डीएम साहब की चहेती युवती चला रही है जिला!

चहेती युवती की हर बात पर एक्शन लेते हैं डीएम साहब… आखिर क्या है दोनों का रिश्ता…. गांव और शहर में हो रही है चर्चा… पंचायत विभाग के डीपीआरओ कार्यालय में संविदा पर तैनात है चहेती युवती… युवती के कहने पर 5 संविदाकर्मियों को बिना कारण हटा चुके हैं डीएम…  डीपीआरओ और सीडीओ समेत सारे अधिकारी डरते हैं युवती से…

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सीएम योगी के पैर छूने वाले बाराबंकी डीएम अखिलेश तिवारी को बीजेपी सांसद प्रियंका रावत ने बताया भ्रष्टाचारी

बाराबंकी : यूपी के बाराबंकी में बीजेपी सांसद प्रियंका रावत ने अपनी ही सरकार के डीएम अखिलेश तिवारी पर भ्रष्टाचार और भाजपा सरकार की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया है। डीएम के खिलाफ शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है। प्रियंका ने मुख्यमंत्री से शिकायती पत्र में  डीएम अखिलेश तिवारी पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है। पत्र में शिकायत की गयी है कि डीएम द्वारा ज़िले में विकास एवं जनकल्याणकारी कार्यों में सहयोग नहीं किया जा रहा जिसके कारण जनपद के विकास कार्य अवरुद्ध हो गए हैं। इससे भाजपा सरकार की छवि धूमिल हो रही है।

मुख्यमंत्री योगी को लिखे शिकायती पत्र में प्रियंका रावत ने डीएम पर फ़ाइल फेकने, राम लीला मैदान में ओपन थ्रेटर न बनने, सांसद निधि से विकास कार्यो को स्वीकृति न प्रदान करने,  सांसद आदर्श ग्राम दीनपनाह में विकास योजनाओ की स्वीकृत न करने और धारा 143 के तहत लखनऊ के निकट ज़मीनों पर अवैध निर्माण की स्वीकृत देने पर और हाल में ही मुहर्रम और दशहरा पर मूर्ति विसर्जन पर हुए दंगो में लापरवाही बरतने के आरोप लगाया है।

सांसद प्रियंका रावत ने कहा कि डीएम ने उनके ऊपर फ़ाइल फेंका और बदसलूकी की। सांसद प्रियंका रावत ने कहा कि डीएम सरकार को बदनाम कर रहे है, इनको सिर्फ पैसा चाहिए। डीएम भ्रष्टाचार में डूबे हैं। जन प्रतिनिधियों की भी डीएम इज़्ज़त नहीं करते हैं। प्रियंका रावत ने कहा कि हर चीज़ में डीएम साहब को पैसा चाहिए। डीएम बिलकुल निरंकुश हो रहे हैं। इनको यही ध्यान नहीं है कि सरकार बदनाम हो रही है। हम लोग बदनाम हो रहे हैं। इनको सिर्फ 24 घंटे पैसा चाहिए। जिस व्यक्ति के दिमाग में भ्रष्टाचार घुसा हुआ हो, वह जनपद का कोई काम नहीं कर सकता है। सरकार की कोई भी योजना को सही से इम्प्लीमेंट नहीं करवा सकता है। इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी को मैंने लिखित शिकायत भेजी है।

उधर, कैमरे के सामने डीएम अखिलेश तिवारी से बीजेपी सांसद के आरोपों के बारे में पूछा गया तो पहले तो वह खमोश रहे फिर बोले कि इस पर मुझे कोई कमेंट नहीं करना है। उन्होंने बयान देने से मना कर दिया।

गौरतलब है कि 14 अगस्त को सीएम योगी आदित्यनाथ बाराबंकी के बाढ़ग्रस्त इलाके में लोगों से मिलने आए थे। यह मौका तब असहज हो गया जब सीएम योगी आदित्यनाथ के हेलीकॉप्टर से उतरते हुए बाराबंकी के डीएम अखिलेश तिवारी उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेने पहुंच गए। डीएम का यह कारनामा चर्चा का विषय बन गया था क्योंकि ऐसा पहले की सरकारों में ही देखने को मिलता था। इस सरकार में सीएम योगी ने खुद ही अधिकारियों और नेताओं से चापलूसी ना करने को आदेश दिया है। लेकिन फिर भी ना जाने क्यों यूपी के आईएएस और आईपीएस सीएम के पैर छूते रहते हैं। जनता से मिलने में लापरवाही बरतने के मामले में बाराबंकी के डीएम अखिलेश तिवारी को मुख्यमंत्री कार्यालय से पहले ही नोटिस मिल चुका है।

Rizwan Mustafa
rizwanmustafa68@gmail.com
Mob-9452000001

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सीतापुर का ये शख्स पत्रकार नहीं बल्कि डीएम का पीए बन गया है! (देखें वीडियो)

डीएम ने स्वीकार किया कि मेले में पानी की व्यवस्था नहीं। लेकिन दैनिक जागरण के लिए खबर लिखने वाले एक महोदय बोले कि पानी की व्यवस्था है। अगर सवाल जिलाधिकारी से पूछा जाए और उसका जवाब एक मीडिया कर्मी देने लगे तो यह बात बहुत अटपटी बात है।

सीतापुर जिले के पिसावां ब्लाक में पंडित दीन दयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी के अवसर चल रहे अन्तोदय मेले में आयीं जिलाधिकारी सारिका मोहन जब पत्रकारों से वार्ता कर रही थीं उसी दरम्यान पत्रिका के पत्रकार ने डीएम से सवाल किया कि मैडम, ब्लाक में मेले का तो आयोजन कर दिया गया लेकिन मेले में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। इस पर डीएम सारिका मोहन ने बीडीओ की तरफ देखते हुए इस मामले पर जवाब मांगा। उन्होंने बीडीओ पिसावां एके चौबे की लापवाही स्वीकार करते हुए माना कि पीने के पानी का टैंकर नहीं मंगवाया गया। कई पत्रकार उक्त समय रिकार्डिंग कर रहे थे।

उसी समय अखिलेश सिंह नामक पत्रकार ने बीच में बात काटने का प्रयास करके सबको चौंका दिया। इस कार्यक्रम में इस प्रश्न पर एक तरफ सारिका मोहन जवाब दे रही थीं वहीं अखिलेश सिंह इस पर सफाई देने में जुट गए।  दैनिक जागरण के लिए खबर लिखने वाले पत्रकार के रूप में खुद प्रस्तुत करने वाले पत्रकार अखिलेश सिंह बीच में ऐसे बोल पड़े जैसे ब्लाक में पानी ही पानी है।

एक तरफ एक मीडिया कर्मी सवाल पूछ ही पाया कि दूसरी तरफ डीएम के आधे अधूरे जवाब के साथ अखिलेश की आवाज आने लगी। वह कह रहे थे कि पानी की समस्या नहीं है, पानी तो है। अखिलेश ने ‘पानी तो है’ कई बार कहा जो वीडियो में रिकार्ड हो गया। उक्त हरकत से वहाँ मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। वहीं उक्त पत्रकार की इस कार्यशैली से तमाम सवाल भी खड़े हो गए। इस प्रकार की पत्रकारिता की वजह समझना बहुत मुश्किल बात नहीं है। फिलहाल पीने के पानी की व्यवस्था पर पत्रकार अखिलेश की सफाई की बात शायद ही कोई पचा सके।

देखें संबंधित वीडियो :

सीतापुर से रामजी मिश्र की रिपोर्ट.

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जबरन सेल्फी लेने वाले मनचले को जेल भिजवाने वाली डीएम चंद्रकला के पीछे क्यों पड़ा है दैनिक जागरण?

बी. चंद्रकला (जिलाधिकारी, बुलंदशहर)

नीचे चार आडियो टेप हैं. ये टेप करीब तीन महीने पहले सामने आये थे. बुलंदशहर के करोड़ों रुपये के आईटीआई परीक्षा घोटाले से संबंधित इन टेपों के जरिए पता चला कि इस पूरे घोटाले में दैनिक जागरण, बुलंदशहर के ब्यूरो चीफ सुमन करन भी किसी न किसी रूप में संलिप्त हैं. जागरण प्रबंधन ने सब कुछ जानकर भी अपने दागी ब्यूरो चीफ को पद से नहीं हटाया. बुलंदशहर की जिलाधिकारी बी. चंद्रकला ने जब अपने संग जबरन सेल्फी लेने वाले एक मनचले युवक को जेल भिजवाया तो जागरण के इसी दागी पत्रकार ने उनसे जले पर नमक छिड़कने वाले अंदाज में सवाल पूछा जिसके बाद चंद्रकला ने भी पत्रकार को कायदे से समझाया.

