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सियासत

भिंडरावाले और गोडसे के कितने पूजने वालों को देशद्रोह में जेल भेजा!

जेएनयू प्रकरण पर कुछ सवाल हैं जो मुंह बाए जवाब मांग रहे हैं। मालूम है कि जिम्मेदार लोग जवाब नहीं देंगे, फिर भी। लेकिन उससे पहले नोट कर लें-

1. देश को बर्बाद करने की कोई भी आवाज़, कोई नारा मंजूर नहीं। जो भी गुनाहगार हो कानून उसे माकूल सजा देगा।
2. कोई माई का लाल या कोई सिरफिरा संगठन न देश के टुकड़े कर सकता है न बर्बाद कर सकता है। जो ऐसी बात भी करेगा वो यकीनन “देशद्रोही” है।
3. किसी नामाकूल से या देशभक्ति के किसी ठेकेदार से कोई सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
4. कोई भी किसी भी मुद्दे पर असहमत है तो ये उसका हक़ है। हां कोई भी। कोई माई का लाल असहमति को “देशद्रोह” कहता है तो ये उसकी समझ है।

जेएनयू प्रकरण पर कुछ सवाल हैं जो मुंह बाए जवाब मांग रहे हैं। मालूम है कि जिम्मेदार लोग जवाब नहीं देंगे, फिर भी। लेकिन उससे पहले नोट कर लें-

1. देश को बर्बाद करने की कोई भी आवाज़, कोई नारा मंजूर नहीं। जो भी गुनाहगार हो कानून उसे माकूल सजा देगा।
2. कोई माई का लाल या कोई सिरफिरा संगठन न देश के टुकड़े कर सकता है न बर्बाद कर सकता है। जो ऐसी बात भी करेगा वो यकीनन “देशद्रोही” है।
3. किसी नामाकूल से या देशभक्ति के किसी ठेकेदार से कोई सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
4. कोई भी किसी भी मुद्दे पर असहमत है तो ये उसका हक़ है। हां कोई भी। कोई माई का लाल असहमति को “देशद्रोह” कहता है तो ये उसकी समझ है।

आइये अब जेएनयू पर बात कर ली जाये। आज़ाद भारत के इतिहास में आधी रोटी पर दाल लेकर दौड़ पड़ने का ये सबसे जीवंत नज़ारा है। उस पर भी दाल में उन्माद का तड़का लग गया है।

1. जेएनयू में एक संगठन ने एक सभा की जिसका वीडियो एक चैनल के पास आया। हंगामाखेज नारेबाजी में पाकिस्तान ज़िंदाबाद और देश की बर्बादी के सुर सुनाई दे रहे हैं।
2. हल्ला मचा और मचना ही चाहिए।उन्माद के ताप में जलती भीड़ ने पूरे जेएनयू को देशद्रोही बता कर हांका लगाना शुरू कर दिया।
3. दूसरे दिन एक और वीडियो आया जिसमें दूसरा पक्ष पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगा रहा है। अगर पहले वीडियो पर इतना भरोसा है तो इस पर भी कर लीजिये।
4. जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज़ हो जाता है जो कि न आयोजक था न भारत विरोधी नारे लगा रहा था।उसका बाद का भाषण कल से अनकट चल रहा है चैनलों पर सुन लीजिये क्या कह रहा है।
5. जिसने भी भारत की बर्बादी के नारे लगाये उसे पकड़ कर मुकदमा चलाइये लेकिन चार, चालीस या चार सौ के किये के लिए पूरी यूनिवर्सिटी को देशद्रोह का अड्डा किस आधार पर कहा जा सकता है?
6. झूठ का सहारा लेकर आग में घी के लिए हाफिज सईद के फ़र्ज़ी ट्विटर से ट्वीट करवा दिया। हद ये है कि दिल्ली पुलिस ने फ़ौरन आगाह कर दिया कि ये ट्वीट फ़र्ज़ी है। देश भर को अलर्ट भी किया।
7. गृह मंत्री शायद इसी फ़र्ज़ी ट्वीट पर भरोसा कर जेएनयू के पीछे हाफिज का हाथ बता रहे हैं। क्या विडम्बना है।

