रवीश रंजन शुक्ला-
देश के सबसे मशहूर डाक्टर और मेदांता अस्पताल के मालिक डॉ नरेश त्रेहान ने 40 साल से ऊपर के लोगों को स्वस्थ्य रहने के लिए 10 बातें बताई हैं जिसपर आपको अमल करने की जरुरत है क्योंकि 100 में 11 लोग ही 60 की उम्र पार करते हैं..और केवल 7 लोग ही 65-70 की उम्र पार करते हैं…लेकिन अगर आप की उम्र 40 से पार है तो लंबी उम्र के लिए इन 10 चीज़ों पर अमल करें..
- दिन में कम से कम दो लीटर पानी पीना इससे बॉडी स्वस्थ्य रहती है
- शरीर से काम लीजिए..जितना शरीर से काम लेंगे यानि मेहनत करेंगे उतना शरीर स्वस्थ्य रहेगी..पैदल चलना साइकिल चलाना शामिल है
- खाना कम खाइए जितना ज़रूर है उतना खाइए…चीनी या मिठाई दो सप्ताह के लिए कम खाइए देखिए कैसे चेहरे पर सूजन कम हो सकता है..रात को कार्बोहाइड्रेट मत खाइए सलाद खाइए
- वाहन का प्रयोग कम करें..पैदल या साइकिल का इस्तेमाल ज्यादा करें
- ग़ुस्सा नहीं होना है..कम बोलिए बोलने से पहले सोचिए…पहले सोचिए फिर बोलिए..घर में No Anger zone बनाइए
- धन का मोह छोड़िए..उतना धन कमाइए जितना ज़रूरी है don’t run after money..यानि धन कमाने के फेर में पड़ेंगे तो दोस्त छूट जाएँगे..मिलजुलकर रहना ज़रूरी
- कभी किसी चीज़ को पाने के लिए खुद पर ग़ुस्सा न उतारें..मसलन बडी कार नहीं खरीद पाए कोई बात नहीं अपने को अपराध बोध में मत रखें
- पद, जाति, धर्म और पैसा आपका अहंकार बढ़ाती है उसे त्यागें..जीवन में विनम्र बनिए..सबके साथ हँसी ख़ुशी से रहे..
- बाल सफ़ेद होने का मतलब बुढ़ापा नहीं है..आप आशावादी रहें यात्रा करना चाहिए जब तक घुटने चल रहे हैं..
- अपने छोटों से बहुत सहानुभूति रखिए..यानि अंहकार मत रखिए कि सबलोग मुझे नमस्कार करें..अपने से छोटों का सम्मान करें. देखिए आपको कितनी ख़ुशी मिलती है..
काम की बात : 2003 में एक बार मुझे दिल्ली के एस्कॉर्ट्स अस्पताल में तत्कालीन डायरेक्टर डॉक्टर नरेश त्रेहान से मिलने खुद को दिखाने का अवसर मिला। सारी जांच के बाद वे बोले , कि आप दिमाग की बात दिमाग तक न रख कर उसे दिल तक ले जाने के कारण दिल को ज्यादा तकलीफ देते हैं। ये दुनियां और ये दुनियां वाले अपने ढंग से चलेंगे, इनके कारण आपको खुद को खास कर अपने दिल को तकलीफ नहीं देनी चाहिए। वे मनोवैज्ञानिक ढंग से मरीजों से खूब बात करते हैं। इसके बावजूद मुझसे भूलें हुईं और दो बार अटैक भी हुए। इसके अलावा और भी बातें हुईं। उनकी बातें तथ्यपूर्ण हैं और उन्हें ठीक से समझा जाना चाहिए। वे देश के ऐसे पहले हार्ट सर्जन हैं,जिन्होंने रोबोट के सहारे दिल के तमाम ऑपरेशन किए थे, जिसे पढ़ कर उनसे मिलने का मन था, तो एक दिन गया तो एम्स था,जहां हड़ताल के चक्कर में एस्कॉर्ट्स पहुंच गया। जहां उन्होंने कई जांचें कि और इलाज के प्रिस्क्रिप्शन और निर्देश दिए, कोई फीस भी नहीं ली। बड़े अस्पताल अब पंच सितारा होटल खर्च वाले हो गए हैं। उनकी कुछ सलाहें ध्यान देने योग्य है! –गणेश ज्ञानार्थी


