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ट्रम्प को नियंत्रण में लेने वाले मस्क का एआई ग्रोक उम्मीद से ज्यादा शातिर दिख रहा है!

अभिरंजन कुमार-

दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की ट्रंप सरकार को नियंत्रित करने वाले एलन मस्क का एआई ग्रोक मेरी उम्मीद से अधिक शातिर दिखाई दे रहा है।

मैंने आज तक इस दुनिया में कोई ऐसी चीज़ नहीं देखी थी, जिसपर वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों एक साथ लहालोट हों। आम तौर पर वामपंथी जिसे अमृत बताते हैं, दक्षिणपंथी उसे पेशाब से भी बदतर बताते हैं। जैसे शराब। इसी तरह दक्षिणपंथी जिसे अमृत बताते हैं, वामपंथी भी उसे पेशाब से ज़्यादा कुछ मानने को तैयार नहीं होते। जैसे गोमूत्र।

लेकिन ग्रोक मुझे दुनिया में पहली ऐसी चीज़ के तौर पर दिखाई दिया है, जिसपर वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों रीझे हुए दिखाई दे रहे हैं। कारण – ग्रोक जहां वामपंथियों को उनके मनमुताबिक जवाब दे रहा है, वहीं दक्षिणपंथियों के तुष्टीकरण में भी पीछे नहीं है।

पिछले एक या दो दिन में मैंने कई ऐसे पोस्ट देखे, जिनमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने मन के हिसाब से जवाब हासिल किए हैं और सोशल मीडिया पर उन्हें अपनी वैचारिक जीत के एलान की तरह शेयर किया है।

एक दक्षिणपंथी भाई के पोस्ट से पता चला कि ग्रोक ने राहुल गांधी को उन पांच नेताओं में से एक बताया है, जिनसे भारत की एकता और अखंडता को गम्भीर खतरा है। जबकि कुछ अन्य वामपंथी भाइयों के पोस्ट से पता चला कि राहुल गांधी ही वह नेता हैं, जो भारत की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रख सकते हैं।

अब ग्रोक की इन दोनों परस्पर विरोधाभासी “फाइंडिंग” को दोनों तरफ की “फंडिंग” से पल रहे उनके आईटी सेल के लोग खूब प्रचारित और प्रसारित कर रहे हैं।

इससे ऐसा लगता है कि ग्रोक और अन्य एआई के आ जाने से विभिन्न राजनीतिक दलों के आईटी सेल से जुड़े भाइयों बहनों का काम और आसान हो गया है। अब अपने राजनीतिक दल और विचार को जस्टिफाई करने के लिए उन्हें लंबे-लंबे पोस्ट लिखने में न तो मेहनत करनी है, न ज्यादा दिमाग लगाना है। उनके लिए यह काम अब एआई करेगा।

मतलब उनकी कार्यक्षमता में अब सैकड़ों गुणा इज़ाफ़ा होने वाला है। मतलब व्हाट्सएप और फेसबुक यूनिवर्सिटी से अब पहले की तुलना में और भी ज़्यादा ज्ञान प्राप्त होते रहने की पूरी संभावना है। मतलब दिमाग का और भी ज़्यादा दही होने वाला है।

हालात ऐसे हैं कि जब तक देश और दुनिया का एक-एक आदमी अपने दिमाग का इस्तेमाल करना बंद करके मनोरोगी नहीं बन जाता, तब तक नई-नई तकनीक के विभिन्न माध्यमों द्वारा उसपर सच्ची-झूठी सूचनाओं के हमले होते रहेंगे। हमलावार इतने ताकतवर हो चुके हैं कि उनकी हार होने की कोई संभावना नहीं है। धन्यवाद।

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