में भरे जाने वाले SC / ST / OBC / General तो आप पहले ही जानते हैं. जानते हैं ना?

आनंद कुमार के एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं…

Akash Gaurav पहली बार इनके बारे में मुझे संघ के प्रथम वर्ग के दौरान मिली थी। दुसाध समुदाय के लोग इनके जन्मदिन के दिन इनकी पूजा करते है और सूअर की बलि चढाते हैं। कहते है कि मुल्लों को काटने के बाद राज सुहलदेव ने ही सूअर का बलि देने की प्रथा शुरू की थी।

Sushant Jha सुहेलदेव के बारे में कहीं पढ़ा था पासी थे. क्या पासी और राजभर एक ही हैं?

Anand Kumar शादी जैसे संबंधों के लिहाज से पासी और राजभर वैसे ही अलग हो जाते हैं जैसे ब्राह्मण और भूमिहार| तय करने में थोड़ी दिक्कत होगी, दोनों बहुत सी मान्यताओं में एक होंगे, मगर बहुत छोटी छोटी सी चीज़ों में अलग| जैसे सूअर का मांस खाना दोनों के लिए परंपरागत हो सकता है, ताड़ी परंपरागत हो सकती है| लेकिन जब बात सूअर पालने की आएगी तो दोनों अलग होंगे| ताड़ी के पेड़ से ताड़ी उतारने की बात होगी तो अलग होंगे|

Singh Yogendra राजभर ओबीसी में आते हैं और पासी अनुसूचित में. दोनों बिलकुल अलग जातियां हैं और हिन्दू क्षत्रिय राजाओं, अन्य सभी हिन्दुओं के साथ मिलकर मुसलमानों से लड़ती आई हैं.

Sunil Pandey हमारे बलिया में कुछ राजभरों को ‘जय सुहेल देव’ कहते सुना था.

Brijesh Rai बांसडीह विधानसभा और फेफना में अच्छी खासी आबादी है इनकी और ये जय सुहेल देव का नारा ही लगाते हैँ. आप ने सही कहा.

Vinod Mishra गाज़ी पीर के कारण अभी इतिहास मालूम हुआ. क्रिमिनल कास्ट के बारे में अनुमान था, यहा भी एक C.T.S. की आबादी है.

Singh Yogendra सुहेलदेव बैस राजपूत थे. उन्होंने 21 राजाओं का संघ बनाकर मसूद गाजी का सामना किया था. इनके साथ भर और पासी भी कन्धे से कन्धा मिलाकर लड़े थे. ब्रिटिश गजेटियर में इन्हें राजपूत ही लिखा है. पर इनका साथ भर और पासियों द्वारा दिए जाने पर संदेह में कुछ अंग्रेज इतिहासकारों द्वारा इन्हें भर अनुमानित कर लिया जो कि गलत है. ये त्रिलोकचंद प्रथम के पुत्र बिदारदेव के वंशज थे. भालों से लड़ने के कारण इनकी बैस वंशी शाखा भाले सुल्तान कहलाती है. वोट बैंक की गन्दी राजनीति के चलते संघ परिवार इन्हें कहीं भर तो दूसरे इलाके में पासी प्रचारित करता है. हिन्दू एकता होनी चाहिए पर अपने पुरखों का इतिहास लुटाकर कैसी एकता? क्षत्रिय इतिहास को पहले वामपंथियो अंग्रेजों कांग्रेसियों ने बिगाड़ा, अब वही काम संघी क्यों कर रहे हैं? अवध के इलाके में जहाँ पासी ज्यादा हैं वहां सुहेलदेव को पासी बताकर वोट लिए जाते हैं और पूर्वांचल में इन्हें भर जाति से जोड़कर वोट की फसल काटी जाती है. वोट बैंक के लिए भाजपा और संघ कितना नीचे गिर सकते हैं और क्षत्रिय इतिहास और संस्कृति का कितना अपमान कर सकते हैं, इसकी कोई सीमा नहीं. क्षत्रियों के इतिहास से छेड़छाड़ और अपमानित करने की कड़ी में एक और अध्याय भाजपा जोड़ने जा रही है. सलार मसूद गाजी को हराने वाले बैस राजपूत राजा सुहेलदेव बैस को दलित जाति पासी का बताकर उत्तर प्रदेश में कई कार्यक्रम आयोजित करेगी जिससे पासी जाति के वोट उसे मिल सके. इससे पहले अहिरों के वोट के लिए उन्हें यदुवंशी, काछियों के वोट के लिए सम्राट अशोक को बिना किसी कारण के काछी बताने का षड्यंत्र भाजपा कर चुकी है. यहा तक की दलितों को असली राजपूत और राजपूतों को डरपोक और नाकारा बताने का कृत्य संघ प्रमुख भागवत भरी सभा में कर चुके हैं. गौरतलब है कि ये वही भाजपा है जिसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोजाना आरक्षण को हमेशा के लिए जारी रखने की बात करते हैं. ये कैसा दोगलापन है? अगर इनकी नजर में दलित राजा महाराजा रहे हैं तो फिर उन्हें किस बात का आरक्षण? फिर क्षत्रियों को किस कारण आरक्षण से वंचित रखा गया है? भाजपा और संघ अपने फायदे के लिए क्षत्रिय राजपूतों के इतिहास और स्वाभिमान को ही निशाना क्यों बनाते है? क्षत्रिय राजपूतों के स्वाभिमान को इतना हलके में क्यों लिया जाता है?

Anand Kumar एक छोटा सा सवाल था Singh Yogendra जी, अभी तो राजभर denotified ही हैं ना? ये denotified हटने के बाद वो कहाँ गिनेंगे खुद को? आरक्षण का लाभ लेना चाहेंगे या आरक्षण छोड़कर जनरल में आना चाहेंगे? आप खुद भी राजभर हैं या राजनैतिक हैं और बसपा समर्थक हैं?

Singh Yogendra हम हिंदुत्व के प्रबल समर्थक हैं पर इसका अर्थ यह नहीं कि हमारे पुरखों को कोई अपना बताकर पेश करे. आश्चर्य है कि जिसे सदियों से पिछली सदी के मध्य तक क्षत्रिय राजा के रूप में जाना जाता रहा, उसे अचानक से बिना सबूत के भर या पासी राजा बना दिया गया.

Anand Kumar ये गंभीर परिणाम वगैरा रहने दीजिये भाई. आप राजभर हैं? आपके परिवार में राजभरों से शादी होती है?

Singh Yogendra राजभर किसे बोल रहे हो आप? हम राजपूत हैं कोई राजभर भर नहीं और आपकी मिथ्या पोस्ट का प्रतिकार किया है. राजा सुहेलदेव बैस 11वीं सदी में वर्तमान उत्तर प्रदेश में भारत नेपाल सीमा पर स्थित श्रावस्ती के राजा थे जिसे सहेत महेत भी कहा जाता है. सुहेलदेव महाराजा त्रिलोकचंद बैस के द्वित्य पुत्र विडारदेव के वंशज थे. इनके वंशज भाला चलाने में बहुत निपुण थे जिस कारण बाद में ये भाले सुल्तान के नाम से प्रसिद्ध हुए। सुल्तानपुर की स्थापना इसी वंश ने की थी। सुहेलदेव राजा मोरध्वज के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनका राज्य पश्चिम में सीतापुर से लेकर पूर्व में गोरखपुर तक फैला हुआ था। उन्हें सुहेलदेव के अलावा सुखदेव, सकरदेव, सुधीरध्वज, सुहरिददेव, सहरदेव आदि अनेको नामो से जाना जाता है। माना जाता है की वो एक प्रतापी और प्रजावत्सल राजा थे। उनकी जनता खुशहाल थी और वो जनता के बीच लोकप्रिय थे। उन्होंने बहराइच के सूर्य मन्दिर और देवी पाटन मन्दिर का भी पुनरोद्धार करवाया। साथ ही राजा सुहेलदेव बहुत बड़े गौभक्त भी थे।

Pushpendra Rana भर अभी पिछड़ा वर्ग में आते हैं और कई अन्य जातियों के साथ इन्हें अनुसूचित जाति में शामिल करने का मामला अभी भी चल रहा है.

Singh Yogendra हमे किसी समाज से दिक्कत नहीं. हिंदुत्व के लिए कोई भी बलिदान देने को तैयार हैं. पर पुरखों को कोई दूसरी जाति का बताए, ये स्वीकार नहीं है.

Pushpendra Rana सुहेलदेव बैस को राजभर बताने के लिए आपके पास क्या प्रमाण है?

Anand Kumar 1950 के दशक तक कोई राजभर नाम लेने वाला नहीं था, उसे क्रिमिनल कास्ट बनाया हुआ था| आज भी राजपूतों की शादियाँ होती हों राजभरों में या बैंस में तो बताइये कि हां होती है| शर्मा क्यों रहे हैं इतना? पूर्वज चाहिए, अभी वाले को नहीं अपनाएंगे? थोड़ी हिम्मत दिखाइए… ले आइये किसी राजपूत को जिसने बैंस या राजभर परिवार में शादी की हो… उसे आप क्षत्रिय मानते हों तो ठीक… नहीं मानते तो फिर जबरन मुहर्रम क्यों मना रहे हैं?

Pushpendra Rana इसके लिए नए नए साहित्य लिखे गए सेठ बिहारी लाल की तर्ज पर. सुहेलदेव बैस के वंशज पयागपुर के राजाजी ने ही सुहेलदेव बैस का स्मारक अपनी जगह पर बनवाया और उनके मेले की शुरुआत की लेकिन बाद में वोट बैंक वालो के द्वारा उसे हाईजैक कर लिया गया

Singh Yogendra महामूर्ख न बनो यार, फेसबुकिया ही बने रहो उचित रहेगा। सुहेलदेव बैस को जबरदस्ती सुहेलदेव राजभर बना दिया और तुम मूर्खतापूर्ण सवाल पूछ रहे हो? कमीनो में ब्याह तेरे जैसे करते होंगे हम नहीं.

Prashant Singh Bains बैंसो के कोई वैवाहिक सम्बन्ध नहीं रहे हैं भर जाति में। भर जाति आदि सिर्फ़ जंगलों में रह कर गुज़र बसर करने वाली छोटी जातियाँ थी। इस्लामिक आक्रमणकारियों के विरुद्ध सिर्फ़ इन जातों ने राजा सहेलदेव का साथ दिया था. 

Pushpendra Rana बैस असली क्षत्रिय वंश है और उनमे सभी क्षत्रिय वंशो की शादी होती है. भर एक अलग जाति है जिनका क्षत्रियों से कोई सम्बन्ध नहीं. कुछ क्षत्रिय गिर कर भरों में जरूर शामिल हुए हो सकते हैं. जातियों और जाति व्यवस्था के बारे में कुछ पढ़ कर आइये, फिर ये बातें करिए. और हां denotified ट्राइब का मतलब पता है? denotified में जितनी भी जाती आती थी वो bc, sc, st में बटी हुई है. अब denotified की बात कर के यहा क्या बनना चाहते हो?

Sajan Soni जब तक क्रिमिनल कास्ट बताया जाता रहा तब तक किसी ने प्रतिक्रिया नहीं दिखाई, denotified caste पर भी न अब तक कोई पोस्ट मिला न किसी ने कोई जानकारी दी । आज सरकार के एक सराहनीय कदम पर किसी ने ऐतिहासिक तथ्यों को रखने की कोसिस की तो अपने ज्ञान की शेखी बघारने धमक गए। उनकी उपलब्धियों का विश्लेषण छोर जातिगत विश्लेषण पे मुद्दे को अटका दिया और हवाला इतिहास से छेर चार का!! मज़ारों पे मत्था टेकेंगे और खुद को हिंदुत्व का समर्थक बताएंएगे पर जब उपलब्धियों की बात होगी तो ये तेरा बाप ये मेरा बाप करेंगे।

Pushpendra Rana आश्चर्य है की जिसे सदियों से पिछली सदी के मध्य तक क्षत्रिय राजा के रूप में जाना जाता रहा उसे अचानक से बिना सबूत के भर या पासी राजा बना दिया गया.

Singh Yogendra राजा सुहेलदेव बैस के विषय में मिथ्या प्रचार. इस युद्ध में राजपूतो के साथ भर और थारू जनजाति के वीर भी बड़ी संख्या में शहीद हुए,राजपूतों के साथ इस संयुक्त मौर्चा में भर और थारू सैनिको के होने के कारण भ्रमवश कुछ इतिहासकारों ने सुहेलदेव को भर या थारू जनजाति का बता दिया जो सत्य से कोसो दूर है क्योकि स्थानीय राजपुतो की वंशावलीयो में भी उनके बैस वंश के राजपूत होने के प्रमाण है। सभी किवदन्तियो में भी उनहे राजा त्रिलोकचंद प्रथम का वंशज माना जाता है और ये सर्वविदित है की राजा त्रिलोकचंद( प्रथम)बैस राजपूत थे। पिछले कई दशको से कुछ राजनितिक संगठन अपने राजनितिक फायदे के लिये राजा सुहेलदेव बैस को राजपूत की जगह पासी जाती का बताने का प्रयत्न कर रहे है जिससे इन्हें इन जातियों में पैठ बनाने का मौका मिल सके। दुःख की बात ये है की ये काम वो संगठन कर रहे है जिनकी राजनीती राजपूतो के समर्थन के दम पर ही हो पाती है। इसी विषय में ही नही, इन संगठनो ने अपने राजनितिक फायदे के लिये राजपूत इतिहास को हमेशा से ही विकृत करने का प्रयास किया है और ये इस काम में सफल भी रहे है। राजपूत राजाओ को नाकारा बताकर इनके राजनितिक हित सधते हैं। पर हम अपना गौरवशाली इतिहास मिटने नहीं देंगे। वीर योद्धा, महान संगठक महाराजा सुहेलदेव बैस को शत शत नमन.

Pushpendra Rana ऐसे तो इस युद्ध में ब्राह्मण आदि और अन्य जातियों के लोग भी काम आए थे लेकिन इससे सुहेलदेव बैस ब्राह्मण नहीं हो जाते.

Anjni Kumar Sarswat किसी भी जाति के क्यों न हो वह एक वीर हिंदू थे यही पर्याप्त है गर्व करने के लिए। जय महाराजाधिराज राजराजेश्वर हिंदवी गौरव श्री सुहेलदेव

Anand Kumar राजाओं के खानदान से थे क्षत्रिय तो… बनाइये अपना एक ट्रस्ट पैसे इकठ्ठा कीजिये किसी इतिहासकार को तथ्य निकालने कहिये… देखें कब तक राजभर और बैंस में राजपूतों की शादियाँ होती रही हैं. ऐसे तो नहीं चलेगा भाई.. आपने छोड़ दिया सदियों डूबने के लिए आज कुम्भ के बिछड़े भाई हो गए हैं आपके? और कुछ नहीं मिलता तो प्रयाग और गया के पंडितों के पास करीब 800 साल का तो रिकॉर्ड मिल जायेगा शादियों का… निकालिए उसमें से देखें… जिस अँगरेज़ ने हर विरोध करने वाले को क्रिमिनल कास्ट बना दिया था उसके लिखे पर भी भरोसा नहीं करना… दल हित चिन्तक तो चलिए पहले ही चर्च के पैसे पर पलते हैं.. उनकी भी नहीं सुनते… शादी के रिकॉर्ड तो होते हैं पंडितों के पास… उस से निकाल लीजिये देखते हैं कब तक राजभर कौन सी जाति में थे.. अभी तो पिछड़े हैं ये तो मानियेगा ??

Singh Yogendra भर पिछड़े हों या दलित हों हमे कोई लेना देना नही. हमे उनसे कोई शिकवा नही. पर तुम सुहेलदेव बैस को सुहेलदेव भर लिख रहे हो इससे आपत्ति है. सुहेलदेव बैस का स्मारक खुद उनके वंशज पयागपुर के राजपूत राजा ने अपनी 500 बीघा जमीन दान में देकर बनवाया था.

Rajpal Singh Champawat Sarechan आनन्द जी आप की पोस्ट ग़लत है.. कोई लाँजिक नही..

Singh Yogendra बैस तो उच्चकुल के राजपूत हैं उनमें तो शादी होगी ही पर भरों में शादी ब्याह तुम्हारी हो सकता है हुई हो या उन्ही की पैदाइश हो तुम? सुहेलदेव बैस का स्मारक खुद उनके वंशज पयागपुर के राजपूत राजा ने अपनी 500 बीघा जमीन दान में देकर बनवाया था.

Anand Kumar आ गए जातिवादी रंगत में. बस थोड़ा सा उकसाना पड़ता है. नीच कुल का ही जब मानते हो उन्हें तो काहे उन्हें अपना पूर्वज घोषित करने पर तुले थे Singh Yogendra जी.  मान लो कि जातिवादी हो… एकता की बातें तुमसे ना हो पाएंगी… जाने दो…

Singh Yogendra अरे मुर्ख नीच कुल का सुहेलदेव बैस को नही कहा. वो बैस क्षत्रिय राजपूत कुल के थे जिसे तुम जैसे मुर्ख जबरदस्ती भर या पासी बना रहे हो. हिंदुत्व का पाठ सीखने की जरूरत तुम जैसे कायरो से नही है. जब हमारे पुरखे तुर्को अफगानो से लडकर सर कटवा रहे थे तो उस समय तुम्हारे पुरखे किसी बिल में दुबके हुए बैठे होंगे. आज भी हिन्दू हो तो हमारे पुरखो के बलिदान की वजह से. हिंदुत्व का पाठ तुम जैसे घोंचूओ से सीखने की जरूरत नहीं है.

Banti Kharayat ओ आनंद कुमार…..तुम लोग कभी नहीं सुधरोगे….ये फर्जी इतिहास रचने से तुम लोग राजपूत नहीं बन सकते रहोगे वही ही….जैसे वो तुम्हारा मसीहा जिस ने अपने ब्राह्मण शिक्षक(जिसने उसे अपने खर्चे पर पढ़ाया) की कास्ट अपने नाम के आगे जोड़ ली परन्तु हीन भावना से ग्रषित होने के कारण पूर्वाग्रह नहीं त्याग पाया जिनका सरनेम चुरा लिया उनके लिये….. दूसरे के बाप को बाप कहने से वो तुम्हारा बाप नही हो जायेगा…

Anand Kumar कुल के हिसाब से आल्हा उदल का कुल भी नीच होता था इसलिए उनकी लड़ाइयाँ होती रहती थी ना? अपनी मूर्खताओं का नतीजा इतने सालों में भी नहीं दिखा? smile emoticon गजब के अंधे होते हो भाई…

Singh Yogendra अरे अक्ल के अन्धो कौन तुम्हे सूतियापन्ति का इतिहास पढ़ा रहा है? आल्हा उदल बनाफर राजपूत वंश के थे. तुम्हे किस चूतिये ने कह दिया उनका कुल निचा होता था? बनाफर राजपूत आज भी बुन्देलखण्ड में मिलते हैं.

