हिसार में पुलिस ने दो दर्जन मीडियाकर्मियों को बर्बर तरीके से पीटा और कैमरा तोड़ा

संत रामपाल प्रकरण कवर करने हरियाणा के हिसार पहुंचे दर्जनों मीडियाकर्मियों को हरियाणा पुलिस ने बुरी तरह पीटा. कई चैनलों के रिपोर्टरों और कैमरामैनों को गंभीर चोटें आई हैं. पुलिस द्वारा आजतक के रिपोर्टर और कैमरामैन को पीटते हुए दृश्य न्यूज चैनलों पर दिखाए जा रहे हैं. ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) ने मीडिया पर जान-बूझकर किए गए अटैक की कड़ी निंदा की है और दोषियों तो दंडित करने की मांग की है. बीईए महासचिव और वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह ने कहा है कि पुलिस ने राजनीतिक आकाओं के इशारे के बाद मीडिया पर हमला किया है ताकि पुलिस कार्रवाई को मीडिया कवर न कर सके और मौकै से मीडिया के लोगों को भगाया जा सके. ओबी वैन से लेकर मोबाइल, कैमरा तक तोड़े क्षतिग्रस्त किए गए हैं. करीब दो दर्जन पत्रकारों और कैमरामैनों को चुन चुन कर पुलिस ने निशाना बनाया है.

हरियाणा के हिसार में पुलिस प्रशासन संत रामपाल की जिद के आगे बुरी तरह पस्त हुआ है. कोर्ट की फटकार के बाद आज दोपहर जब संत रामपाल को पकड़ने के लिए आश्रम में घुसने की पुलिस कार्रवाई  शुरू हुई तो पुलिस अफसरों ने पहले से तय शर्तों के मुताबिक चुनिंदा करीब 60 पत्रकारों व कैमरामैनों को कवरेज के लिए अंदर जाने दिया. इन सभी साठ मीडियाकर्मियों की इंट्री लिस्ट के आधार पर की गई जिसे पुलिस व मीडिया के लोगों ने एक रोज पहले तैयार किया था. लेकिन जब पुलिस कार्रवाई को मीडिया वाले कवर करने लगे तो पुलिस ने अचानक न जाने किसके इशारे पर संत रामपाल के समर्थकों को छोड़कर मीडिया के लोगों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया. इसके बाद मीडिया के लोगों में कोहराम मच गया. किसी के गर्दन पर लाठियां पड़ीं तो किसी के पैर पर. किसी के पेट में डंडे मारे गए तो किसी के हाथ पर. कई लोगों के कैमरे पूरी तरह तोड़ डाले गए. सारे मीडियावालों को आपरेशन स्थल से बहुत दूर पीटते हुए खदेड़ दिया गया.

इसके बाद सभी न्यूज चैनलों पर मीडिया की पिटाई सबसे बड़ी खबर हो गई. हरियाणा में भाजपा की सरकार बनी है. ये टीवी वाले मोदी और भाजपा के गुणगान करते थकते अघाते नहीं थे. अब जब उनके उपर भाजपा सरकार की तरफ से डंडे बरसाए गए हैं तो सभी जुल्म सितम न्याय की बातें करने लगे हैं. एकतरफा रिपोर्टिंग और पेड रिपोर्टिंग के जरिए किसी पार्टी व नेता को प्रमोट करने का हश्र संभवतः ऐसा ही होता है. दुखद ये है कि लाठी खाने वाले आम पत्रकार हैं. चैनलों के मालिकों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला. चैनल के मालिक तो चुनावी माल मलाई खा खा कर फिलहाल मदहोश स्थिति में हैं. उन्हें कोई फरक नहीं पड़ने वाला कि उनका पत्रकार और कैमरामैन पीटा गया है या नहीं. चैनलों पर खबरें कुछ रोज चलेंगी और फिर सब भूलकर मोदी-भाजपा गुणगान में जुट जाएंगे क्योंकि इसके लिए कार्पोरेट की तरफ से बड़ा हिस्सा-पैसा बड़े मीडिया हाउसों को मिला हुआ है.

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