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दानिश सिद्दीकी अवॉर्ड पाँच लड़कियों को जानबूझकर नहीं दिया गया, यह पत्रकारिता का बदलाव है! देखें तस्वीरें

सर्वप्रिय सांगवान-

दानिश सिद्दीक़ी अफ़गानिस्तान में रिपोर्टिंग के दौरान तालिबान की गोली का शिकार हो गए थे. अपने काम से उन्होंने विश्व का सबसे बड़ा पत्रकारिता अवॉर्ड पुलित्जर कमाया था. जीवन भर कितने ही विवाद देखे, लड़ाइयाँ देखी, देश देखे, और अपना काम करते हुए दुनिया से चले गए. उनके पिता को जब भी देखती हूं तो लगता है कि उनके पिता भी किसी शहीद के पिता की तरह महसूस करते होंगे.

दानिश सिद्दीकी फाउंडेशन ने ये अवॉर्ड दिया और चार लोगों की ज्यूरी ने इसका चयन किया था. राजदीप सरदेसाई.. वरिष्ठ संपादक, इंडिया टुडे, वैष्णा रॉय.. संपादक, फ्रंटलाइन, गैब्रिएला जॉनसन.. संपादक रॉयटर्स, किशलय भट्टाचर्जी.. डीन, ओपी जिंदल विश्वविद्यालय.

ख़ास बात ये है कि अलग-अलग कैटेगरी में 5 लड़कियों को ये अवॉर्ड मिला है. राजदीप सरदेसाई ने अपने भाषण में कहा कि ‘ये सिर्फ़ एक संयोग है कि सब लड़कियों को अवॉर्ड मिला, ये जानबूझकर नहीं किया गया है. ये दिखाता है कि पत्रकारिता कितनी बदल गई है, उस वक्त से जब गिनी-चुनी लड़कियां ही न्यूज़रूम में दिखती थी.’

मैं शुक्रगुज़ार हूं कि इस साल एक बार फिर मेरे काम को इस लायक समझा गया. आप सभी का शुक्रिया जिन्होंने ख़बर पढ़ते ही अपनी शुभकामनाओं से मुझे ऐसा महसूस करवाया जैसे मैं इस दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की हूं।

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मूल खबर…

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