आप सोच सकते हैं कि इस पुरुष प्रधान देश में जब एक डीएम महिला के साथ जबरन सेल्फी लेते हुए अभद्रता की कोशिश हो सकती है तो आम महिलाओं की क्या स्थिति होगी. किसी के जख्मों पर अगर नमक डाला जाये तो कैसा महसूस होता है. जाहिर है दर्द ही होता. लोकतन्त्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया माध्यम के प्रतिनिधि ने बुलंदशहर की जिलाधिकारी बी. चन्द्रकला से उनकी पीड़ा को इसी मानसिकता से जानने की कोशिश की जिसके बाद चन्द्रकला ने उस व्यक्ति को हकीकत का आईना दिखाया. सोशल मीडिया पर इस बातचीत से संबंधित ऑडियो के वायरल होने के बाद बुलंदशहर की महिलाओं ने जिलाधिकारी के इस स्वाभिमानी व सख्त रवैये की सराहना की और बताया कि पत्रकार हो या समाज का कोई वर्ग उन्हें अबला न समझे.


बुलंदशहर के आईटीआई परीक्षा घोटाले से संबंधित कुछ टेप जिसमें दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ का नाम आया था….

टेप नंबर एक

टेप नंबर दो

टेप नंबर तीन

टेब नंबर चार


कुछ महीने पहले की याद कीजिए. ये वही देश है जिसने निर्भया के हत्यारे एक नाबालिग को कानून से इतर फांसी की सजा की मांग की थी. महिलाओं की सुरक्षा की मांग के सामने सरकार झुकी और कानून में बदलाव हुआ. जाहिर है निर्भया के लिए हुए आंदोलन में मीडिया की बड़ी भूमिका थी. लेकिन बुलंदशहर में डीएम बी. चन्द्रकला के सेल्फी मामले में मीडिया के एक वर्ग का मापदंड बदल दिया गया. मीडिया माध्यम ने बहस छेड़ी कि महिला डीएम की सेल्फी लेने वाले युवक को उसकी अभद्रता के बाद भी माफ कर दिया जाना चाहिए था. घटना के एक दिन बाद इस मीडिया माध्यम के प्रतिनिधि ने डीएम की उस बातचीत को निजता कानून का उल्लंघन करते हुए न केवल रिकॉर्ड किया, बल्कि उसे सार्वजनिक भी कर दिया. बी. चन्द्रकला ने मीडिया माध्यम को करारा जबाब देते हुए बताया है कि महिलाओं की संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए.

दरअसल, डीएम बी. चन्द्रकला के साथ हुई यह घटना 1 फरवरी की शाम की है और जागरण के रिपोर्टर से बातचीत वाला ऑडियो उसके करीब 24 घंटे बाद रिकॉर्ड की गयी है. जिलाधिकारी के जिस जवाब को मीडिया माध्यम में छापने के लिए उन्हें फोन किया गया, उसका उन्होंने जिक्र तक अगले दिन की खबर में नहीं किया. शहर की महिलाओं का कहना है कि मीडिया माध्यम आधी आबादी की आवाज दबाने का काम कर रहा है. जिलाधिकारी ने अपने आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए बिल्कुल ठीक जवाब दिया है. अब अगर कोई इसे तूल देता है तो ये देश के चौथे स्तंभ का दुर्भाग्य है. 

सभी लोग यह सवाल करें कि बुलंदशहर की डीएम बी चन्द्रकला के साथ जबरन सेल्फ़ी लेने वाले को सज़ा देने पर हंगामा क्यों? अब कुछ बात बयानबाजियों पर. पता चला है कि राकेश टिकैत जी ने भी डीएम के खिलाफ बयान दिया है. उनसे ऐसी हल्की बात की उम्मीद नहीं थी. आज स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत की याद आ गयी. वो लड़कियों और महिलाओं की कितनी इज़्ज़त करते थे. क्या अब मेरठ मुज़फ्फरनगर की माता बहनों की जबरदस्ती सेल्फ़ी खींची जाने लगेंगी और पेपरों में छपने लगेंगी? लोग खुश होकर चटखारे लेकर फोटो देखेंगे और खबर पढ़ेंगे तो अच्छा लगेगा?

‘लेडी सिंघम’ कहलाने वाली डीएम बी चन्द्रकला के बारे में जिन्हें नहीं पता वे फिर से जान लें. एक ऐसी शख्सियत जो प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सालों से लड़ती चली आ रही हैं. मात्र 23 साल की उम्र में राजस्थान से अपने करियर की शुरुआत करने वाली डीएम चन्द्रकला जहाँ गयीं वहां लोगों के दिल में बस गयी, महिला सशक्तीकरण की चर्चा आज उनका नाम लिए अधूरी मानी जाएगी. देश के दस साहसी अधिकारियों की लिस्ट में उनका नाम आना कोई इत्तेफ़ाक़ नहीं है.

खैर कहते हैं जब कोई ईमानदार कोतवाल चार्ज लेता है तो इलाके के सभी चोर डर कर मौसेरे भाई हो जाते हैं. यह केस भी कुछ ऐसा है. बुलंदशहर एक एक गाँव में जब विकास की योजनाओं के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मीटिंग चल रही थी, तब फ़राज़ नाम का एक मनचला सभा के बीच में ही घुस कर डीएम के साथ बदतमीज़ी की और जबरदस्ती सेल्फ़ी लेने की कोशिश करने लगा. वो पहले भी एक कार्यक्रम के दौरान डीएम साहिबा के साथ सेल्फ़ी की मांग कर चुका था, तब चन्द्रकला ने उसे तस्वीर लेने का मौका दे दिया था. पर इस बार जब एक महत्वपूर्ण सभा के दौरान उसने ऐसा करना चाहा तब पुलिस ने फ़ौरन उसकी इस हरकत को देख शांतिभंग के आरोप में उसे अंदर कर दिया. हालांकि वह अगले ही दिन जमानत पर बरी हो गया, पर राजनीतिक उद्देश्य से इस मामले को मीडिया के कुछ लोगों ने बेशर्मी से पेश किया.

देश के एक बड़े मीडिया ग्रुप दैनिक जागरण के एक पत्रकार मनोज झा लिखते हैं- ‘शौक ही तो था, पूरा कर लेने देना चाहिए था’. ये शब्द क्या किसी पत्रकार के हैं? एक महिला के साथ जबरदस्ती सेल्फ़ी लेने को शौक बताने वाले पत्रकार यहीं नहीं रुके. इस खबर की हेडलाइन में वो लिखते हैं- ‘अब लोकतंत्र पर खतरा मंडराने लगा है’. बाल की खाल खींचने वाले ऐसे ही लोग ऐसे मनचलों को बढ़ावा देते हैं. जब इंटरलॉक टाइल्स से बनी घटिया सड़क पर चन्द्रकला ने ठेकेदार समेत सभी अधिकारियों को फटकार लगाई थी तब ये कहाँ थे? जब क्लीन-यूपी अभियान के तहत उन्होंने लगातार 36 घंटे सफाई करने का कीर्तिमान बनाया था तब ये कहाँ थे?

भारत पितृसत्तात्मक समाज के लिए जाना जाता है और आज भी कुछ लोग इस सोच से उबर नहीं पाये हैं. आशा करते हैं कि भगवान उन्हें जल्दी ही सद्बुद्धि देगा और वो बेवजह चन्द्रकला जैसी निर्भीक डीएम का विरोध बंद करेंगे. कानून सबके लिए एक है और अनुशासन सबके लिए जरूरी. हिंदुस्तान की समस्त जागरूक जनता डीएम बी चंद्रकला के साथ है और उनसे ऐसे ही निर्भीकता से काम करते रहने की उम्मीद रखता है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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डीएम और एसएसपी की चमचागीरी कर रहा अमर उजाला

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। नैनीताल के प्रमुख व्यापारिक नगर हल्द्वानी से छपने वाला सम्मानित दैनिक अमर उजाला का रुद्रपुर (जिला- ऊधमसिंह नगर ) ब्यूरो पिछले कुछ वर्षों से प्रशासनिक अफसरों, खासतौर से डीएम और एसएसपी की जमकर चमचागीरी कर रहा है। ऐसी दर्जनों खबरें प्रस्तुत की जा सकती हैं जो चमचागीरी को स्पष्ट करती हैं। यहां 1 फरवरी के अंक में प्रकाशित खबर का अवलोकन करें।

जिसने खबर लिखी उसका ऐसी खबर लिखने के पीछे अपना कोई स्वार्थ रहा होगा लेकिन जिसने खबर संपादित की उसे यह ध्यान रखना चाहिए था कि कम से कम भाषा के हिसाब से तो खबर ठीक हो। ‘गलत के लिए कड़क, अच्छे के लिए नरम दिल कप्तान’ शीर्षक बॉक्स खबर में एक जगह लिखा है, ”लेकिन कई बार उन्होंने गंभीर मुद्रा भी धारण की तो पूरा माहौल गंभीरमय हो गया”। आखिर कोई बताएगा कि यह ‘गंभीरमय’ क्या होता है?  कुछ वर्ष पूर्व किसी वरिष्ठ पत्रकार का बयान पढ़ा था कि पत्रकार डीएम और एसएसपी के स्टैनो बन गये हैं। यहां से छपने वाली खबरें अक्सर उक्त बयान की तस्दीक करती हैं।

उपर संलग्न: अमर उजाला के 1 फरवरी 2016 के अंक में प्रकाशित संबंधित खबर.