Anand Kumar पहले आपस में निपट लीजिये जातिवादी Singh Yogendra जी. एक बता रहा है बानफर राजपूत… एक किस्सा कहता है… थे की नहीं आल्हा उदल?

Prashant Singh Bains भर भर ही लिखते है, गोत्र नहीं। Anand जी, आल्हा कहानी नहीं है। वो वीर रस। तुम भर सोच वाले क्या जान सकते हो वीर रस क्या होता है।

Rajarsh Singh Bais खून को किसी सम्बोधन या प्रमाण की जरुरत नहीं, नाम के आगे हम सिंह इस लिये लिखते है की हम आपस में न लड़े। पर फिर भी हम आपस में लड़ते है । अगर राजपूत एक दुसरे के परस्पर विरोधी न हो तो तुम 1000 साल और आरक्षण लो तब भी हमारा कुछ नही बिगड़ेगा। भर में जा कर बैंस खोजोगे तो कहा मिलेगा हाँ अगर भरो में बैसो की नाजायज़ औलाद ढूँढो तो मैं sure हु मिल जाएगी।।।

Anand Kumar आहा एक और जातिवादी सूरमा आये. नाईट शिफ्ट है आज की. हा हा हा

Singh Yogendra जातिवादी सडांध तुम्हारे अंदर भरी हुई है. अगर मुल्ला होते तो अब तक ओकात बता दिए होते Anand Kumar जी. संघी हो इसलिए संयम है क्योंकि वोटर हम भी बीजेपी के ही हैं पर अपने इतिहास से छेड़छाड़ बर्दाश्त नही होगी. यहाँ दुष्ट वामपंथी नही बल्कि हमारे प्रिय संघी ही फर्जी इतिहास रच रहे हैं. अंग्रेजो ने गजेटियर में लिखा है कि कुछ लोग सुहेलदेव को थारु कुछ भर, कुछ बैस राजपूत तो कुछ कलहंस राजपूत बताते हैं. उनकी पूरी वंशावली आज के बैस राजपूतो में मिलती है फिर भी विवाद मान लिया जाए तो सरकार और आप उन्हें एकतरफा भर कैसे लिख सकते हो?

Prashant Singh Bains डे नाइट खेलने वाले है यहाँ।।।,, बेस नाजायज़ खेलने में माहिर है।।। ये तो ग़नीमत हो गई कि तुम्हारे सविधान ने १९५२ ऐक्ट ला दिया वरना जाने कितने ओर नाजायज़ etc … बैंसो के गुणगान कर रहे होते।… ओर ज़्यादा ठाकुरई पर बोलो तो आ जाऊँ अवध वाली।। तो मुँह छुपाते नहीं मिलेगा।।। इस इतिहास को अपनी में घुसा लो ओर हर बार जब झाड़े फिरने निकालोगे तो इसको बाँचना

Anand Kumar चलिए जातिवादी थोडा तो ऊपर आये… कम से कम चंदेल, तोमर, बैंस, राजभर से आगे उच्च कुल, नीच कुल छोड़कर अब पोलिटिकल संघी कम्युनिस्ट तक स्वागत है… ऐसे ही छूटेगी ये जातिवाद की आपकी बीमारी वैसे रानी झाँसी को क्या मानते हैं आप लोग ? आल्हा तो चलिए आपने कहानी घोषित कर दिया… रानी झाँसी क्या थी ? दलित, ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य कुछ होगी ना ??

Singh Yogendra तू क्या है पहले ये बता? रानी झांसी शूरवीर यौद्धा थी जन्मना ब्राह्मण थी. जातिवाद तुम फैला रहे हो सुहेलदेव को भर लिखकर.

Rajarsh Singh Bais हमे जातिवाद की जरूरत ही नही । वो कमजोरो का हथियार है

Anand Kumar अरे रे तू तड़ाक पर उतर आये जातिवादी Singh Yogendra जी को नाईट शिफ्ट की नौकरी में भी गुस्सा आया smile emoticon वाह वाह smile emoticon तलवार तो नहीं खींच ली grin emoticon घर में है भी की नहीं.

Singh Yogendra तुम जैसे tatpunjiyo के लिए तलवार की क्या जरूरत?

Anand Kumar वो किताब का लिंक ऊपर जो एक सूर्यवंशी क्षत्रिय को राजा बता रहे हैं किसी इलाके का उनके लिए है… सुहेलदेव वैसे क्या थे? चंद्रवंशी की सूर्यवंशी? नाग वंश वाले सूर्यवंशी होते हैं? शायद आपको पता होगा जातिवादी Singh Yogendra जी?

Singh Yogendra बिलकुल नागवंश खुद सूर्यवंश की शाखा है. http://rajputworld.blogspot.in/2013/07/blog-post_10.html?m=1

अत्रि अन्तर्वेदी मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष, सुहेलदेव को भर बतलाकर रेल चलायेंगे…. चुनावों में रेल सी देखते रह जायेंगे।

Avinash Sharma भैया Anand Kumar, ये नही मानेंगे ये तो वही बात के पक्ष धर है जहां मीठा -२गप्पऔर कड़वा कड़वा थू. वाल्मीकी, व्यास, जाबाल ऋषि बन गय् तो वो ब्राह्मण हो गये, सुहेलदेव, आल्हा ने पराक्रम कर दिया तो वो क्षत्रिय हो गये. इनसे पूछो कि गोधरा मे जो जलाये थे मिंयों ने हिंदू वो जात देख कर जलाये थे क्या. उऩका बदला लेने वाला बामन ठाकुर नही बल्की इनकी नजरो मे छोटी जात का तेली था.

शुभम शर्मा आर्य discussion गलत दिशा में चला गया। कुछ लोगो को “जातिगत superiority” का मीठा सायनाइड चूसने में अब भी मजा आता ह।

Pushpendra Rana अबे चूतिये अगर इन सब से हारते तो तू आज हिन्दू हिन्दू ना कर रहा होता. और ये आर्य समाजी बकवास अपने पास रख. २३०० साल पहले खुद megasthenes लिख गया है की जाती कभी नही बदली जा सकती थी. शुंग और kanva ब्राह्मणों से क्षत्रिय हो गए क्या? सातवाहन क्षत्रिय हो गए? विश्वामित्र ब्राह्मण हो गए? और क्षत्रिय कभी किसी गैर क्षत्रिय को क्षत्रिय नही मानता दूसरी जातियों की तरह नही तो आज दो तिहाई जनता क्षत्रिय होती

Brijesh Rai इस नाम से ट्रेंन चलाकर .भासपा (भारतीय समाज पर्टी )के साथ 2017 के चुनाव मे गठबंधन को भी हरी झंडी दे दी हैँ ..इस पार्टी के मुखिया ओमंप्रकाश राजभर के साथ भाजपा नेताओ का मेल जोल काफी चरचा मे रहा था..2012 के चुनाव मे शुहेल देव वाली पार्टी ने बनारस और आजम गढ मडल की 16 सीटो पर दमदारी के साथ चुनाव लडा था और भाजपा के उम्मिदवारो से भी ज्यदा वोट मिले थे इनको ..फागु चौहान .अम्बिका चौधरी .अब्दुल समद अंसारी जैसे नेताओं को हारना पडा था इस पार्टी की वजह से ..बनारस के दो विधानसभा मे ये बसपा से ज्यदा वोट पाये थे ….राजभर बिरादरी शुहेलदेव के नाम पर ही राजनिती करती हैँ …

Madan Tiwary जब मानसिंह अकबर से शादी का रिश्ता हो सकता है और स्वीकार्य भी था राजपूत समाज को फिर राजभर से क्यों नहीं ? वैसे उस समय रजवाड़े किसी जाति के हों उनकी आपस में शादिया होती थी क्योकि शादी का मकसद राज्य विस्तार था ।

Rajpal Singh Champawat Sarechan Abet cutiye pehle itihas pad … Wo dasi thi jiske sath akbar ki Shadi hui… Aur apwad Har jagah hotey hai …

Sonu Anil हे प्रभु ये ठकुरई कब जाऐगी

Singh Yogendra ठकुराई न होती तो आप मुल्ला होते anil जी

Sonu Anil कौन सी ठकुरई जयचंद वाली vp singh वाली या दिग्विजय सिंह वाली

सुधाँशु मणि त्रिपाठी बहराइच में सब राजा सुहैलदेव राजभर ही जानते हैं।

Swati Gupta मैं भी यही जानती हूँ. राजा सुहैल देव पासी सुना था हमने.

सुधाँशु मणि त्रिपाठी उनके स्मारक या मंदिर कह लें, वहाँ के शिलापट्ट पे यही नाम लिखा है। जो चित्तौरा झील के किनारे पर है जहाँ उन्होंने सलार मसूद को मारा था।

Tarun Kumar आरे भाई, सुहेलदेव किसी जाति के थे, हिन्दू थे, दुश्मनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, विजयी हुए, इसलिये वो हमारे गौरव गान के नायक हैं, ना की किसी जाति विशेष के होने के।

Singh Yogendra ये दुष्प्रचार सिर्फ कुछ दशक पुराना है भर और पासी लडको ने भी इस युद्ध में राजाओं का जमकर साथ दिया था न कि सुहेलदेव पासी या भर थे. ये सारा भृम एक अंग्रेज लेखक द्वारा किये साक्ष्य विहीन अनुमान से शुरू हुआ। अंग्रेज तो राम कृष्ण को काल्पनिक बताते हैं आर्यो को विदेशी तो सब पर यकीन कर लिया जाए?

Swati Gupta मैं बहराइच में रह चुकी हूँ, इसलिये बता रही हूँ कि वहाँ के लोकल सब उन्हें पासी बताते हैं

Singh Yogendra जी और पूर्वांचल के कुछ जिलो में इन्हें भर बताकर वोट की फसल काटने की तैयारी है जबकि राजा सुहेलदेव बैस राजपूत थे जिनकी पहले और बाद की पूरी वंशावली मौजूद है

Tarun Kumar इतिहास के लेखन परम्परा ना होने से निश्चय ही समस्या हैं, लेकिन सही क्या हैं, इसका निर्णय तो तथ्य के आधार पर ही कर सकते हैं। अब अशोक कौन थे, क्षत्रिय, शुद्र या कुछ और, यह विवादित हैं, हमेशा रहेगा। जिसे जो मानना हैं माने लेकिन जाति इतिहास में कोई मायने नहीं रखती।

Swati Gupta इनका पासी ही पता था, वैसे क्या फ़र्क़ पड़ता है, थे तो हिन्दू ही, पर अभी तक उपेक्षित थे। वहाँ हम तीन साल रहे पर क्षत्रिय तो किसी ने नहीं बोला

Jaipal Singh Sindarli मित्रों आजकल कुछ तथाकथित पढ़े लिखे और राजपूतो से इर्शाभाव रखने वाले लोग हमारे योगदान को नकारते हैं। जिन जातियो को राजपूतो से नफरत है वो जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, जैसलमेर, बीकानेर, हरयाणा आदि के साथ ही सैकड़ो शहरो के नाम बदल दें। ध्यान दे कि वर्तमान भारत के सीमावर्ती क्षेत्र और पूर्व रियासते जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, जम्मू, कच्छ में राजपूत शासन ना होता तो ये भी पाकिस्तान में होते और आज राजपूत विरोधी हिन्दू टोपी पहन कर कुरान पढ़ रहे होते। शायद इन राजपूतो ने गलती कर दी मुग़ल तुर्को से लड़ाई कर के अपनी संस्कृति को बनाये रखा——
बाप्पा रावल
नागभट प्रतिहार
मिहिरभोज प्रतिहार
राणा सांगा
राणा कुम्भा
वीर पृथ्वी राज चौहान
महाराणा प्रताप
रानी दुर्गावती
वीर जयमल
वीर छत्रशाल बुंदेला
दुर्गादास राठौर
मालदेव
छत्रपति शिवाजी
महाराणा राजसिंह
रानी कर्मावती
रानी पद्मनवती
विरमदेव सोनिगरा
राजा भोज
सुहेलदेव बैस
आनंदपाल तोमर
राजा हर्षवर्धन बैस
बन्दा सिंह बहादुर
ऐसे ही हजारो योद्धा जो हिंदुत्व के लिए कुर्बान हो गए।

वीर कुंवर सिंह, आऊवा ठाकुर कुशाल सिंह,राणा बेनीमाधव सिंह,चैनसिंह परमार,रामप्रसाद तोमर बिस्मिल,ठाकुर रोशन सिंह,महावीर सिंह राठौर जैसे महान क्रांतिकारी अंग्रेजो से लड़ते हुए शहीद हो गए। आजादी के बाद सबसे ज्यादा परमवीर चक्र राजपूतो ने जीते।शैतान सिंह भाटी,जदुनाथ सिंह राठौड़,पीरु सिंह शेखावत,गुरुबचन सिंह सलारिया,संजय कुमार डोगरा जैसे परमवीरो का बलिदान क्या भुला जा सकता है? आज भी राजपूत रेजिमेंट, राजपूताना रायफल्स, डोगरा रेजिमेंट, गढ़वाल रेजिमेंट, कुमायूं रेजिमेंट, जम्मू कश्मीर रायफल्स के जवान सीमा पर दुश्मन का फन कुचलने और गोली खाने के लिए सबसे आगे होते हैं। देश के एकीकरण के लिए हमने अपनी सैकडो रियासते कुर्बान कर दी,सारी जमीदारी कुर्बान कर दी,अपने खजाने खाली कर दिए! क्या इस त्याग को यूँ ही भुला दिया जाएगा?  राजपूत मतलब राजपुत्रः गीता से लेकर रामायण तक में वर्णित है यहाँ क्षत्रियो में भगवान राम, भगवान कृष्णा से लेकर महात्मा बुद्ध भगवान महावीर से लेकर सभी सभी तीर्थनकर साथ ही लोकदेवता कल्ला जी बाबा रामदेव गोगाजी कल्लाजी सहित सैकड़ो लोकदेवता, जाम्भा जी परमार(विश्नोई मत) हुएं। ये सब क्षत्रिय राजपूत थे,क्या इनको भी मानना छोड़ दोगे?

Pushpendra Rana ये ही भर, मेव, चेरो आदि इनके पूर्वजो को परेशान करते थे, इनको लूटते थे. हिन्दुओ को पूजा पाठ तक नही करने देते थे. इनको क्षत्रियो ने ही इनके आतंक से मुक्ति दिलाई. इस बारे में ग्रन्थ भरे पड़े है. आज वोट के लिए ये आतंकी ही इनके हीरो हो गए और क्षत्रिय दुश्मन. इन जैसो पे कभी भरोसा ही नही करना चाहिए.

Dheer Singh Pundir इन संघियो का अस्तित्व राजपूतो के बलिदान पर टिका हुआ है पर इन अहसानफरमाइशो को सिर्फ नकारात्मक पक्ष ही दिखाई देता है. इतिहास की जानकारी करिये.  बाप्पा रावल और नागभट परिहार की वजह से ही अरब हमलावर सिंध से आगे भारत में पुरे 500 साल तक नही घुस पाए. वो अरब जो इस्लाम की स्थापना के कुछ ही दशको में पुरे मध्य पूर्व एशिया मिस्र ईरान इराक सीरिया जीतते हुए स्पेन तक जा पहुंचे थे. वो भारत में विफल हुए क्योंकि यहाँ बाप्पा रावल और नागभट परिहार ने राजस्थान के युद्ध में उन्हें करारी मार लगाई. जितनी सूझ बूझ और वीरता से राजपूतो ने अरबो तुर्को से देश की रक्षा की ऐसा उदाहरण विश्व में दूसरा नही है.

मूल खबर….

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भारतीय मोहतरमा को एक पाकिस्तानी के प्यार में पड़ने की ये सजा मिली, न्यूड तस्वीरें आनलाइन हो गईं

Yashwant Singh : एक भारतीय मोहतरमा ने एक पाकिस्तानी से चैट किया और प्यार में पड़कर अपनी कई न्यूड तस्वीरें भेज डालीं. उन परदेसी भाई साहब ने एक रोज सब कुछ आनलाइन कर दिया. साथ ही मोहतरमा के सारे एफबी मित्रों के पास उस आनलाइन फोटोज के लिंक भेज दिए. मेरे पास भी आई हैं कुछ नंगी तस्वीरें लेकिन मैंने एक आंख से देखा और दूसरी आंख से डिलीट का बटन दबा दिया. सुना है वस्त्र विहीन तस्वीरें देख कुछ करीबियों की जुगलबंदियां टूट गईं और दिल इधर उधर छटपटाते बिखरे पाए गए.

पर सवाल वही है कि अगर मर्द की न्यूड फोटो लीक हो तो मर्दों वाली बात, लेकिन औरत की हो तो वो क्यों हो गई बेसवा? प्यार में सारा खेल शरीर का ही क्यों रखते हो, कुछ दिमाग का भी रखा करो. शरीर दागी हो गया (चलो मान लेते हैं) तो दिमाग तो क्रिएटिव है, सेंसेटिव है, कुछ नया रचेगा, फिर से वो छपेगा और फिर चल निकल सकती हैं जुगलबंदियां.

ये पूरा खारिज और पूरा कुबूल वाला खेल मुझे समझ नहीं आता. जितना अच्छा है, उसे प्यार करो. जो खराब लगे, उसे इगनोर करो. और वैसे भी, पत्थर वो मारे जिसने पाप न किया हो. देह के दायरे में उम्र के आखिरी पड़ाव तक डूबे रहना कहां की होशियारी है. पाप करिए, लेकिन उससे सबक लेकर आगे बढ़िए, रिपीट मत करिए, अटकिए मत.

