दो आईएएस अधिकारी चर्चा में हैं। एक का नाम धीमान चकमा है तो दूसरे नाहार्जुन बी गौड़ा हैं। दोनों अधिकारियों पर अपने कामकाज में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगा है। नीचे पढ़िए किसके लिए किसने क्या लिखा है?
डॉ शीतल यादव-
ये IAS धीमान चकमा हैं जब इनकी UPSC निकली थी तब इन्होंने कहा था कि,
“मैं गरीबों की सेवा करना चाहता हूं, पिछड़ों का उत्थान करना चाहता हूं, पूर्वोत्तर के लिए काम करना चाहता हूं।”
लेकिन अब 2 महीने पहले ही एक पॉश वेस्टिन होटल के कमरे में 57 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।
IAS से एक ATM तक का शानदार सफर तय किया है इन बाबू साहब ने।
मूर्ति नैन-
10 करोड़ की घूस लेकर 51 करोड़ का जुर्माना केवल 4 हजार में खत्म कर दिया गया।
यह कारनामा किया है मध्यप्रदेश के आईएएस अफसर डॉ. नागार्जुन गौड़ा ने। पाथ इंडिया कंपनी जो हाईवे निर्माण कर रही थी, उसने बिना अनुमति के 60 फीट खुदाई कर दी।
इलाका तालाब में बदल गया। ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप धरना दिया। 2023 में जांच में भारी गड़बड़ी पाई गई और अवैध खनन के चलते कंपनी पर 51 करोड़ का जुर्माना लगाया गया।
एडीएम गौड़ा ने पोस्टिंग मिलते ही जांच की। आरोप ज्यों के त्यों रहे, लेकिन जुर्माना घटाकर केवल 4 हजार कर दिया।
अब हंगामा खड़ा हो गया है। एक्टिविस्ट आनंद जाट ने पूरे मामले को उजागर कर दिया है।
वहीं, खुरपेंच नामक एक्स हैंडल से एमपी के आईएएस गौड़ा के लिए लिखा गया है-
मध्य प्रदेश के चर्चित IAS नागार्जुन बी. गौड़ा पर गंभीर सवाल
RTI एक्टिविस्ट का आरोप – हरदा ADM रहते हुए अवैध खनन करने वाली कंपनी पर लगे ₹51 करोड़ के जुर्माने को घटाकर महज ₹4,000 कर दिया गया!


- श्रीमान अफसर, क्या ये नियमों के आधार पर लिया गया फैसला था या फिर किसी खास कंपनी को सफेद चादर ओढ़ाने का खेल ??
- अगर आम आदमी पर इतना बड़ा जुर्माना लगता तो क्या उसे भी इतनी माफ़ी मिलती ??
- जनता जानना चाहती है – ये प्रशासनिक प्रक्रिया थी या फिर प्रशासनिक कृपा ??
जवाब सिर्फ दस्तावेजो से नहीं , ईमानदारी से भी चाहिए।