पत्रकार एपी भारती की रिपोर्ट. संपर्क: ap.bharati@yahoo.com

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डीएम ने सीजीएम से फोन कर कहा- अखबार में ढेर सारी चीजें छपती हैं जो सब वसूली टाइप रहती हैं (सुनें टेप)

धंधेबाज मीडिया के सच को अधिकारी भी अच्छी तरह जानते हैं लेकिन बस वह आन द रिकार्ड इस पर कुछ नहीं बोलते. छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के डीएम नीरज बंसोड़ ने यहां के सीजीएम प्रभाकर ग्वाल से फोन पर बातचीत में मीडिया को लेकर अपनी राय का खुला मुजाहरा कर दिया. डीएम साब ने सीजीएम साब से कहा कि अखबारों की बातों का वह संज्ञान लेकर एफआईआर आदि न किया करें क्योंकि अखबारों में तो बहुत सी चीजें छपती हैं जो सब वसूली टाइप रहती है.

हालांकि डीएम की इस नसीहत का मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इस रूप में बुरा मान गए कि यह तो सरासर अदालती काम में हस्तक्षेप है. कोई डीएम कैसे किसी सीजीएम को कह सकता है कि वह किस खबर का संज्ञान लें और किसका न लें. पूरा मामला तूल पकड़ चुका है और बातचीत का यह टेप वायरल हो गया है. इस मामले में राजस्थान पत्रिका में छपी जो खबर है, उसे दिया गया है. साथ ही नीचे टेप दिया जा रहा है जिसे आप सुन सकते हैं.

अगर उपरोक्त आडियो फ्लैश फाइल न सुन पा रहे हों तो नीचे दिए गए यूट्यूब लिंक पर क्लिक कर बातचीत की रिकार्डिंग सुनें>

https://www.youtube.com/watch?v=HYbt6zV2LMU

इन्हें भी पढ़ सुन सकते हैं>

आईपीएस सिकेरा से पत्रिका के संपादक महेंद्र ने माफीनामा छापने का वादा किया (सुनें टेप)

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खबर छपने से बौराए फर्रूखाबाद के प्रभारी सूचनाधिकारी पूरन चंद्र मिश्रा ने पत्रकार आनंद भान शाक्य को दी जमकर गालियां (सुनें टेप)

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पत्रकारों को हमेशा धमकाते रहने वाले मध्य प्रदेश के बदतमीज वन मंत्री डा. गौरीशंकर शेजवार के तीन आडियो-वीडियो टेप सुनें

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लीजिए साहब, एक सपाई युवा नेता ने डीएसपी को फोन पर कह दिया- ‘तेरी मां की xxx , औकात हो तो आ जाओ, मैं बूथ कब्जा कर रहा हूं’ (सुनें टेप)

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शिवराज के मंत्री ने पत्रकार को हड़काया- ”अखबार और मालिक दोनों पर केस करूंगा, ठिकाने लगा दूंगा” (सुनें टेप)

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‘आजतक’ का पत्रकार मनोज सट्टेबाज की रिहाई और मेले में सट्टा चलाने के लिए थानेदार से सिफारिश कर रहा (सुनें टेप)

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यूपी में जी मीडिया और राजस्थान में समाचार प्लस के संवाददाता मांग रहे पैसे (सुनें टेप)

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भाजपा जिलाध्यक्ष टिकट देने के लिए दो लाख रुपये रिश्वत मांग रहा (सुनें टेप)

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दूरदर्शन के दो अधिकारियों की बातचीत हुई लीक, कैसे होती है सेटिंग-गेटिंग, जानें (सुनें टेप)

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जानिए, कैसे ब्लैकमेल करते हैं ये दैनिक भास्कर वाले… (सुनें टेप) …रिपोर्टर ने संपादक के लिए प्राचार्य से मांगी LED

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अगर इस नए चैनल से जुड़ना चाहते हैं तो ये-ये काम करने होंगे (सुनें टेप)

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सुदर्शन न्यूज में काम कर रही एक लड़की ने पूरे ऑफिस के सामने महेश का भांडा फोड़ दिया (सुनें टेप)

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आपको मैनेज किया था, फिर कैसे छप गई आपके अखबार में खबर (सुनें टेप)

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यूपी का आबकारी मंत्र : खूब पिलाओ-पैसा कमाओ, डीएम बढ़ाएंगे शराब की बिक्री !

उत्तर प्रदेश के किसी बिजनेसमैन  को दिन दिन दूनी रात चैगनी कमाई करने का धंधा करना हो तो राज्य का आबकारी विभाग उसके लिये नजीर बन सकता है।कमाई के मामले मंे आबकारी महकमें ने बड़े-बड़े उद्योगपतियों को पछाड़ दिया है।आश्चर्य की बात यह है कि शराब के कारण प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के साथ-साथ अन्य कई सामाजिक बुराइयों की चिंता सरकार में बैठे लोगों को रत्ती भर भी नहीं है।इसी लिये प्रति वर्ष हजारो करोड़ की आमदनी करने वाले महकमें के बड़े अधिकारी इतनी मोटी कमाई के बाद भी संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।वह  प्रदेश के तमाम जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने जिले में शराब की खपत बढ़ाने को कह रहे हैं।शराब से परिवार बिगड़ते हैं तो बिगड़े।अपराध बढ़ते हैं तो बढ़ा करें लेकिन आबकारी विभाग का इन बातों से कुछ लेना-देना नहीं है।ऐसा लगता है कि  यूपी के जिलाधिकारियों के पास कोई काम नहीं है।इसी लिये उनके कंधों पर शराब बेचने की जिम्मेदारी डाली जा रही है।सरकारी खजाना भरने के चक्कर में आबकारी विभाग के अधिकारी महापुरूषों की उस नसीहत को अनदेखा कर रहे हैं जिसमें वह कहा करते थे,‘ जो राष्ट्र नशे का शिकार होता है,विनाश उसकी तरफ मुंह बाय खड़ा रहता है।’ 

नशे के खिलाफ तमाम नसीहतें आज भी जगह-जगह पोस्टरों-बैनरों-होर्डिंग के माध्यम से सामने आ रही हैं,लेकिन हो इसके उलट रहा है।आश्चर्य की बात यह है कि यह नशा विरोधी होर्डिंग और बैनर-पोस्टर भी आबकारी विभाग के अधीन काम कर रहा मद्य निषेध विभाग ही लगाता है, ताकि लोग नशे में फंस कर घर बर्बाद न करें।मतलब एक ही विभाग जहां एक तरफ लोगों को अधिक से अधिक शराब पिलाने के चक्कर मंें अपनी हदें पार कर रहा है तो उसका ही उप-विभाग(मद्य निषेध विभाग)प्रदेशवासियों को नशे से दूर रखने के लिये करोड़ो रूपया विज्ञापन पर खर्च कर रहा है।

उत्तर प्रदेश में वाणिज्य कर विभाग के बाद सबसे अधिक सरकारी खजाना आबकारी विभाग के राजस्व से ही भरता है।वर्ष 2013-2014 के वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग ने शराब,बियर और भांग जैसी नशीली चीजों से 12 हजार पाॅच सौ करोड़ के लक्ष्य के साक्षेप में 11 हजार छहः सौ करोड़ रूपये का राजस्व एकत्र किया।इतनी राशि में किसी छोटे-मोटे देश का पूरा बजट तैयार हो जाता है।आबकारी विभाग की आमदनी साल दर साल आगे बढ़ रही है।वित्तीय वर्ष 2008 और 2009 में आबकारी विभाग ने 4 हजार 220 करोड़ रूपये का राजस्व जुटाया था जो वर्ष 2012-2013 में 9 हजार 782 करोड़ पहुंच गया।

राज्य में शराब की खपत की बात की जाये तो फुटकर अंग्रेजी शराब की दुकानों से वर्ष 2013-2014 में 08 करोड़ 25 लाख 53 हजार 9सौ चार बोतलें अंगे्रजी शराब की बिकी।ठर्रा यानी देशी पीने वालों की आदत तो इससे काफी अधिक थी।वित्तीय वर्ष 2013-2014 में 26 करोड़ 86 लाख 68 हजार 231 लीटर शराब पियक्कड़ गटक गये।इसी प्रकार बियर पीने वाले भी पीछे नहीं रहे।बीयर के शौकीन उक्त वित्तीय वर्ष में 15 करोड़ 43 लाख 8 हजार 748 बोतलें डकार गये।बात दारू पीने में रिकार्ड बनाने की कि जाये तो लखनऊ और कानपुर मंडल इस मामले में पहले और दूसरे पायदान पर रहे जबकि तीसरे नबंर पर बाबा भोलेनाथ की नगरी वाराणसी मंडल के लोग रहे।सबसे कम दारू पीने वालों में मुरादाबाद मंडल रहा।

