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सुख-दुख

डॉक्टर धरती के शैतान हैं!

रंगनाथ सिंह-

महज संयोग है कि कुछ दिन पहले ही मैं डॉक्टरों पर एक आलोचनात्मक पोस्ट लिख रहा था लेकिन उसे पूरा नहीं कर सका। तब मुझे नहीं पता था कि कुछ दिन बाद ही डॉक्टर दिवस आने वाला है। वह पोस्ट जब पूरी होगी तब देखा जाएगा, आज इतना कहना चाहूँगा कि डियर डॉक्टरों आपको पता होना चाहिए कि आप इस समय हमारे देस की सबसे हेटेड प्रोफेशनल कम्युनिटी हैं।

आम जनता पुलिस और वकील से भी ज्यादा आपसे नफरत करती है। आप भले ही मीडिया और राजनेता से सबसे ज्यादा नफरत करते हों लेकिन देश की 90 प्रतिशत आबादी, जिसकी जेब में आपके पाप-पुण्य को अफोर्ड करने भर पैसा या बीमा नहीं है, वह आपसे ही सबसे ज्यादा नफरत करती है।

आम भारतीय आपसे सबसे ज्यादा नफरत करने के साथ ही आप से ही सबसे ज्यादा डरता भी है। वह महीनों-सालों तक बीमारियों को सहता-झेलता रहता है ताकि आपके पास न जाना पड़ा। भारत में कौड़ी के भाव कीमत देकर तेज दिमाग बच्चे डॉक्टर बन जाते हैं। आरक्षण की कृपा से सभी समुदायों के बच्चे डॉक्टर बन रहे हैं लेकिन सभी समुदायों के आम लोग इसबात पर सहमत हैं कि ज्यादातर डॉक्टर धरती पर शैतान जैसे हैं। अतः इसे आप लोगों की सफलता मानना चाहिए कि आप लोग जाति-महजब से ऊपर उठकर कर्म करते होंगे तभी आप लोगों के बारे में सभी समुदायों की राय में अद्भुत समानता है।

यह नहीं समझिएगा कि मैं अस्पताल से लौटकर यह पोस्ट लिख रहा हूँ। जीवन में पहली बार तीन साल पहले अस्पताल गया था। यह अलग बात है कि तब भी यह पुष्ट हुआ था कि रेलवे स्टेशन पर पाए जाने वाले जेब कतरे और डॉक्टरों में इतना ही फर्क है कि जेब कतरों की प्रशिक्षण का खर्च जनता नहीं उठाना पड़ता। आप वह महान पेशेवर प्रजाति हैं जो जिनके पैसे पर पढ़े-बढ़े उन्हीं का खून चूसते हुए बाकी जीवन गुजारते हैं।

आपको धरती का भगवान जब कहा गया था तब भी आज जैसे डॉक्टर पाए जाते थे यह प्रेमचन्द की कहानी मंत्र में वर्णित है लेकिन अब वे डॉक्टर नहीं पाए जाते जिनका वर्णन प्रेमचन्द की कहानी में कभी नहीं हुआ।

जाहिर है कि कुछ लोग कहेंगे कि अच्छे डॉक्टर भी होते हैं! हमारे सबसे महान इतिहास ग्रन्थ रामायण और महाभारत में भी दिखाया गया है कि राक्षसों और कौरवों के बीच भी कुछ अच्छे लोग थे। किसी भी समुदाय के बारे में उसके बहुसंख्यक वर्ग के हिसाब से सामान्य राय बनायी जाती है। 5-10 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी की अच्छाई से 80-90 प्रतिशत आबादी के पाप नहीं छिप जाते!

मैं किसी के शुभ दिन को खराब करने में यकीन नहीं रखता लेकिन डॉक्टरों द्वारा शोषित आम लोगों के कष्ट सुन-सुनकर मुझे आज का दिन सबसे बेहतर लगा क्योंकि यह दिन आपका आधिकारिक दिन है। यकीन मानिए, आप इससे भी बुरी भाषा और शैली में आपकी विवेचना डिजर्व करते हैं लेकिन आपके स्तर तक उतरकर लिखना मेरे लिए सम्भव नहीं है।

यह भी साफ कर दूँ कि डॉक्टर धरती के शैतान हैं, जुमला मेरा रचा नहीं है। यह जुमला एक अस्पताल के अन्दर फुटपाथ पर बैठकर इलाज की राह देख रहे एक गरीब बुजुर्ग के मुँह से सुना था जो कान से टकराते ही मेरी आत्मा से चिपक गया। तब से यह पोस्ट उस बुजुर्ग की तरफ से मुझपर उधार थी। उसी उधार का ब्याज आज चुका रहा हूँ, मूल फिर कभी।

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