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FAST चैनलों के लिए बनेंगे नियम, सूचना एवं प्रसारण सचिव संजय जाजू ने की पुष्टि

नई दिल्ली। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सचिव संजय जाजू ने पुष्टि की है कि फ्री एड-सपोर्टेड टेलीविज़न (FAST) चैनलों के लिए एक नियामक ढांचा (Regulatory Framework) तैयार किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संजय जाजू ने कहा कि सरकार इस मसले की समीक्षा कर रही है और इस पर जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे। यह बयान इस बात की पहली आधिकारिक पुष्टि है कि मंत्रालय सक्रिय रूप से FAST इकोसिस्टम के लिए औपचारिक दिशानिर्देश तैयार करने में जुटा है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब इंटरनेट पर लिनियर टीवी जैसी सामग्री बिना सब्सक्रिप्शन शुल्क के दिखाने वाले FAST चैनलों की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ रही है। इससे नियामक असंतुलन और लाइसेंस प्राप्त प्रसारकों (Broadcasters) के साथ प्रतिस्पर्धा में असमानता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

वर्तमान में केबल और सैटेलाइट चैनल Cable Television Networks (Regulation) Act, 1995 के तहत सख्त नियमों के दायरे में काम करते हैं — जिनमें अपलिंकिंग, डाउनलिंकिंग और प्रोग्राम कोड अनुपालन शामिल है। इसके विपरीत, FAST चैनल अब तक किसी औपचारिक नियामक ढांचे के अंतर्गत नहीं आते हैं और लाइसेंस या कंटेंट कोड की बाध्यता से मुक्त हैं।

ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) सहित कई उद्योग संगठनों ने इसे एक “रेगुलेटरी वैक्यूम” बताया है, जिससे लाइसेंस प्राप्त प्रसारक असमान स्थिति में आ गए हैं।

AIDCF के महासचिव मनोज छंगानी ने पहले कहा था —“FAST चैनल सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं हैं, बल्कि एक बिना नियंत्रण वाली बाधा हैं, जो लाइसेंस प्राप्त केबल ऑपरेटरों के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही हैं।”

कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस स्थिति को “रेगुलेटरी आर्बिट्राज” का उदाहरण बताते हुए अनुपालन और संप्रभुता संबंधी चिंताएं उठाई हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय FAST प्लेटफॉर्म भारतीय दर्शकों से राजस्व तो कमा रहे हैं, लेकिन वे देश के प्रसारण नियमों का पालन नहीं करते।

ट्राई (TRAI) ने भी पहले कहा था कि FAST चैनल लिनियर टीवी की तरह ही काम करते हैं और MIB को यह जांचना चाहिए कि क्या उन्हें ब्रॉडकास्टिंग के दायरे में लाया जाना चाहिए। अब तक मंत्रालय की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया था, लेकिन जाजू की पुष्टि से संकेत मिलता है कि अब सरकार इस दिशा में सक्रिय हो चुकी है।

यह निर्णय हालिया जीएसटी सुधारों के बाद और अहम हो गया है, जिनसे स्मार्ट टीवी के दामों में कमी आई है। इससे भारत में FAST चैनलों की व्यूअरशिप तेजी से बढ़ी है, और पारंपरिक केबल से इंटरनेट-सक्षम टीवी की ओर बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियामक स्पष्टता आने से जहां FAST प्लेटफॉर्म्स पर कुछ अनुपालन जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, वहीं इससे उन्हें कानूनी वैधता और पारदर्शिता भी मिलेगी — जिससे विज्ञापन उद्योग के लिए यह सेक्टर और आकर्षक बन सकता है।

आने वाला नियामक ढांचा संभवतः निम्न बिंदुओं पर केंद्रित होगा —

  • कंटेंट की जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण
  • विज्ञापन मानक
  • FAST चैनलों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया

उपभोक्ता शिकायत निवारण और अनुपालन रिपोर्टिंग व्यवस्था

यह व्यवस्था आईटी नियम 2021 (OTT Guidelines) की तरह ही एक संतुलित तंत्र ला सकती है, जिसमें नवाचार और निष्पक्ष नियमन दोनों का ध्यान रखा जाएगा।

हालांकि संजय जाजू ने किसी तय समयसीमा का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनका बयान इस बात का संकेत है कि भारत में प्रसारण नीति (Broadcast Policy) का परिदृश्य अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

सरकार की यह पहल सुनिश्चित करेगी कि चाहे कोई भी प्लेटफॉर्म हो — केबल, सैटेलाइट या इंटरनेट आधारित — सभी एक समान नियामक और जवाबदेही ढांचे के तहत संचालित हों।


FAST क्या होता है?

FAST (Free Ad-Supported TV) वे प्लेटफॉर्म हैं जो टीवी जैसे चैनल इंटरनेट के ज़रिए फ्री में दिखाते हैं, लेकिन उनमें विज्ञापन (Ads) चलते हैं। यानि कि:

  • आपको कोई सब्सक्रिप्शन फीस नहीं देनी पड़ती (जैसे Netflix या Hotstar में देनी होती है)
  • लेकिन आपको बीच-बीच में विज्ञापन देखने पड़ते हैं, जैसे पारंपरिक टीवी पर।

यह कैसे काम करता है?

FAST प्लेटफॉर्म लिनियर टीवी चैनल्स (यानि 24×7 चलने वाले शेड्यूल्ड चैनल्स) को इंटरनेट पर स्ट्रीम करते हैं। इनके पास अपने कई “चैनल” होते हैं — जैसे न्यूज़, स्पोर्ट्स, मूवीज़, या म्यूज़िक। आप बस इंटरनेट कनेक्शन और स्मार्ट टीवी या मोबाइल ऐप के जरिए इन्हें देख सकते हैं।

उदाहरण के लिए

  • Pluto TV (Paramount Global का)
  • Samsung TV Plus
  • LG Channels
  • Tubi (Fox Corporation का)
  • Amazon Freevee
  • JioTV+ (भारत में कुछ हद तक इसी तरह)

OTT से फर्क क्या है?

  • पहलू FAST प्लेटफॉर्म OTT प्लेटफॉर्म
  • शुल्क पूरी तरह मुफ़्त ज्यादातर पेड (सब्सक्रिप्शन आधारित)
  • राजस्व विज्ञापन से सब्सक्रिप्शन + विज्ञापन
  • कंटेंट टीवी जैसा, लगातार चलता ऑन-डिमांड (आप चुनते हैं क्या देखना है)

उदाहरण Pluto TV, Samsung TV Plus Netflix, Disney+ Hotstar, SonyLIV

भारत में इसकी बढ़ती लोकप्रियता क्यों?

स्मार्ट टीवी की कीमतें घटने और सस्ता इंटरनेट मिलने से FAST चैनलों की पहुँच तेजी से बढ़ रही है। दर्शक अब “टीवी जैसे अनुभव” को डिजिटल स्क्रीन पर फ्री में पाना चाहते हैं। वहीं, विज्ञापनदाता भी ऐसे प्लेटफॉर्म पर निवेश बढ़ा रहे हैं क्योंकि यहाँ दर्शक समय ज़्यादा बिताते हैं।

सरकार का ध्यान क्यों गया?

  • क्योंकि अभी तक FAST प्लेटफॉर्म्स किसी औपचारिक नियमन के दायरे में नहीं थे —
  • पारंपरिक टीवी चैनलों को जो नियम मानने पड़ते हैं (Cable TV Act, uplinking, content code आदि),

FAST चैनलों पर वे लागू नहीं थे।

इसी वजह से अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) इन पर नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लाने की तैयारी कर रहा है, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

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