उत्तर प्रदेश में यह शराब  पियक्कड़ों के पास करीब 23,175 फुटकर दुकानों के माध्यम से पहुंचती है।वित्तीय वर्ष 2013-2104 के अनुसार राज्य में देशी शराब की 13,640 अंगे्रजी शराब की 5,096 बियर की 4,043 के अलावा पूरे प्रदेश में 396 माॅडल शाॅप थीं जिसमें और वृद्धि ही हुई है।  

यह सुनकर और देखकर आश्चर्य होता है कि राज्य में जितने मयखाने हैं उतने तो ज्ञान के मंदिर (हाईस्कूल और इंटर कालेज) भी नहीं हैं।यूपी में कुल 23 हजार 175 शराब की दुकानों के मुकाबले मात्र 20,720 कालेज ही हैं।ऐसी ही स्थिति सरकारी अस्पतालों की है।यूपी की करीब 21 करोड़ आबादी के लिये प्रदेश में मात्र 5,095 अंग्रेजी (एलोपैथिक), 2114 आयुर्वेदिक,1,575 होम्योपैथिक और 253 यूनानी अस्पताल हैं।इसमें भी करीब 80 प्रतिशत खस्ता हालत में हैं।न तो प्रर्याप्त डाक्टर और अन्य स्टाफ तैनात हैं, न ही दवाएं मौजूद हैं।  

बहरहाल, शराब के धंधे से आबकारी विभाग भले ही हजारो करोड़ कमा रहे हो, परंतु तथ्य यह भी है कि उत्तर प्रदेश में अंग्रेजी दारू पीने वालों की संख्या लगातार घट रही है।उत्तर प्रदेश सरकार की आय घट रही है। सरकार के लिये यह बात चिंता जनक है,लेकिन वह जमीनी हकीकत को अनदेखा कर रही है।उत्तर प्रदेश में नंबर दो की शराब का धंधा खूब फल-फूल रहा है।प्रदेश में अंग्रेजी शराब की खपत या बिक्री कम हो रही है तो उसका सबसे बड़ा कारण है हरियाणा। यू पी के कई जिलों में हरियाणा की अवैध शराब धड़ल्ले से बिक रही है।पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तो हरियाणा की शराब छोटी-छोटी दुकानों और गली मोहल्ले में घरों से बेचीं जा रही है। ऐसा नहीं है की पुलिस या उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग को इस बात की जानकारी नहीं है।खाकी वर्दीधारी लोग इन अवैध शराब बेचने वालों से अपना हिस्सा वसूलते खुले आम देखे जा सकते हैं।अवैध कारोबार के पनपने का एक कारण और भी ह।ै जहां नंबर एक की शराब के दुकानों और मॉडल शापों पर दारू का एक पव्वा 150-160 रूपये में मिलता है वहीँ अवैध हरियाणा ब्रांड पव्वा केवल 60-70 रुपये में मिल जाता है। इस लिए प्रदेश में नंबर एक की अंग्रेजी शराब की बिक्री कम हो रही है।बताते चलें कि 2012 के विधान सभा चुनाव प्रचार के दौरान सपा नेता और मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि अगर उनकी सरकार बनी तो ‘शाम की दवा’ के दाम घटाये जायेंगे,लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।यह स्थिति तब है जबकि आबकारी विभाग के मुखिया मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही हैं।

प्रदेश में अवैध शराब का धंधा बढ़ रहा है।वहीं आबकारी विभाग अपनी मजबूरियों में उलझा है।आबकारी विभाग के नियमों के मुताबिक जिला आबकारी अधिकारी को हर माह पच्चीस फीसदी दुकानों का निरीक्षण करना चाहिए। इस दौरान शराब की गुणवत्ता, दुकान के मानक, रेट सूची आदि की जांच करनी होती है।नकली शराब की जांच के लिए जिला आबकारी अधिकारी और निरीक्षक को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी तरह, आबकारी निरीक्षक को महीने में एक बार प्रत्येक दुकान का निरीक्षण करना चाहिए,लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है जिस कारण प्रदेश में हरियाणा की शराब की बिक्री और मिलावटी शराब का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। आबकारी विभाग के ही एक रिटायर्ड अधिकारी का कहना था कि प्रतिमाह करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाला आबकारी विभाग विकलांग है। विभाग के पास न ही पर्याप्त मात्रा में फोर्स है और न ही चलने के वाहन हैं। ऐसे में शराब का गलत कारोबार करने वालों के खिलाफ विभाग नाकाम हो रहा है। सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला यह विभाग अपने संसाधनों के लिए ही तरस रहा है। इतना ही नहीं यह विभाग संसाधन के साथ ही उन कड़े नियमों के लिए भी मोहताज है जो इसके पास नहीं हैं। 

बता दें कि मलिहाबाद कांड में जहरीली शराब से जब कई दर्जन लोगों की मौत हुई तो सरकार ने आनन-फानन में आबकारी विभाग के सभी अधिकारियों के ऊपर कार्रवाई करते हुए उनको पद से हटा दिया। जबकि दूसरी तरफ पुलिस विभाग के सीओ स्तर तक ही कार्रवाई की गई। सूत्र बताते हैं कि इस अवैध कारोबार में पुलिस की मोटी रकम प्रतिमाह बंधी हुई होती है। कभी-कभार आबकारी विभाग की टीम छापेमारी करती है तो उससे पहले अवैध कारोबार करने वालों को पता चल जाता है। ऐसे में इसकी जानकारी अधिकतर पुलिस ही देती है। 

बात यही खत्म नहीं होती है। प्रदेश में आबकारी विभाग के पास अवैध शराब का कारोबार करने वालों के खिलाफ कोई सख्त कानून नहीं है।विभाग कहीं भी अवैध शराब पकड़ता है तो उसे एक्साइज की धारा 60, 61 और 62 के तहत ही कार्रवाई करनी पड़ती है। कच्ची,देसी या फिर विदेशी, किसी भी तरह की अवैध मदिरा का व्यवसाय करने वालों के खिलाफ आबकारी विभाग सिर्फ उक्त धाराओं में ही कार्रवाई करता है। यह धाराएं जमानतीय तो होती ही हैं,अवैध करोबारियों पर जुर्माना भी नाम मात्र का लगता  है। सबसे बड़ी बात यह है कि सुबह विभाग इनको पकड़ कर कोर्ट में पेश करता है जबकि शाम तक यह आरोपी जमानत पर रिहा होकर फिर अपने धंधे में लग जाते हैं। अगर इससे भी ज्यादा कुछ होगा तो मात्र छह माह की कैद हो जायेगी।मोटे अनुमान के अनुसार अवैध शराब की बिक्रि से आबकारी विभाग को प्रति वर्ष करीब 500 सौ करोड़ का नुकसान हो रहा है।   

लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार से संपर्क : ajaimayanews@gmail.com

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डीएम ने मुर्गा न बनने पर पत्रकार की बाइक पुलिस को सौंप दी

बाराबंकी (उ.प्र.) : जिलाधिकारी ने सरेआम मामूली सी बात पर कल सुबह 10.21 बजे डीएम ऑफिस मोड़ पर ‘क्राइम रिब्यू’ के पत्रकार रामशंकर शर्मा को पहले मुर्गा बनने को कहा। ऐसा न करने पर पुलिस को बुलाकर पुनः दबाव बनाया। 

शर्मा ने बताया कि वह कचहरी गेट से मोटरसायकिल चलाकर अंदर जा रहा थे। मोबाइल पर काल अटैंड करने के लिए बाइक किनारे खड़ी कर बात करने लगे। इसी समय डीएम की कार पीछे से आ गई। कार का हार्न सुनकर शर्मा ने बाइक थोड़ी और किनारे कर ली, फिर भी डीएम ने गनर से बाइक की चाबी निकालने और शर्मा को सबके सामने मुर्गा बनने को कहा। मना करने पर पुलिस बुलवाकर उनकी बाइक कोतवाली भिजवा दी।

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शाहजहाँपुर की डीएम ने कहा – जगेन्द्र के घर जाने से विवादित हो जाऊंगी

कल आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर तथा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने पत्रकार जगेन्द्र सिंह के गाँव खुटार जा कर उनके परिवार वालों से मिल कर मौजूदा स्थिति, विवेचना और उनकी सुरक्षा के बारे में जानकारी ली. स्थितियों पर उन्होंने पूरी तरह असंतोष जाहिर करते हुए मुआवज़े और घटना की सीबीआई जांच की मांग की. 

