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देश के सबसे बड़े अंग्रेजी अखबार के हिंदी संस्करण में छपा यह लेख खालिस बकवास है!

अनिल जैन-

यह हिंदी में प्रकाशित होने वाले देश के सबसे बड़े ‘अंग्रेजी अखबार’ के जयपुर संस्करण का संपादकीय पन्ना है। मैं इस पन्ने पर छपे लेख की विषय वस्तु पर नहीं जा रहा हूं, क्योंकि वह तो खालिस बकवास है।

मुझे तो चौंकाया है लेख के शीर्षक ने….”क्या जातिगत जनगणना का औचित्य न्यायसंगत है?’’ यानी जिस बुद्धि-शत्रु ने यह शीर्षक दिया है, उसके मुताबिक अन्यायसंगत औचित्य भी होता है!

अगर यह शीर्षक खुद लेख के लेखक ने दिया है तो मामला और भी ज्यादा गंभीर है और उसकी भी पढ़ाई-लिखाई व भाषा-ज्ञान पर सवाल खड़ा होता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसने राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति का पद किस तरह हासिल किया होगा।

बहरहाल यह अखबार पिछले एक-डेढ़ दशक के दौरान पत्रकारिता से तो पर्याप्त दूरी बना ही चुका है और इस शीर्षक को देख कर अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि हिंदी भाषा से भी यह अखबार कितनी गहरी प्रतिबद्धता के साथ दुश्मनी निभा रहा है। वैसे हिंदी के बाकी अखबारों की स्थिति भी इससे जुदा नहीं है।

मुझे यकीन है कि इस ‘न्यायसंगत औचित्य’ पर न तो अखबार के प्रबंधन का ध्यान गया होगा और न ही पदनामधारी संपादक का।

मैंने भी इस अखबार में करीब आठ साल काम करते हुए कुछ समय तक संपादकीय पन्ने का प्रभार भी संभाला है। उस दौरान भी संपादकीय पन्ने सहित अन्य पन्नों पर प्रबंधन की मंशा के मुताबिक ऐसा बहुत कुछ छपता था जो कि नहीं छपना चाहिए, लेकिन ऐसा भाषा-भंजन नहीं होता था, क्योंकि उस समय तक अखबार में संपादक और ज्यादातर संपादकीय सहयोगी पढ़े-लिखे हुआ करते थे और उनमें भी Devpriya Awasthi जी खासतौर पर भाषाई अशुद्धियों पर पैनी नजर रखते थे।

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4 Comments

4 Comments

  1. Uttarakhand

    June 2, 2025 at 10:46 am

    तू कौन सा कम बकैती मास्टर है। तुम सब अपने को पत्रकार कहने वाले बुद्धिजीवी समझने वाले किसी न किसी के चरण चुंबन करते हो।
    वैसे भी तुमने यहां पर लिखना क्या चाहती थी यही पता नहीं चल रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हारी इसके साथ कोई व्यक्तिगत दुश्मनी है। वैसे भी 8 साल तुम यहां भी किसी ने किसी के चरण वंदना करके रहे हो

  2. Parth

    June 2, 2025 at 10:50 am

    तुम अपना ज्ञान देख लो खालिस शब्द और बकवास शब्द कौन सी भाषा के है यह पता है तुम्हें वह पता ही नहीं है?? और बनने की कोशिश कर रहे हो हिंदी के मूर्धन्य ज्ञाता।
    दूसरी बात बताओ किसी कार्य को करने का औचित्य क्या है?? क्या वह तर्कसंगत न्यायसंगत है? यही कहा जाता है। तुम अध जल गगरी छलकत जाए वाली परंपरा के हो तुम्हारे जैसों के
    लिए ही यह लिखा गया है किअधजल गगरी छलकत जाए

  3. Sheela

    June 2, 2025 at 10:54 am

    अपने ज्ञान का परिचय देने से पहले स्वयं ज्ञान अर्जित करना जरूरी है। तुम्हारी हिंदी भाषा शब्दावली और किसी वाक्य का भावार्थ समझने का ज्ञान तुम्हारे ज्ञान को प्रदर्शित कर रहा है

  4. Parth

    June 2, 2025 at 10:55 am

    तुम्हारे गुलाम नहीं है कि तुम्हारी बकैती और बकवास सुनने के लिए तुम्हारे भड़ास फॉर मीडिया को फॉलो करेंगे तुम्हें हमारी टिप्पणी से इतनी नफरत है कि उसे हटा रहे हो तो हमारे पास भी इतना फालतू समय नहीं कि हम तुम्हें पढ़ें ।

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