
संजय कुमार सिंह
इंडियन एक्सप्रेस की लीड इन सबसे अलग है। इसके अनुसार डोनाल्ड ट्रम्प के शपथग्रहण में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर हिस्सा लेंगे। उसके बाद क्वैड समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक होने की संभावना है। इसमें भारत भी शामिल होगा। मामला यह था कि ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नहीं बुलाया। खबर यह है कि विदेश मंत्रियों की बैठक होगी, उसमें भारत भी शामिल होगा। नवोदय टाइम्स की लीड भी सबसे अलग है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ठोस कचरा निस्तारण के मामले में दिल्ली की स्थिति दिल दहलाने वाली है। अदालत ने इस मामले में केंद्र और एमसीडी पर सख्त टिप्पणी की है। इसके अलावा, आज अखबारों में दो तरह की खबरें हैं। एक दिल्ली में ऑटो एक्सपो का उद्घाटन। इससे संबंधित खुशहाली और दिल्ली में भाजपा द्वारा महिलाओं को 2500 रुपये महीना देने की घोषणा। कुल मिलाकर, कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव की हालत का पता सैफ अली खान पर हमले से चलता है तो भाजपा के शासन की कामयाबी (चुनाव जीतने पर) महिलाओं के लिए 2500 रुपए प्रति माह की घोषणा है। हेडलाइन मैनेजमेंट के बावजूद आज की खबरों से जो संदेश मिल रहा है उन्हें पढ़िये। इसमें सैफ अली खान की खबर की उपेक्षा भी है, उसपर अंत में।
सरकार का प्रचार करने वाली खबरों में इंडियन एक्सप्रेस ने सेना के उपप्रमुख के हवाले से 2047 का एजंडा बताया है (अभी 2025 शुरु हुआ है)। इसमें सामाजिक, सांप्रदायिक सद्भाव, विनिर्माण और रोजगार शामिल है। खबर के अनुसार, सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सब्रमणी ने कहा कि 2027 तक विकसित भारत की दृष्टि को पूरा करने देश की कमजोरियों को दूर करने की जरूरत है। इनमें भारत का विनिर्माण क्षेत्र, रोजगार के पर्याप्त मौकों की कमी और मानव विकास सूचकांक के साथ अनिश्चित सीमा शामिल है। कहने की जरूरत नहीं है कि इसके जरिये सरकार ने मान लिया है कि ये कमियां 2047 से पहले दूर नहीं होंगी भरे 2013-14 में ही रोजगार देने का सपना दिखाया जा रहा था। आप जानते हैं कि दो पूर्व सेना प्रमुखों की किताबें नहीं छप रही हैं और उनके कार्यकाल में जो हुआ उसे वो नहीं बता पा रहे हैं पर मौजूदा उपसेना प्रमुख से सरकार का प्रचार करवाया जा रहा है। न सिर्फ वे सरकार की कमियां गिना पा रहे हैं बल्कि यह भी बता रहे हैं कि यह सब 2047 का विजन पूरा करने के लिए तब तक हो जायेगा। इस बीच चुनाव जीतते रहने के लिए सरकार ने जो उपाय किये हैं उसे मनीष सिसोदिया ने बताया है और यह भी इंडियन एक्सप्रेस में है। चुनाव आयोग पर पक्षपात के इतने आरोप शायद ही कभी लगे हों और शायद ही पहले कभी चुनाव आयोग अपनी छवि को लेकर इतना निश्चिंत रहा हो। पर वह अलग मुद्दा है।