इन दोनों ने शाहजहाँपुर घटनास्थल जा कर आसपास के लोगों से बात की और यह निष्कर्ष निकाला कि मौके पर आग पुलिस के अन्दर घुसने के बाद लगी. लोगों ने यह भी बताया कि जिस मुकदमे में जगेन्द्र के खिलाफ पुलिस दबिश में गयी थी, वह पूरी तरह झूठा था.

इसके बाद इन दोनों ने डीएम शाहजहांपुर शुभ्रा सक्सेना से एक बार खुटार जा कर परिजनों से मिल लेने का निवेदन किया तो उन्होंने कहा कि एसडीएम मौके पर गए थे. वह काफी है. उन्होंने कहा, यह विवादित मामला है, इसमें दो तरह की बातें कही जा रही हैं और यदि मौके पर गयी तो मैं भी विवादित हो जाऊंगी. मुआवज़े के बारे में  भी उन्होंने कोई संतोषजनक आश्वासन नहीं दिया. नूतन ने कहा है कि डीएम की बातें दुर्भाग्यपूर्ण और प्रशासनिक निर्ममता का सबूत है.   

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें-  

IPS officer Amitabh Thakur and social activist Dr Nutan Thakur yesterday went to journalist Jagendra Singh’s house at Khutar and met his family members to know about the progress of investigation and their safety concern, who showed complete dissatisfaction with the investigation and sought CBI enquiry. They also talked of appropriate compensation.

Later they went to the place of incidence at Shajehanpur and concluded that the fire took place after the police entered the house. It was also concluded that the case against Sri Jagendra in which police raided his house was false.

They met he DM Shajehanpur Shubhra Saxena requesting her to at least go once to Khutar to meet the family members to which she said that the SDM has gone to the place and this is good enough. She said this is a controversial issue where two different versions are coming and if she goes there, she will also get tainted. She was equally evasive about the issue of compensation.

Nutan said that the DM’s statements are not only completely callous but also demonstrate the administrative apathy is this case.

 डॉ.नूतन ठाकुर संपर्क : 94155-34525

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कानपुर में जिलाधिकारी के तंबाकू विरोधी अभियान का धुंआ निकाल रहे विज्ञापन के भूखे अखबार वाले

कानपुर : डीएम डा. रौशन जैकब का शहर को तम्बाकू मुक्त करने के लिये चलाया जा रहा अभियान पूरे जोरों पर है, दूसरी तरफ इस अभियान को यहां पैसे का भूखा प्रिंट मीडिया खूब पलीता लगा रहा है। शहर के आलाधिकारियो के प्रयासो पर अखबारों में छप रहे विज्ञापन पानी फेरने में लगे हुए हैं।

ये कोई नई बात नहीं है। इस अभियान के दौरान ही अपने 18 मई के अंक में हिन्दुस्तान ने पान मसाले का विज्ञापन छाप डाला और वो भी मुख्य पृष्ठ पर। इन अखबार वालों को शहर में चलाये जा रहे अभियानों से कोई सरोकार नहीं है। ये बड़े मीडिया हाउस दोधारी छुरी होते हैं। ये शहर को तंबाकू फ्री बनाने वाली खबरें भी छापते हैं और तंबाकू उत्पादों का विज्ञापन भी छापते हैं।

ये मामला एक शहर का नहीं है। मीडिया चाहे प्रिंट हो या फिर इलेक्ट्रानिक, सभी में धूम्रपान करने वाले विज्ञापनों की धूम है। इलेक्ट्रानिक मीडिया तो इनसे भी दो कदम आगे है। नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले चैनलों में शराब उत्पादों के विज्ञापन बेरोकटोक चलाये जा रहे हैं। जैसे बेगवाइपर, रायल स्टेग, रायल चैलेंजर आदि ब्रांड म्यूजिक सीडी के नाम से प्रमोशन कर रहे हैं। अब जनता भी जानती है ये ब्रांड म्यूजिक सीडी बनाती हैं या फिर कुछ और।

ये बड़े मीडिया हाउस सिर्फ पैसों की भाषा समझते हैं। जिस तरह खुलेआम शराब का सेवन समाज अच्छा नहीं मानता है उसी तरह इन विज्ञापनों के प्रसारण को भी जुर्म की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। अखबारों का ये दोगलापन अब बंद होना चाहिए।

लेखक एवं भारतन्यूज24 के प्रधान संपादक नितिन कुमार से संपर्क : 9793939399 

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डीएम ने प्रवासी पीड़ितों की मदद करने पहुंचे पत्रकार का कार्ड छीना

प्रतापगढ़ (उ.प्र.) : असम के पीड़ित मजदूरों की फरियाद पर जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी पत्रकार कृष्णभान सिंह का पहचान पत्र ही छीन लिया। धमकी भी दी कि जाओ, जो चाहो छाप देना। इस घटना से जिले के पत्रकारों में रोष है। 

जिले के रानीगंज थाने के बुढौरा ग्राम में बिजली का काम कर रहे हैं बरपटा (आसाम) के मजदूर। इनकी कहानी वही के रहने वाले जाकिर बताते हैं कि किस तरह उन्हें एक तिवारी जी ले आए, जो कि लेबर कान्ट्रेक्टर हैं। उन्होंने जाकिर, उसकी पत्नी और दो अन्य को उन्होंने गोदरेज कम्पनी में काम पर लगवाया। एक दिन जब कोई नहीं था तो जाकिर की पत्नी से कम्पनी के मुंशी ने छेड़छाड़ की। इसी दौरान मौके पर आ पहुंचे जाकिर ने विरोध किया तो उसे काम से निकाल दिया गया।

पीड़ितों ने थाना रानीगंज में शिकायत की। थानाध्यक्ष संजय शर्मा ने तत्काल कम्पनी के दो लोगों को थाने बुलाया और दो महीने, 9 दिन का मजदूरों की मजदूरी का हिसाब कराया। चार मजदूरों की पूरी मजदूरी 78, 000 कुछ रूपये निकली। थानाध्यक्ष के सामने ही 6000 रूपये पीड़ितो को दे दिए गए। बाकी पैसा 19 मई 20015 को देने को थाने पर बुलाया। दूसरे दिन बुलाये गये समय पर जब पीड़ित पहुंचे तो थानाध्यक्ष ने उनको असम भाग जाने को कहा। पीड़ित ने अपनी बात पत्रकार कृष्णभान को बताई तो  उन्होंने क्षेत्राधिकारी डी एल सुधीर से बात की। उन्होंने थानाध्यक्ष को तत्काल बुलाया लेकिन थनाध्यक्ष का इशारा पा कर क्षेत्राधिकारी ने पीड़ित को जिलाधिकारी के पास जाने की सलाह दे डाली। 

पीड़ितों ने 19 मई 2015 को जिलाधिकारी को रानीगंज तहसील दिवस पर शिकायत की। पत्रकार ने जब जिलाधिकारी से इस मामले पर बात करनी चाही तो जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने पत्रकार का आई कार्ड छीन लिया और अभद्रता की। कहा कि जो खबर चलानी है जाकर चला दो। जरा सोचिए कि प्रतापगढ़ जिले में पीड़ितों का सहयोग करने पहुंचे पत्रकार से जब एक जिलाधिकारी इस तरह की हरकत करे तो समझ सकते हैं, जिले की कानून व्यवस्था की स्थितियां क्या होंगी। 

ये हैं अखिलेश सरकार का नजारा। इस मामले में पत्रकार ने मुख्य सचिव आलोक रंजन को भी सूचना दी है और कममिश्नर इलाहाबाद को भी। पत्रकार का कहना है कि यदि जिलाधिकारी ने कार्ड छीना है तो वे ही पत्रकार को कार्ड वापस करें और अपनी गलती मानें। देखते हैं कि चौथे स्तंभ का मजाक उड़ाने वाले इस जिलाधिकारी पर क्या कार्रवाई होती है

पत्रकार कृष्णभान सिंह से संपर्क : 9628536386

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हरदोई के डीएम ने बर्बाद किसान को फेसबुक पर ब्लाक कर दिया!

