शीतल पी सिंह-
जेफरी एपस्टीन फाइल्स का रिलीज, अमेरिका में हंगामा…. जेफरी एपस्टीन एक अमेरिकी अरबपति थे, जिन्हें नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 2019 में जेल में उनकी संदिग्ध मौत हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया। एपस्टीन के घोटाले ने दुनिया भर में सनसनी मचा दी क्योंकि वे कई शक्तिशाली लोगों – राजनेताओं, उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों और अन्य हस्तियों – से जुड़े थे। इनमें वर्तमान राष्ट्रपति ट्रंप ,पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, ब्रिटेन के प्रिंस एंड्र्यू, हार्वर्ड के कई प्रोफेसर और अन्य कई सेलिब्रिटी शामिल हैं।
एपस्टीन की साथी गिसलेन मैक्सवेल को 2021 में 20 साल की सजा हुई। वर्षों से एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज कोर्ट केसों में धीरे-धीरे सार्वजनिक होते रहे, जिनमें फ्लाइट लॉग्स (उनके निजी जेट की यात्राएं), कॉन्टैक्ट बुक और पीड़िताओं के बयान शामिल हैं। इनमें कई नाम उजागर हुए, लेकिन कोई ठोस “क्लाइंट लिस्ट” नहीं मिली जो ब्लैकमेल साबित करे।
19 नवंबर 2025 तक की बड़ी खबर यह है कि अमेरिकी कांग्रेस ने लगभग सर्वसम्मति से (हाउस में 427-1 और सीनेट में एकमत) एक बिल पास किया है, जिसे “एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट” कहा जा रहा है। यह बिल अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) को आदेश देता है कि एपस्टीन और मैक्सवेल से जुड़े सभी अनक्लासिफाइड दस्तावेज – जांच रिपोर्ट्स, ईमेल, कम्युनिकेशंस और अन्य सामग्री – 30 दिनों के अंदर सार्वजनिक करे। पीड़िताओं की गोपनीयता और चल रही जांचों को बचाने के लिए रेडैक्शन की अनुमति है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले इसका विरोध किया था, इसे “डेमोक्रेटिक होक्स” बताते हुए, लेकिन बाद में समर्थन दे दिया और कहा कि वे इसे साइन करेंगे। यह बिल रिपब्लिकन सांसदों थॉमस मैसी, मार्जोरी टेलर ग्रीन और डेमोक्रेट रो खन्ना के प्रयासों से पास हुआ। एपस्टीन की पीड़िताएं, जैसे एनी फार्मर और अन्य, कैपिटल हिल पर मौजूद रहीं और इसे अपनी जीत बताया।
इस रिलीज की पृष्ठभूमि में ट्रंप प्रशासन का रुख महत्वपूर्ण है। 2025 की शुरुआत में DOJ ने कहा था कि कोई “क्लाइंट लिस्ट” नहीं है और एपस्टीन ने प्रमुख लोगों को ब्लैकमेल नहीं किया। जुलाई 2025 में एक मेमो में DOJ ने पुष्टि की कि एपस्टीन की मौत आत्महत्या थी और कोई साजिश नहीं। फिर भी, कांग्रेस की ओवरसाइट कमिटी ने हजारों पेज ईमेल रिलीज किए, जिनमें ट्रंप का जिक्र था – जैसे एपस्टीन ने कहा कि ट्रंप उनके साथ घंटों बिताते थे। इनसे ट्रंप और एपस्टीन की पुरानी दोस्ती (1990-2000 दशक) फिर चर्चा में आई, हालांकि ट्रंप कहते हैं कि उन्होंने एपस्टीन से दूरी बना ली थी।
इस रिलीज के संभावित परिणाम बहुत बड़े हो सकते हैं:
राजनीतिक भूचाल: अगर फाइल्स में नए नाम उजागर हुए – जैसे हॉलीवुड स्टार्स, बिजनेसमैन या राजनेता – तो कई करियर खतरे में पड़ सकते हैं। ट्रंप के विरोधी इसे उनके खिलाफ इस्तेमाल करेंगे, क्योंकि एपस्टीन से उनकी पुरानी तस्वीरें और संबंध जगजाहिर हैं। रिपब्लिकन पार्टी में भी बंटवारा दिखा, जहां कुछ सांसद ट्रंप के खिलाफ गए।
पीड़िताओं के लिए न्याय: सैकड़ों पीड़िताओं (कई नाबालिग) को उम्मीद है कि पूर्ण पारदर्शिता से दोषियों पर मुकदमा चलेगा। लेकिन अगर ज्यादातर सामग्री पहले से रिलीज या रेडैक्टेड हुई, तो निराशा होगी।
साजिश सिद्धांतों का बोलबाला: सोशल मीडिया पर पहले से अफवाहें हैं कि “एलिट क्लास” बच्चों की तस्करी करता है। रिलीज से या तो ये सिद्धांत खत्म होंगे या और भड़केंगे, अगर कुछ छिपाया गया लगे।
मीडिया और पब्लिक ट्रस्ट: अमेरिकी न्याय व्यवस्था पर सवाल उठेंगे कि इतने साल क्यों छिपाया गया। वैश्विक स्तर पर ब्रिटेन (प्रिंस एंड्र्यू), इजराइल आदि देश प्रभावित हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह रिलीज अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी पारदर्शिता कवायदों में से एक हो सकती है, लेकिन अगर इसमें कोई “बम” नहीं फूटा तो इसे राजनीतिक ड्रामा मात्र कहा जाएगा। पीड़िताओं की लड़ाई जारी रहेगी, और दुनिया देखेगी कि शक्ति के सबसे बड़े गलियारों में कितने और कैसे कैसे राज दफन हैं।