का कहूं, कछु कहा नहीं जाए. बिन कहे भी रहा नहीं जाए.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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हम जीत गए, फेसबुक हार गया

Rahul Pandey : हम जीत गए, फेसबुक हार गया। आज सोमवार को ट्राई ने फेसबुक और रि‍लायंस को उसकी औकात बताते हुए हम लोगों की नेट न्‍यूट्रैलि‍टी की पैरोकारी को वि‍जयी बनाया है। अब फेसबुक अपने यहां फ्री बेसि‍क्‍स का फर्जीवाड़ा नहीं कर पाएगा। ट्राई ने साफ कहा है कि सर्विस प्रोवाइडर अलग-अलग कंटेंट के लिए डिफरेंट टैरिफ नहीं ले पाएंगे। आज ही इसका नोटिफि‍केशन जारी कि‍या गया है जो अभी से ही सारी टेलीकॉम कंपनि‍यों पर लागू है। न माना तो हर दि‍न पचास हजार रुपये जुर्माना भी देना पड़ेगा और ट्राई उस कंपनी का टैरि‍फ वापस भी ले लेगा।

इतना ही नहीं, कुछ कंपनि‍यां ऐसी हैं जो कहती फि‍रती हैं कि उनका कनेक्‍शन लि‍या तो फेसबुक या ट्वि‍टर फ्री में चलाने को मि‍लेगा, उनपर भी तुरंत रोक लगा दी गई है। अगर कोई कंपनी ऐसा कहती मि‍ले या दि‍खे तो तुरंत ट्राई को उसकी वेबसाइट पर जाकर मैसेज करें, उस कंपनी की वाट लगा दी जाएगी। सबसे ज्‍यादा नज़र रखने की जरूरत है रि‍लायंस पर क्‍योंकि ये कंपनी इतनी बेहया है कि बगैर कि‍सी की इजाजत के ये सारा भ्रष्‍टाचार ये पि‍छले साल अक्‍टूबर से ही कर रही है।

हम नेट न्‍यूट्रैलि‍टी चाहने वाले तकरीबन 6 लाख लोग थे जि‍नने ट्राई को फेसबुक और रि‍लायंस के गठजोड़ से होने वाले महाभ्रष्‍टाचार पर रोक लगाने के लि‍ए अपने अपने तर्क रखे थे। अब ये दीगर बात है कि फर्जीवाड़े से फेसबुक ने अपने 32 लाख लोगों को बरगलाया और फ्री बेसि‍क्‍स के समर्थन में ट्राई को मेल कराया। फि‍र भी हमने हि‍म्‍मत नहीं हारी और लगातार इस फर्जीवाड़े के बारे में बताते रहे, लड़ते रहे। आने वाले कुछ दि‍नों के लि‍ए ही सही, लेकि‍न हम जीत गए। अब देश में सबको समान दर पर इंटरनेट यूज करने को मि‍लेगा। सभी वेबसाइट्स समान दर पर ही खुलेंगी। बधाई।

पत्रकार राहुल पांडेय के फेसबुक वॉल से. राहुल पांडेय ने इस प्रकरण पर फेसबुक पर पूरी सीरिज चलाई थी, ‘फेसबुक के फ्रॉड’ शीर्षक से जिसे आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

फेसबुक के फ्रॉड

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जिसे कालगर्ल बताया, उसने आरोप लगाने वाले पत्रकार का अश्लील चैट किया सार्वजनिक

पत्रकार रमेश ठाकुर ने जिस लड़की को कालगर्ल, चीटर बताया और उसकी फोटो समेत उसके बारे में ढेर सारी बुरी बातें ह्वाट्सएप, मेल और फेसबुक पर अपने दोस्तों को शेयर किया, उस लड़की ने सामने आकर पत्रकार से किए गए चैट को सार्वजनिक कर दिया है. सबसे पहले रमेश ठाकुर की वाल से वो पोस्ट जिसमें उन्होंने लड़की का नाम, फोटो, मोबाइल नंबर आदि देकर उसके बारे में ढेर सारी नकारात्मक बातें कही हैं और गंभीर आरोप लगाए हैं. कानूनी प्रावधानों के कारण लड़की की पहचान छुपाने के लिए उसके नाम मोबाइल नंबर व फोटो को ब्लैक कर दिया गया है.

और, ये वो चैट हैं, जिसे लड़की ने सार्वजनिक कर दिया है…

संबंधित मूल पोस्ट>

पत्रकार रमेश ठाकुर ने चीटिंग का आरोप लगाया तो लड़की ने अश्लील चैट किया सार्वजनिक

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लड़की सेक्स करने से मना कर दे तो बदनाम कर देते हैं…

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पत्रकार रमेश ठाकुर ने ‘कालगर्ल’ होने का आरोप लगाया तो लड़की बोली- ‘अश्लील चैट करता था’

पत्रकार रमेश ठाकुर पर एक लड़की ने बदनाम करने का आरोप लगाया है. उसने वो चैट सार्वजनिक कर दिया है जिसमें रमेश ठाकुर लड़की से अश्लील बातें कर रहे हैं. इससे पहले लड़की पर रमेश ठाकुर ने मदद मांगने के नाम पर पुलिस व पत्रकार को भ्रमित करने, पैसे मांगने, चीटिंग करने समेत कई किस्म के गंभीर आरोप लगाए थे. बाद में जब ये आरोप लड़की तक पहुंचे तो उसने पत्रकार पर अश्लील बातें करने का आरोप लगाया और पूरे चैट को सार्वजनिक कर दिया.

पत्रकार रमेश ठाकुर का कहना है कि लड़की खुद को दिल्ली निवासी और देहरादून में बीबीए की पढ़ाई करने वाली बता रही थी. उसने फेसबुक पर संपर्क कर खुद को छेड़छाड़ की पीड़ित बताया और मदद मांगी. रमेश के मुताबिक उनने देहरादून के पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर मामले के बारे में जानकारी दी. रमेश का कहना है कि एसएसपी ने लड़की से संपर्क किया और उसके बताए जगह पर पुलिस पहुंची लेकिन वहां लड़की नहीं मिली.

रमेश के मुताबिक इसके कुछ देर बाद फिर लड़की का फोन आया. उसने बताया कि वह वहां से जान बचाकर भाग गई है. उसने खुद के फोन को दिल्ली से 497 रुपये से रिचार्ज कराने की मदद मांगी ताकि वह पैरेंट्स से संपर्क कर सके. रमेश ने बताया कि उन्होंने लड़की का फोन रिचार्ज करा दिया. उसके बाद उसने कोई संपर्क नहीं किया. पुलिस काफी समय तक परेशान रही. रमेश आगे बताते हैं कि 24 जनवरी को रात चार बजे फिर लड़की ने फोन किया. लड़की ने बताया कि उसका फोन टूट गया है और 6500 सौ रुपए किसी तरह भिजवा दो.

रमेश के मुताबिक वह समझ गए कि लड़की चीट कर रही है. उन्होंने दिल्ली साइबर सेल में संपर्क कर पूरी कहानी बताई. साइबर सेल ने लड़की के फोन नंबर को ट्रैक किया तो पता चला उसकी लोकेशन दिल्ली की है. रमेश यहीं आगे नहीं रुकते. वह आरोप लगाते हैं कि लड़की के नंबर की डिटेल निकाली तो पता चला कि यह किसी स्कार्ट यानी कालगर्ल का नंबर है.

उधर, लड़की ने भड़ास से संपर्क कर आरोप लगाया कि उसके साथ पत्रकार रमेश ठाकुर गंदी बातें करता था. वह जब उसकी गंदी बातों के जाल में नहीं आई तो उसने बदनाम करने के वास्ते एक गंदी कहानी गढ़ी और ह्वाट्सएप समेत कई जगहों पर भेज दिया. लड़की ने रमेश ठाकुर के चैट के कुछ अंश सार्वजनिक किए हैं जिससे पता चलता है कि पत्रकार रमेश ठाकुर वाकई अश्लील बातें कर रहे हैं. लड़की ने जो मैसेज भड़ास को भेजा है, वह नीचे दिया जा रहा है: 

bhaiya mjhe esne bdnam kar dia plz help me.

kal raat ko isne mjhse bat k. me mana nahi kar rahi k maine help mangi, bt isne mjhe kaha kbhi apni nangi pic do or dost k naam par mjhe bolta mere sath rat guzaro, malamal kar dunga.

agar mjhe aisa karna hota na me ye msg nh karti but isne mjhe ye sab karne par majbur kia sir.

meri koi galti nh h.

wait.

mere iski kch chat h. me send karti hu.

ye dekho chat.

isko kya kahoge jo isne mjhse kaha.

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रीता बहुगुणा को परेशान करने के लिए फेसबुक पर कट्टरपंथी हिंदूदवादी ग्रुप ने किया कारनामा, मुकदमा दर्ज

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता व विधायक रीता बहुगुणा जोशी ने फेसबुक और कुछ अन्य सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री डाले जाने के आरोप में शुक्रवार को अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। रीता ने यहां संवाददाताओं को बताया कि कुछ शरारती और कट्टरपंथी तत्वों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत उनकी फोटो सहित झूठा बयान फेसबुक और कुछ अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों पर पोस्ट किया गया है। इसमें अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उनका निजी मोबाइल नंबर डाला गया है और लोगों से अपील की गई है कि वे इस पोस्ट को शेयर करें और रीता जोशी को फोन करके परेशान करें।

रीता ने बताया कि इसके खिलाफ उन्होंने हजरतगंज कोतवाली के साइबर अपराध प्रकोष्ठ में मुकदमा दर्ज कराया है। रीता ने कहा कि जो बयान उनके नाम से पोस्ट किया गया है, वह पूर्णतया भ्रामक और झूठा है। यह उनकी छवि बिगाड़ने और हिंदू विरोधी करार देते हुए लोगों को उनके विरुद्ध उकसाने का भाजपा व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का घिनौना प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली, बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश के विभिन्न चुनावों में मात खाने के बाद भगवा दल अपने प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बना रहा है और वह उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर धार्मिक उन्माद फैलाकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहता है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष राज्यसभा सदस्य पीएल पूनिया ने रीता के आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि झूठे प्रचार के जरिए कांग्रेस की प्रवक्ता के साथ-साथ पार्टी की छवि बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

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केजरीवाल पर निशाना साध प्रशांत भूषण ने काटजू के तर्क को गलत बताया तो जवाब में काटजू ने लिखा लंबा चौड़ा मेल…

Markandey Katju : Mr. Shanti Bhushan’s response to my article in scroll.in in which I said that the Delhi Govt. is a state, and is empowered to constitute a Commission of Inquiry. I have taken his permission to post his email to me…

Justice Katju is totally wrong

Delhi being the capital of India, having the embassies of the entire world located therein, the President of India, the Parliament of India, the Prime Minister, the entire cabinet, etc. it could not belong to the people of Delhi only. It belongs to the people of the whole country.It is the govt elected by the people of the entire country who have to administer Delhi.

This is the reason for enacting Art 239 AA (7) empowering Parliament to enact a law for supplementing the provisions of Part VIII which could even go to the extent of amending that Part .In Fact this power was exercised by the Parliament by enacting the Administration of the National Territory Act.

A look at the provisions of this Act would show that neither the Delhi govt nor even the Delhi Legislative Assembly have been given any real powers.Their function even on subjects not excluded from their jurisdiction is only to assist the Central Govt through its representative the Lt Governor. All powers are rightly with the Central Govt alone.Any exercise of legislative power or executive power requires the approval of the Lt Governor.

It may hurt the ego of Arvind Kejriwal but the constitutional position is that he is only a Chief Minister in name but is effectively only a subordinate officer of the Lt Governor. His role as CM is only ceremonial.

xxx

Markandey Katju : My reply to Mr. Shanti Bhushan..

Dear Shanti Bhushanji,

I have read your email. So according to you Delhi voters wasted their time and money voting for a ceremonial body, and you made a substantial financial contribution also to this ceremonial body.

By your logic Delhiites were cheated and deceived into thinking that they were electing a legislative ( not a merely administrative ) body, and the only authority in Delhi is the unelected chamcha of the central govt, Najeeb Jung, while elected functionaries are only flowerpots.

I find your logic totally unacceptable in a democratic country.

Except for land, police and public order, the Delhi legislature can legislate, and the Delhi Govt. can deal with, all matters in the State and Concurrent List. But how can they legislate and deal with them if they cannot even inquire into them ? Sports is a matter within entry 33 of the state list, and inquiries are a matter covered by entry 45 of the concurrent list.

Hence a purposive, and not literal interpretation has to be given to the word ‘state’ in section 3 of the Commissions of Inquiry Act, 1952. Several decisions of the Indian Supreme Court, as well as English Courts, have adopted the purposive approach.

You write :

” A look at the provisions of this Act would show that neither the Delhi govt nor even the Delhi Legislative Assembly have been given any real powers.Their function even on subjects not excluded from their jurisdiction is only to assist the Central Govt through its representative the Lt Governor. All powers are rightly with the central govt alone “

So according to you, the Delhi C.M. other Delhi Ministers, and MLAs are only civil servants who are subordinate to the Central Govt. and their job is only to assist the Central Govt. With respect, I find this a strange logic.. If your statement is accepted, Article 239AA becomes redundant, and Delhi reverts to becoming a purely administrative unit.

Your reference to Article 239AA(7) is totally misplaced. That provision reads :
” (a) Parliament may, by law, make provisions for giving effect to, or supplementing provisions contained in the foregoing clauses and for all matter incidental or consequential thereto .

(b) Any such law as is referred to in sub-clause (a) shall not be deemed to be an amendment of this constitution for the purposes of article 368 not withstanding that it contains any provision which amends or has the effect of amending this constitution. “

A perusal of the above shows that it only empowers Parliament to make supplementary, incidental or consequential laws. It does not derogate from the legislative powers of the Delhi Legislature on matters on which it is competent to legislate.

I may mention that by virtue of Articles 249 and 250 of the Constitution in some situations Parliament can legislate on matters covered by the state list.
Regards

Markandey Katju

फेसबुक से.

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अपने यूजर्स का शोषण करने वाले फेसबुक को छोड़िए, TSU.CO पर आइए और जमकर कमाइए…

फेसबुक जैसी सोशल मीडिया साइट पर यदि आप कोई कंटेंट डालते हैं तो संतोष सिर्फ लाइक या कमेंट से ही होना पड़ता है. कैसा हो कि यदि इस कंटेंट की लोकप्रियता के आधार पर पैसा भी मिल जाए. जब ऐसा फॉर्मूला लेकर आई एक कंपनी TSU.CO तो फेसबुक ने त्‍योरियां चढ़ा लीं. इंस्टाग्राम और व्हाट्सअप जैसे पॉपुलर प्लैटफार्म की मालिक सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक 300 बिलियन डॉलर (दो लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा की हो गई है. कमाई का फंडा यही है कि आप जो भी कंटेंट इन प्लेहटफॉर्म पर शेयर करते हैं, उसके आसपास ये एड लगाती हैं. जितना ज्या दा कंटेंट देखा जाएगा, फेसबुक का उतना फायदा. लेकिन, अब एक और सोशल मीडिया प्लेंटफार्म आया है, जिसने फेसबुक की नींद उड़ा दी है. क्यों कि उसे अपनी कमाई खतरे में पड़ती दिख रही है. जानिए क्याे है पूरा मामला…

पिछले कुछ महीनों से फेसबुक अपने प्लैटफॉर्म से वेबसाइट TSU.CO से सबंधित सभी पोस्ट ब्लॉक कर रही है. फेसबुक ने लगभग 10 लाख ऐसे पोस्ट (फोटो, विडियो और आर्टिकल) डिलीट कर दिए हैं जिसमें TSU.CO लिखा था. फेसबुक का दावा है कि यह एक स्पैम है. हालांकि अमेरिका के एक प्रमुख मीडिया हाउस द्वारा छपी खबर के मुताबिक TSU.CO ने फेसबुक के रेवेन्यू मॉडल पर बड़ा हमला किया है. इस वेबसाइट के मुताबिक, अब आप अपने कंटेन्ट (फोटो, विडियो और आर्टिकल) को फेसबुक पर फ्री में अपलोड करने की जगह उससे मोटी कमाई भी कर सकते हैं. इस कमाई के साथ अपने यार-दोस्तों से इस कंटेंट की शेयरिंग सुविधा मुफ्त ही रहेगी.

अमेरिका में रजिस्टर्ड इस कंपनी में फिलहाल 50 कर्मचारी है. TSU.CO के प्रमुख सेबैस्टियन सोब्याक का दावा है कि जहां फेसबुक अपनी वेजसाइट पर एडवर्टाइजिंग से हो रही पूरी कमाई खुद रख रहा है, वहीं वे इस रेवेन्यू से महज 10 फीसदी कमाई करेंगे और बाकी 90 फीसदी अपने यूजरों को दे देंगे. उदाहरण के लिए यदि किसी कंटेंट पर सौ रुपए का एड पब्लिश होता है. तो दस रुपए कंपनी रखेगी, 45 रुपए उस कंटेंट के पब्लिशर यानी उस अकाउंट वाले को मिलेगा और बाकी 45 उस अकाउंट के सदस्यों में बांट दिया जाएगा. सोशल मीडिया का यह बिजनेस मॉडल रेवेन्यू शेयरिंग और चेन मार्केटिंग पर आधारित है.

अब यदि TSU.CO ने ये ऑफर दिया है तो इससे फेसबुक को क्‍या आपत्ति होनी थी? दरअसल, इस वेबसाइट पर अकाउंट खोलने वाले यूजर अपनी कम्‍युनिटी को बड़ा करने के लिए फेसबुक का सहारा ले रहे हैं. वे फेसबुक पर अपने मित्रों को TSU.CO ज्‍वाइन करने के लिए न्‍यौता देते हैं. ये इनवाइट इतने ज्‍यादा हो गए हैं कि फेसबुक को स्‍पैम लगने लगे हैं. फेसबुक का कहना है कि लोग पैसा कमाने के लिए स्‍पैम इनवाट भेज रहे हैं. हालांकि, इस कारोबार को समझने वाले कहते हैं कि पूरा मामला कमाई से जुड़ा है. TSU.CO हूबहू फेसबुक जैसा ही है, बस फर्क यह है कि वहां उसे पैसा भी मिल रहा है. ऐसे में फेसबुक को डर है कि TSU.CO ज्‍वाइन करने के लिए भेजा गया हर इनवाइट फेसबुक यूजर की संख्‍या घटाएगा.

फिलहाल तो सोशल मीडिया की दुनिया में फेसबुक ही दबंग है. लेकिन, उससे सवाल तो किया जा रहा है कि उसका TSU.CO को इस तरह ब्‍लॉक करना क्‍या सही है?

आईचौक डाट इन पर प्रकाशित राहुल मिश्र की रिपोर्ट.

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श्रुति सेठ, कविता कृष्णन, शर्मिला टैगोर, शोभा डे आदि को रंडी, वेश्या, चरित्रहीन कहने वाले ये लोग कौन हैं?