Kumar Sauvir : मुझे तो अब अक्‍सर ऐसा साफ लगने लगता है कि जो पढ़-लिख कर डीएम बन जाता है, वह वाकई बेवकूफी या अभद्रता का दामन सम्‍भाल लेता है। उनसे ज्‍यादा समझदार और संवेदनशील तो साबित होता है किसान, जो अफसरशाही कार्यशैली से लेकर प्रकृति तक की निर्ममता का सामना करना होता है। नजीर हैं हरदोई के जिलाधिकारी रमेश मिश्र। हरदोई के डीएम ने डीएम हरदोई के नाम पर एक नया फेसबुक पेज बनाया है, जिसमें वे दिन भर अपनी ढपोरशंखी ढफली बजाया करते हैं कि:- आज मैंने इतने लोगों को लाभान्वित किया, उतने लोगों को उतना फायदा उठाया। इतने लोगों के साथ हेन किया, और उतने लोगों को हेन किया। ऐसा किया, वैसा किया, यू किया, ऊ किया, अइसन किया, वइसन किया।

लेकिन क्‍या, कितना, केतरा किया, उसका जवाब आपको उनके पेज पर टंगी अखबारी कटिंग के शीर्षक में मिल सकता है। पिछले एक पखवारे से डीएम रमेश मिश्र जी लगातार इसी तरह की लारंतनियां फेंक रहे थे, कि अचानक एक बेबस किसान, जिसकी सारी फसल ताजा प्राकृतिक हादसे में तबाह हो चुकी थी, लेकिन ने सरकारी अफसरों पर कई दिनों तक गुहार लगायी, चिरौरी की और मिन्‍नतें मनायीं कि:-सरकार। हम लोग बर्बाद हो चुके हैं, अब आप तो नजरे इनायत कर दीजिए।

लेकिन किसी भी अफसर के कानों तक जूं नहीं रेंगी। हारकर उस किसान ने एक नयी तरकीब अपनायी। उसने डीएम हरदोई फेसबुक के दावों वाले पोस्‍ट पर लगातार अपनी अर्जियां कमेंट के तौर पर लगाना शुरू कर दिया। इस किसान के मुताबिक उसके ऐसे कमेंट-अर्जियां लगाने को डीएम साहब ने इग्‍नोर किया, लेकिन जब किसान ने अपना हौसला नहीं छोड़ा तो डीएम साहब ने खुद ही अपना सब्र तोड़ दिया और उस किसान के कमेंट को लगातार डिलीट करना शुरू किया।

जाहिर है कि इस प्रक्रिया से भी किसान का हौसला नहीं टूटा, बल्कि उसकी तेजी बढ़ती ही गयी। एक दिन तो उस किसान ने यहां तक लिख दिया कि सरकार, अब क्‍या मरै के बादै कोई राहत मिली? नतीजा, डीएम साहब ने फैसला किया कि वह अपने संसार से इस किसान को विदा कर देंगे। और आखिरकार डीएम साहब ने अपने पेज पर इस किसान को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा करते हुए उसे ब्‍लाक कर दिया। बहुत सिकायत करत रहत रहै ना? ल्‍यौ, अब थामो बाबा जी का घण्‍टा!

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर के फेसबुक वॉल से.

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वाराणसी में जिलाधिकारी ने प्रेस कार्ड देखने के बहाने पत्रकारों से की हाथापाई

वाराणसी : बीएचयू में छात्रों पर बल प्रयोग से पहले प्रशासन और पुलिस को रिपोर्टिंग करने पहुंच पत्रकार रास्ते का रोड़ा दिखे। उन्हें वहां से हटाने की ओछी तरकीब जब कारगर होती न दिखी तो जिलाधिकारी पत्रकारों से हाथापाई पर उतर आए। इसके बाद कुछ पत्रकार वहां से खिसक लिए और कुछ एक अधिकारियों के तलवे सहलाने में जुट गए। इस बीच प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में फोर्स ने हॉस्टल खाली करा लिया।

पं मदनमोहन मालवीय को भारतरत्न मिलने के 20 दिन के भीतर ही उनकी बगिया एक बार फिर आंदोलनकारियों की भेट चढ़ गयी. क्रिकेट खेलने को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने हाथ खड़ेकर जिला प्रशासन से मदद माँगने लगा. विश्वविद्यालय ने मदद क्या मांग ली कि बीएचयू को  जिला प्रशासन ने छावनी में तब्दील कर दिया. जिलाधिकारी, एसएसपी जनपद की फ़ोर्स सहित पीएससी लाठी भाजने को तैयार हो गयी. जैसे-जैसे रात हुई. फोर्स सख्त रूप धारण करती गई. प्रशासन को विधि छात्रावास पर इक्कठे देख विधि के छात्र जिला प्रशासन के खिलाफ हॉस्टल से नारेबाजी करने लगे. जिला प्रशासन को नारेबाजी नागवार गुजरी. प्रशासन ने रणनीति बनाई कि लॉ छात्रावास में घुसकर छात्रों की धुनाई की जाए और इनके ऊपर मुक़दमे दर्ज किए जाए. 

इसी बीच डीएम और एसएसपी की नजर पत्रकारों पर पड़ी. पत्रकार उनकी राह में अवरोधक दिखे. इसके बाद पुलिस कप्तान ने पत्रकारों पर तंज कसना शुरू किया ताकि पत्रकारों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आए तो हाथ साफ़ किया जाए लेकिन माहौल को समझते हुए पत्रकारों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. इसके बाद जिलाधिकारी ने वहां मौजूद दर्जनों पत्रकारों को बुलाया और प्रेस-कार्ड दिखाने को कहा. दैनिक जागरण से बीएचयू बीट देखने वाले दिनेश सिंह ने प्रेस-कार्ड घर भूलने की बात कही तो डीएम प्रांजल यादव सभी मर्यादा लांघकर पत्रकारों से हाथापाई पर उतारू हो गए. 

इतना होने के बाबजूद कुछ चाटुकार डीएम-एसएसपी की जी-हुजूरी में लगे रहे. अंत में पत्रकारों को बीएचयू से बाहर निकालने के बाद प्रशासन ने लॉ छात्रावास भगवानदास को खाली करा दिया. पूरा मामला यह था कि लॉ के छात्र आईटी के मैदान में क्रिकेट खेलने लगे. दो ओवर बचा ही था कि आईटी के छात्र ग्राउंड में आकर खाली  कराने लगे. इसी दौरान आईटी-लॉ के छात्रों में ग्राउंड में ही गुत्थम-गुत्थी हो गई. दो घंटे बाद दोनों गुटों के छात्रों में बदले की ज्वाला भड़क गयी और दोनों तरफ से पत्थरबाजी के साथ-साथ पेट्रोलबम में फेके गए . सूचना तो यहाँ तक थी कि आईटी के छात्रो की संख्या काफी ज्यादा होने के कारण लॉ छात्रावास में घुसकर आईटी ने मारपीट की जिसमे लॉ छात्रावास के वार्डन गंभीर रूप से घायल हो गए.

इतना होने के बावजूद कुलपति छात्रों के बीच डीएम के बुलाने पर आए. अब प्रश्न यह कि लाखो रुपए प्रतिमाह खर्च कर बीएचयू का सुरक्षातंत्र और खुफिया विभाग बार-बार फेल क्यों होता है. भारी मात्रा में पत्थर और पेट्रोलबम छात्रों के पास इक्कठा हुए और इसकी भनक विश्वविद्यालय के खुफियातंत्र को नहीं हुई? आखिर प्रश्न उठना यह भी लाजमी है कि जिला प्रशासन लॉ के छात्रों को ही निशाना क्यों बनाता है, आईटी के छात्रों के साथ दरियादिली क्यों? चाहे दलीलें कुछ भी हों, लोगों का कहना है कि बीएचयू में यदि छात्र उग्र होते हैं तो ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए कि विश्वविद्यालय ही उन्हें शांत कराए क्योंकि बच्चे लाठी खाने के लिए नहीं होते. जब-जब बीएचयू में बवाल हुआ है तो देखा गया है कि बाहरी अराजकतत्व मुंह बांधकर मौके का फायदा उठाते हैं और अंत में गाज छात्रों पर गिरती है. लोगों की मांग है कि बीएचयू प्रशासन को कदापि जिला-प्रशासन के हाथ छात्रों को नहीं छोड़ना चाहिए.

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यूपी में महिला आईएएस पर डीएम की बुरी नजर, सीएम तक पहुंची बात, आईएएस एसोसिएशन भी गंभीर

लखनऊ/दिल्ली : उत्तर प्रदेश में तैनात एक ट्रेनी महिला आईएएस की आपबीती ने गोरखपुर के जिलाधिकारी रंजन कुमार के आचरण को संदिग्ध बना दिया है। आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ.नूतन ठाकुर के मुताबिक महिला अफसर ने उनसे मिलकर अफसर की बदनीयती की सारी हरकत खोल दी है। एक अखबार ने इस पूरे मामले का रहस्योदघाटन किया है। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है। सेंट्रल आईएएस एसोसिएशन के सचि‍व संजय भूस रेड्डी और यूपी आईएएस एसोसिएशन के सचिव भुवनेश कुमार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। 

नूतन ठाकुर ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अब मामले की शिकायत कर दी है। एसडीएम ने भी पूरा मामला सरकार के आला अफसरों को बता दिया है। नूतन ठाकुर और आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने बताया कि ट्रेनी आईएएस उनकी पूर्व परिचित है। जब अमिताभ आईआईएम लखनऊ में वर्ष 2009-2011 में एमबीए की पढाई कर रहे थे, तब यह ट्रेनी भी उनसे कुछ सलाह लिया करती थी। दोनों ने ट्रेनी आईएएस से बात भी की और मामले को सही पाया। अमिताभ ठाकुर का कहना है कि उन्होंने भी मामले को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का मन बना लिया है। उन्होंने मांग की है कि मामले की गोपनीय जांच करवाई जाए और अगर यह आरोप डीएम के खिलाफ सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए। डीएम रंजन कुमार ने उन पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि पूरा मामला गलत है। इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है। मीडिया को पता नहीं क्यों पर्सनल मामले में दिलचस्पी है! 

