सत्येंद्र पी एस-
आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की बत्ती और हूटर छीन लिया गया। यह उनको विशिष्ट बनाता था। इसके खतरनाक साइड इफेक्ट हुए हैं। अब वह लूटपाट पर उतारू हैं। अपना पद प्रतिष्ठा दिखाने के लिए हर तरीके से धन जमा करने में लगे हैं। तमाम जमीनें, कैश, तरह तरह की लग्जरी में अकबका गए हैं कि क्या कर डालें, जिससे कि वह विशिष्ट बनें, विशिष्ट दिखें।
पिछले दस साल में बहुत कुछ बदल गया। अक्सर मुझे समझ में नहीं आता कि यह अधिकतम धन जुटाने की क्या सनक है? किसी को क्या दिखाना है? किसी को क्या बताना है? इस धरती पर कितने लोग आए और दिखा बताकर चले गए। कौन पूछता है? हमारा अस्तित्व ही क्या है? हम अपने सौ पचास परिचित लोगों को ही तो दिखा पाते हैं, और किसी को क्या फर्क पड़ता है कि हम क्या हैं?
यूपी में शशि प्रकाश गोयल चीफ सेक्रेटरी बने हैं, जैसा कि मुझे कन्फर्म था कि वहीं बनेंगे। वेबसाइट से उनकी कुंडली देखी थी और तय था कि वही बनेंगे। जब देखी थी, उस समय मैं ज्योतिष की पढ़ाई कर रहा था और मुझे देखकर लगा कि ये बंदा टॉप पर जाएगा।

गोयल महज 22 साल की उम्र में आईएएस अधिकारी बन गए। रैंकर थे और अपने गृह राज्य में पोस्टिंग मिली। न तो वह ब्राह्मण ठाकुर, न कोई लॉबी। न उनकी जाति वाला कोई मुख्यमंत्री। फिर भी हर सरकार में प्रमुख पोस्ट पर रहे। भाजपा सत्ता में आई तो गुजरात लॉबी के करीबी हो गए। ऊर्जा इतनी कि जिस पद पर जाते हैं, कमांड अपने हाथ में ले लेते हैं।
ऐसे में यह तय था कि भाजपा का गैर ब्राह्मण केंद्रीय नेतृत्व उन्हें यूपी का चीफ बनाएगा ही। खासकर ऐसे वक्त में, जब भाजपा के ग्रह नक्षत्र इशारा कर रहे हैं कि अगले विधानसभा में भाजपा हार जाएगी।
खैर, मसले पर आते हैं। किसी आईएएस के लिए यह शीर्ष सपना होता है कि वह यूपी जैसे राज्य का चीफ सेक्रेटरी बन जाए। गोयल साहब बन गए। और बनते ही हृदय के वाल्व में कुछ गड़बड़ हो गया (सूचना के मुताबिक) और हॉस्पिटल पहुंच गए। इसी अवस्था में इंसान बुद्ध बन जाता है कि सारी पॉवर, सारा पैसा, सारी ताकत मेरी मुट्ठी में है और मैं कितना बेबस लाचार हूँ। यह संतई बहुत कम लोगों को नसीब होती है कि अपने चरम पर पहुंचकर संसार व भौतिक सुखों की नश्वरता की फीलिंग हो जाए!
शशि प्रकाश गोयल जल्द स्वस्थ हों, यही कामना है। संभवतः उन्हें अब भौतिक जगत से परे हटकर मनुष्यों के लिए कुछ करना है। और इसीलिए उन्हें प्रकृति ने एक छोटा सा झटका दिया है कि भौतिक सुखों के पीछे भागने में संतुष्टि नहीं है। जिंदगी दया, करुणा, प्रेम, सद्भाव और भरपूर जिंदगी जी लेने में है। यह ज्ञान मुझे भी तमाम झटकों के बाद मिला था, जब यह फील हुआ कि मनुष्य कितना बेबस, लाचार प्राणी है, जो स्वघोषित विद्वान होता है। बुद्ध को बहुत कम उम्र में यह ज्ञान मिल गया था तो उन्होंने दुनिया बदल दी थी।
जिस रोज आपको भौतिक चीजों की सीमाओं का अहसास हो जाता है, यह पता हो जाता है कि हमारा ज्ञान विज्ञान कुछ भी नहीं है, हम कितने बेबस हैं, उस दिन से ही जिंदगी की सही और नई यात्रा शुरू होगी है। अदरवाइज मैंगो पीपल्स को तो आजीवन गफलत बनी रहती है कि गुणगांव का मेदांता या अमेरिका के सिडर सिनाई या क्लीवलैंड पहुंच पाएंगे तो जान बच जाएगी। इसी यूटोपिया में जन्म से लेकर मृत्यु के बीच का वक्त पूरा हो जाता है।



Dr. Madhusudan Kumar saha
August 26, 2025 at 10:55 am
bahut hi acchi bate kahi gayi lekin aisi soch kitno ke pas hai.
आर यल मौर्य
August 26, 2025 at 7:00 pm
बहुत ही सही कहा है यदि ऐसा सोच ले लोग तो स्वयं व अन्य का कितना भला हो जायेगा।सायद आप की बिचारधारा से कुछ असर हो जाये।
बुध्द ही बुध्द है।
Baliram Singh
August 27, 2025 at 6:02 am
लेख थोड़ा छोटा है भाई साहब
Uma Kant Tripathi
August 27, 2025 at 7:35 am
Kaun nahi hai,jo,ye bat nahi janta,ye batein sabko pata hai,isme kutch bhee naya nahi hai-insan aise hee raha hai-aise hee rahega,achha lekh honey kay bad bhee one way sa ho gaya hai..
Dharma
August 27, 2025 at 8:00 am
Wow .. Thank you Sir for great Article.. Absolutely Eye opener . .. Keep Writing!!
Ganesh Yadav
August 27, 2025 at 10:09 am
Maine bhi apne jeevan kal me dekha hai ki log retirement ke baad gyaani ban jate hai, retirement ke baad unhe bhi saswat gyan ho jata. Yahi gyan agar kursi par baith kar ho jata to sayad unke saath saath unke aas pas ke logon ka bhi jeevan dhany ho jata.
Sushila
August 27, 2025 at 11:07 am
Bhot badhiya
Devashish Chauhan
August 27, 2025 at 11:15 am
इसमें एक लाइन लिखी है कि अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा हार जाएगी। भाई मैं एक बात कहना चाहूंगा कि खाली पेट पोस्ट मत लिखा करो। दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहता है खाली पेट। जन्म से ही कुंठित हो पत्रकार सॉरी पत्तलकर महोदय या कहीं से कोर्स किये हो। जय श्रीमहाकाल