Krishna Kant : भारतीय सवर्ण मर्द के पास महिला की बात का जवाब नहीं होता तो तुरंत चरित्र हनन पर उतर आता है. यह पाखंडी समाज है इसलिए किसी का भी चरित्र हनन बहुत कारगर हथियार है. प्राय: पति जब पत्नी से हारता है तो लांछन लगा देता है. कोई किसी से हारता है तो उसके चरित्र पर कीचड़ उचाल देता है. सोशल मीडिया पर महिलाओं को गालियां देने वाले कौन लोग हैं?

श्रुति सेठ, कविता कृष्णन, शर्मिला टैगोर, शोभा डे… आदि को लेकर चारित्रिक अभियान चलाने वाले कौन लोग हैं? ये ऐसे गिरे हुए गलीज संस्कारी हैं कि यदि सुषमा स्वराज भी मोदी या संघ पर उंगली उठा दें तो ये लोग उन जैसी भद्र महिला के साथ भी यही करेंगे. सोनिया गांधी को लेकर अश्लील चुटकुले पिछले कुछ सालों में खूब मजे लेकर शेयर किए गए. गांधी और नेहरू की फोटोशाप्‍ड पिक्‍चर पर इन सिपाहियों ने बड़ी मेहनत की है.

इनकी खासियत देखिए कि ये माताओं बहनों की इज्जत के लिए ही जीते हैं. स्वनामधन्य संस्कारवान होते हैं. ईश्‍वर में जान देने की हद तक भरोसा है. गोमूत्र तक का अपमान नहीं सह सकते. उस संगठन के समर्थक हैं जो 90 साल तक मेहनत करके इनका चरित्र निर्माण कर पाया है. ये भारत मां की अस्मिता के रखवाले हैं. देवी की पूजा करते हैं. गाय माता के लिए सर काटने और कटाने के लिए तैयार हैं.

दलितों, महिलाओं, मुसलमानों से घृणा करने वाले लोगों में एक खास समानता है कि वे सवर्ण हिंदू हैं और आरएसएस समर्थक हैं. ये खास लोगों की खास प्रवृत्ति है जिसके मूल में वर्णव्‍यवस्‍था है. वह वर्णव्‍यवस्‍था जहां दलित और महिलाएं अछूत हैं, कमतर हैं. मुसलमान म्‍लेच्‍छ है. जहां भी स्त्रियों की असहमति का सामना हो, उन्‍हें रंडी बता देते हैं. कुछ नमूने उपर और नीचे दिए गए हैं, देखें.

युवा पत्रकार कृष्णकांत के फेसबुक वॉल से.

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भड़ास वाले यशवंत जैसे नमूने ने आज मुझे काफी मेंटल टार्चर किया : अर्चना गौतम

Archana Gautam : कोई बताएगा का फेसबुक चैट का स्क्रीन शॉट निकलते कैसे हैं? एक नमूने का निकालना है, भड़ास4मीडिया का यशवंत सिंह है कोई। पहले तो बोलता है कि आप फेक हैं और फिर नंबर मांगता है मेरी कन्फर्मेशन के लिए। उसके बाद कहता है कि तुममें बहुत घमंड है और ईश्वर उसे जरूर तोड़ेंगे और फिर गाली दे कर निकल जाता है। ऐसे नमूनों को भी देखना चाहिए कभी-कभी।

xxx

ये सबसे आसान तरीका है लड़की का ध्यान अपनी तरफ खीचने का कि उसे फेक बोलो। क्यूंकि किसी की पहचान पर शक करने से आप अपने अंट -शंट के लिए जवाबदेह नहीं रह जाते क्यूंकि आप ऐसा कुछ एक आइडेंटिटी खोज के अनुरूप ऐसा करते हैं। ऊपर से अगर आपके पुरुषत्व दम्भ पर चोट लग जाए तो फिर श्राप से ले कर पता नहीं क्या -क्या। तो इन महोदय ने तो पहले फ़ोन नंबर इस बहाने माँगा की वो मेरे काम चलाऊ पोस्ट को अपने पेज पर छापेंगे और साथ में हथियार रखा फेक आईडी आर्गुमेंट का। जब फ़ोन नंबर की बात नहीं गली तो फिर अपना हथियार ले कर शुरू हो गए की मेरी आईडी फेक और मुझमे बहुत घमंड है।

लो भाई मैंने नंबर नहीं दिया और अनफ्रैंड करने को बोला तो मैं घमंडी लेकिन इनके शक करने का अधिकार बरक़रार। जब लगा कि बस अब कुछ नहीं बचा तो मेरे अकाउंट को बंद करने की धमकी दे कर ब्लॉक कर दिया। इन सब में मेरी गलती ये रही की इसको मैंने टाइम तक बर्दास्त किया शांत रहने और शांत करने की कोशिश की,मुझे ऐसा बिलकुल भी नहीं करना चाहिए था क्यूंकि ऐसा करने से मैं डिफेंसिव होती गयी। इस घटना ने अच्छा सबक दिया है।  इसने आज मुझे काफी मेन्टल टार्चर किया। लड़कियां प्लीज इस से दूर रहे।

फेसबुक पर सक्रिय किन्हीं अर्चना गौतम के वॉल से.


इसके आगे की कथा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करें…

सारा चैट सुरक्षित है, अपने लड़कियापे का नाजायज फायदा न उठाओ : यशवंत सिंह

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फेसबुक अपनी तरफ से कर रहा मेरा प्रचार, मैंने एक पैसा खर्च नहीं किया : बरखा दत्त

बरखा दत्त के स्पांसर्ड फेसबुकी पेज के बारे में भड़ास4मीडिया पर छपी खबर को लेकर ट्विटर पर बरखा दत्त ने अपना बयान ट्वीट के माध्यम से जारी किया. उन्होंने लोगों के सवाल उठाने पर अलग-अलग ट्वीट्स के जरिए जवाब देकर बताया कि उनकी बिना जानकारी के फेसबुक उनके पेज को अपने तरीके से प्रमोट कर रहा है. उन्होंने बताया कि फेसबुक की तरफ से उनके पास फोन आया था जिसमें ट्विटर की तरह एफबी पर भी सक्रिय होने के लिए अनुरोध किया गया. तब मैंने उन्हें कहा कि कोशिश करूंगी. ऐसे में एक भी पैसा देने का सवाल ही नहीं उठता. बिलकुल निराधार खबर भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित हुई है. 

 

बरखा दत्ता का कहना है कि उन्हें बताया गया कि फेसबुक कई पब्लिक पर्सनाल्टीज जिनमें पत्रकारों भी शामिल हैं, को अपनी तरफ से प्रमोट करता है, जैसे राहुल कंवल, शेखर गुप्ता, फिल्म स्टार्स शाहरुख खान, आमिर खान आदि. बरखा दत्त ने अपने फेसबुक पेज पर उनके नाम के नीचे स्पांसर्ड लिखे होने को लेकर उठाए गए सवाल पर भी जवाब दिया. इस संबंध में बरखा दत्त के जितने भी ट्वीट्स हैं, नीचे दिए जा रहे हैं.

barkha dutt ‏@BDUTT

rubbish. I have not paid anyone a single paisa. what are you talking about?

xxx

FB team asked me to be active on FB like on Twitter & I said sure, would try. No question of Money. Rubbish story.

xxx

It’s Facebook’s call  to underline our presence on its medium. I am owed an apology NOW.

xxx

FB promoting our presence – many of us who are journalists. Check it out.

xxx

It is appplicable to ALL public personalities being promoted by them including many journalists. These include, I am told many journos- rahul, Shekhar, me, film stars, SRK, Aamir.

xxx

just asked facebook why it says sponsored. They say Facebook is promoting public personalities.

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पैसे वाली पत्रकार हैं बरखा दत्त, फेसबुक लाइक तक खरीद लेती हैं!

Yashwant Singh : बरखा दत्त इन दिनों फेसबुक पर खूब सक्रिय हो गई हैं. उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर इस बाबत लिखा भी है. साथ ही कई कहानियां किस्से विचार शेयर करना शुरू कर दिया है. बरखा समेत ज्यादातर अंग्रेजी पत्रकारों की प्रिय जगह ट्विटर है. लेकिन सेलेब्रिटी या बड़ा आदमी होने का जो नशा होता है, वह फेसबुक पर भी ले आता है, यह जताने दिखाने बताने के लिए यहां भी मेरे कम प्रशंसक, फैन, फालोअर, लाइकर नहीं हैं. सो, इसी क्रम में अब ताजा ताजा बरखा दत्त फेसबुक पर अवतरित हुई हैं और अपने पेज पर लाइक बढ़ाने के लिए फेसबुक को बाकायदा पैसा दिया है. यही कारण है कि आजकल फेसबुक यूज करने वाले भारतीयों को बरखा दत्त का पेज बिना लाइक किए दिख रहा है. पेज पर Barkha Dutt नाम के ठीक नीचे Sponsored लिखा है.

इस Sponsored लिखे होने का मतलब हमको आपको सबको पता है. फेसबुक को पैसा देकर उसके जरिए जबरन पेज लाइक कराया जाना. सो, लगभग एक लाख लाइक के करीब पहुंचने वाला है बरखा का पेज. 84 हजार से ज्यादा लाइक तो उपरोक्त स्क्रीनशाट में दिख रहा है. अब जब आप ये पढ़ रहे होंगे, हो सकता है लाइक का आंकड़ा काफी आगे निकल गया होगा. अब ये नहीं पता मुझे कि उन्होंने पांच लाख लाइक खरीदने के लिए फेसबुक को पैसा दिया है या सिर्फ दो चार लाख. जो भी हो. हम हिंदी वाले तो इतने पैसे में कई दिन सुकून से खा पी सकते थे, घूमघाम सकते थे, घर परिवार को घुमा सकते थे. छुट्टी लेकर अपने ओरीजनल घर-गांव-देहात जा सकते थे क्योंकि हम हिंदी वाले थोड़ा कम कमाते हैं, इसलिए थोड़ा कम खर्च कर पाते हैं. कम ही हिंदी वाले होंगे जो फेसबुक पेज पर लाइक खरीदते होंगे, हां- दलालों, मालिकों, लायजनरों आदि इत्यादि की आधुनिक कैटगरी को छोड़कर.

फेसबुक पर कुछ रोज पहले अपनी सक्रियता बढ़ाने के दौरान बरखा की लिखी गई वो शुरुआती पोस्ट जिसे फेसबुक को पैसा देकर Sponsored करवाने के बाद लाइक हासिल करने हेतु एफबी के जन-जन तक घुमवाया, ये है: ”प्रभा दत्त (बरखा दत्त की मां) के युद्ध मोर्चे पर रिपोर्टिंग हेतु जाने के अनुरोध को एचटी प्रबंधन ने ठुकरा दिया था”

फिलहाल अभी तक मैंने बरखा दत्त का फेसबुक पेज लाइक नहीं किया है जबकि पिछले कई रोज से फेसबुक बार बार मेरे आगे इस प्रायोजित विज्ञापन को मौलिक तरीके से पेश कर लाइक करने के लिए लपलपाते हुए ललचा रहा है. अगर ये पेज स्पांसर्ड न होता तो शायद मैं लाइक कर लेता, लेकिन खरीदे हुए या बिके हुए, जो कह लीजिए, पेज को लाइक देने का मतलब होता है कि आप फेसबुक की दुकान को पैसा देकर भारतीय मुद्रा को विदेश तो भेज ही रहे हैं, फर्जी तरीके से खुद को नामवर बताने जताने दिखाने के ट्रेंड को भी बढ़ावा दे रहे हैं.

वैसे बहुत सारे हिंदी पट्टी वाले कह सकते हैं कि पैसा बरखा दत्त ने इमानदारी से कमाया है, उसे चाहे वो लाइक खरीदने में खर्च करें या घर में रखकर माचिस मारकर जला दें, आपको जलन कुढ़न खुजन क्यों है? तो भइया, मेरा जवाब भी सुनते जाइए. बरखा दत्त अगर कोई कंपनी होतीं, किसी कंपनी की मालिकन होतीं, कोई कारपोरेट होतीं, कोई पीआर एजेंसी होतीं, कोई प्रोडक्ट होतीं तो उनके प्रचार प्रसार पर मुझे कोई आपत्ति न होती. फेसबुक पर साड़ियों से लेकर योगासन तक के खूब स्पांसर्ड पेज टहलते रहते हैं और हम आप सब जाने-अनजाने उसे लाइक मारकर फेसबुक वाले से लेकर उसके क्लाइंट तक को खुश किया करते हैं.

पर जब कोई पत्रकार ऐसा करता है तो उससे यह अपेक्षा नहीं की जाती. कल को कोई जज साहब लाइक खरीदने लगें तो फिर हो गया काम. जिन चार स्तंभों की हम बात करते हैं, उसमें से प्रत्येक की गरिमा होती है. विशेषकर मीडिया तो ज्यादा जिम्मेदारी वाला या यूं कहिए ज्यादा जनता के करीब खंभा होता है. पर अगर इसी खंभे के लोग कारपोरेट सरीखा व्यवहार करने लगे तो रिलायंस के कस्टमर केयर एक्जीक्यूटिव और हमारे पत्रकारों के बीच फर्क क्या बचेगा. अंतत: जब दोनों का मकसद अपना हित साधन है, अपने कंपनियों का हित साधन है, तो काहे को एक खुद को चौथा खंभा माने और दूसरा देश का कारपोरेट घराना. सोचिए सोचिए. वइसे, पइसा प्रधान इस दौर में सोचने विचारने लिखने का काम भी आजकल पैसे ले देकर ही होते हैं, ऐसे में अगर आप नहीं सोचते हैं तो हम बुरा बिलकुल नहीं मानेंगे. 🙂   

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. संपर्क: yashwant@bhadas4media.com


उपरोक्त पोस्ट पर बरखा दत्त ने अपनी तरफ से ट्वीटर पर सफाई दी / जवाब दिया. इस प्रकरण से संबंधित उनके सारे ट्वीट और उनकी सफाई का भड़ास4मीडिया पर प्रमुखता से प्रकाशन किया गया है जिसे आप नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं:

फेसबुक अपनी तरफ से कर रहा मेरा प्रचार, मैंने एक पैसा खर्च नहीं किया : बरखा दत्त

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दिग्विजय सिंह और अमृता राय की शादी ने समाज को नया रास्ता दिखाया है

Sadhvi Meenu Jain : खबर है कि दिग्विजय सिंह ने अमृता राय से विवाह कर लिया है. खबर सुनकर चुस्की लेने या सिंह की नैतिकता / अनैतिकता से इतर मैं इस बहाने एक दूसरे विषय पर बात करना चाहती हूँ. हमारा समाज विधवा / विधुर / तलाकशुदा वरिष्ठ नागरिकों को दोबारा से एक नया जीवनसाथी चुनने की इजाजत क्यों नहीं देता और जो समाज की धारणा के विपरीत जाकर ऐसा कर भी लेते हैं उनका मखौल उड़ाया जाता है. उन पर ‘चढ़ी जवानी बुढ्ढे नूं’ ‘बुड्ढा जवान हो गया’ ‘तीर कमान हो गया’ ‘बुड्ढी घोड़ी, लाल लगाम’ जैसी फब्तियां कसी जाती हैं.

क्यों भई. ऐसा क्या गुनाह कर दिया उन्होंने? न्यूक्लियर परिवारों के इस युग में जब बेटे-बेटियां अपनी अपनी गृहस्थी, परिवार व समाज की जिम्मेदारियों में व्यस्त हो जाते हैं और जीवन की आपाधापी के चलते माता-पिता से बात करने तक की फुरसत उन्हें नहीं मिलती तब ऐसे में इन बुजुर्गों का एकाकीपन इन्हें काटने को दौड़ता है.

पति या पत्नी में से एक की मृत्यु हो जाए तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं. कहां जाएं. किसके साथ बांटें ये अपने एकाकीपन की व्यथा? यूं ही घुट-घुट कर मर जाएं? पहले ज़माना था जब परिवार संयुक्त होते थे. बुजुर्गों का मन लगा रहता था. लेकिन आज के घोर आत्मकेंद्रित परिवारों में बुजुर्गों के लिए जगह ही कहां बची है? ऐसे में अगर वे अपना अकेलापन बांटने के लिए विवाह कर लेते हैं तो इसमें बुराई क्या है? जीवन के इस पड़ाव पर स्त्री हो या पुरुष, दैहिक सुख की अपेक्षा साहचर्य सुख खोजता है.

बुजुर्गों के कल्याण के लिए काम करने वाली मुम्बई की एक स्वयंसेवी संस्था के साथ वर्षों से जुड़े होने के कारण एकाकीपन भोगते बुजुर्गों की पीड़ा को बहुत नज़दीक से महसूस किया है. कई ऐसे बच्चों को मैं व्यक्तिगत रूप से जानती हूं जिन्होंने पीछे अकेले रह गए माता या पिता के लिए स्वयं जीवनसाथी की तलाश कर उनका विवाह करवाया है. कई ऐसी स्वयंसेवी संस्थाएं हैं जो अकेले बुजुर्गों के लिए सहचर तलाशने का काम कर रही हैं.

तो मित्रों, बचपना छोड़िए और कल्पना कीजिए उस स्थिति की जब आपकी संतानें अपने-अपने परिवारों के साथ या तो विदेश चली गईं है या आपको अपने साथ नहीं रखना चाहती हैं और आपकी पत्नी या पति का देहांत हो चुका है और अकेले जीवन बिताना आपके बस की बात नहीं है. तब ऐसी स्थिति में क्या करेंगे आप? Please try to put yourself in their shoes. If you are able to sympathize and empathize with them, you will not ridicule them.

साध्वी मीनू जैन के फेसबुक वॉल से.


मूल खबर :

अमृता-दिग्विजय ने कर ली शादी, फेसबुक पर शेयर की दिल की बात

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अपनी नौकरी बचाने के लिए शशि शेखर नीचता पर उतर आये हैं

रमन सिंह : हिन्दुस्तान में साइन कराने का सिलसिला शुरू… अपनी नौकरी बचाने के लिए शशि शेखर नीचता पर उतार आये है. इसी का नतीजा है कि इन दिनों हिन्दुस्तान अखबार में कर्मचारियों से दूसरे विभाग में तबादले के कागज पर साइन कराने का दौर शुरू हो गया है. दिल्ली में तो खुद शशि शेखर जी साइन करा रहे हैं. साइन नहीँ करने वालों को निकालने की धमकी भी दी जा रही है.  मजीठिया से घबराया हिन्दुस्तान फिलहाल जिस कागज पर साइन करा रहा है उसमें भी कई फर्जीवाड़ा है. इसलिए नीचे के फोटो को आप ध्यान से पढ़िए. दो फोटो हैं, दोनों को ध्यान से देखिए. कई फर्जीवाड़े समझ में आएंगे. 