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर ऑटो एक्सपो की शुरुआत की खबर लीड छापी है। पुराना प्रगति मैदान अब भारत मंडपम हो गया है और ऑटो एक्सपो अब भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2025 है। यहां इस खबर का शीर्षक वही है जो प्रधानमंत्री ने कहा है। उन्होंने कहा है, भारत के वाहन क्षेत्र से लोगों की अपेक्षाएं मालूम होती हैं। अखबार ने इसी पन्ने पर सैफ अली खान की खबर दी है और इसका शीर्षक है, सैफ पर हमला करने वाला अभी भी नहीं पकड़ा जबकि अभिनेता को आईसीयू से डिस्चार्ज कर दिया गया। अखबार के पहले पन्ने की मुख्य खबर या लीड का शीर्षक है, दिल्ली भाजपा ने महिलाओं को 2500 रुपये और सस्ती एलपीजी देने की घोषणा की। अखबार ने इसके साथ बताया है कि केजरीवाल ने राजधानी में छात्रों को मुफ्त बस यात्रा की पेशकश की। एक और शीर्षक है, आप के काम रोकने के कारण लोग भाजपा से नाराज हैं। जाहिर है, भाजपा के लिए कवरेज कैसी हो रही है। आप इसे हेडलाइन मैनेजमेंट की स्थिति भी मान सकते हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने ऑटो एक्सपो की खबर को लीड बनाया है और भाजपा की चुनावी घोषणाएं सेकेंड लीड हैं। सैफ अली खान की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। हालांकि पहले पन्ने पर आधा विज्ञापन है और यहां अधपन्ना नहीं है। कारण चाहे जो हो, खबर पहले पन्ने पर नहीं हो। अखबार ने बताया है कि ऑटो एक्सपो में प्रधानमंत्री न ग्रीन मोबिलटी की बात की। द हिन्दू में दोनों ही खबरें लीड नहीं हैं और लीड बनी है गाजा की खबर जबकि दूसरी खबर बताती है कि कम से कम 126 भारतीयों ने रूस की सेना में काम करना स्वीकार किया है और इनमें से 16 लापता हैं। अखबार को यह जानकारी केंद्र सरकार ने दी है। दि एशियन एज में भी दिल्ली चुनाव के लिए भाजपा की घोषणा को महत्व दिया गया है। अखबार ने 500 रुपये में एलपीजी देने की बात भी बताई है और खबर है कि भाजपा ने महिलाओं को प्रभावित करन की कोशिश की है। ऑटो फेयर की खबर का शीर्षक यहां इस प्रकार है, प्रधानमंत्री ने भारत को मोबिलिटी का भविष्च कहा, निवेशकों को प्रभावित किया।
अमर उजाला ने इसी बात को खुलकर लीड के रूप में कहा है। दरअसल उसने बताया है कि, प्रधानमंत्री क्या बोले…. ऑटो उद्योग का भविष्य भारत से, 4 साल में आया 3 लाख करोड़ का विदेशी निवेश। अखबार ने बताया है कि उद्योग 12 प्रतिशत की तेजी से बढ़ा और 1.5 लाख नौकरियों का सृजन हुआ। खबर के अनुसार तीन लाख करोड़ में डेढ़ लाख नौकरियां बनीं। बहुत आसान गणना है कि इसका मतलब हुआ, एक करोड़ में सिर्फ दो नौकरी। अब इस निवेश का क्या लाभ और यह उस निवश को रखने का किराया भर भी है कि नहीं, बाद में समझ में आयेगा। बताने की जरूरत नहीं है कि कारों के इस निवेश (और कारों की बिक्री) बढ़ाने के लिए पर्यावरण के नाम पर पुरानी गाड़ियों को कंडम करने का नियम बना है। इस निवेश के लिए और भी बदलाव किये गये हैं पर अभी वह मुद्दा नहीं है। मुझे तो लगता है कि यह प्रचार भी कुछ ज्यादा ही है तभी इतने बड़े निवेश की खबर किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है। आइये, अब सैफ अली खान की खबर को ढूंढ़ें। अमर उजाला में यह सिंगल कॉलम की खबर है। शीर्षक है, सैफ की हालत में सुधार, तीन दिन में छुट्टी संभव।
