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उत्तर प्रदेश

सस्पेंड आईएएस अभिषेक प्रकाश की बढ़ी मुश्किलें, एसआईटी ने शासन से मांगी कार्रवाई की अनुमति

लखनऊ। चर्चित सौलर प्लांट घोटाले में सस्पेंड आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश की परेशानियां अब और बढ़ती नजर आ रही हैं। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने शासन से उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मांगी है। अभिषेक प्रकाश फिलहाल न तो एसआईटी के सामने पेश हुए हैं और न ही विजिलेंस की पूछताछ में सहयोग कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा के तहत कार्रवाई के लिए गृह विभाग से अनुमति मांगी है। यदि शासन से अनुमति मिलती है, तो उनकी गिरफ्तारी की तलवार भी लटक सकती है।

दरअसल, अभिषेक प्रकाश पर आरोप है कि सीएमएस इनफ्राटेक कंपनी को फर्जी तरीके से सरकारी ठेके दिलाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इसी कारण उन्हें सस्पेंड भी किया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, उन्होंने अपने कार्यकाल में नियमों को ताक पर रखकर कंपनी को 7,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट दिलवाए।

एसआईटी को नहीं मिला सहयोग

एसआईटी और विजिलेंस ने कई बार अभिषेक प्रकाश को बयान देने के लिए तलब किया, लेकिन वह अब तक पेश नहीं हुए हैं। अधिकारियों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, पर कोई जवाब नहीं मिला। यही वजह है कि अब एसआईटी ने शासन से आगे की कार्रवाई की अनुमति मांगी है।

प्रोजेक्ट में कर्मियों की नियुक्ति पर भी संदेह

इस घोटाले में नियुक्त कर्मियों की चयन प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में लिया गया है। जांच रिपोर्ट में 116 सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों की भूमिका को संदिग्ध बताया गया है।

अगर शासन से अनुमति मिलती है, तो अभिषेक प्रकाश की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। मामला गंभीर होता जा रहा है और शासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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