दोनों फोटो को आप अगर ध्यान से देखेंगे तो उसमें शशि शेखर का हस्ताक्षर अलग अलग है. अब आप पता लगाइये कि कौन सही है. दूसरा फर्जीवाड़ा ये है कि लैटर 29 मई 2015 को जारी हुआ है और लोगोँ से साइन सितम्बर में कराया जा रहा है. तीसरा फर्जीवाड़ा- जिस कागज पर साइन करा कर कर्मचारियों को हिन्दुस्तान अखबार से हटा कर इंटरनेट डिवीज़न में डाला जा रहा है उसका वितीय वर्ष 2014-15 है जबकि कागज 29 मई 2015 को जारी हुआ है.

फेसबुक पर सक्रिय किन्हीं रमन सिंह के वॉल से.

वो कौन सी दो तस्वीरें हैं जिनको ध्यान से देखने पर कई किस्म का फर्जीवाड़ा नजर आता है. उन दोनों तस्वीरों को देखने के लिए नीचे लिख कर आ रहे 2 या Next पर क्लिक कर दें>>

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सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही बाबा रामदेव और बालकृष्ण की ये तस्वीर, जानें क्यों…

 

जब तक कांग्रेस की सरकार केंद्र में थी, बाबा रामदेव रोज काला धन की हुंकार भरते थे. काला धन का हिसाब अपने भक्तों और देशवासियों को बताते थे कि अगर वो काला धन आ गया तो देश की सारी समस्याएं हल हो जाएंगी. काला धन के मुद्दे को नरेंद्र मोदी ने भी लपका और बाबा रामदेव की मुहिम को समर्थन किया. माना जाने लगा कि रामदेव और नरेंद्र मोदी की जोड़ी अगर जीतकर केंद्र में सरकार बनाने में सफल हो गई तो यह तो तय है कि देश में काला धन वापस आ जाएगा. लेकिन जोड़ी के जीतने और सरकार बनाने के बावजूद काला धन देश वापस नहीं आया.

मोदी के आदमियों ने तो अपने वोटरों को औकात बताने के लिए यहां तक कह दिया कि काला धन वाला नारा केवल नारा था यानि जुमला था, जनता को भरमाने, वोट खींचने के लिए. खैर, बेचारी जनता, वो तो अब पांच साल के लिए झेलने को मजबूर है. पर बाबा रामदेव ने गजब की चुप्पी साध रखी है. कुछ बोलते ही नहीं. काला धन को लेकर उनका अभियान भी शांत हो गया है.

इसी बीच सोशल मीडिया पर ढेर सारे लोग बाबा रामदेव से सवाल करने लगे कि आखिर वे काला धन के मसले पर केंद्र सरकार को घेरते क्यों नहीं, काला धन के लिए अब वो अभियान चलाते क्यों नहीं. वे काला धन पर अब कुछ बोलते क्यों नहीं? इसी बीच, कुछ लोगों ने बाबा रामदेव और उनके प्रधान शिष्य बालकृष्ण की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर यह कहते हुए शेयर कर दी कि देखिए, बाबा और उनके चेले काला धन खोजने में लगे हैं. इस मजेदार तस्वीर को काला धन खोज से जोड़ देने के बाद लोगों की हंसी रोके नहीं रुक रही है. जो भी इसे देख रहा है, अपने वाल पर शेयर कर रहा है.

तस्वीर में बाबा रामदेव और बालकृष्ण एक टीले नुमा पहाड़ी या पहाड़ी नुमा टीले, जो कह लीजिए, पर कुछ तलाश रहे हैं. जाहिर है, वह कोई जड़ी बूटी तलाश रहे होंगे, लेकिन काला धन तलाशने का जो जुमला सोशल मीडिया वालों ने इस तस्वीर के कैप्शन के रूप में फिट किया है, वह खूब हिट जा रहा है. लोग बाबा रामदेव से उम्मीद तो करते ही हैं कि संत होने के नाते वो अपनी चुप्पी का राज सच सच बताएंगे.

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एक पूर्व संपादक ने फैलाया झूठ!

आपके पीसी का विंडो करप्ट हो जाए तो अब आप कह सकते हैं कि यह आपके उस रिसर्च की वजह से हुआ जो आप ब्राम्हणवाद और केन्द्र सरकार के विरोध में कर रहे थे। आपके विंडो के करप्ट होने में सवर्णवादी साजिश है। दिलीप सी मंडल फेसबुक प्रकरण के बाद मुझे संदेह है कि इस तरह की बात कोई करे तो उसकी बात को सिरे से नकार दिया जाएगा। इस तरह के बिना सिर पैर की बात पर भी सहमति में सिर डुलाने वाले भक्तों की बड़ी संख्या है फेसबुक पर। मेरी आपत्ति इस तरह का झूठ फैलाने वालों से कम है क्योंकि उनके पास कथित तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी है, आप जो चाहें लिखें लेकिन तमाम कथित समाजवादी से लेकर कथित सवर्ण-विरोधी मानसिकता रखने वाले लोग बिना तथ्यों की जांच पड़ताल किए जब इस झूठ को प्रचारित करने के औजार बनते हैं तो दुख होता है।  दिलीप सी मंडल के फेसबुक प्रोफाइल को लेकर जो भ्रामक प्रचार पिछले कुछ समय से लगातार किया जा रहा था, उसे लेकर यह पोस्ट सिर्फ इसलिए लिख रहा हूं ताकि सनद रहे।

विनीता गौतम नाम की महिला की फेसबुक आईडी उसी दौरान ब्लॉक हुई थी, जब दिलीप के फेसबुक आई डी की खबर आई थी।  विनीता ने लिखा – ‘कोई बात नहीं आईडी प्रूव सबमिट कर दिया है। अब रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा। मैं ना पहले फेक थी ना बन पाऊंगी।’

वैसे दिलीप चन्द्र मंडल जिस समाज के कथित वकील बनकर लिखते पढ़ते हैं, उनके मदद का वक्त आता है तो अपना फेसबुक प्रोफाईल हाइड करके दिलीप मंडल की जगह दिलीप चन्द्र मंडल के नए अवतार में आ जाते हैं। समाज को नौकरी और आन्दोलन का फर्क भी गाहे बगाहे समझाते हैं। यह भी समझाते हैं कि इंडिया टूडे अलग माध्यम है और फेसबुक अलग माध्यम है। यही वजह रही होगी कि ‘आउट लुक’ बिना किसी दिलीप सी मंडल के भी बाबा साहब को कवर पर छाप देता है और दिलीप सी मंडल, ‘दिलीप सी मंडल’ होकर भी ‘पांडेयजी’ और ‘मिश्राजी’ के साथ इंडिया टूडे में अपने संपादक की नौकरी बजाने में व्यस्त रहते हैं। वे भूल जाते हैं, वंचितों को अवसर देने की बात।

यह बताना जरूरी है कि दिलीप सी मंडल, दिलीप मंडल वाली आईडी का विसर्जन अपने पुराने फेसबुक प्रोफाइल के साथ कर आए थे। नया ई मेल जिससे उन्होंने फेसबुक के कम्युनिकेशन के चीफ कारसन डाल्टन से कम्युनिकेशन किया, उसमें उनका नाम ‘मंडल’ नहीं बल्कि ‘मॉन्डल’ है। हाल में ही दिलीप के एक फर्जी प्रोफाइल की भी चर्चा हुई। जिसकी जानकारी दिलीप के ही एक फेसबुक स्टेटस से मिलती है। जिसमें वे इस तरह का फर्जी प्रोफाइल बनाने वालों को धमकाते हुए कहते हैं कि उनके पास साइबर एक्सपर्ट की टीम है और वे फर्जीवाड़ा करने वालों को देख लेंगे। दुख की बात यह है कि दिलीप ने अपने फेसबुक प्रोफाइल बंद होने के मामले में उस एक्सपर्ट टीम से ना जाने क्यों बात नहीं की और समाज में मिथ्या आरोपों को हवा लगने दी और एक झूठ फैलने दिया कि सरकार के इशारे पर उनके प्रोफाइल को बंद किया गया है।

मिस्टर कारसन का एक मेल दिलीप सी मंडल ने अपने फेसबुक वॉल पर शेयर किया है। जिसमें एक शब्द लिखा गया है और जवाब में दिलीप का लम्बा जवाब है। जिसका जवाब दूसरी तरफ से देना उचित नहीं समझा गया है। यहां कारसन से एक मित्र की बातचीत को शेयर कर रहा हूं। पढ़िए ध्यान से। इतना ही नहीं फोन पर फेसबुक की तरफ से एक प्रतिनिधि वर्निका गुप्ता ने मित्र से बातचीत की। बातचीत की रिकॉर्डिंग भी इन पंक्तियों के लेखक के पास है। जिसमें गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि जो भी हुआ वह तकनीकी एरर की वजह से हुआ। अब दिलीप कारसन के मेल में लिखे एक शब्द ‘वेरिफायड’ की जैसी चाहें व्याख्या करें। लेकिन यह फेसबुक है, यहां कोई झूठ लम्बे समय तक नहीं टिक सकता।

आशीष कुमार ‘अंशु’
Ungal Baz
Contact: +919868419453

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केंद्र सरकार बताए, सामग्री अपलोड करने का अधिकार फेसबुक, ट्विटर को है या नहीं – दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह उस अनुबंध को अदालत के समक्ष पेश करे जिससे यह पता लगाया जा सके कि फेसबुक (एफबी) व ट्विटर के पास सामग्री अपलोड करने का बौद्धिक संपदा अधिकार (आइपीआर) है। न्यायमूर्ति बीडी अहमद व संजीव सचदेव की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील संजय जैन ने इस बारे में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अगली सुनवाई 19 अगस्त को है। पेश मामले में भाजपा नेता केएन गोविंदाचार्य ने याचिका दायर की थी। याचिका में प्रधानमंत्री कार्यालय समेत अन्य मंत्रालयों के सोशल मीडिया का उपयोग करने पर आपत्ति जताई गई थी।

फेसबुक (एफबी) व ट्विटर के पास इससे पूर्व 7 मई को अदालत ने कहा था कि ऐसा लगता है कि जब सोशल मीडिया पर कोई सामग्री अपलोड होती है तो वेबसाइट को बिना रॉयल्टी दिए उसका आइपीआर मिल जाता है। अदालत ने कहा था कि क्या केंद्र सरकार को इस बात की जानकारी है कि सोशल मीडिया में ऐसे विकल्प होते हैं जिन्हें चुनने से उपयोग करने वाला आइपीआर को रोक सकता है। 

अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि सामग्री अपलोड करने में आइपीआर का लाइसेंस दिया जा सकता है। जब सरकार ने बिना किसी रॉयल्टी के मुफ्त में लाइसेंस दे ही दिया है तो इसे सरकार की उदारता ही कहा जाएगा। अदालत ने कहा था कि तकनीक का इतनी तेजी के साथ विकास हो रहा है कि लोग व सरकार इसे नहीं समझ पा रहे हैं और अगर वे इसे नहीं समझ पाएंगे तो वे पीछे छूट जाएंगे। 

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मैं बड़ा चापलूस टाइप का व्‍यक्ति था

फेसबुक पर मैं जैसा दिखता हूं, वैसा हूं नहीं। मैं बड़ा चापलूस टाइप का व्‍यक्ति हुआ करता था। अनायास ही किसी मतलब के व्‍यक्ति की तारीफ कर देना मेरी आदत में शुमार था। लेकिन मेरी इस चापलूसी से मुझे कोई लाभ नहीं मिला। कारण। चापलूसी की कला इतनी विकसित हो चुकी थी कि वहां मेरे लिए कोई स्‍पेस नहीं रह गया था।

आज मैं जहां हूं, वह फ्लाप चापलूसों का अड्डा है। यहां खारिज कर दिए गए चापलूस हैं, जिन्‍होंने आलोचना का दामन थाम रखा है। वैसे आलोचना भी एक प्रकार की चापलूसी है। जैसे, यदि मैं सपा की आलोचना कर रहा हूं तो जाने-अनजाने भाजपा, बसपा और कांग्रेस की चापलूसी कर रहा हूं। यदि मैं भाजपा या मोदी की आलोचना कर रहा हूं तो जाने-अनजाने सपा की चापलूसी कर रहा हूं। ऐसे बहुत सारे चापलूस हमारे इर्द-गिर्द हैं, जिन्‍हें आप आसानी से पहचान सकते हैं। मेरा झगड़ा प्राय: चापलूसों से ही हुआ है, क्‍योंकि वे मुझे अपना प्रतिद्वंद्वी मानते रहे हैं।

आजकल कुछ लोग दैनिक जागरण की चापलूसी करने के लिए मेरी आलोचना कर देते हैं, क्‍योंकि मैं कदम-कदम पर दैनिक जागरण की आलोचना करता रहता हूं। चापलूसी शब्‍द को जब निगेटिब शब्‍द बना दिया गया तो चापलूसी का आलोचना के रूप में अवतार हुआ। बड़ा गड्ड-मड्ड हो गया है सब। अब आपको संजय गुप्‍ता की चापलूसी का मौका नहीं मिल रहा है, तो चिंता की कोई बात नहीं। आप मजीठिया वेतनमान मांगने वालों की आलोचना कर दें। चापलूसी अपने आप हो जाएगी और आप चापलूस कहलाने से बच जाएंगे। आज चापलूसी करना इतना कठिन हो गया है कि बड़े-बड़े चापलूसों के तोते उड़ गए हैं। अब ऐसा समय आ गया है कि चापलूसी पर शोध किए जाने की जरूरत है। मैं तो यह कहता हूं कि चापलूसी को अकादमिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। आलोचकों के बिना यह देश चल सकता है, लेकिन चापलूसों के बिना नहीं। मेरे जैसे लोग बिना उचित प्रशिक्षण के चापलूसी कर ही नहीं सकते।

श्रीकांत सिंह के एफबी वाल से

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यूट्यूब की तरह फेसबुक भी वीडियो अपलोड करने वालों को देगा कमाई करने का मौका

जैसे यूट्यूब पर लोग वीडियो अपलोड करके पैसे कमाते हुए, उसी तरह फेसबुक पर भी ओरिजनल वीडियो अपलोड करने वाले कमाई कर सकते हैं. फेसबुक एक नया फीचर जोड़ने जा रहा है. इसके तहत अगर आप अपनी टाइमलाइन या फेसबुक पेज पर कोई वीडियो अपलोड करते हैं तो फेसबुक उस पर एड चलाएगा और इससे होने वाली आमदनी को आपके साथ शेयर भी करेगा. वीडियो ओरिजनल होना चाहिए और उस पर किसी का कॉपीराइट नहीं होना चाहिए.

फेसबुक का नया फीचर ‘सजेस्टेड वीडियो’ फिलहाल आईफोन पर टेस्ट किया जा रहा है. इसका फायदा कंटेट क्रिएटर और मीडिया हाउस को भी होगा. इसका रेवन्यू मॉडल वैसा ही है जैसा कि यूट्यूब का है. फेसबुक के अनुसार 10 सेकेंड्स या उससे ज्यादा समय तक एड देखने पर ही विज्ञापन देने वाले से चार्ज किया जाएगा. यानी कि किसी वीडियो एड पर रेवन्यू तभी जनरेट होगा जब कोई सर्फर उस एड को कम से कम 10 सेकेंड्स तक देखेगा.

इस फीचर के लाइव होने के बाद आपको अपनी न्‍यूज फीड पर सजेस्‍टेड वीडियो फीड दिखाई देगी. आप जिस वीडियो को क्लिक करेंगे फेसबुक उससे संबंधित दूसरे वीडियोज़ भी आपको सजेस्‍ट करेगा. यही नहीं फेसबुक अपनी न्यूज फीड एल्‍गोरिदम में बदलाव कर रहा है. इससे सर्फर अपनी फीड में वीडियो देख सकेगा और उसे अपने अनुसार फीड में सहेज भी सकेगा. फेसबुक अपने वीडियो एड से हासिल रेवन्यू का 55 फीसदी इसके कंटेट क्रिएटर के साथ शेयर करेगा.

सबसे पहले यूट्यूब ने वीडियो पर एड देने शुरू किए थे. वीडियो अपलोड करने के मामले में यूट्यूब इस वक्‍त दुनिया की नंबर वन सोशल मीडिया साइट है. फेसबुक के इस कदम से अब उसे कड़ी टक्‍कर मिल सकती है. अभी फेसबुक को सबसे ज्‍यादा रेवन्यू मोबाइल से मिल रहा है और इसमें और तेजी आने की संभावना है. इस साल फेसबुक को पूरी दुनिया से होने वाली आमदनी में से 73 फीसदी यानी 70 हजार करोड़ रुपये (10.90 बिलियन डॉलर) सिर्फ मोबाइल एड के जरिए हासिल होंगे. मोबाइल पर फेसबुक एप्लीकेशन किसी दूसरे एप्प की तुलना में काफी सफल है. भारत में फेसबुक का इस्‍तेमाल करने वालों की संख्या 12 करोड़ से ज्यादा है.

