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उत्तर प्रदेश

हाथरस : इतने बड़े कांड की 8 लाइन ख़बर? अख़बारों-पत्रकारों को लोग गाली न दें तो क्या करें!

प्रभाकर कुमार मिश्रा-

दो बच्चों की हत्या हो गई और ख़बर भूले बिसरे अंदाज़ में आठ दस लाइन में निपटा दी गई। न स्कूल का नाम है न आरोपी का नाम है! पत्रकारों को लोग गाली नहीं देंगे तो क्या करेगें?

ख़बर और केस को लेकर आए कुछ कमेंट… नीचे पढ़ें


वसिमुद्दीन अहमद-
मुस्लिम एंगल होता तो खूब मसाला लगाकर यही अखबार खबर छापते, अब क्या करें, छुपाना भी है और छापना भी है तो ऐसे ही छापेंगे।

सत्यपाल अरोड़ा-
दैनिक जागरण अख़बार होगा निश्चित तौर पर।

आशीष सागर दीक्षित-
खबर को बिना वेरीफाइड टिवीटर पोस्ट की तर्ज पर एक पैराग्राफ में निपटा दिया।

सुनील शर्मा-
आजकल खबर उतना ही दिया जाता है जितना उन्हें बताया जाता है।

फहद मिर्जा-
लगता है पत्रकार जी ने सर्वनाम अच्छे से पढ़ा है। सब उसका उसका लिखा गया है।

अजय-
पत्रकारिता लगभग विलुप्त होने के कगार पर ही है भारत से।

यहां देखें पूरा मामला क्या है?

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