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उत्तर प्रदेश

बरेली में फर्जी खबर छापकर विवादों में घिरा हिंदुस्तान अखबार

बरेली। कृषि विभाग से जुड़ा एक विवाद अब मीडिया जगत तक पहुँच गया है। आरोप है कि एक पत्रकार ने जातीय द्वेषवश विभागीय अधिकारियों के खिलाफ लगातार भ्रामक और फर्जी खबरें प्रकाशित कीं और इन खबरों को दैनिक हिंदुस्तान जैसे बड़े अखबार ने बिना पुष्टि के प्रकाशित कर दिया।

जानकारी के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब हाल ही में निदेशालय ने डॉ. नीरजा सिंह, उप निदेशक भूमि संरक्षण, को अतिरिक्त कार्यभार सौंपने का आदेश जारी किया। डॉ. सिंह ने स्वास्थ्य कारणों से पहले ही चार्ज न लेने का अनुरोध किया था, जिसके चलते प्रक्रिया में दो सप्ताह का समय लगा। अब आदेश के तहत यह कार्यभार डीडीपीपी अमर पाल को सौंपा गया है।

इसी प्रक्रिया को लेकर एक ऑनलाइन पोर्टल पर डॉ. नीरजा सिंह के खिलाफ नकारात्मक खबर प्रकाशित की गई। आरोप है कि संबंधित पत्रकार का अतीत भी विवादित रहा है और पूर्व में अमर उजाला और अमृत विचार जैसे संस्थानों से उसे बाहर किया जा चुका है। आश्चर्यजनक रूप से यही खबर हिंदुस्तान अखबार ने भी अपने संस्करण में प्रकाशित कर दी।

मामले ने तूल पकड़ लिया है और पाठक हिंदुस्तान जैसे जिम्मेदार अखबार की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, डॉ. नीरजा सिंह को तेजतर्रार और कार्यकुशल अधिकारी माना जाता है।

महज दो सप्ताह में ही उन्होंने कार्यालय में कामकाज की नई संस्कृति विकसित की है, जो कुछ लोगों को नागवार गुजर रही है।

इसी विवाद पर पूर्व में अमर उजाला में छपी थी ये खबर

इस पूरे प्रकरण पर पत्रकार सुधाकर शुक्ला का पक्ष भी पढ़ें…

कृषि और भूमि संरक्षण विभाग की कोई खबर भ्रामक और मनगढ़ंत नहीं है। भूमि संरक्षण विभाग की डब्ल्यूडीसी और किसान समृद्धि योजनाओं की टीएसी जांच हो चुकी है। उसमें इनके कई अफसरों और बाबुओं को प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया गया है। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर पूर्व डिप्टी डायरेक्टर कृषि अभिनंदन सिंह और पूर्व कार्यवाहक बीएसए निलंबित हो चुके हैं।

डिप्टी डायरेक्टर कृषि कार्यालय से कई बाबुओं के ट्रांसफर हो चुके हैं। दूसरी बात अमर उजाला ने मुझे कभी किसी आरोप में नहीं निकाला क्योंकि मेरे ऊपर कोई आरोप थे ही नहीं। मैने आगरा यूनिट से खुद इस्तीफा दिया था। नीरजा सिंह को डिप्टी डायरेक्टर कृषि का अतिरिक्त चार्ज 25 अगस्त को मिला था। लेकिन शासन ने उनको 12 सितंबर को अतिरिक्त चार्ज से हटा दिया। उसकी वजह यह है कि कृषि और भूमि संरक्षण विभाग के घपले की सबसे पहले जांच बतौर डिप्टी डायरेक्टर भूमि संरक्षण नीरजा सिंह ने ही की थी। उसमें उन्होंने घपलेबाज अफसर और बाबुओं को क्लीनचिट दे दी थी।

उनसे डिप्टी डायरेक्टर कृषि का चार्ज हटने की यही वजह है। मेरा किसी भी विभाग के अफसर और बाबुओं से कोई जातीय झगड़ा नहीं है। न ही मैं आज तक डिप्टी डायरेक्टर कृषि कार्यालय में गया हूं।

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1 Comment

1 Comment

  1. प्रतीक प्रताप सिंह

    September 16, 2025 at 5:41 pm

    सर प्रणाम

    सर मैं आजमगढ़ मेहनजपुर का निवासी हूं और छोटा सा पत्रकार भी हूं आपको रेगुलर पढता हूं। मेरा एक प्रश्न है सर आपने जिस सुधाकर शुक्ला के उगाही की खबर प्रमुखता से चलाई थी आज उसकी उगाहि वाली खबर क्यों लिख रहे हैं। सर मैंने जितनी पड़ताल की है इसने ये खाबर छापने से पहले सम्बंधित कर्मचारियों से पैसे की डिमांड की पैसा ना मिलने पर इसने ये खबर छापी। इसकी पैसे उगाही के ऑडियो मेरे पास हैं। आप हम जैसे छोटे पत्रकारों के आदर्श है कृपया मेरी अज्ञानता को दूर करें ।

    सुधाकर की कालई खोलने वाली आपकी खबर का लिंक = https://www.bhadas4media.com/sudhakar-shukla-nikale-gaye/

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