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अंजना ओम कश्यप और आज तक का सच से सामना हो गया कल शाम

कल एक प्रोग्राम में उनके एक एंकर अशोक सिंघल ने मजमा ज़माने के लिये वह पूछ लिया जो सबके मन में है पर हर आदमी Avoid करना चाहता है क्योंकि सवाल के निशाने पर एक मंत्री तो है पर वह स्त्री भी है! नतीजे में पिटते पिटते बचे एंकर साहब और एंकर श्रेष्ठ कश्यप जी! इन्हीं महोदया ने चुनाव के ठीक पहले “आप” के आशीष खेतान को एक live कार्यक्रम में कहा था ” आपकी औक़ात क्या है ” पर खेतान ने सभ्य व्यक्ति की तरह मुस्कुराते हुए उन्हें टाल दिया था।

कश्यप संध्या बहसों में “आप” को बेइज़्ज़त करने और बीजेपी का पक्ष लेने के लिये सोशल मीडिया में बदनाम हैं । वे मोदी के साथ एक कैम्पेन चित्र में बीजेपी का झंडा फहराते हुए एक बालकनी में साथ खड़ी हुई फ़ोटो फ़्रेम में हैं जो सोशल मीडिया में आमफहम है। टीवी चैनल ” आप” की दैनिक फ़ज़ीहत का अभियान छेड़े हुए हैं पर इस बार उन्होंने एक कड़वा सवाल अपनी मेहबूब पार्टी की स्टार मंत्री से पूंछने की जुर्रत दिखाई और औक़ात बोध हो गया! इस टिप्पड़ी में यह बताने की कोशिश है कि आलोचना/निन्दा/पेड न्यूज़ के बावजूद आप” की प्रतिक्रिया और आलोचना पर बीजेपी की प्रतिक्रिया में क्या बुनियादी अन्तर है, यह नहीं कि आजतक ने कभी केजरीवाल की तारीफ़ नहीं की! इस टिप्पणी में यह बताने की कोशिश है कि आलोचना / निन्दा / पेड न्यूज़ के बावजूद ‘आपट’ की प्रतिक्रिया और सिर्फ कड़ा सवाल या हल्की-सी आलोचना पर बीजेपी वालों की प्रतिक्रिया में क्या बुनियादी अन्तर है।

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह के एफबी वाल से

Sharad Tripathi : आज ‘आजतक’ पर स्मृति की परीक्षा कार्यक्रम देखा। अच्छा लगा की स्मृति ईरानी ने दृढ़ता से जवाब दिए, तथा कार्यकुशलता दिखाते हुए विभिन्न मसलों को हल करने की दक्षता भी दिखाई। लेकिन अपने अजेंडे से लाचार आजतक का रिपोर्टर/एंकर फिसल ही गए। अशोक सिंघल ने पूछ लिया की मोदी ने (नोट करिये मोदी ने, मोदीजी नहीं) आपमें क्या देखा की इतनी कम उम्र में आपको शिक्षा मंत्री बना दिया! सुनने वाले मतलब समझ चुके थे। लेकिन स्मृति ने अशोक सिंघल को जो समझाया वो शायद उसको समझ आ गया था ये उसका चेहरा बता रहा था। ऐसी घिनोनी मानसिकता कभी बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए और तुरंत रिएक्शन देना चाहिए । जो स्मृति ने और पब्लिक ने दिया। स्मृति का जवाब बहुत कुछ कह गया जिसमे उन्होंने कहा की आप किसी पुरुष मंत्री से तो ऐसा सवाल नहीं पूछते! बड़ा दुःख तो इस अंजना ॐ कश्यप से रहा जो शांति से ऐसा बचकाना सवाल सुनती रही। बड़ी दोषी अंजना हैं! बाद में ट्वीट करके आप स्मृति को अहंकारी कह सकती हैं लेकिन आप तो घटिया लेवल की निकलीं। आजतक आज एक बार फिर शर्मसार हुआ। लेकिन ये तो क्रांतिकारी चैनल है न शर्म इसे आती नहीं।

मीडियाकर्मी शरद त्रिपाठी के फेसबुक वॉल से.


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मुकेश ने एफबी पर हुई कुछ चैट सार्वजनिक कर दोष ऋचा पर भी मढ़ा, बाद में ‘सॉरी’ बोल दिया

Mukesh Kumar Sinha : ऋचा से मेरी पहले कभी बात नहीं हुई. शुरुआत उसने की कविता शेयर करने से लेकर और फिर उसने बातों को मोड़ा. मैं कन्फर्म हो गया एक फेक प्रोफाइल है इसलिए अंत उसके अनुसार हुआ.

(चैट पढ़ने के लिए उपरोक्त पिक्चर पर क्लिक कर दें.)

उपरोक्त स्टेटस के बाद मुकेश कुमार सिन्हा का ताजा स्टेटस ये है, जिसमें उन्हें सॉरी लिखकर अपनी गलती के लिए माफी मांगी है…

उपरोक्त दोनों स्टेटस पर जनता की मिलीजुली प्रतिक्रिया कुछ यूं है…

Ila Varma Aisa kaam Kara hi kyu

सोनाली मिश्रा शोधार्थी-इग्नू वाकई ऐसा काम किया ही क्यों?

Anita Singh किस बात का sorry

Robin Singh sambhav hai ,tag ,kar ke kaho jiske tum apraadhi ho … ye to aap kee kavita ka ans jaisa lag rahaa hai …

Rajeev Bhutani गलती तो गम्भीर हो गई —

Kumar Gulshan Anant Sorry की जरूरत ही क्या है सर जब फेक प्रोफाईल था…

Anjana Dutta sry मैं आपको unfrnd कर रही हूँ

Saurabh Jha dost sharminda hone ki jarurat nhi hai.. Shudhar sakte hai to shudhar jaiye bus…frown emoticon

Shahnawaz Khan कोई गलतफहमी हुई है

Lakshmi Sharma फेक आई डी है तो सॉरी क्यों । पहले सच तो सामने आए

Saurabh Jha n galti akele inki nhi hai.. aap inka post pade,,, Agar bandi frank ho rhi hai to fir walmiki v fisle the ye to Mukesh g hai…grin emoticon

Aparna Anekvarna I appreciate this step.. take care.

Abha Khare Aap hamare mitra the aur rahenge hamesha ….

Veeru Sonker मुकेश भाई आपको शर्म आनी चाहिए ! बाकि और ज्यादा कुछ कहने का मन नहीं है id के असली नकली होने से आप का गुनाह कम नहीं होता !…See More

Lakshmi Sharma लेकिन इस प्रकरण में रश्मि की चेट भी ध्यान देने की बात है। उसके स्क्रीन शॉट भी देखे मैंने। मैं यह नहीं कहती कि उस से मुकेश जी सुर्खरू हो जाते हैं लेकिन उससे ये स्पष्ट हो रहा है कि चेट में हम लोगों को भी सामने वाले को किसी गलत या खुश फहमी का मौका नहीं देना चाहिए

आकाँक्षा सेठ आपको दादा कहती हूँ…बुरा लगा बहुत

Vani Geet क्या हुआ !!??

सुनीता शानू अरे क्या हुआ भाई किस बात की सॉरी बोल रहे हो?

सुभाष शर्मा कोई गल नहीं। पश्चाताप कर लिया बहुत है। मेरे मन में आपके लिए पहले जैसा ही सम्मान है।

Neeta Mehrotra आप मित्र और छोटे भाई हैं मेरे …… और सदा रहेंगें।

Priyanka Om sorry kyu keh rahe aap?

सुशीला शिवराण श्योराण अगर fake id है तो kiss की उम्मीद किससे थी मुकेश जी?

Nanda Pandey तुम हमारे अपने हो और रहोगे हमेशा

Anjani Kumar कोई बात नहीं…!

Samar Anarya एक स्त्री के बार बार मना करने पर भी ‘किस’ माँगने की बेशर्मी के बाद ‘सॉरी’ बोलते हुए घटना का जिक्र भी नहीं? झूठा सॉरी है फिर यह।

सुशीला शिवराण श्योराण Abha Khare कल कोई तुमसे जबरन kiss माँगेगा और हम उसे मित्र बनाए रखेंगे? तुम्हारे निर्णय से हैरान हूँ। flirting का साथ दे रही हैं आप?

Puneeta Chanana What happened? Don’t understand.

सुशीला शिवराण श्योराण Neeta Mehrotra जी छोटे भाई को kiss प्रकरण पर कुछ नहीं कहेंगी?
धन्य हैं आप दिदिया!
ऐसे ही छोटे भाई तैयार कीजिए ताकि कल बहुत सी दामिनी नंगी सड़क पर पड़ी मिलें हो सकता है उनमें से कोई आपकी बहन-बेटी भी निकल जाए!
कैसी फ़सल उगा रही हैं आप?
क्या काटेंगी?

Sandeep Sharma First identify truth …. meantime preference to sorry .

Samar Anarya और आपकी कमेंट से थोड़ा हतप्रभ हूँ Lakshmi.. स्त्री पुरुष संबंधों में चुहल कह लें, फ़्लर्टिंग कह लें, वह भी होता ही है। कितनी दोस्तों को जानेमन कहके पब्लिक पोस्ट लगाता रहता हूँ मैं, आपने तो देखें हैं सारे! लेख भी। पर बिना सहमति के नहीं। रश्मि ऋचा सिंह की बात में वह चुहल दिख रही है पर फिर ‘किस’ माँगने का सीधा नकार भी। और इन जनाब ने ठीक पहले का हिस्सा ग़ायब कर दिया है जहाँ वह पहले से ब्लाक की धमकी दे चुकी हैं। सो पहले कुछ रहा भी हो तो भी न का मतलब न ही होता है न? पर ये साहब तो अड़े हुए हैं।

सीमा संगसार अब तो मैं आपको सौरी बोल रही हूँ—-

Lakshmi Sharma तुम्हारा हतप्रभ होना स्वाभाविक है Samar लेकिन मेरी बात को तुम दूसरे नज़रिये से समझो जहां लोग लिफ्ट लेने को आकुल व्याकुल बैठे रहते हैं। मैं सिर्फ ये कह रही हूँ कि मर्दों के (इसे भी सामान्यीकृत कर के पढ़ा जाए) इस समाज में बिना ठीक से परिचित हुए बात करने का कुपरिणाम से ही सचेत करना चाहती हूँ मैं। तुम जब किस या जानेमन कहते हो तो सरे आम साफ मन से उस को कहते हो जिसका विश्वास तुम्हें मिल चुका है। बिना जाने तो तुम नहीं कहोगे इतना मैं तुम्हे जानती हूँ। और सबसे ऊपर मैंने लिखा न कि मेरे इस पक्ष से मुकेश सुर्खरू नहीं हो जाते। उनकी गलती अक्षम्य है

Samar Anarya बिलकुल ठीक बात है Lakshmi, पर आकुल बैठे लोगों को भी लड़की के न बोलने पर चला ही जाना चाहिये! ये तो मान ही नहीं रहे हैं।

Aanchal Singh Dono kasurvar hai …aur maafi khud se mangiye ki bhavisya mai dobara aisi galti na ho …….

Lakshmi Sharma हाँ यहाँ मैं तुमसे सहमत हूँ Samar । ये नहीं मान रहे तो ये एक्सपोज हों बहिस्कृत हों और ऋचा इनके विरुद्ध शिकायत दर्ज़ कराए। हम साथ हैं

सोनाली मिश्रा शोधार्थी-इग्नू अगर मैं कहूं तो थोड़ी बहुत चुहल तो चलती है पर ये? सार्वजनिक जीवन में सावधान होकर चलने की आवश्यकता होती है.

Neha Agarwal Soory mai bhi aapko unfriend kar rahi hu.

Samar Anarya थोड़ी बहुत नहीं, जितनी हो जाये कुछ बुरा नहीं सोनाली अगर सहमति से हो। पर इनके स्क्रीनशॉट्स से साफ है कि मना करने पर भी अड़े हुए हैं, मुझे वह सबसे ज़्यादा खटक रहा है।

Lakshmi Sharma जब तक ये प्रकरण चल रहा है अनफ्रेंड कर के किसका हित होगा ये सोच के अन फ्रेंड करें

सोनाली मिश्रा शोधार्थी-इग्नू जी, और फिर इस तरह से सार्वजनिक करना, अगर दो लोगों के बीच की बात थी, तो उसे आपस में सुलझा लेना चाहिए, ऐसे आरोपों के कीचड से खुद का दामन ही दागदार होगा

Ruchi Bhalla दोनों ही मेरी मित्र सूची में हैं …. रश्मि कुछ दिन हुए और मुकेश एक साल से भी ज्यादा । दो – एक बार हमिंग बर्ड के सिलसिले में उनसे फोन पर बात हुई है। जब आज ये पोस्ट देखी .. तो मैं खुद को रोक नहीं सकी फोन करने से … सिर्फ एक सवाल किया मैंने … ये क्या है मुकेश और
उनका जवाब था … मेरी गलती थी।
मैंने कहा …. आप जब दिल से मान रहे हैं और कह रहे हैं …
तो कह दीजिए वाल पर सारी ….
उन्होंने कहा है दोस्तों …. खुद से …
दिल से….

Samar Anarya @Ruchi Bhalla- पर माफी तो उससे माँगी जाती है जिसका दिल दुखाया हो, जिसे नुक़सान पहुँचाया हो।

Samar Anarya और ये जरा भी ईमानदार हैं तो उन्हें किस के ठीक पहले वाली चैट सार्वजनिक करनी चाहिये क्योंकि साफ है कि रश्मि ने उसी पर ब्लाक की धमकी दे दी थी Lakshmi, सोनाली। पर ये अड़े रहे। हाँ अमित्र करने का कोई फ़ायदा नहीं पर जो चाहे, ख़ासतौर पर स्त्रियाँ उन्हें पूरा हक है।

सुशीला शिवराण श्योराण सोनाली मिश्रा शोधार्थी-इग्नू जी पुरुष के अमर्यादित और कामुक व्यवहार से स्त्री का दामन दाग़दार कैसे हुआ भला? हैरान होती हूँ जब उच्च शिक्षितों को ऐसे अविवेकी, तर्कहीन विचार प्रकट करते हुए देखती हूँ ! गलती पुरुष करे शर्म स्त्री को आए ! शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करके भी हम दोषी को नहीं भुक्तभोगी को दोष देते हैं !!!!! If education can’t teach us to think logically and to be righteous…..then what is the difference between the educated people and illiterates ?

सुशीला शिवराण श्योराण Ruchi Bhalla जी शुक्रिया आपने कुछ प्रकाश तो डाला । अपने मित्र से कहिए जिसके कसूरवार हैं उससे माफ़ी माँगें।

सोनाली मिश्रा शोधार्थी-इग्नू मैंने दोनों के बारे ये कहा था, मेरा अभिप्राय कतई भी एकतरफा नहीं था, हां हो सकता है बात sसही से नहीं कह सकी सुशीला जी

Anju Choudhary फेक id के लिए इतना बवाल….कोई ये क्यों नहीं समझ रहा कि ये मुकेश को बदनाम करने के लिए रची गई सोची समझी साजिश भी हो सकती है |कुछ दिन पहले मैंने भी एक पोस्ट डाली थी कि यहाँ फेसबुक पर बहुत से पुरुष औरतों के नाम रख कर घूम रहे हैं और अपने ही दोस्त (पुरुष ही) उनकी हर पोस्ट पर वाह..वाह करते नज़र आते हैं ……..इस बेकार के बवाल का कोई मतलब ही नहीं है और सॉरी कहना तो बनता ही नहीं है |

Mukesh Sharma मुकेश जी बहुत विस्फोटक स्वरूप हो चुका है यह प्रकरण । कुछ समझ नहीं आ रहा है ।

Niharika Neelkamal Arora gasp emoticon gasp emoticon gasp emoticon gasp emoticon gasp emoticon gasp emoticon

Archana Kumari चाहे कुछ भी हुआ हो सतर्क और सचेत आपको ही रहना था अपनी छवि,गरिमा और सम्मान के लिए। कहीं न कहीं चूक तो आपसे ही हुई। आग को हवा नहीं,पानी देते हैं कि घर जलने से बच जाए। अब इन सबका क्या फायदा,जो नुकसान होना था हो चुका। कोई बीमा पाॅलिसी नहीं है।

Nanda Pandey कैसे पड़ गए पचड़े में तुम ……

Alpika Jaiswal कुछ समझ ही नही आरहा हमे तो

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी वो id fake नहीं है. जो भी है शर्मनाक है. दोनों ही तरफ़ से. कोई एक नहीं दोनों ही बराबर के अपराधी.

निर्गुण मनीषा हाँ दोनों की गलती है !

Bhuwan Gupta किस चक्कर में हो बाबूजी ???

Anjana Dutta नाम आपने ऋचा लिखा इनबॉक्स में रशिम कह रहे है चक्कर क्या है मुकेश बाबू

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी रश्मि ऋचा की पोस्ट देखिये. क्या आप kiss मांगते हुए शोभा दे रहे हैं.

Parveen Salar Be careful

Shachii Kacker अगर पता चल गया था कि फेक है तो आगे बात नही करनी थी….

Nanda Pandey ओह्ह्ह्ह

Ranjana Srivastava उसने बात को मोड़ा तो आप मुड़ क्यूँ गए जनाब…गलती तो आपसे भी हुई है।

सुदेश आर्या Mukesh Kumar Sinha जी ! ये क्या है… महिलाओं को बदनाम करने से पहले मुझे इन बातों का जवाब चाहिए …

Mittal Shashi Mukesh Kumar Sinha ji acha nhi laga ye sab dekh pad kar chahe wo koi b ho pahle bat ki fir sareaam kar di

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी मेरी छोटी बहन है ! इसका कमेन्ट शो हुआ तो तब रश्मि की वॉल देखी …..मैं तो मुकेश जी को बहुत अच्छा मित्र मानती हूं इनकी पुस्तक की समीक्षा भी लिख रही हूं ….लेकिन आज ये महान लेखक मुझे जवाब देंगे …वरना …

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी सुदेश दी आज सचमुच बहुत आहत हुई. आज कहीं ना कहीं साहित्य भी शर्मसार हुआ है.

Shachii Kacker सुदेश आर्या जी ,लड़की कोई भी हो,गलत किसी के साथ हो आवाज तो सब को उठानी होगी

सुदेश आर्या बिल्कुल ! मैं पोस्ट डालूंगी ,,,,मगर चाहती हूं पहले ये जवाब दें कि आखिर ये है क्या ?? आज किसी और के साथ तो कल हमारे साथ होगा …औरत औरत की दुश्मन नहीं दोस्त होती है …यह मर्दों को बता देना है …

विष्णुप्रिया चौधरी शर्मनाक।

निधि जैन इतनी बात बढ़ी कैसे

सुदेश जी ताली दोनों हाथो से बजती है

सुदेश आर्या निधि जैन ! जो है सब सामने है !

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी निधि जैन जी वही मैं कह रही. दोनो ही अपराधी हैं, दोनों ही सफ़ाई दे रहे.

Anjani Kumar ऐसे सरेआम / गलत बात / अब क्या अंतर आप में और रोड छाप फेसबुक हैंडलर में / या कहीं मार्केटिंग का कोई नया फंडा तो नहीं/”कोई आप पर ध्यान नहीं देता/ध्यान खीचना पड़ता है” शोभा डे

Archana Kumari सहमत हूँ मैं। गलती दोनों ने की है। देखिएगा कोई बस लड़की होने का फायदा न उठा ले। गलती दोनों ने की है तो सजा भी दोनों को मिलनी चाहिए

Rinku Chatterjee हैरान हूँ।

सोना श्री आखिर यह माजरा क्या हैं Mukesh Kumar Sinha सर जी ?

विजय कुमार सिंघल अगर अकाउंट फेक भी है तो भी ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए.

Rajeev Bhutani फंसा—-

विजय कुमार सिंघल आप सार्वजनिक रूप से क्षमा मांग लीजिये.

