लक्ष्मी प्रताप सिंह-
भारत सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के ईमेल अकाउंट Zoho पर शिफ्ट कर दिए। इनमें प्रधान मंत्री ऑफिस (PMO), ग्रह मंत्री इत्यादि के ईमेल भी हैं। अभी भी सरकारी ईमेल एड्रेस में आपको Gov.in या फिर Nic.in दिख रहा है लेकिन इसका सर्वर (मतलब जहां डेटा सेव है वो) zoho में शिफ्ट हो चुका है। Zoho सारे सरकारी डेटा को प्रोसेस, स्टोर और एक्सेस करेगा।
गृह मंत्री से लेकर हर बड़ा सरकारी पद पर बैठा व्यक्ति Zoho का प्रचार स्वदेशी के नाम पर कर रहे हैं। जबकि पहले ये ईमेल जिस NIC (नेशनल इन्फॉर्मेशन सेंटर) पर चल रहे थे वो न सिर्फ स्वदेशी था बल्कि सरकारी भी था।
एक कर्मचारी के ईमेल को मेंटेन करने का सालाना खर्च है करीब 300 रुपए है । भारत में कुल 33 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हैं। मतलब सरकार सालाना 1600 करोड़ खर्च करेगी मात्र इन्हें मेंटेन करने के लिए। (पूरे Zoho बिजनेस सूट का खर्च)
एक बार यदि इतना ही पैसा 16,00 करोड़ सरकारी NIC में लगा देते तो उसे अपग्रेड भी कर सकते थे और टेक्नोलॉजी हमेशा के लिए बनी रहती। कुछ लोगों को नौकरियां मिलती। जनता से आल्तू – फ़ालतू टैक्स लगा के इसकी वसूली नहीं करनी पड़ती। हर साल इतना पैसा किसी प्राइवेट कंपनी को नहीं देना पड़ता।
सवाल ये नहीं कि फालतू खर्चा कर के सरकारी और स्वदेशी INC से उठा के सर्वर Zoho पर क्यों डाले जा रहे। सवाल ये है कि Zoho है किसका?
Zoho के मालिक श्रीधर वेंबु को 2021 में अजीत डोवल की नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर का मेंबर बनाया गया था। 2024 में उन्हें यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन में भी अपॉइंट कर दिया गया। वो भाजपा की यूथ विंग ABVP की कॉन्फ्रेंस में गेस्ट भी रहे और RSS को भी डिफेंड करते रहे हैं।
इस देश के नागरिकों को यहां 4 बातों की चिंता होनी चाहिए।
- देश की केंद्रीय जानकारियां सरकारी संस्था से उठा के एक प्राइवेट संस्था को दी जा रही जो सुरक्षा की दृष्टि से बिल्कुल ठीक नहीं है।
- सरकार पर 1600 करोड़ रुपया सालाना का फालतू का बोझ बढ़ाया जा रहा जो अंत में नागरिकों को ही GST देके चुकाना पड़ेगा।
- नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल के खास लोग देश की सारी बड़ी संस्थाओं में हैं। इस देश के सारे बड़े बिजनेस डील का अप्रूवल इन्हीं लोगों के हाथों में है।
- जबकि उनके बेटे भारत से बाहर के देशों की नागरिकता लेके बैठे हैं। वो दुनियां के अमीर लोगों के फंड मैनेज करते हैं। ऐसे देशों से कंपनियां ऑपरेट करते हैं जहां से वो किसी भी देश की सरकार की पकड़ के ना आ सकें।
जो व्यक्ति अपनी अगली पीढ़ी के लिए भारत पर भरोसा नहीं करता, हम अपनी अगली पीढ़ी का भविष्य उसके हाथ में कैसे दे रहे ?
Note: ये बात भाजपा कांग्रेस की नहीं है। NIC भी ग्रह मंत्रालय के अंतर्गत आती है। वो कम से कम अमित शाह को रिपोर्ट तो करती। उनका बेटा जय शाह कम से कम भारत में तो बैठा है, उसे भी यही रहना है।
एक और बात, कोई भी आदमी भारत सरकार के ग्रह मंत्री से ज्यादा ताकतवर नहीं होना चाहिए। हो रहा है तो चिंता की बात है।


