गोरखपुर अमर उजाला में एडिटर और एनई के आतंक से भगदड़

गोरखपुर अमर उजाला में इन दिनो संपादक प्रभात सिंह और न्यूज एडिटर मृगांक सिंह के आतंक से मीडिया कर्मियों में भगदड़ सी मची हुई है। कई लोग तीन से छह महीने तक की मेडिकल छुट्टी पर चले गए हैं। कई पत्रकार अन्य अखबारों में चुपचाप नौकरियां खोजने में लगे हुए हैं। ब्यूरो स्तर पर कई जिलों में स्ट्रिंगरों में भी असंतोष बताया जाता है। मेन पॉवर डिस्टर्व होने से कार्यरत लोगों के जरूरी अवकाश भी मंजूर नहीं किए जा रहे हैं।  

बताया गया है कि संपादकीय विभाग में कार्यरत कासिफ अली छह माह से मेडिकल अवकाश पर हैं। दंडात्मक रूप से उन्हें सिटी रिपोर्टिंग से से डेस्क पर लगा दिया गया था। इसी तरह हरिकेश शाही के बारे में सूचना है कि वह भी तीन माह से मेडिकल छुट्टी पर हैं। विजयकांत मिश्रा भी तीन माह से मेडिकल छुट्टी लेकर घर बैठे हुए हैं। बताया जाता है कि खबरों में खामख्वाह रौब गांठने के लिए रोजाना देर रात तक मीन-मेष निकाल कर परेशान किया जाता रहा है। 

इसी तरह गोरखपुर अमर उजाला मुख्यालय से जुड़े कई जिलों में स्ट्रिंगरों में भारी असंतोष है। ब्यूरो स्तर पर स्ट्रिंगरों का अभाव पैदा हो गया है। इससे दैनिक कामकाज प्रभावित होने की सूचना है। पिछले कुछ महीनो में कई स्ट्रिंगर काम छोड़ कर चुपचाप खिसक लिए हैं। बताया जाता है कि संपादक और न्यूज एडिटर की मनमानी से हर कर्मचारी खौफ खाए हुए है। नौकरी जाने के डर से कोई जुबान नहीं खोल रहा है। 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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Comments on “गोरखपुर अमर उजाला में एडिटर और एनई के आतंक से भगदड़

  • प्रभात सिंह उदय कुमार का चेला है. अपनी बचाने की चक्कर मैं niyam कानून सीखा रहा है. आजकल सरे संपादक ऐसे ही करके खुद को कंपनी की नज़र मे गुड एडिटर बता रहे है.

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  • अमर उजाला के पास कोई अछा ग्रुप एडिटर तो अभी है नहीं, shashi शेखर के जाने के बाद यहाँ तबाही हो गए. कहने को उदय कुमार है लेकिन उन्हें ज्यादा पावर नहीं diye गए है. शीशा बंद केबिन मे पड़े रहते है. चेले चमाटो के साथ राजनीती करते है. उन्ही को sab यूनिट मे सेट किया है.

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