Rajeev Bhutani समय रहते यदि आप सफाई पेश नही कर पाये तो अगला स्कीन शाट् के जरिये आपको ब्लैक मेल करेगा —बहुत सतर्क रहने की जरूरत है —फेक id की तुरंत complaint करे–

सुदेश आर्या फेक अकाउंट तो प्रोफाइल देखकर ही पता चल जाता है ! न भी पता चले तो ऐसी बात करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता ..इसका मतलब आप भी आनंद ले रहे हैं …

Rajeev Bhutani नही सुदेश जी ये बात नही मैने तो वजह बताई है –गलत तो 100 % वो है ही —

उद्दण्ड मार्तण्ड मणि बिक गयी “हमिंग बर्ड”… इसलिए “सर” कहलाना नहीं पसन्द करते हैं… देखा सुदेश दी…

Prashant Aryapriyam हे भगवान मौत दे दो। दोनों दोषी हैं।दोनों को सजा मिले।

रवि कुमार कुछ तो लोग कहेंगे लोगो का काम है कहना ।

Suresh Agarwal सावधानी बरते..ऐसी बाते सार्वजानिक करके क्या हासील

Rajeev Bhutani Mukesh Kumar Sinha माफी मांगो

सुदेश आर्या अगर आप बराबर के हकदार हैं और दोनों के मध्य कुछ था भी तो आपको पोस्ट डालनी ही नहीं चाहिए थी …..हमें उससे कोई लेना देना नहीं था….लेकिन ऐसा करके आपने बहुत ही गलत किया ….जानते नहीं थे कि यहां आपकी बहुत सारी अम्मा बैठी हैं ? क्यों अपनी व दूसरों की छिछालेदर करनी व करानी थी ? चलो इससे बहुत बहनों को सीख तो मिलेगी ….इसी कारण अन्य पुरूष मित्र भी शक के दायरे में आते हैं !!

सुभाष शर्मा विनम्रता से निवेदन है सुदेश जी कि महिलाओं की बकील न बनें क्यों कि मामला इनबॉक्स कन्वर्सेशन का है इसलिए पुरुष महिला के चश्मे से न देखकर उचित अनुचित आचरण तक ही रखें तो ज्यादा उचित होगा।

उद्दण्ड मार्तण्ड मणि “सिन्हा सर” ने सोचा था कि मित्र उनका साथ देंगें लेकिन अम्मियों ने उनकी ही क्लास लगा दी.

सुदेश आर्या मैं वकालत नहीं कर रही सुभाष शर्मा जी! एक बार मेरा कमेन्ट फिर से पढ़िये …मुझे ज्यादा दुख इस कारण हो रहा है कि मैं ऋचा को जानती भी नहीं और मुकेश जी मेरे अच्छे मित्र रहे हैं …शिकायत वहीं होती है जहां अपनापन होता है …औऱ मैं गलत लोगों की वकालत नहीं करती ….जो दिख रहा है क्या उसे आप नहीं देख पा रहे तो अफसोस है …frown emoticon

उद्दण्ड मार्तण्ड मणि अगर “सिन्हा सर” सफाई नहीं देगें तो उन्हें ब्लॉक कर दिया जाए। वरना सफाई दे…

सुदेश आर्या सफाई दें न दें मैं तो ब्लॉक कर ही रही हूं …साथ में उनके चाहने वालों को भी ..

उद्दण्ड मार्तण्ड मणि और सबसे अच्छी बात है शुरू से लेकर आखिर तक की पूरी चैट डाल दे। फैसला खुद ब खुद हो जायगा. पहले पूरा मामला तो देखा जाय मैं तब ब्लॉक करुँगी. दोनों ने जो स्क्रीन शॉट दिये वो अपनी अपनी गलती छुपाई और दुसरे की गलत बातो को सर्वजनिक किया.

Rajesh Shrivastava मित्रो एक तरफ़ा फैसला मत कीजिये मुकेश जी एक सुलझे हुए इंसान हैं पहले उनकी बात सुनिए फिर किसी के बारे में निर्धारण कीजिये

Samar Anarya स्त्री पुरुष संबंधों में चुहल कह लें, फ़्लर्टिंग कह लें, वह भी होता ही है। मैं खुद चैट क्या कितनी दोस्तों को जानेमन कहके पब्लिक पोस्ट लगाता रहता हूँ पर बिना सहमति के नहीं। रश्मि ऋचा सिंह की बात में वह चुहल दिख रही है पर फिर ‘किस’ माँगने का सीधा नकार भी। और इन जनाब ने ठीक पहले का हिस्सा ग़ायब कर दिया है जहाँ वह पहले से ब्लाक की धमकी दे चुकी हैं। सो पहले कुछ रहा भी हो तो भी न का मतलब न ही होता है न? पर ये साहब तो अड़े हुए हैं।

Robin Singh try kar rahe honge .. kabhi kabhi galti se galat number daayal ho jaata hai .. maanga hee to tha .. bchara uski stithi samjo mili bhee nahi aur badnaam ho gaye.


पूरे प्रकरण को जानने के लिए इसे पढ़ें:

‘हमिंग बर्ड’ वाले मुकेश कुमार सिन्हा की कविता क्या पसन्द कर ली, वह ‘किस’ मांगने लगा!

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‘हमिंग बर्ड’ वाले मुकेश कुमार सिन्हा की कविता क्या पसन्द कर ली, वह ‘किस’ मांगने लगा!

रश्मि ऋचा सिंह : ये है साहित्य का असली चेहरा. यही तो करने आते हैं आप यहाँ? दोस्ती करो तो हद से आगे निकल जाओगे आप… ये आपके मुकेश कुमार सिन्हा हैं ‘हमिंग बर्ड’ वाले. जरा सा कविता क्या पसन्द कर ली. जरा सा दोस्ती क्या कर ली, ये तो अपनी पर ही उतर आये. इनको मेरा ‘किस’ चाहिए. अब यहाँ से मन भर गया. नमस्कार!

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मुकेश कुमार सिन्हा के साथ हुई मेरी चैट को एडिट कर के यहाँ पेश किया जा रहा है. ये मुझे सच्ची दोस्ती का हवाला दे कर बहकाने की पूरी कोशिश कर रहा था….. जब इसने किस की बात कही तभी मैंने इन्हें हड़का दिया! अब यहाँ ग्रुपिंग का खेल हो रहा है मेरे साथ.  मुकेश कुमार सिन्हा से कोई ये पूछे की वो ये किस क्या अपनी बहन को कर सकता है?  इस नीच ने मेरे हड़काने के बाद भी मुझे आँख मारी. जो लोग पैरवी के लिए यहाँ आ रहे है वो लोग मुकेश से ये पूछे की दोस्ती के नाम पर आप क्या किस तक पहुच जायेंगे? मुकेश कुमार सिन्हा जी का ग्रुप बहुत बड़ा है. इनकी ‘हमिंग बर्ड’ नाम की पुस्तक आ चुकी है. अभी “गूंज” और “तुहिन” नाम के दो काव्य संकलन भी आ चुके हैं. मैं इनसे नहीं जीत पाऊँगी. मुझे जो कहना था कह दिया ऐसे गंगा के सामान पवित्र लोग इनके गैंग को ही मुबारक हो.

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मुकेश जी की खुद की वाल देख आइये आप सभी, जो महिलाये अभी तक चुप थीं मेरी पहल पर, अब एक एक करके सामने आ रही है ये बहुत समय से ऐसा खेल खेल रहे थे यही लगता है. मैंने इनसे जितनी भी बाते की वह सब इनको एक अच्छा कवि मान कर एक मित्र की तरह की. पर ये बिलकुल से खुल गए. आरके भैया, आप सब का साथ ही ऐसी मानसिकता वालो को साहित्य के संसार से दूर रख पायेगा. अभी तक 50 महिलाओं ने ये स्वीकार किया है की मुकेश उनके साथ भी कभी न कभी इस तरह की घटिया हरकत कर चुके हैं. मेरा विरोध करने वालो को सिर्फ ये ही कहना चाहूंगी की अगर आज मैं भी चुप रहती तो शायद आपको ज्यादा अच्छा लगता? फिर शायद अगला नंबर आप अपना ही लगाते.

फेसबुक पर एक्टिव महिला रश्मि ऋचा सिंह के फेसबुक वॉल से.


उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ कमेंट्स इस प्रकार हैं…

Krishna Pandey : साहित्य के नाम पर फेसबुक पर कुछ लोग ऐसे सक्रिय हैं जो अपने कुत्सित भावनाओं का नंगा नाच इनबॉक्स में चैट के माध्यम से करते हैं। वैसे आपकी बात कितनी सच है ये तो नही पता कौन सही है या कौन गलत। किन्तु आपको जिस दिन पहला अश्लील मैसेज आया था उसी दिन ब्लॉक कर देना चाहिए था, पता नही इतने दिन आपने क्यों बर्दाश्त किया? मेरा कुछ ऐसे लोगों से पाला पड़ा है जो साहित्य से जुड़े हैं / जुडी हैं और काफी नामी लोग हैं ,किन्तु उनके हरकत बहुत ही निम्न स्तर के हैं । मेरे मित्रों के मिले फीडबैक के बाद मैंने उनसे दुरी बना ली और कुछ लोगों को ब्लॉक भी कर दिया।

सुशीला शिवराण श्योराण : ऐसे मंजनू हर क्षेत्र में हैं साहित्य भी अपवाद नहीं। मैं इस शर्मनाक हरकत की भर्त्सना करती हूँ और मुकेश कुमार सिन्हा जी से पूछती हूँ यह दोस्ती कब से है, यह क्यों हुआ क्योंकि कुछ टिप्पणियाँ डिलीट की गई लग रही हैं। सन्तोषजनक जवाब न मिलने पर ये मेरी मित्र सूची से हटा दिए जाएँगे. रश्मि को अपनी तस्वीर नहीं भेजनी चाहिए थी। इससे हिम्मत बढ़ती है लोलुप मर्दों की। किन्तु माँगने पर अगर तस्वीर भेज भी दी तो इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं कि कोई भी पुरुष किसी भी महिला पर खुद को ज़बरदस्ती थोप सकता है। मर्यादा से बाहर जा सकता है। दो कदम के बाद यदि महिला को लगे कि यह आदमी मित्रता के लायक नहीं तो पुरुष को उसकी इच्छा का, उसके निर्णय का सम्मान करना ही चाहिए। मित्रता कैसी, कहाँ तक दो इंसानों का निजी निर्णय है कोई भी एक कह दे कि बस यहीं तक तो दूसरे को शालीनता से स्वीकार करना चाहिए वह निर्णय। कोई भी इंसान ख़ुद को दूसरे पर थोप नहीं सकता…..स्त्री-पुरुष से, लिंग-भेद से ऊपर उठ कर आप क्यों नहीं देखते मित्रता को? मित्रता और लोलुपता व बेशर्मी में अंतर पहचानिए। मैं जब 19 वर्ष की थी तो मुझसे 2 साल बड़े और शरीर से दुगुने लड़के को DTC की बस में उसकी निर्लज्जता के लिए पीटकर पुलिस लॉक अप में बंद करवाया था। पिछले साल सुरेन्द्र साधक को मना किया था सख्ती से कि मेरे चैट बॉक्स में आकर फ़ालतू बकवास न करे। कहने के बावज़ूद नहीं माना था। दूसरी बार फिर घटिया बात कही तो मैंने भी screen shots दिखा कर उस की घटिया हरकत फेसबुक पर सप्रमाण पोस्ट की। ऐसे पाशविक प्रवृत्ति वाले कामुक पुरुषों को बेनकाब करना ज़रूरी है।

Kiran Dixit : कोई भी व्यक्ति जो दो चार किताबें छपवा कर साहित्यकार बनने का दावा करता है जरूरी नहीं वह चारित्रिक दृष्टि से भी सही होगा. इस इन्सान ने मित्र बनते ही अपनी पुस्तक खरीदने का मुझसे भी आग्रह किया था. लेकिन हमने इस तरीके को बिल्कुल सही नहीं माना कि आप मित्र इसलिए बने हैं कि हम आपकी पुस्तक खरीदें. खैर, जो भी हुआ बहुत ही दुःखद और निंदनीय है। इस व्यक्ति की जितनी भर्त्सना की जाये, कम होगी. ऐसे लोग मित्रता के नाम को कलंकित करते हैं. वैसे मेरा मानना है कि हर इन्सान को अपनी हद भी पहचाननी चाहिए. जिस समय ये लगे कि दूसरा इन्सान अपनी हद पार कर रहा है तुरंत ही अपने को विथड्रा कर लेना चाहिए। किसी को भी इतना आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती. बहरहाल उनको तो अपनी हद पार करने का नतीजा तो पता ही चल गया •••••दिन में ही तारे नजर आने लगे होंगे. इससे ज्यादा सजा उनको और कहाँ मिल सकती थी.

Ranjana Singh : अइयो Mukesh Kumar Sinha जी,, हम तो समझते थे कवि हृदय आप केवल काँग्रेस के लिए कमजोर पड़ जाते हैं,,,, लेकिन आप तो …..साहित्य बिरादरी का नमवे माटी में मिलवा दिए…. भेरी भेरी बैड जी।

Veeru Sonker : मुकेश कुमार सिन्हा जी अब माफ़ी मांग रहे है सार्वजानिक रूप से. उनकी पोस्ट देखी मैंने अभी. माफ़ी वाली पोस्ट अभी भी मुकेश की वाल पर है उन्होंने किया तो बहुत गन्दा काम पर अब माफ़ी मांग कर गंगा नहाने की कोशिश कर रहे हैं.

उमाशंकर सिंह परमार : कविता लिखने और कविता जीने मे बहुत बडा अन्तर है तुकबन्दी करके या चन्द वायावी अल्फाजों का जमघट जमा कर कोई भी फेसबुक मे कवि होने का दम्भ भरने लगता है…

Padm Singh : इनकी हरकतों के कारण ही लगभग एक साल पहले ही इनसे दोस्ती टूट गयी थी… दो कौड़ी की कविताएं लिखने वाला ब्लागर एक किताब छपवा कर साहित्यकार बन गया…लेकिन इनकी कांग्रेसी मानसिकता कभी नहीं मरी। धिक्कार है !!

Richa Vimal Kumar : इन पर मुझे पहले से ही शक था !! बीसियों बार fr req भेजा मगर मैंने कभी एक्सेप्ट नहीं किया!! मैं बार बात डिलीट करती रही,, मगर ये जनाब बार बार req भेजते रहे। एक दिन इनबॉक्स में इन्हें हड़का कर ब्लोक कर दिया !! अफ़सोस की बात है कि लोग मुकेश जी की पैरवी में उतर रहे। ऐसे कई दो चार पुस्तकें छपवा लेने वाले तथा कथित साहित्य के पुरोधाओं का असली चेहरा सुंदर महिलाओं के inbox में पता चलता है। ऐसे लोगों का पर्दाफाश होना ही चाहिए। आपने ठीक किया ऋचा जी!


इसके आगे का पढ़ें….

मुकेश ने एफबी पर हुई कुछ चैट सार्वजनिक कर दोष ऋचा पर भी मढ़ा

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हरदोई के डीएम ने बर्बाद किसान को फेसबुक पर ब्लाक कर दिया!

Kumar Sauvir : मुझे तो अब अक्‍सर ऐसा साफ लगने लगता है कि जो पढ़-लिख कर डीएम बन जाता है, वह वाकई बेवकूफी या अभद्रता का दामन सम्‍भाल लेता है। उनसे ज्‍यादा समझदार और संवेदनशील तो साबित होता है किसान, जो अफसरशाही कार्यशैली से लेकर प्रकृति तक की निर्ममता का सामना करना होता है। नजीर हैं हरदोई के जिलाधिकारी रमेश मिश्र। हरदोई के डीएम ने डीएम हरदोई के नाम पर एक नया फेसबुक पेज बनाया है, जिसमें वे दिन भर अपनी ढपोरशंखी ढफली बजाया करते हैं कि:- आज मैंने इतने लोगों को लाभान्वित किया, उतने लोगों को उतना फायदा उठाया। इतने लोगों के साथ हेन किया, और उतने लोगों को हेन किया। ऐसा किया, वैसा किया, यू किया, ऊ किया, अइसन किया, वइसन किया।

लेकिन क्‍या, कितना, केतरा किया, उसका जवाब आपको उनके पेज पर टंगी अखबारी कटिंग के शीर्षक में मिल सकता है। पिछले एक पखवारे से डीएम रमेश मिश्र जी लगातार इसी तरह की लारंतनियां फेंक रहे थे, कि अचानक एक बेबस किसान, जिसकी सारी फसल ताजा प्राकृतिक हादसे में तबाह हो चुकी थी, लेकिन ने सरकारी अफसरों पर कई दिनों तक गुहार लगायी, चिरौरी की और मिन्‍नतें मनायीं कि:-सरकार। हम लोग बर्बाद हो चुके हैं, अब आप तो नजरे इनायत कर दीजिए।

लेकिन किसी भी अफसर के कानों तक जूं नहीं रेंगी। हारकर उस किसान ने एक नयी तरकीब अपनायी। उसने डीएम हरदोई फेसबुक के दावों वाले पोस्‍ट पर लगातार अपनी अर्जियां कमेंट के तौर पर लगाना शुरू कर दिया। इस किसान के मुताबिक उसके ऐसे कमेंट-अर्जियां लगाने को डीएम साहब ने इग्‍नोर किया, लेकिन जब किसान ने अपना हौसला नहीं छोड़ा तो डीएम साहब ने खुद ही अपना सब्र तोड़ दिया और उस किसान के कमेंट को लगातार डिलीट करना शुरू किया।

जाहिर है कि इस प्रक्रिया से भी किसान का हौसला नहीं टूटा, बल्कि उसकी तेजी बढ़ती ही गयी। एक दिन तो उस किसान ने यहां तक लिख दिया कि सरकार, अब क्‍या मरै के बादै कोई राहत मिली? नतीजा, डीएम साहब ने फैसला किया कि वह अपने संसार से इस किसान को विदा कर देंगे। और आखिरकार डीएम साहब ने अपने पेज पर इस किसान को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा करते हुए उसे ब्‍लाक कर दिया। बहुत सिकायत करत रहत रहै ना? ल्‍यौ, अब थामो बाबा जी का घण्‍टा!

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर के फेसबुक वॉल से.