अब ज़रा कुछ और सवाल-

a) देशभक्ति के रंग में ऊभ-चूभ हो रही पार्टी अभी कल तक इस पीडीपी के साथ कश्मीर में सत्ता में थी जो ऐलानिया अफज़ल की आरती उतारती है। महबूब मुफ़्ती और उनके साथ पूरे कश्मीरी अवाम को भी देशद्रोह के मुक़दमे में बंद कब करेंगे? वहां आये दिन पाकिस्तान का झंडा कुछ ज्यादा ही फहरा रहा है। लेकिन फिर भी हर कश्मीरी देशद्रोही नहीं है न, कहा जाना चाहिए।

b) एक मोहतरमा हैं आसिया अंद्राबी। कश्मीर में दुख्तराने- मिल्लत की मुखिया। अभी बीते साल आसिया ने पाकिस्तान का जश्ने आज़ादी मनाया और मोबाइल से ही पाकिस्तान को तकरीर की। क्या हुआ, क्या कोई मुकदमा दर्ज़ हुआ? आपकी ही सरकार थी वहां और कल अगर महबूब एक जरा सा इशारा कर दें तो आप फिर शपथ लेने को उतावले बैठे हैं। तब भूल जायेंगे ये मोहतरमा भी अफज़ल को शहीद मानतीं हैं?

c) जरनैल सिंह भिंडरावाले का नाम याद है क्या ..! आज़ाद भारत का सबसे खतरनाक विद्रोह करने वाला। सबसे बड़ा देशद्रोही। पता है आपको कि पंजाब में आज भी तमाम लोग उसे पूजते हैं।लोग ही क्यों अब तो पंजाब सरकार ने अपने खजाने से उसके नाम पर स्टेडियम भी बनवा दिया है। तो क्या पूरे पंजाब को देशद्रोही मान लेंगे? कुछ किया क्या? एक भी देशद्रोह का मुकदमा? नहीं ना…। क्योंकि वहां भी आप सरकार में हैं।

d) और वो जो गोडसे की पूजा करते हैं ..! उसकी पिस्तौल की फोटू की आरती उतारते हैं ..! 26 जनवरी को काला दिवस मनाते हैं। कितने लोग जेल भेजे गए बताइये तो…! वो देशद्रोह नहीं है क्या?? आप अफज़ल की फांसी के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हैं उसी सुप्रीम कोर्ट ने गौडसे को फाँसी दी थी तो गौडसे को पूजना देशद्रोह नहीं है..?

अरे भाई ये देशद्रोह का ठप्पा भी आप इतना चीन्ह चीन्ह कर चस्पा करेंगे तो ठीक नहीं है…!

तुरंता न्याय पर आमादा भीड़…

अर्द्ध सत्य की आधी रोटी पर उन्माद की दाल लेकर लपलपाती दौड़ रही भीड़ तुरंता न्याय चाहती है। कोई जाँच नहीं, कोई सुनवाई नहीं ,कोई सबूत गवाही नहीं। बस भीड़ के एक अगुआ ने कह दिया है कि नारे लगाने वालों की जीभ काट ली जाये तो दूसरे ने फ़तवा जारी कर दिया है कि गोली मार दी जाये। बस..! एक बार फिर साफ़ कर दिया जाये कि देश की कीमत पर कोई नारा मंज़ूर नहीं है लेकिन झूठ और फरेब से गढ़े जा रहे किसी भी ज़हरीले जाल में फंस कर उन्मादी होना भी गलत ही है। कोई भी ये न भूले कि तुरंता न्याय करने को बौरा रही भीड़  किसी अफवाह से हरहरा कर जिस दिन आपकी घर की सांकल बजाएगी तब आपकी गुहार सुनने वाला कोई नहीं होगा।

लेखक डॉ राकेश पाठक डेटलाइन इंडिया न्यूज पोर्टल के प्रधान संपादक हैं. उनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.

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1 Comment

1 Comment

  1. ram babu

    February 16, 2016 at 6:09 am

    आपने नए एंगल से सोचने को मजबूर किया. धन्यवाद इस बढ़िया लेख के लिए.

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