एक समाचारपत्र के रिपोर्टर के मुताबिक महिला आईएएस अफसर का आरोप है कि  गोरखपुर के जिलाधिकारी रंजन कुमार उसको रात दो बजे फाइलें देखने के लिए अपने आवास पर बुलाकर खाना बनाने को कहते थे। रिपोर्टर की रिकार्डेड जानकारी के मुताबिक पीड़ित विवाहित आईएएस ने बताया है कि एक दिन रंजन कुमार ने उससे कहा – शहर में इसीलिए तुम्हारी ड्यूटी लगाई गई है कि तुम्हारा चेहरा हमेशा सामने रहे। महिला आईएएस ने बताया है कि रंजन कुमार उसे फिल्में दिखाने भी ले जाते रहे हैं। 

सूत्रों के मुताबिक पीड़िता आईएएस को जब डीएम की हरकतों पर बदनीयती का शक हुआ तो उसने उस पर ऐतराज जताया और इससे डीएम के नाराज हो जाने पर वह छुट्टी पर चली गई। बाद में लौटने पर उनका गोरखपुर के देहात क्षेत्र में स्थानांतरण कर दिया गया। इस पर महिला आईएएस ने जिले के पुलिस कप्तान को सारी बातें बता दीं। इसके बाद स्थानांतरण रुक गया है। 

सेंट्रल आईएएस एसोसिएशन के सचि‍व संजय भूस रेड्डी ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि अभी घटनाक्रम की उन्हें अपेक्षित जानकारी नहीं है। वह इस संबंध में यूपी आईएएस एसोसिएशन से बात करेंगे। यदि डीएम पर महिला अधिकारी के आरोप सच साबित होते हैं तो इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। सेंट्रल आईएएस एसोसिएशन यूपी सरकार से इस मामले की जांच की मांग भी कर सकता है।

यूपी आईएएस एसोसिएशन के सचिव भुवनेश कुमार ने कहा है कि पूरी जानकारी उन्हें मीडिया से मिली है। दोनों अधिकारि‍यों की तरफ से उन्हें अभी कोई भी शिकायत नहीं मिली है। ऐसे में वह अभी कुछ नहीं कर सकते हैं। यदि पीड़ित पक्ष एसोसिएशन के पास आएगा तो वह मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई जरूर करेंगे। 

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शासनादेश पर अमल की मांग : मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम, एसएसपी से सुरक्षा वापस लो

लखनऊ : आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने प्रमुख सचिव गृह से प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी सहित तमाम वरिष्ठ अफसरों के साथ कमिश्नर, आईजी ज़ोन, डीआईजी रेंज, जिलों के डीएम, एसएसपी आदि अफसरों के सुरक्षाकर्मियों को वापस लेने की मांग की है. साथ ही अन्य लोगों को बिना आकलन सुरक्षा दिए जाने के बारे में जांच कराने की मांग की है.

संलग्न- सुरक्षा सम्बन्धी शासनादेश दिनांक 09 मई 2014

 

उन्होंने कहा कि डॉ, नूतन ठाकुर की याचिका संख्या 6509/2013 में हाई कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 पृष्ठों का एक विस्तृत शासनादेश दिनांक 09 मई 2014 को निर्गत किया था, जिसमे कुल 20 श्रेणी के लोगों के लिए सुरक्षा के सम्बन्ध में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे.

इनमें कहीं भी मुख्य सचिव, डीजीपी, कमिश्नर, डीएम जैसे अफसरों का उल्लेख नहीं है पर बड़ी संख्या में प्रशासनिक और पुलिस अफसर बिना किसी आकलन के मनमर्जी सुरक्षा लिए चलते हैं. इतना ही नहीं, लखनऊ में लगभग 500 लोगों को मौखिक आदेशों पर पुलिस लाइन्स से सुरक्षा दी गयी है. उन्होंने इस प्रकार शासनादेश के विपरीत दिए गए सभी सुरक्षाकर्मी तत्काल हटाने की मांग की है.

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें – 

Take back security from Chief Secy, DGP, Comm, DMs

IPS officer Amitabh Thakur and social activist Dr Nutan Thakur have asked the Principal Secretary Home to take back the security cover of State Chief Secretary, Home Secretary, DGP etc along with Commissioners, Zonal IG Zones, Range DIGs, DMs, SSPs etc. They also sought enquiry into providing state security to many others without threat perception.

They said that after High Court’s order in Dr Thakur’s Writ Petition No 6509 of 2019, the State government passed a 6 page detailed Government order dated 09 May 2014 where procedure of providing security and different categories of protectee have been enumerated in great details.

These categories do not contain Chief Secretary, DGP, Commissioner, DMs etc but very large number of government officials take security cover without any assessment, against the provisions of the GO. In addition, some 500 persons have been provided security by Lucknow police merely on oral orders.

 They have asked taking back all these security personnel provided against the government order.

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डीएम की कांफ्रेंस में सूचना अधिकारी ने पत्रकारों को बुलाया ही नहीं

देवरिया : जिलाधिकारी शरद कुमार सिंह की प्रेस वार्ता में उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब कुछ पत्रकारों से उन्हें पता चला कि सूचना अधिकारी ने कांफ्रेंस के संबंध में सूचित ही नहीं किया था। जिलाधिकारी ने सूचना अधिकारी की हरकत पर नाराजगी जताते हुए पत्रकारों से खेद व्यक्त किया। 

गत दिनो जिलाधिकारी ने अपने कैम्प कार्यालय पर निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची से सम्बन्धित एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया था। जिलाधिकारी ने सभी पत्रकारों को बुलाए जाने के निर्देश दिए थे। आपसी गुटबाजी के चलते सूचना अधिकारी रविन्द्र पाण्डे ने कुछ पत्रकारों को सूचना नहीं दी, जिनमें लखनऊ से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्रों के संवाददाता एवं मान्यता प्राप्त पत्रकार और न्यूज एजेन्सी के पत्रकार भी शामिल थे। रविन्द्र पाण्डे का कहना है कि केवल लीडिंग न्यूज पेपर वालों को ही बुलाने का निर्देश मिला था। यह निर्देश किसने दिया था, वह जिलाधिकारी के पूछने पर नहीं बता पाए।

बताते है कि प्रेस वार्ता की जानकारी जब छूटे हुए उन पत्रकारों को हुई तो उन्होंने एक साथ जाकर प्रेस वार्ता के दौरान ही सूचना अधिकारी की करतूत की जानकारी जिलाधिकारी को दी। जिलाधिकारी ने कहा कि सूचना अधिकारी ने उन्हें बदनाम करने के लिए यह कुत्सित प्रयास किया है। 

गौरतलब है कि वर्तमान समय में जिले के सूचना अधिकारी द्वारा गुटबाजी किए जाने की शिकायतें अक्सर आती रहती है। सूचना अधिकारी इस समय जिले के विकास से सम्बन्धित सूचना कुछ चुनिन्दा प्रेस वालों तक ही पहुंचवाते हैं, जिससे अधिकांश पत्रकारों में उनके प्रति रोष है। सूचना कार्यालय में समाचारों की कटिंग भी समय से नहीं की जाती है और न ही जिलाधिकारी तक पहुंचायी जाती है। यही नहीं आरोप है कि पत्रकारों को मान्यता दिलवाने में भी सूचना अधिकारी द्वारा भेद भाव किया जाता है। बताया जाता है कि कुछ पत्रकारों ने उक्त घटना की सूचना, सूचना निदेशक लखनऊ को प्रेषित करते हुए कार्रवाई की मांग की है। 

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पन्ना के कलेक्टर पर केंद्रीय विद्यालय प्राचार्या ने यौन शोषण का आरोप लगा आत्महत्या की कोशिश की

(कलक्टर और प्राचार्या की फाइल फोटो. पीड़िता की पहचान छुपाने के लिए उनके चेहरे को फोटोशॉप के जरिए ब्लर कर दिया गया है.)

