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दिल्ली

हिंदुस्तान टाइम्स और पत्रकार नीलेश मिश्र को हाईकोर्ट से मिला स्टे, भरना था 40 लाख रु हर्जाना

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश देते हुए उस ट्रायल कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें हिंदुस्तान टाइम्स और इसके पूर्व रिपोर्टर नीलेश मिश्र को कारोबारी अरुण कुमार गुप्ता को मानहानि के तौर पर संयुक्त रूप से 40 लाख रुपये चुकाने का निर्देश दिया गया था।

गुप्ता, जो डार्ट्स आईटी नेटवर्क के संस्थापक हैं, ने आरोप लगाया था कि साल 2007 में “Get Smart, Email with Care” शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में अप्रत्यक्ष रूप से यह दर्शाने की कोशिश की गई कि उन्हें अपनी पुरानी कंपनी से वित्तीय अनियमितताओं के कारण बर्खास्त किया गया था। जबकि रिपोर्ट में उनका नाम सीधे तौर पर नहीं था।

अदालती कवरेज करने वाली वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार, इस वर्ष जून में साकेत कोर्ट ने माना था कि मीडिया हाउस और पत्रकार यह साबित नहीं कर पाए कि उन्हें संबंधित जानकारी किस स्रोत से मिली थी। इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराते हुए 40 लाख रुपये का हर्जाना अदा करने का आदेश दिया था।

इस आदेश को चुनौती देते हुए हिंदुस्तान टाइम्स और नीलेश मिश्र ने हाई कोर्ट में दलील दी कि यह रिपोर्ट केवल जनता को ईमेल और इलेक्ट्रॉनिक संचार के दुरुपयोग के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई थी, न कि गुप्ता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि खबर में “alleged” और “purportedly” जैसे शब्दों का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया गया था, जिससे रिपोर्ट को संतुलित और निष्कर्षविहीन बनाए रखा जा सके।

हाई कोर्ट की जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि फिलहाल 6 जून 2025 को साकेत कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश और डिक्री के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 दिसंबर 2025 को होगी।

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