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दिल्ली

हिंदुस्तान टाइम्स और पत्रकार नीलेश मिश्रा को देना होगा 40 लाख रुपये का हर्जाना, 60 दिनों की मोहलत!

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने प्रतिष्ठित अखबार हिंदुस्तान टाइम्स और उसके पूर्व रिपोर्टर नीलेश मिश्रा को मानहानि के एक मामले में व्यवसायी अरुण कुमार गुप्ता को 40 लाख रुपये का हर्जाना अदा करने का आदेश दिया है। यह मामला 2007 में प्रकाशित एक रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि गुप्ता को एक कंपनी से “वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में बर्खास्त किया गया” था।

बार एंड बेंच नामक वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जिला जज प्रभदीप कौर ने अपने आदेश में कहा कि कुल हर्जाना राशि में से 3/4 हिस्सा अखबार को और शेष 1/4 हिस्सा मिश्रा को अदा करना होगा। साथ ही अदालत ने अखबार को 60 दिनों के भीतर माफी प्रकाशित करने और भविष्य में गुप्ता के खिलाफ मानहानिपूर्ण सामग्री प्रकाशित न करने का निर्देश भी दिया है।

क्या है मामला?

अरुण कुमार गुप्ता ने 2000 में इंटेग्रिक्स नामक कंपनी में निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला था और जुलाई 2005 में इस्तीफा देकर अपनी नई कंपनी Darts IT Network शुरू की। वर्ष 2006 में इंटेग्रिक्स ने गुप्ता के खिलाफ एक कथित ईमेल और वेबसाइट हैकिंग को लेकर दो मुकदमे दर्ज कराए थे। हालांकि, बाद में उच्च न्यायालय के आदेश पर यह सामने आया कि ईमेल और हैकिंग से जुड़ा आईपी एड्रेस गुप्ता से जुड़ा पाया गया।

जनवरी 2007 में हिंदुस्तान टाइम्स ने मिश्रा द्वारा लिखी एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें बिना नाम लिए यह दावा किया गया कि एक व्यक्ति को वित्तीय गड़बड़ियों के चलते कंपनी से निकाला गया। इसी के बाद गुप्ता ने अखबार, रिपोर्टर, इंटेग्रिक्स, उसके निदेशकों और वकील के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया, हालांकि बाद में उन्होंने इंटेग्रिक्स और अन्य से समझौता कर लिया। केस सिर्फ हिंदुस्तान टाइम्स और मिश्रा के खिलाफ जारी रहा।

अदालत ने क्या कहा?

कोर्ट ने पाया कि रिपोर्ट में किए गए दावे, विशेषकर ‘बर्खास्तगी’ और ‘वित्तीय अनियमितता’ जैसे आरोप, पूरी तरह निराधार थे। न्यायालय ने कहा कि रिपोर्ट में जिस व्यक्ति की बात की गई, वह स्पष्ट रूप से गुप्ता ही थे, क्योंकि गवाहों ने भी माना कि वे उस रिपोर्ट को गुप्ता से जोड़ पाए थे।

जज ने कहा, “यह रिपोर्ट गुप्ता की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली थी। जब गवाहों ने उन्हें रिपोर्ट के आधार पर सवालों के घेरे में लिया, तो उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि अखबार और रिपोर्टर ने कोई ऐसा दस्तावेज पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो कि गुप्ता को वास्तव में वित्तीय अनियमितताओं के कारण हटाया गया था। इसके अलावा, ‘निष्पक्ष टिप्पणी’ और ‘जनहित’ की दलीलों को भी अदालत ने खारिज कर दिया।

संस्था की जिम्मेदारी ज्यादा: कोर्ट

अदालत ने नीलेश मिश्रा की तुलना में अखबार को अधिक जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “एक संस्था हमेशा व्यक्ति से बड़ी होती है और संस्थान की जिम्मेदारी भी अधिक होती है। अखबार जैसे बड़े संस्थान को किसी भी रिपोर्ट के प्रकाशन से पहले पर्याप्त जांच-पड़ताल करनी चाहिए।”

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