पन्ना : केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्या ने पन्ना जिले के प्रशासनिक मुखिया कलेक्टर आर.के. मिश्र पर दो बार जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध बनाने का गंभीर आरोप लगाया है. इससे पन्ना के साथ-साथ पूरे प्रदेश के प्रशासनिक हलके में सनसनी फ़ैल गई है. शनिवार की सुबह लगभग 9 बजे केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्या ने मानसिक प्रताड़ना के चलते फिनायल पी कर आत्महत्या करने की कोशिश की. विद्यालय के स्टाफ ने गंभीर हालत में प्राचार्या को जिला चिकित्सालय में भरती कराया है जहां उनका इलाज चल रहा है.

इससे पहले प्राचार्या ने पत्रकारों व मीडिया के सामने खुल कर अपने ऊपर हुए अत्याचारों की व्यथा सुनाई. प्राचार्या का कहना था कि पन्ना कलेक्टर आर.के. मिश्र ने उन्हें बहाने से अपने बंगले बुला कर दो बार शारीरिक सम्बन्ध स्थापित किये. साथ ही जान से मरने की धमकी भी दी. प्राचार्या का कहना था कि इस सम्बन्ध में जब उन्होंने पन्ना के एस.पी. को फ़ोन पर घटना की जानकारी देना की कोशिश की तो उन्होंने इस मामले को उनका पर्सनल मामला बताते हुए फ़ोन काट दिया और उनकी शिकायत नहीं सुनी.

इन सब बातों से मानसिक रूप से तंग आकर प्राचार्या ने आत्महत्या करने की कोशिश की. जब इस मामले में कलेक्टर पन्ना से उनका पक्ष जाना गया तो उन्होंने अपने ऊपर लगे सरे आरोपों को राजनैतिक साजिश करार दिया. उनका कहना था कि यह महिला मेंटली डिस्टर्ब है. मैंने कभी भी उसे बंगले पर नहीं बुलाया और ना ही कोई दैहिक शोषण किया. जब इस मामले में पन्ना एस.पी. से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने पत्रकारों से मिलने बात करने से परहेज किया. फिलहाल जिला चिकित्सालय पन्ना के आईसीयू वार्ड, जिसमे पीड़ित प्राचार्य भारती हैं, में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का जमावडा बना हुआ है. प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह ने कलेक्टर पन्ना को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. अब पन्ना के नए कलेक्टर शिव नारायण चौहान बनाये गए हैं.

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डीएम हो तो इन मैडम की तरह, करप्ट अफसरों को पब्लिक के सामने ही औकात में ला दिया (देखें वीडियो)

राहुल गोयल ‘बुलंदशहर एक्सप्रेस’ नामक वेबसाइट चलाते हैं. इन्होंने भड़ास को पत्र लिखकर सूचित किया है बुलंदशहर की डीएम बी. चंद्रकला का जो वीडियो वायरल हुआ है, दरअसल वो ओरीजनली उन्होंने यूट्यूब पर अपलोड किया था जिसे बाद में बड़ी मीडिया कंपनियों ने डाउनलोड कर अपने अपने पोर्टलों पर अपलोड कर लिया. राहुल का कहना है कि उनकी मेहनत का रिकागनाइज किया जाना चाहिए. राहुल का पत्र इस प्रकार है…

respected sir,

ये वीडियो सबसे पहले हमने यूट्यूब पर अपलोड किया था. आज इस वीडियो की काफी चर्चा हो रही है. कई राष्ट्रीय वेबसाइटों ने इसे डाउनलोड करके अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड कर लिया है. आपसे निवेदन है कि कृपया इस खबर को थोड़ी जगह देंगे तो आपकी बहुत मेहरबानी होगी और हम जैसी छोटी वेबसाइटों को हौसला मिलेगा.

Regards
Rahul Goel
Bulandshahr Express
editor.bsrexpress@gmail.com

अब बात करते हैं वीडियो की. बुलंदरशहर में नगर पालिका के कई करोड़ रुपये के विकास कार्य बेहद घटिया और मानक विहीन पाये गये. जिलाधिकारी बी.चन्द्रकला ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया. उन्होंने मौके पर ही जनता के सामने अफसरों की तगड़ी क्लास लगाई. बुलंदशहर सिटी में करीब 10 करोड़ रुपये के इंटरलॉक टाइल्स के निर्माण कराये जा रहे हैं और इन निर्माण कार्यों में लगने वाली इंटरलॉक टाइल्स बुलंदशहर नगर पालिका के चेयरमैन के एक रिश्तेदार की फैक्ट्री से मंगाई गयी है. डीएम ने स्थल निरीक्षण में पाया कि ये टाइल्स बेहद घटिया और अधबनी हैं. डीएम ने दोषी ठेकेदार और अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं. डीएम बी. चंद्रकला ने जिस तेवर के साथ पब्लिक के सामने एक-एक अफसरों की क्लास ली, वह अदभुत दृश्य है. वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…

https://www.youtube.com/watch?v=5Uz7KR7z1XM

 

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जिया न्यूज की बढ़ी मुश्किलें: पूर्व एचआर हेड सहित 18 कर्मी पहुंचे कोर्ट, प्रबंधन को नोटिस

जिया न्यूज की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। ताजा मामले में एक बार फिर से चैनल के 18 पूर्व कर्मचारी, जो कि बिना कारण बर्खास्त कर दिए गए थे, ने अपना बकाया लेने के लिए लेबर कमिश्नर का दरवाजा खटखटाया है। आमतौर पर ऐसा होता नहीं है, लेकिन जिया न्यूज में जो हो जाए कम है क्योंकि इस चैनल के तो एचआर/एडमिन हेड को अपने अधिकार के लिए लेबर कोर्ट जाना पड़ा है। 

जिन पूर्व कर्मचारियों ने इस ताजा मामले में कोर्ट की शरण ली है, उनकी सूची में सबसे उपर पूर्व एचआर/एडमिन हेड शरद नारायण का नाम है। नारायण अपने अन्य 17 सहकर्मियों के साथ हाल ही में लेबर कमिश्नर के पास पहुंचे और अपनी समस्या से उन्हे अवगत कराया। शिकायत पत्र में कहा गया है कि उल्लेखित सभी 18 कर्मचारियों को जिया न्यूज प्रबंधन ने जबरन बिना किसी कारण के नौकरी से बर्खास्त कर दिया। कर्मचारियों ने कहा कि न केवल उन्हें नौकरी से हटाया गया बल्कि उनका बकाया भी नहीं दिया जा रहा है। इस वजह से कई परिवार गंभीर संकट में आ गए हैं।

जानकारी के अनुसार जिया न्यूज का नाम सामने आते ही मामले को समझने में लेबर कमिश्नर को जरा भी देरी नहीं लगी और उन्होने संयुक्त शिकायत पत्र के आधार पर जिया न्यूज को नोटिस भेज कर उन्हें अपने सामने पेश होने का आदेश दिया है। पिछली 19 मई को भी जिया न्यूज के 30 कर्मचारी मुआवजे की मांग को लेकर लेबर कमिश्नर के पास पहुंचे थे, जहां उन्हें न्याय मिला था और जिया न्यूज प्रबंधन को अपने पूर्व कर्मचारियों के समक्ष घुटने टेकने पड़े थे। लेबर कमिश्नर रीता भदोरिया की फटकार और भड़ास4मीडिया की खबर का असर इस कदर हुआ कि, जिया न्यूज ने उन कर्मचारियों भी बुलाकर मुआवजा दिया, जिन्होंने लेबर कमिश्नर के समक्ष शिकायत भी नहीं की थी।

पिछली बार सुनवाई के दौरान जिया न्यूज प्रबंधन को लेबर कमिश्नर रीता भदोरिया ने कंपनी अधिनियम के बारे में बताते हुए जमकर लताड़ लगाई थी। उस समय जिया न्यूज के एचआर प्रमुख मौजूदा मुख्य शिकायतकर्ता हुआ करते थे।  लेकिन उस समय वह सस्पेंड चल रहे थे। उनके ऊपर अपने महिला सहकर्मी से छेड़छाड़ किए जाने का आरोप था,  जिसके चलते शरद नारायण लेबर कमिश्नर के समक्ष नहीं गए थे। जिया न्यूज प्रबंधन ने अपनी तरफ से एचआर एक्जीक्यूटिव पूनम को भेजा था और कमिश्नर ने उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई थी। 

नहीं चलने वाला चैनल: लेबर कोर्ट के उपायुक्त ने कहा

कर्मचारी द्वारा भेजे गए पत्र में दावा किया गया है कि पिछली बार जब 19 मई को 30 कर्मचारी लेबर कमिश्नर के पास अपनी शिकायत को लेकर पहुंचे थे तो वहां पर असिस्टेंड लेबर कमिश्नर प्रभाकर मिश्र ने कहा था कि जो दयनीय स्थिति जिया न्यूज के कर्मचारियों की है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह चैनल ज्यादा समय नहीं चलेगा। 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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