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दिल्ली में ‘पीपली लाइव’ : वो फांसी लगाता रहा और तुम लाइव रिपोर्टिंग में लगे रहे…

Sheetal P Singh : दौसा, राजस्थान से दिल्ली आकर एक किसान ने केजरीवाल की रैली के दौरान पेड़ पर फन्दा डालकर आत्महत्या की कोशिश की। राजस्थान और केन्द्र में पूर्ण बहुमत की बीजेपी की सरकारें हैं पर वहाँ का किसान भी आत्महत्या कर ले तो टीवी चैनल केजरीवाल को कैसे दोषी सिद्ध कर सकते हैं, बीजेपी का नाम भी लिये बिना, यह इस समय देखने लायक है! किसान “आप” की रैली में फाँसी चढ़ा : इसको तो रिपोर्ट करो, गढ़ो, फैलाओ… लेकिन किसान फाँसी क्यों चढ़ा : इसे पूरी तरह गोल कर जाओ… मीडिया के पाखंड का सूक्त…

Ajay Bhattacharya : वो फांसी लगाता रहा और तुम लाइव रिपोर्टिंग में लगे रहे. कैमरा छोड़कर उसे थाम लेते तो एक जिंदगी बच जाती. जो तुम्हारी खबर से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण थी. खुद को मीडिया वाले कहते हो?

Peri Maheshwer : If we are done with AK and AAP, let us come to the brass tacks.
– The farmer is from Rajasthan, a BJP ruled state.
– He was talking about crop failure and no government help.
– He was shouting slogans against Vasundhara Raje.
– He travelled all the way to Delhi to make a point at an AAP rally.
– Modi talks about a help to farmers from crop failures
– Just Vidarbha, BJP ruled, has 600 suicides in 3 months!!!
Any one on policy, governance, promises, responsibility and accountability. Beyond politics please..

Rama Shanker Pandey : दिल्ली में किसान की मौत के जिम्मेदार क्या केवल नेता हैं? जब किसान वहां खुदकुशी कर रहा था तो पत्रकार क्या कर रहे थे? उनकी एक कोशिश तीन बच्चों को अनाथ और एक पत्नी को विधवा होने से बचा सकती थी। लेकिन वो तो ब्रेकिंग न्यूज की तलाश में थे। अब माइक हाथ में लेकर अपना चेहरा चमका रहे हैं। थोड़ी तो शर्म कर लो। अब मौत पर तमाशा हो रहा है। न्यूज चैनल वालों की टीआरपी पर नजर है तो राजनेताओं की किसानों के वोट पर। किसान मरता रहा है और मरता रहेगा। हम सब संवेदनहीन हैं। हम सभी उस किसान की मौत के गुनहगार हैं।

Priyabhanshu Ranjan :  BJP ने राजस्थान के रहने वाले किसान की खुदकुशी की खबर आने के बाद आनन-फानन में प्रेस कांफ्रेंस कर AAP पर हमला बोला। बड़ा अच्छा किया। लेकिन संबित पात्रा इस सवाल का जवाब बड़ी खूबसूरती से टाल गए कि केंद्र और राजस्थान में BJP की सरकार होने के बावजूद किसान को खुदकुशी क्यों करनी पड़ी !!!

Surbhi Sondhi : Except one AAP volunteer Joginder who tried to save Farmer, everyone failed! From Police, to Media! Rally continued is shame too! Really SAD.

Qs to MEDIA
a) Who climbed tree to save Farmer?
b) Who took him to Hospital?
c) What were u doing in rally afterwards?
d) What ws Delhi Police doing?

Many tv reporters were also there under the tree reporting with guest teachers, but shameless reporters could not help that farmer, he died.. Media could not reach to farmers who r dying everyday. A farmer came to media and commits suicide in front of media in Delhi. Gajendra’s crop was damaged, govt could not help him. He committed suicide in Delhi in front of media. What a situation, a farmer had to commit suicide in front of media in Delhi so that his voice can be heard by Modi govt. Amazing and shocking…what has happened within one year of BJP rule that farmers are committing suicide in such a large number… Modi jee ne Bihar main rally kiya tha aur BOMB phata tha…ager aisa band hone lagega…..then harek rally main koi sucide karne aa jaayega… Vasundhara raj forced him? to go to kejriwal rally to commit suicide, Gajendra was resident of rajasthan and his voice remain unheard and hence he chose to commits suicide in Delhi in front of cameras.

Jitendra Narayan : संवेदनहीन राजनैतिक नेताओं, शासन व्यवस्था, कॉरपोरेट और मीडिया सहित पूरी दलाल व्यवस्था के गले में फाँसी का फंदा लगाने का वक़्त आ गया है….!!!

Pramod Tambat : राजस्थान के किसान ने केजरीवाल की सभा के दौरान आत्महत्या कर ली। सारे चैनल आम आदमी पार्टी के पीछे लग गए हैं। क्या ऐसा नहीं लग रहा कि भाजपा की सरकारों को बचाने के लिए आप को निशाना बनाया जा रहा है। आखिर किसान ने आत्महत्या क्यों की इसकी खोजबीन क्यों नहीं की जा रही है?

Sudhir Mishra : वो कतई मरने के लिए पेड़ पर नहीं चढ़ा था। अपने जूते उसने पेट में कपड़ों के भीतर घुसा रखे थे। जाहिर है, उसे नीचे आना था। वापस जाना था। चिट्ठी में लिखा था कि वो बहुत गरीब है, खेत में कुछ बचा नहीं, पिता जी ने घर से बाहर कर दिया और उसके तीन बच्चे हैं। वो घर कैसे जाए ? साफ है, वो मरने के इरादे से नहीं बल्कि अपनी परेशानियों पर ध्यान आकृष्ट करना चाह रहा था, फिर क्या हुआ जो उसकी मौत हो गई। वो कौन लोग थे, जो सब देख रहे थे-जरा ठीक से जांच होनी चाहिए। तमाशा बनवाने वालों ने कुछ ज्यादा बड़ी हरकत कर दी है-

Sanjeev Chandan : मर गया नत्था, दिल्ली में हुआ पीपली लाइव…. !

Abdul H Khan : एक न्यूज चैनल पर मौके पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी कह रहा है कि वो आदमी नरेंद्र मोदी- वसुंधरा के खिलाफ नारे लगा रहा था, और फिर ये कदम उठाया।

सचिन तिवारी : माफ करना गजेन्द्र, गरीब किसान की इस देश में कौन सुनता है! (बस तुम्हारी मौत न्यूज़ चैनल वालों की टीआरपी बढ़ाने वाली ही न निकले!)

Ankit Kumar : एक किसान मर रहा था और कुछ लोग हंस रहे थे कुछ भाषण दे रहे थे की किसानो का भला कैसे हो और कुछ् कैमरा लेकर उसे न्यूज़ बना रहे थे ताकि किसानो के भले के टीवी पर बुद्धिजीवियों को बिठाकर घंटो “विचार विमर्श” कर सके.. न्यूज़ चैनल को TRP मिल जाएगी … भाषण देने वालो को सहानुभूति … किसानो का क्या होगा पता नहीं …वो किसान मर गया इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है और क्या सजा होनी चाहिए शायद ही हमारा तंत्र ये सोच पाए … राजनीती में जिंदगियों की कीमत नहीं होती.

आशीष सागर : सात राज्यों की सरकार के नेताओं ने कहा कि किसानों ने हमारे यहाँ आत्महत्या नहीं की है. सिर्फ महाराष्ट्र ने स्वीकार किया कि किसान हमारे यहाँ आत्महत्या कर रहा है. उत्तर प्रदेश (समाजवादी सरकार), पंजाब, मध्यप्रदेश (बुंदेलखंड) और अन्य प्रान्त में मरते हुए किसान अगर झूठ बोल रहे हैं, समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रही रोज की खबरें अगर गलत हैं तो केंद्र और राज्य सरकार हम सब पर क़ानूनी कार्यवाही करेl अगर हम सही आप झूठे और मक्कार हों तो अपने नशे में जी रहे नेताओं, अफसरों, लेखपाल को लेकर बेशर्मी से जिंदा रहो क्योंकि लाशों पर शासन अब अधिक साल आप भी नही कर पाओगेl …ये देखिये किसानों की बिटोलियाँ / बेटियां अबकी साल ब्याही नहीं जाएगी. उनके घर शहनाई नहीं बजेगी और उनके हाथ पीले नहीं होंगे. .हम किसानों की आवाजें हैं, सुन रहे हो न. गत 21 अप्रैल को कानपुर जोन -बुंदेलखंड के बाँदा, महोबा,जालौन में सात किसान और आत्महत्या कियेl  नामुरादों की सरकार है, मक्कारी का जलवा है… जरा देखो तो इस देश में किसान आत्महत्या का बलवा हैl झूठे बयानों से मौतों को नकारते, सुनयोजित तरीके से किसानों को मारते. इनकी नीयत में अंग्रेजी लगान है, मेरा नेता चोर है – बेईमान हैl

Shubh Narayan Pathak : व्यवस्था हत्यारी क्यों हो रही है? व्यवस्था= सरकार, संसद, राजनेता, मीडिया, पुलिस, नौकरशाह, जज… संदर्भ- बताने की जरुरत महसूस होती नहीं होती। स्पष्टता के लिए तत्कालिक तौर पर दिल्ली सीएम की सभा में राजस्थान के किसान की आत्महत्या को ले सकते हैं।

Naval Kant Sinha : हम सबको बहुत-बहुत मुबारकबाद…. राजस्थान के एक किसान गजेन्द्र ने फसल बर्बाद होने के चलते दिल्ली आकर आम आदमी पार्टी की रैली में पेड़ पर लटककर जान दे दी। उसके तीन बच्चे हैं और आज उसकी चचेरी बहन की शादी है। चलिए अब तो बनी किसान की आत्महत्या, एक खबर…. टीवी चैनल खबर चला रहे हैं और कल हमारे अख़बार वाले साथी भी खबर को पेज वन पर छापने को मजबूर होंगे क्योंकि दिल्ली की भीड़ में हुई है आत्महत्या। राजस्थान की सरकार भी इंकार नहीं कर पायेगी और दे देगी मुआवज़ा। हाँ, इस किसान पर मोटिवेटेड होकर जान देने का आरोप लगाया जा सकता है। नेता किसानों की मौत बेच रहे हैं, इस मौत को भी बेच लेंगे। लेकिन क्या एक किसान को मरने के लिए भी दिल्ली की किसी भीड़ में जाना पड़ेगा, जहाँ वहां प्रेस-मीडिया के कैमरे मौजूद हों? कल भी किसानों का दर्द लिखा था तो किसी साथी ने कहा कि ये मीडिया की कॉर्पोरेट मजबूरी है। सच भी है। किसान न मीडिया की, न सियासत की और न हमारी प्राथमिकता हैं, तो मरेंगे ही। उन बेचारो के पास कोई विकल्प भी तो नहीं। मुआवज़े की उम्मीद के साथ गजेन्द्र को श्रद्धांजलि…

डॉ. अनिल दीक्षित : जंतर-मंतर पर यदि कोई इंसान आत्महत्या कर ले तो सियासत के मुंह पर थूकने का वक़्त है… दिल्ली हमें आज तुझपे शर्म आ रही है। ठगिनी है तू, कितनी उम्मीदों से हम अपना नुमाइंदा चुनकर भेजते हैं और तू उसे हम से ही दूर कर देती है। उसे लोकतंत्र का राजा बनाकर हमें यूं रुलाती है। अनिश्चितकाल के लिए राजकीय शोक होना चाहिए, हमारा अन्नदाता मरा है आज।

Shahnawaz Malik :  पेड़ से लटकती गजेंद्र की लाश और उनकी चिट्ठी हंगामा खड़ा कर चुकी है। यही मौका है जब सिंहासनों को हिलाया या ढहाया जा सकता है। आप किसी भी आंदोलन से जुड़े हों, कुछ देर के लिए उसे रोककर आगे आ जाएं। पेड़ से टंगी गजेंद्र की लाश में इस देश के बेबस किसानों की तस्वीर झलकती रही है। यह ख़ुदकुशी दिल्ली में नहीं होती तो हलचल भी नहीं होती। अभी तक एक हज़ार से ज़्यादा किसानों की ख़ुदकुशी का नोटिस किसने लिया? हम गजेंद्र की मौत पर सामने आ सकते हैं, आ जाएं।

Brijesh Kumar Mishra : इन दोगले मीडिया वालों से कोई पूछने की हिम्मत करेगा कि “दूसरों पर चिल्ला चिल्ला कर गजेन्द्र की मौत का तमाशा बना कर अपनी TRP बढाने में लगे हो, क्या तुम लोगों ने वहां मौजूद अपने सैकड़ों पत्रकारों और फोटोग्राफरों से ये पूछा कि उस किसान की मौत की कमेंट्री करने के बजाय उन लोगों ने उसे बचाने की कोशिश क्यों नहीं की?”

Vijay Rana : किसानों की मौत पर राजनीतिक रोटियां मत सेको. आप की रैली में उस अभागे किसान को आत्महत्या करने से रोका जा सकता था. लेकिन उसे समय पर नहीं रोका गया, सब लोग आप नेता, कार्यकर्ता और मीडिया, तमाशा देखते रहे. किसानों का संकट एक राष्ट्रीय संकट है. सभी राजनितिक दलों को इसका मिल कर हल सुझाना चाहिए, जबकि विपक्षी दल किसानो में दहशत फैला रहें हैं. उनकी दुर्दशा का राजनितिक इस्तेमाल कर रहे हैं. ये निहायत शर्मनाक है.

फेसबुक से.


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फेसबुक ने लेखक-पत्रकार अमरेंद्र किशोर के अकाउंट को बिना किसी कारण बताये बंद कर दिया

(अमरेंद्र किशोर)


: फेसबुक का मनमानापन भारत में अघोषित आपातकाल की ओर इशारा कर रहा है – अमरेंद्र किशोर : फेसबुक ने लेखक-पत्रकार अमरेंद्र किशोर के अकाउंट को बिना किसी कारण बताये बंद कर दिया है। अमरेंद्र ने बीते शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह अपने कॉलेज के जमाने से ही सांप्रदायिक ताक़तों के खिलाफ लिखते रहे हैं और ख़ास तौर से राज-व्यवस्था में फिरकापरस्त ताक़तों के  बढ़ते वर्चस्व को खारिज किया है। फेसबुक की इस कार्रवाई को अमरेंद्र ने पूरी तरह से घटिया करार देते हुए फेसबुक के कट्टरपंथी भावना से मुक्त होने के दावे पर सवाल उठाए हैं। अमरेंद्र ने जोर देकर कहा कि हाल के दिनों में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तिवित भूमि-बिल, हरियाणा के मुख्यमंत्री का अचानक उभर आया गीता-प्रेम और मोदी सरकार के वादों के सन्दर्भ में जमकर फेसबुक पर सवाल उठाये थे। इनमें श्रीमद्भागवत गीता के सामाजिक सरोकारों पर अमरेंद्र द्वारा उठाये गए सवालों को लेकर फेसबुक पर जमकर मोदी समर्थकों ने आपत्ति प्रकट की थी।

अमरेंद्र ने कहा कि ‘बीते मंगलवार से ही मेरा फेसबुक अकाउंट बंद कर दिया गया है। कई बार अनुरोध करने के बावजूद फेसबुक के अधिकारियों ने मेरा अकाउंट शुरू नहीं किया। उन्होंने ऐसा अतिवादी ताक़तों को संतुष्ट करने के लिए किया, जो नहीं चाहते कि कोई अपने विचार स्वतंत्र तौर से निर्भीक होकर सोशल साइट पर साझा करे।’ उन्होंने आगे कहा, “कुछ लोगों को मेरे उस पोस्ट पर आपत्ति जरूर थी जिसमें मैंने श्रीमद्भागवत गीता के सामाजिक सरोकारों को लेकर कई सवाल उठाये थे। चूँकि न्यायालय ने भी स्पष्ट तौर टिप्पणी की थी कि गीता धर्म-ग्रन्थ नहीं है और न ही राष्ट्रिय ग्रन्थ है इसलिए गीता को लेकर लिखा गया कोई भी पोस्ट न किसी के धार्मिक भावनाओं पर आघात था और न ही राष्ट्रद्रोह था।”

उन्होंने दुःख प्रकट करते हुए कहा कि अपने २४ साल के पत्रकारिता के कर्रिएर में इतना मानसिक संताप उन्हें कभी नहीं झेलना पड़ा। आदिवासी भारत की ज़िंदगी और उनकी दुर्गतियों पर कई किताब लिख चुके अमरेंद्र किशोर को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इनदिनों अमरेंद्र समाज-विज्ञान और पर्यावरण पर केंद्रित एक अंगरेजी मासिक ‘डेवलपमेंट फाइल्स’ का सम्पादन भी कर रहे हैं।

उनका कहना है “अपनी पत्रिका केलिए विभिन्न लोकोपयोगी सामग्रियाँ मैं फेसबुक के अपने मित्रों के बूते जुटाता रहा हूँ– हमारे मित्र न सिर्फ ग्रामीण-आदिवासी भारत बल्कि भारतीय उप-महाद्वीप के कई इलाकों के थे– जिनसे मुझे दुर्लभ जानकारी मिलती थी। इसलिए मैं अपने पाठको से जुड़ने के लिए माध्यम के रूप में फेसबुक का इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन मैंने न तो मान्यवर मोदी पर या किसी पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी की थी और न ही राज-सरकार के खिलाफ किसी अभद्र शब्द का प्रयोग-उपयोग किया था। इसके बावजूद किसी तरह की चेतावनी दिए बगैर मुझ पर यहां प्रतिबंध लगा दिया गया।” अमरेंद्र के मुताबिक़ “मेरे पुराने अकाउंट में ढेर सारी दुर्लभ तसवीरें थी और कई पोस्ट थे, जिन्हे हासिल करना आसान ही नहीं नामुमकिन है।”   

पुराने अकाउंट में अमरेंद्र द्वारा उनके कई साथियों के पास भेजे गए सन्देश के साथ फेसबुक द्वारा ‘अब्यूसिव पोस्ट’ लिखा आता रहा है, जिस कारण अमरेंद्र को मानसिक यंत्रणा झेलनी पडी है। अमरेंद्र किशोर ने कहा है कि कहने केलिए अपने देश में अभिव्यक्ति की आजादी है। सुप्रीम कोर्ट भले ने साइबर कानून की उस धारा को निरस्त कर दिया जो वेबसाइटों पर कथित अपमानजनक सामग्री डालने पर पुलिस को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति देता था। लेकिन कोर्ट की बात कोर्ट  में ही रह गयी, लगता है। यहां तो बिना कुछ लिखे ही फेसबुक कट्टरपंथी भावना के लोगों के इशारे पर मानसिक यातना दे रहा है।” अमरेंद्र ने कहा कि फेसबुक का ऐसा मनमानापन भारत में अघोषित आपातकाल की ओर इशारा कर रहा है।


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