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सुख-दुख

आजकल ग्रे डाइवोर्स का ज़माना है!

मणिका मोहिनी-

आजकल ग्रे डाइवोर्स (gray divorce) का ज़माना है। ग्रे डाइवोर्स होता है बड़ी 40, 50, 60 की उम्र में पति पत्नी का अलग होना, अपनी शादी तोड़ना। पहले सोचा जाता था कि भई शादी में मुश्किलें आ रही हैं तो अलग होने का निर्णय जल्दी करो ताकि उम्र रहते यानी युवा रहते दूसरा जीवन साथी मिल सके। अब बड़ी से बड़ी उम्र में अच्छे से अच्छे जीवन साथी मिल जाते हैं इसलिए पहली शादी के बच्चे पालो, उन्हें बड़ा करो, पढ़ाओ-लिखाओ, सेटल करो, फिर पुरानी शादी से बाहर निकलो। यह ट्रेंड अधिकतर शिक्षित, आर्थिक रूप से संपन्न, स्वावलंबी महिलाओं की पहल पर शुरू हुआ है।

फिल्म क्षेत्र में अभिनेता कमल हसन और सारिका, फिल्‍म मेकर प्रकाश झा और दीप्‍ति नवल, फिल्म मेकर आरबाज़ खान और मलाइका अरोड़ा के बाद अब क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग के ग्रे डाइवोर्स की चर्चा है। इसी तर्ज पर माइक्रो-सॉफ्ट कंपनी के फाउंडर बिल गेट्स भी लंबे समय तक शादी में रहने के बाद तलाक लेकर पत्‍नी से अलग हुए थे।

इन विशिष्ट हस्तियों के अलावा मुझे अपने परिचय का एक किस्सा याद आ रहा है। बेहद सुंदर, उच्च शिक्षित, धनवान और समाज में सम्मान प्राप्त युगल। पति इंजिनियर, ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत, पत्नी दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में सीनियर डॉक्टर, दो किशोर पुत्र। पति के आग्रह पर दस साल पहले पत्नी बच्चों सहित ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट हो गई। डॉक्टर पत्नी को वहां एक अस्पताल में तुरंत नौकरी मिल गई। बड़े बेटे ने वहां डॉक्टरी पढ़ी, वहीं अस्पताल में लग गया। छोटे बेटे ने इंजीनियरिंग की, वहीं जॉब मिल गई।

पति nagging टाइप था, हील-हुज्जत यानी किच-किच करने वाला, जिस कारण पत्नी खुश नहीं थी। अब 50+ पत्नी डाइवोर्स लेकर ऑस्ट्रेलिया में बच्चों के साथ रह रही है। बच्चे मां के पक्ष में हैं। तो यह है ग्रे डाइवोर्स।

कुछ महीने पहले पत्नी भारत आई थी। अपने आप बताया, ‘सारी उम्र चुपचाप सहती रही कि शायद ठीक हो जाए पर नहीं हुआ। अब बुढ़ापे में तो कम से कम चैन से जी लूं।’

मुझे लगा था, आजकल के ज़माने के हिसाब से मैं बहुत बैकवर्ड हूं। हमारे यहां तो इसे बेवकूफ़ी बोलें। अब इस उम्र में इस सारे झंझट की क्या ज़रूरत थी?


ग्रे डिवोर्स (Gray Divorce) वह स्थिति है जब 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के जोड़े तलाक (डिवोर्स) लेते हैं। यह शब्द “ग्रे हेयर” (सफ़ेद बाल) से लिया गया है, जो बुढ़ापे या परिपक्व उम्र का प्रतीक है। पिछले कुछ दशकों में, विशेष रूप से विकसित देशों में, ग्रे डिवोर्स की दर में तेजी से वृद्धि हुई है।

ग्रे डिवोर्स के मुख्य कारण:

  1. जीवन प्रत्याशा में वृद्धि: लंबी उम्र के साथ, लोग असंतुष्ट रिश्तों को जारी रखने के बजाय नई शुरुआत करना चाहते हैं।
  2. आर्थिक स्वतंत्रता: महिलाएं अब आर्थिक रूप से अधिक सक्षम हैं, इसलिए वे अस्वस्थ रिश्तों से बाहर निकल सकती हैं।
  3. सामाजिक कलंक में कमी: तलाक को लेकर समाज की सोच में बदलाव आया है, खासकर बुजुर्गों में।
  4. रिश्तों में बदलाव: बच्चों के बड़े होने या रिटायरमेंट के बाद जोड़ों के बीच तनाव या अलगाव बढ़ सकता है।
  5. दूसरी शादियों का असफल होना: कुछ मामलों में, दूसरी या तीसरी शादियों में तलाक की संभावना अधिक होती है।

प्रभाव:

  • भावनात्मक चुनौतियाँ: अकेलापन, पहचान का संकट, या डिप्रेशन।
  • आर्थिक मुश्किलें: विशेषकर उन महिलाओं के लिए जो आर्थिक रूप से पति पर निर्भर रही हों।
  • परिवार पर असर: बच्चों और पोते-पोतियों के साथ संबंधों में तनाव।

भारत में स्थिति:

भारत में ग्रे डिवोर्स अभी भी अपेक्षाकृत कम है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में यह प्रवृत्ति धीरे-धीरे बढ़ रही है। समाज में आर्थिक स्वतंत्रता, महिला सशक्तिकरण, और व्यक्तिगत खुशी पर ज़ोर इसका कारण हो सकता है।

यदि आप या कोई परिचित इस स्थिति से गुजर रहे हैं, तो काउंसलिंग या कानूनी सलाह लेना उचित होगा।

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