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बिहार के पैसों से फल फूल रही गलगोटिया ने मोदीजी के AI Summit की इज्जत मिट्टी में मिला दी!

नई दिल्ली। जिस गलगोटिया यूनिवर्सिटी को बिहार सरकार की Student Credit Card योजना के तहत करोड़ों रुपये मिल रहे हैं, वही यूनिवर्सिटी आज भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी कराने का कारण बन गई है। हाल ही में आयोजित AI समिट में चीनी कंपनी के रोबोट को अपना बताकर पेश करने के मामले में गलगोटिया न सिर्फ पकड़ी गई, बल्कि सफाई में भी उसने जिस तरह का गैर-जिम्मेदार रवैया अपनाया, उसने पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिहार सरकार से करोड़ों की मलाई

सूत्रों के मुताबिक, बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत गलगोटिया यूनिवर्सिटी देश की सबसे बड़ी लाभार्थी निजी यूनिवर्सिटीज़ में से एक है। सिर्फ एक महीने पहले ही बिहार सरकार ने गलगोटिया को करीब 11 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। यह पैसा उन छात्रों की फीस के रूप में गया है, जिन्होंने बिहार सरकार की गारंटी पर गलगोटिया में दाखिला लिया है।

यानि साफ है— बिहार के टैक्सपेयर्स के पैसों से चल रही यूनिवर्सिटी, और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की नाक कटवा रही है।

AI समिट में फर्जीवाड़ा

AI समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने जिस रोबोट को “अपना इनोवेशन” बताकर प्रदर्शित किया, वह दरअसल चीनी कंपनी का बना हुआ रोबोट निकला। सोशल मीडिया पर जब असली स्रोत सामने आया तो मामला खुल गया और गलगोटिया की भारी फजीहत हुई।

सफाई भी घमंड भरी

मामले के बाद यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर/प्रवक्ता ने जो बयान दिया, वह और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने माफी मांगने के बजाय कहा: “मैं शायद अपनी बात को eloquently नहीं रख पाई, जो कि rare है।”

यानी गलती मानने की जगह यह बताया जा रहा है कि दिक्कत बस “कम्युनिकेशन” की थी, फर्जीवाड़े की नहीं।

सवाल जो उठते हैं

  • क्या बिहार सरकार का पैसा ऐसी यूनिवर्सिटी को दिया जाना चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर झूठा दावा करे?
  • क्या यह सिर्फ “कम्युनिकेशन फेल्योर” था या सोची-समझी ब्रांडिंग धोखाधड़ी?
  • जिन छात्रों की फीस सरकारी कर्ज से जा रही है, उन्हें क्या बदले में यही “फर्जी इनोवेशन” मिलेगा?

एक तरफ गलगोटिया यूनिवर्सिटी बिहार सरकार की योजनाओं से करोड़ों रुपये कमा रही है, दूसरी तरफ दुनिया के सामने भारत को टेक्नोलॉजी फ्रॉड के रूप में पेश कर रही है। यह सिर्फ एक यूनिवर्सिटी की गलती नहीं, बल्कि पूरे प्राइवेट एजुकेशन मॉडल पर तमाचा है, जहां सरकारी पैसा तो चाहिए, लेकिन जवाबदेही शून्य।


ज्ञानेश्वर-

Galgotias University बहुत बड़ा लाभार्थी है Bihar Student Credit Card योजना का. अभी कोई एक महीने पहले ही इसे करीब 11 करोड़ का भुगतान किया गया है. पहले के भुगतान की राशि तो बहुत बड़ी है. लेकिन, यह कितना झोल करता है, झूठे दावे करता है, भारत की नाक कटा देता है, फिर से AI Summit में उजागर हुआ है. थू-थू करा दी इसने, भारत सरकार भी शर्म कर रही होगी.

विस्तार से तस्वीर में पूरा मामला पढ़ें…


भूपेंद्र चौबे-

यकीन करना मुश्किल है। ‘कम्युनिकेशन’ की इस प्रोफेसर को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए। इस हालत में भी, जब वो दिखावे के तौर पर अपनी गलती मान रही हैं, तब भी कह रही हैं— ‘शायद मैं अपनी बात अच्छे तरीके से नहीं रख पाई’, जो कि बहुत ही दुर्लभ है! जिसने भी इन्हें कम्युनिकेशन का टीचर बनाया है, उसे भी निकाल देना चाहिए।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के मालिकों को फिलहाल बस चुप रहना चाहिए। अपने लिए और गहरा गड्ढा मत खोदिए। अपनी बेवकूफी से इस समिट को खराब मत होने दीजिए।”

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