नवोदय टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। जैसा मैंने बताया लीड दिल दहलाने वाली है। उसके साथ 4 खेल रत्न की खबर। इसके ठीक नीचे, महिलाओं को 2500 रुपये महीना देने का वादा, दूसरी खबर सिंगल कॉलम में , ग्रैप-3 भी हटा, निर्माण कार्य पर रोक भी खत्म। इसके साथ अरविन्द केजरीवाल की घोषणा – छात्रों को बस यात्रा मुफ्त देंगे। इस तरह, यहां लगभग सभी जरूरी खबरें हैं। सैफ की छूट गई या छोड़ दी गई, राम जानें। इंडियन एक्सप्रेस में सैफ की खबर कायदे से है और टॉप पर चार कॉलम में है। मुख्य शीर्षक है, गलत लीड और नये फुटेज के बाद, सैफ को चाकू मारने वाला संदिग्ध पकड़ में नहीं आया। सैफ की खबर द टेलीग्राफ में भी ठीक से है। फ्लैग शीर्षक है, किसी गैंग की भूमिका नहीं, पुलिस अंदर के किसी आदमी की भूमिका जांच रही है। मुख्य शीर्षक है, खून से सने कुर्ते में ऑटो से आये व्यक्ति ने कहा, मैं सैफ हूं। एक दूसरी खबर का शीर्षक है, चाकू की नोक पर, दो मिमी से बच गये। नवभारत टाइम्स में पहले पन्ने पर दो ही खबरें हैं। एक भाजपा की घोषणा और दूसरा ऑटो एक्सपो। बाकी दलों के प्रचार, भाजपा की आलोचना का कोई मतलब नहीं है क्योंकि उन्हें अखबारों में पहले पन्ने पर जगह नहीं मिली है।
दैनिक जागरण में यह खबर चार कॉलम में है। शीर्षक है, सैफ का हमलावर अब तक पकड़ से दूर, गहराया रहस्य। दैनिक हिन्दुस्तान की खबर का शीर्षक है, सैफ सुरक्षित, हमलावर पकड़ से दूर। कहने की जरूरत नहीं है कि हमलावर के नहीं पकड़े जाने और पुलिस की कहानियों के सामने आने के बाद एक संभावना यह बनती है कि अपराधी कुमार विश्वास ने सैफ अली खान के बेटे का नाम तैमूर रखे जाने पर जो नया राग छेड़ा था उससे प्रेरित हो और अंदर का ही हो। सोशल मीडिया पर यह अंदेशा जताया जा रहा है और पहले की घटनाओं से भी ऐसी आशंका लगती है। पुलिस की जांच इस दिशा में है या नहीं और इसपर कुमार विश्वास का पक्ष – कुछ भी अखबारों में नहीं है। अव्वल तो कुमार विश्वास ने जो कहा था उसकी आलोचना होनी चाहिये थी, नहीं हुई। हमले के बाद कुमार विश्वास से पूछा जाना चाहिये था कि वे क्या यही चाहते थे और क्या उन्हें लगता है कि उनकी बातों से प्रेरित होकर किसी ने ऐसा किया होगा। उन्हें पहले इसका अहसास था कि नहीं और नहीं था तो अखबारों ने जब नहीं बताया तो वे अब क्या पूछें। कुमार विश्वास ने जो किया उसके लिए उन्हें सजा मिले या न मिले, मीडिया ने अगर उन्हें जिम्मेदार ठहराया होता उन्हें अफसोस होता या वे श्रेय लेते तो लोगों को राजनीति और समाज की स्थिति समझ में आती पर वह सब नहीं हो रहा है। और इसे अगर सोशल मीडिया के भरोसे छोड़ दिया गया है तो भाजपा की ट्रोल सेना से कौन नहीं डरता है, यहां भी इसकी बात खुलकर नहीं हो रही है।
भाजपा की राजनीति यही है। वह हिन्दू मुसलमान तो करती है। हिन्दुओं का संरक्षक तो बनती है लेकिन आरक्षण, पिछड़ी जाति और महिलाओं के मामले की भलाई उसके एजेंडे में नहीं है। इसीलिए जब कांग्रेस और राहुल गांधी ने आरक्षण और जाति की बात की तो भाजपा परेशान हो गई और कांग्रेस के पुराने नारे, जात पर न पात पर इंदिरा की बात पर …. की याद दिलाने लगी। पर यह नहीं बता रही है कि यह तब की जरूरत थी और यह अब की जरूरत है। वैसे ही जैसे घोषित इमरजेंसी और अघोषित इमरजेंसी की जरूरतें (और नुकसान भी) अलग होने है।


