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गरिमा सिंह- सालों बाद कोई एंकर दिखा जिसे देखकर खीज नहीं हुई, बीपी नहीं बढ़ा

News 24 से संदीप चौधरी के चले जाने के बाद लगा था कि यह शो बंद हो जायेगा मगर उसी शिद्दत से गरिमा सिंह ने इसे संभाला। अब दो ही डिबेट देखने योग्य हैं- गरिमा और संदीप चौधरी की – मो. शारिक

प्रभात डबराल-

मैं गरिमा सिंह से कभी नहीं मिला. साथ काम करना तो दूर कभी देखा भी नहीं. इधर पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर उनकी एंकरिंग की कुछ क्लिप देखीं – मजा आ गया. लगा कि टीवी न्यूज़ एंकरिंग में सब कुछ ख़त्म नहीं हो गया. अभी भी कुछ है जिससे नए पत्रकार कुछ अच्छा सीख सकते हैं.

शांत, सहज, निडर – न गुस्सा न उत्तेजना. सालों बाद कोई कोई ऐसा एंकर दिखा जिसे देखकर खीज नहीं हुई, ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ा.

मैं गरिमा सिंह की तुलना उन अर्द्धशिक्षित अहंकारी एंकरों से नहीं कर रहा हूँ जो सरकार विरोधियों को नीचा दिखाने को ही पत्रकारिता मान चुके हैं. मैंने देखा है कि ऐसे एंकर भी जो सरकार के ग़ुलाम नहीं हैं बीजेपी वालों से नहीं डरते, वो भी अक्सर संयम खो बैठते हैं. चीखने चिल्लाने लगते हैं.

गरिमा सिंह की जितनी भी क्लिप देखी उन्हें संयम खोते नहीं देखा. एक बार तो कन्हैया ने किसी बात पर निहायत ही बदतमीज़ी के साथ यहाँ तक कह दिया कि इससे आपके बाल काले हो जाएँगे क्या? गरिमा चीखी चिल्लाई नहीं, बहुत ही शालीनता से अपना विरोध दर्ज किया और आगे बढ़ गईं. कल्पना कीजिए कन्हैया ने ऐसी हिमाक़त किसी और लिपीपुती चमकदार एंकर से की होती तो?

ये तो चलिए स्वभाव की बात मानी जा सकती है. हो सकता है गरिमा शांत स्वभाव की हों. वैसे भी उनके सवालों से लगता है वो तैयारी करके आई हैं. और ये तैयारी सामने वाले को नीचा दिखाने के लिए नहीं, जानकारी हासिल करने के लिये है.

और हाँ, ये मत सोच लेना कि गरिमा दब्बू है. वो डरती वरती नहीं है. खुद देख लो.

आज की तारीख़ में गरिमा सिंह को एंकरिंग के लिए दस में से दस.

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